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Author: Dialogue India

अनिल बेदाग़-आज की राजनीति पर कॉमिक सटायर है फ़िल्म “लव यू लोकतंत्र”

अनिल बेदाग़-आज की राजनीति पर कॉमिक सटायर है फ़िल्म “लव यू लोकतंत्र”

जीवन शैली / फिल्में / टीवी
अनिल बेदाग़-आज की राजनीति पर कॉमिक सटायर है फ़िल्म "लव यू लोकतंत्र"फ़िल्म समीक्षा : लव यू लोकतंत्रकलाकार ;  ईशा कोप्पिकर, रवि किशन, मनोज जोशी, स्नेहा उल्लाल, अली असगर, कृष्णा अभिषेक, सपना चौधरी, अमित कुमारनिर्देशक : अभय निहलानीरेटिंग : 3 स्टार्ससिनेमा अब रियलिस्टिक बनने लगा है, ऐसी कहानी फिल्मों में पेश की जाती है जिससे दर्शक रिलेट कर सकें। इस सप्ताह रिलीज हुई पोलिटिकल सटायर फ़िल्म लव यू लोकतंत्र एक ऐसा ही सब्जेक्ट है जो आज की राजनीतिक हलचल के बारे में है। फ़िल्म में ईशा कोप्पिकर, रवि किशन, मनोज जोशी, स्नेहा उल्लाल, अली असगर, कृष्णा अभिषेक, सपना चौधरी, अमित कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।लव यू लोकतंत्र दरअसल आजके राजनीतिक हालात पर व्यंग्य है जिसे बड़े हास्यास्पद तरीके से दर्शाया गया है। फ़िल्म वर्तमान भारतीय राजनीति पर कॉमिक ढंग से सटायर है। उत्तर भारत की बोली के साथ यह राजन...
नीविया सॉफ्ट फ्रेश बैच 2022 के विजेताओं की घोषणा हुई-अनिल बेदाग

नीविया सॉफ्ट फ्रेश बैच 2022 के विजेताओं की घोषणा हुई-अनिल बेदाग

जीवन शैली / फिल्में / टीवी
नीविया सॉफ्ट फ्रेश बैच 2022 के विजेताओं की घोषणा हुई-अनिल बेदाग मुंबई :भारत के नंबर #1 भरोसेमंद स्किनकेयर ब्राण्‍ड* नीविया इंडिया ने देश के उभरते कंटेन्‍ट क्रिएटर्स की सराहना करते हुए, मुंबई में एक भव्‍य समारोह में नीविया सॉफ्ट फ्रेश बैच के दूसरे एडिशन के 60 विजेताओं की बेहद अपेक्षित सूची जारी की है। फैशनिस्‍टा, एंटरटेनर, स्‍पोर्टी और स्‍मार्टी जैसी शख्सियतों में दो महीने के कंटेन्‍ट क्रिएशन के बाद इस देशव्‍यापी डिजिटल इंफ्लूएंसर कॉन्‍टेस्‍ट का समापन हुआ! इसने आकांक्षी इंफ्लूएंसर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिये एक प्रमाणिक मंच दिया था। नीविया सॉफ्ट फ्रेश बैच के पहले एडिशन ने काफी रोमांच पैदा किया था, जबकि इस एडिशन को 120000 से ज्‍यादा एंट्रीज मिलीं, जोकि पहले एडिशन से 6 गुना ज्‍यादा थीं और इस प्रकार यह नई जनरेशन की लड़कियों के ...
सुशासन एवं देश-विकास के लिये नौकरशाह स्वयं को बदले

सुशासन एवं देश-विकास के लिये नौकरशाह स्वयं को बदले

राष्ट्रीय
सुशासन एवं देश-विकास के लिये नौकरशाह स्वयं को बदले- ललित गर्ग-प्रशासनिक सुधार की जरूरत महसूस करते हुए नौकरशाहों को दक्ष, जिम्मेदारी, ईमानदार, कानूनों की पालना करने वाले एवं उनकी समयबद्ध कार्यप्रणाली की आवश्यकता लंबे समय से रेखांकित की जाती रही है। जबकि बार-बार ऐसे उदाहरण सामने आते रहे हैं जिनसे पता चलता है कि देश की नौकरशाही न केवल अदालतों के फैसलों का पालन करने-कराने में विफल हो रही है, बल्कि उनके भ्रष्टाचार से जुड़े मामले एवं लापरवाह नजरिया देश के विकास की एक बड़ी बाधा के रूप में सामने आ रहा है। निश्चित ही उनकी भ्रष्टाचारयुक्त कार्यप्रणाली, अपने आपको सर्वेसर्वा मानने की मानसिकता, जनता के प्रति गैरजिम्मेदाराना व्यवहार, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कोताही, ये स्थितियां देश को अपने उद्देश्य हासिल करने में भी विफल कर रही है। उनके अहंकार का उदाहरण है राजस्थान के नागौर के एक एसडीएम और सर...
उत्सर्जन वृद्धि पर अंकुश लगाने हेतु भारत के सराहनीय प्रयास   

