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Author: Dialogue India

छप्पन भोग का रहस्य

छप्पन भोग का रहस्य

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छप्पन भोग का रहस्यभारतीय संस्कृति में प्रत्येक परिवार में लगभग षड़रस युक्त भोजन बनाया जाता है। ये परिवार के सदस्यों के लिए सुपाच्य, शक्तिवर्धक तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला होता है। इन षड़रसों के नाम हैं- १. मधुर, २. अम्ल, ३. लवण, ४. कटु, ५. तिक्त और ६. कषाय। भोजन के आवश्यक तत्व कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण ये सभी इस भोजन में निहित हैं। इस भोजन को बनाने में पवित्रता तथा स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। खाद्य सामग्री की शुद्धता भी अति आवश्यक होती है।मंदिरों में छप्पन भोग परम्परा का निर्वहन बड़ी श्रद्धा-भक्ति के साथ किया जाता है। महिलाएँ अपने-अपने घरों से भोग सामग्री बना कर लाती हैं। भोग लगाया जाता है। समाज के सदस्य सपरिवार इस कार्यक्रम में सम्मिलित होते हैं। पूजा आरती करते हैं। छप्पन भोग प्रसाद का वितरण किया जाता है। द्वारकाधीश मंदिर, श्रीनाथ जी मंदिर तथ...
जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

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जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स इस अपराध के पीछे संगठित अपराध समूह ज्यादातर विदेशों में स्थित हैं। उनके लिए यह पैसा कमाने का एक कम जोखिम वाला तरीका है और वे कई पीड़ितों तक आसानी से ऑनलाइन पहुंच सकते हैं। पीड़ित अक्सर पुलिस को इन अपराधों की रिपोर्ट करने से चिंतित होते हैं क्योंकि वे शर्मिंदा होते हैं। जबकि सेक्सटॉर्शनिस्ट पीड़ितों को परेशान करने, शर्मिंदा करने, आघात करने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग कर सकते हैं, यह उच्च समय है कि दानव को सिर के बल ले जाया जाए और जागरूकता बढ़ाने और सेक्सटॉर्शन की बुराई के सामाजिक कलंक को दूर किया जाए। यह ध्यान देने योग्य है कि इंटरनेट कभी भी 'भूलता और माफ नहीं करता' और इसकी पहुंच और प्रसार बिजली से तेज और विशाल है। प्रभावशाली दिमाग वाली हमारी युवा पीढ़ी को यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए कि वे कभी...
सउदी अरब में नया इस्लाम

सउदी अरब में नया इस्लाम

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सउदी अरब में नया इस्लाम* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* सउदी अरब आजकल जितने प्रगतिशील कदम उठा रहा है, वह दुनिया के सारे मुसलमानों के लिए एक सबक सिद्ध होना चाहिए। लगभग डेढ़ हजार साल पहले अरब देशों में जब इस्लाम शुरु हुआ था तब की परिस्थितियों में और आज की स्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। लेकिन इसके बावजूद दुनिया के ज्यादातर मुसलमान पुराने ढर्रे पर ही अपनी गाड़ी धकाते चले आ रहे हैं। सउदी अरब उनका तीर्थ है। मक्का-मदीना उनका साक्षात स्वर्ग है। उसके द्वार अब औरतें के लिए भी खुल गए हैं। यह इतिहास में पहली बार हुआ है। वरना, पहले कोई अकेली मुस्लिम औरत हज या उमरा करने जा ही नहीं सकती थी। उसके साथ एक ‘महरम’ (रक्षक) का रहना अनिवार्य था। इसमें कोई बुराई उस समय नहीं थी, जब इस्लाम शुरु हुआ था। उस समय अरब लोग जहालत में रहते थे। औरतों के साथ पशुओं से भी बदतर व्यवहार किया जाता था लेकिन दुनिया इतनी ब...
भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

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7 अक्टूबर 2022, (गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी अधिकांश ग्रामीण गरीब खेतिहर मजदूर (जो आम तौर पर भूमिहीन होते हैं) और स्वरोजगार करने वाले छोटे किसान हैं जिनके पास 2 एकड़ से कम जमीन है। उन्हें साल भर रोजगार भी नहीं मिल पाता है। परिणामस्वरूप, वे एक वर्ष में बड़ी संख्या में दिनों तक बेरोजगार और अल्प-रोजगार में रहते हैं मुद्रास्फीति, विशेष रूप से खाद्य कीमतों में वृद्धि, बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग व्यय की लागत को बढ़ा देती है। इस प्रकार, मुद्रास्फीति कई परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे धकेल देती है। भूमि और अन्य संपत्तियों के असमान वितरण के कारण, प्रत्यक्ष गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का लाभ गैर-गरीबों द्वारा विनियोजित किया गया है। गरीबी की भयावहता की तुलना में इन कार्यक्रमों के लिए आवंटित संसाधनो...
दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से

दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से

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दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से डॉ. विमल छाजेड़ निदेशक साओल हार्ट सेंटर, नई दिल्ली जीवन को जीने के लिए क्या जरूरी है-भोजन। लेकिन क्या ऐसा होता है कि हमें भोजन के नाम पर कुछ भी दे दिया जाए, तो हम खा लेंगे जब तक वह स्वाद से परिपूर्ण न हो और हम भारतीय तो अपने खान-पान की पौष्टिकता से अधिक स्वाद पर ही ध्यान देते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि हमारा मनपसंद व्यंजन हमें इतना स्वादिष्ट क्यों लगता है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्वाद पहचान कराने वाली कोशिकाएं, मनपसंद भोजन लेने पर या जो व्यंजन हमें स्वादिष्ट लगता है। लेने पर तीक्ष्ण उत्तेजना उत्पन्न करती हैं जो हमें स्वाद का एहसास कराती हैं। भोजन में मीठे के प्रति हमारा आकर्षण सर्वव्यापी है और भारतीयों का मीठे के प्रति कुछ विशेष ही लगाव है। वर्ष 1986 की अपेक्षा आज हम 20 प्रतिशत अधिक चीनी का उपयोग कर रहे हैं। हमारी मानसिक ध...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सकारात्मक पहल*

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सकारात्मक पहल*

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सकारात्मक पहल* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत जी अपने क्रान्तिकारी निर्णयों के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ही संघ वेशभूषा में परिवर्तन करके कार्यकर्ताओं की निक्कर वाली छवि को बदलकर पेंट पहनने की सुविधा प्रदान की। अब उनका स्वप्न तथा आगामी लक्ष्य संघ के सिद्धान्तों को वर्ष 2025 तक भारत के प्रत्येक नगर तथा गांव-गांव में पहुँचाने का है। इसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु उन्होंने संघ को मुस्लिम जनता के हृदय में स्थान प्राप्त करने हेतु आगे बढ़ाया है वो वास्तव में देशहित में अत्यधिक प्रशंसनीय कार्य है, जिसकी देश का प्रत्येक बुद्धिजीवी मुक्तकंठ से प्रशंसा कर रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता श्री इन्द्रेश जी विगत कई वर्षों से मुस्लिम जनसंख्या को संघ से जोड़ने के कार्य में लगे हुए हैं। इसी के अन्तर्गत उन्होंने कई मुस्लिम बेटियों की शा...
हिज़ाब मजहबी सवाल है ही नहीं

हिज़ाब मजहबी सवाल है ही नहीं

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हिज़ाब मजहबी सवाल है ही नहीं* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* हिज़ाब को लेकर आजकल सर्वोच्च न्यायालय में जमकर बहस चल रही है। हिज़ाब पर जिन दो न्यायाधीशों ने अपनी राय जाहिर की है, उन्होंने एक-दूसरे के विपरीत बातें कही हैं। अब इस मामले पर कोई बड़ी जज-मंडली विचार करेगी। एक जज ने हिज़ाब के पक्ष में फैसला सुनाया है और दूसरे ने जमकर हिज़ाब के विरोध में तर्क दिए हैं। हिज़ाब को सही बतानेवाला जज कोई मुसलमान नहीं है। वह भी हिंदू ही है। हिज़ाब के मसले पर भारत के हिंदू और मुसलमान संगठनों ने लाठियां बजानी शुरु कर रखी हैं। दोनों एक-दूसरे के विरुद्ध बयानबाजी कर रहे हैं। असल में यह विवाद शुरु हुआ कर्नाटक से! इसी साल फरवरी में कर्नाटक के कुछ स्कूलों ने अपनी छात्राओं को हिज़ाब पहनकर कक्षा में बैठने पर प्रतिबंध लगा दिया था। सारा मामला वहां के उच्च न्यायालय में गया। उसने फैसला दे दिया कि स्कूलों द्वारा बनाई गई पो...
‘हाइपरटेंशन का पूर्व-संकेत हो सकती है अनुवांशिक भिन्नता’