उत्सर्जन वृद्धि पर अंकुश लगाने हेतु भारत के सराहनीय प्रयास   

आर्थिक
उत्सर्जन वृद्धि पर अंकुश लगाने हेतु भारत के सराहनीय प्रयास    कई अनुसंधान प्रतिवेदनों के माध्यम से अब यह सिद्ध किया जा चुका है कि वर्तमान में  अनियमित हो रहे मानसून के पीछे जलवायु परिवर्तन का योगदान हो सकता है। कुछ ही  घंटों में पूरे महीने की सीमा से भी अधिक बारिश का होना, शहरों में बाढ़ की स्थिति निर्मित होना, शहरों में भूकम्प के झटके एवं साथ में सुनामी का आना, आदि प्राकृतिक  आपदाओं जैसी घटनाओं के बार-बार घटित होने के पीछे भी जलवायु परिवर्तन एक मुख्य कारण हो सकता है। एक अनुसंधान प्रतिवेदन के अनुसार, यदि वातावरण में 4 डिग्री सेल्सियस से तापमान बढ़ जाय तो भारत के तटीय किनारों के आसपास रह रहे लगभग 5.5 करोड़ लोगों के घर समुद्र में समा जाएंगे। साथ ही, चीन के शांघाई, शांटोयु, भारत के कोलकाता, मुंबई, वियतनाम के हनोई एवं बांग्लादेश के खुलना शहरों की इतन...
इस बार हिमाचल का चुनावी संग्राम खास होगा

इस बार हिमाचल का चुनावी संग्राम खास होगा

राज्य
इस बार हिमाचल का चुनावी संग्राम खास होगा- ललित गर्ग- हिमाचल प्रदेश 68 विधानसभा सीटों के भाग्य का फैसला लिखे जाने की तारीखों की घोषणा मुख्य चुनाव  आयोग ने कर दी है, 12 नवम्बर 2022 को वोटिंग एवं 8 दिसम्बर को परिणाम घोषित किये जायेंगे।  इस बार अकेले हिमाचल में हो रहे चुनाव काफी दिलचस्प एवं अहम होने के साथ कांटे की टक्कर वाले होंगे। हिमाचल में अब तक मुख्य चुनावी दंगल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता आया है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी अपना भाग्य आजमाने के लिये मैदान में है। आम आदमी पार्टी के लिये पूर्वानुमान लगाना इसलिये पैचीदा है कि उसकी मुफ्त रेवड़ी वाली संस्कृति कभी तो अपूर्व असरकारकारक हो जाती है और कभी एकदम गुब्बारे से निकली हवा की तरह फिस्स। फिर भी आप हिमाचल के लोगों को भी लुभाने की कोशिश कर रही है, उसके हौसलें भी बुलन्द है, इसलिए देखना होगा हिमाचल की जनता इस पार्टी को कि...
सहमी क्यों है पाकिस्तान सेना

सहमी क्यों है पाकिस्तान सेना

राष्ट्रीय
सहमी क्यों है पाकिस्तान सेना आर.के. सिन्हा पाकिस्तान में मोटी तोंद और लंबी मूंछों वाले सेना के अफसरों के खिलाफ अब कुछ सियासी रहनुमा बोलने लगे हैं। उनके करप्शन तथा अनैतिक कृत्यों को उजागर करने का साहस अब दिखा रहे हैं, जबकि भ्रष्टाचार का घड़ा फूटने ही   वाला है I फिर भी, यह एक सकारात्मक संकेत सरहद के उस पार से आ तो रहा है। इसका स्वागत होना चाहिए। बीते दिनों पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ पार्टी (पीटीआई) के नेता आजम स्वती ने सेना प्रमुख कमर जमान बाजवा के खिलाफ एक ट्वीट किया। उन्होंने अपने ट्वीट में बाजवा के काले कारनामों का पर्दाफाश किया। उनके इस कदम के बाद सेना ने आजम स्वती को गिरफ्तार कर लिया। पर यह तो मानना होगा कि पीटीआई के इस नेता का जमीर जिंदा है। वह एक भ्रष्ट सेना प्रमुख को आईना दिखाने की हिम्मत रखते हैं। पाकिस्तान म...
लुभावने चुनावी वादे, महज वोट बटोरने के इरादे

लुभावने चुनावी वादे, महज वोट बटोरने के इरादे

BREAKING NEWS, राज्य, राष्ट्रीय
लुभावने चुनावी वादे, महज वोट बटोरने के इरादे खाली चुनावी वादों के दूरगामी प्रभाव होंगे। जो विचार सामने आया वह यह था कि चुनाव प्रहरी मूकदर्शक नहीं रह सकता और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संचालन पर कुछ वादों के अवांछनीय प्रभाव को नजरअंदाज कर सकता है। चुनाव आयोग ने कहा कि एक निर्धारित प्रारूप में वादों का खुलासा सूचना की प्रकृति में मानकीकरण लाएगा और मतदाताओं को तुलना करने और एक सूचित निर्णय लेने में मदद करेगा। यह सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए समान अवसर बनाए रखने में मदद करेगा। इन कदमों को अनिवार्य बनाने के लिए, चुनाव आयोग की योजना आदर्श आचार संहिता में संबंधित धाराओं में संशोधन की जरूरत है। -डॉ सत्यवान सौरभ देश में चुनाव के दौरान हमने अक्सर अलग अलग राजनीतिक दलों की तरफ से बड़े बड़े वादों की भरमार देखते है।  जैसे फ्री लैपटॉप, स्कूटी, फ्री हवाई यात्रा, मुफ्त टीवी, मुफ...
महाकवि कालिदास कृत महाकाव्य कुमारसम्भव में शिवजी द्वारा विवाह पूर्व पार्वती की परीक्षा