‘हाइपरटेंशन का पूर्व-संकेत हो सकती है अनुवांशिक भिन्नता’

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'हाइपरटेंशन का पूर्व-संकेत हो सकती है अनुवांशिक भिन्नता'नई दिल्ली, 14 अक्टूबर(इंडिया साइंस वायर):भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी)मद्रास के शोधकर्ताओंने अपने एक ताजा अध्ययन में उच्च रक्तचाप के पीछे जिम्मेदार अनुवांशिक भिन्नता का पता लगाय है।शोधकर्ताओं की खोज में यह तथ्य निकलकर सामने आया है कि मैट्रिक्स मटालो प्रोटीनेज (एमएमपीएस)नामक एक जीन के ‘डीएनए बिल्डिंग ब्लॉक’ में बदलाव से लोगों में उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकताहै। इस निष्कर्ष तक पहुँचने के क्रम में अध्ययनकर्ताओं ने उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगिओं और सामान्यरक्तचाप वाले स्वस्थ लोगों के अनुवांशिक प्रोफाइल का गहन अध्ययन और विश्लेषण किया है।उच्च रक्तचाप के कारण रक्त नलिकाओं की दीवार और धमनियां, दीवारों पर अत्यधिक कोलेजन जमाहोने के कारण सख्त हो जाती हैं। कोलेजन शरीर में पैदा होने वाले प्रोटीन का सबसे प्रचुर मात्रा में पायाजाने वाला प्रकार ...
कौन हैं ‘अर्बन नक्सल्स’ और क्या चाहता है ये तंत्र ?

कौन हैं ‘अर्बन नक्सल्स’ और क्या चाहता है ये तंत्र ?

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कौन हैं 'अर्बन नक्सल्स' और क्या चाहता है ये तंत्र ? कम्युनिस्ट उग्रवाद - माओवाद ! दरअसल 'अर्बन नक्सल्स' (टर्म) सामान्य तौर पर उन कथित कम्युनिस्ट बुद्धिजीवियों वर्ग के लोगों के समूह के लिए प्रयोग किया जाता है जो देश भर में लोकतंत्र को हटाकर तानाशाही कम्युनिस्ट व्यवस्था स्थापित करने के षड्यंत्र में लगे हुए हैं, इस क्रम में इन अर्बन नक्सलियों द्वारा देश भर में अनेकों गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), मानवाधिकार समुहों, सामाजिक समुहों, मजदूर संगठनों, किसान संगठनों एवं छात्र संगठनों का गठन किया गया है जिनके माध्यम से देश विरोधी गतिविधियों को संचालित करना इनका मुख्य उद्देश्य है। इस तंत्र में बाहर से साफ सुथरी छवि वाले वरिष्ठ मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, नागरिक समूहों का नेतृत्व करने वाले लोग, छात्र नेता, किसान नेता, मजदूर संगठनों के नेता, बड़े शहरों के विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले प्रोफेसरों...
हिजाब : इतना जोर क्यों देते हो?

हिजाब : इतना जोर क्यों देते हो?

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इतना जोर क्यों देते हो? हिंदुस्तान की लड़कियां यदि हिजाब पहनना चाहती हैं, तो उन्हें पहनने दीजिए! हिजाब पहनें या नकाब या बुर्का, कोई एतराज क्यों करे? बस इतना जरूर है कि स्कूल कालेज जाएं तो स्कूल ड्रेस पहनें, फौज में जाएं तो यूनिफॉर्म पहनें और स्पेस में जाएं तो स्पेस सूट? बाकी उनकी मर्जी, बाजार में, घर में, कोर्ट में, हिल स्टेशन पर, ब्याह शादियों में जहां भी हिजाब पहनना चाहें, शौंक से पहनें! किसी को क्या परेशानी है उनकी पोशाक से? वैसे कितनी लड़कियां हैं जो फिल्म इंडस्ट्री में हैं, टीवी में हैं, अस्पतालों और न्यायालयों में हैं, मॉडलिंग में हैं, कोई हिजाब नहीं पहनती? उर्फी जावेद का नाम सुना है कभी? रोजाना नई नई ड्रेस पहनती हैं। इतनी अजीबोगरीब पोशाकें कि बेशर्मी भी गश खा जाए। फिल्म इंडस्ट्री ने मधुबाला, नर्गिस, मीना कुमारी, वहीदा रहमान, जीनत अमान, निगार, मुमताज, सायरा बानो, नसीम बानो जैस...