महाकवि कालिदास कृत महाकाव्य कुमारसम्भव में शिवजी द्वारा विवाह पूर्व पार्वती की परीक्षा

साहित्य संवाद
महाकवि कालिदास कृत महाकाव्य कुमारसम्भव में शिवजी द्वारा विवाह पूर्व पार्वती की परीक्षापार्वती जन्मजन्मांतर से शिवजी को पति रूप में प्राप्त करना चाहती थी। दक्ष प्रजापति के घर सतीरूप में जन्म लिया था। एक बार दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया। उस यज्ञ में शंकर तथा सती को निमन्त्रित नहीं किया। आकाश मार्ग से सती ने देवताओं के विमानों को जाते देखा तो शंकरजी से इसका कारण पूछा। शंकरजी से सती को ज्ञात हुआ कि दक्ष प्रजापति ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया है और तुम्हें निमंत्रित नहीं किया है। सती ने शिवजी से आग्रह किया कि वह पिता के घर जाना चाहती है तो शिवजी ने उन्हें समझाया कि हमें निमन्त्रित नहीं किया है। अत: वहाँ जाना उचित नहीं है, किन्तु सती फिर भी पिता के घर गई। उन्होंने यज्ञ में शंकरजी का भाग नहीं देखा। सती के पारिवारिक सदस्यों ने भी उनसे सम्मानपूर्वक चर्चा नहीं की। यह देखकर सती ने अपने आपको योगाग्नि में...
संविधान से खिलवाड़ है यह अधिनियम

संविधान से खिलवाड़ है यह अधिनियम

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार
संविधान से खिलवाड़ है यह अधिनियम" डा.अभिषेक आत्रेय, एडवोकट आन रिकार्ड, सुप्रीम कोर्ट देश में सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा संपत्ति वक्फ बोर्ड के पास है। वक्फ अधिनियम से मिली ताकत के दम पर वक्फ बोर्ड कैसे संपत्तियों पर कब्जा करते हैं, इसकी बानगी हाल ही में तमिलनाडु में देखने को मिली। निश्चित तौर पर देश के कई हिस्सों में वक्फ बोर्ड ने इसी तरह से संपत्तियां बनाई हैं। इस काम में इन्हें एक ऐसे कानून से संरक्षण मिला हुआ है, जो संवैधानिक प्रविधानों का उल्लंघन करता है।  देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए सबसे पहले 1913 में मुसलमान वक्फ वैलिडेटिंग अधिनियम आया। उसके बाद 1923 में मुसलमान वक्फ अधिनियम आया। स्वतंत्रता के बाद वक्फ अधिनियम 1954 अस्तित्व में आया। 1984 में भी वक्फ अधिनियम आया, लेकिन उसे अधिसूचित नहीं किया गया। 1995 में बहुत सारे परिवर्तनों के साथ वक्फ अधिनियम 19...
रक्त तांडव पुस्तक समीक्षा द्वारा भूपेंद्रसिंह रैना

रक्त तांडव पुस्तक समीक्षा द्वारा भूपेंद्रसिंह रैना

TOP STORIES, राष्ट्रीय
रक्त तांडव पुस्तक समीक्षा द्वारा भूपेंद्रसिंह रैना कश्मीर में आतंकवाद के दंश ने कश्मीरी जनमानस में जिस पीड़ा और विषाक्तता का संचारकिया है,उससे उपजी ह्रदय-विदारक वेदना तथा उसकी व्यथा-कथा को साहित्य में ढालने के सफलप्रयास पिछले लगभग तीन दशकों के बीच हुए हैं। कई कविता-संग्रह, कहानी-संकलन,औपन्यासिककृतियां आदि सामने आए हैं, जो कश्मीर में हुई आतंकी बर्बरता और उससे जनित कश्मीरीपंडितों/हिन्दुओं के विस्थापन की विवशताओं को बड़े ही मर्मस्पर्शी अंदाज में व्याख्यायित करतेहैं।कश्मीर के इन निर्वासित किन्तु जुझारू रचनाकारों में सर्वश्री शशिशेखरतोषखानी,चन्द्रकान्ता,क्षमा कौल, रतनलाल शांत,अग्निशेखर,महाराजकृष्ण संतोषी,प्यारेहताश,अवतार कृष्ण राज़दान, ब्रजनाथ ‘बेताब’ , महाराज शाह, अशोक हांडू आदि उल्लेखनीय हैं।इसी श्रृंखला में पिछले दिनों एक नाम और जुड़ गया और वह नाम है कश्मीर के चर्चित कविश्री भूपेन्द्रसिंह ...