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Author: Dialogue India

शरद पूर्णिमा और रत्नाकर से महर्षि बनने की यात्रा करने वाले महापुरूष वाल्मीकि-

शरद पूर्णिमा और रत्नाकर से महर्षि बनने की यात्रा करने वाले महापुरूष वाल्मीकि-

TOP STORIES, विश्लेषण, संस्कृति और अध्यात्म
शरद पूर्णिमा ( इस वर्ष 9 अक्टूबर 2022) पर विशेष शरद पूर्णिमा और रत्नाकर से महर्षि बनने की यात्रा करने वाले महापुरूष वाल्मीकि- शरद पूर्णिमा- आश्विन मास की पूर्णिमा का दिन शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार पूरे साल केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिंदू धर्म में लोग इस पर्व को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था और यह भी मान्यता प्रचलित है कि इस रात्रि को चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इसी कारण से उत्तर भारत में इस दिन खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखने का विधान है। महात्म्य- मान्यता है कि इस दिन कोई व्यक्ति यदि कोई अनुष्ठान करता है तो उसका अनुष्ठान अवश्य सफल होता है। इस दिन व्रत कर हाथियों की आरती करने पर उत्तम फल मिलते हैं। आश्विन मास की पूर्णिमा को आर...
दिल्ली में एलजी – केजरीवाल में चल रहे शीत युद्ध – फिर चली बात LG की

दिल्ली में एलजी – केजरीवाल में चल रहे शीत युद्ध – फिर चली बात LG की

Link of debates on various news channel participation by Dialogue India Group Editor Anuj Agarwal
आज शाम 5 PM से जी सलाम न्यूज़ चैनल पर “ दिल्ली में एलजी - केजरीवाल में चल रहे शीत युद्ध - फिर चली बात LG की “ विषय पर आयोजित बहस में शामिल रहा। बहस का लिंक -
राष्ट्रीय लोक अदालत 12 नवंबर 2022 को देश भर में लगेगी

राष्ट्रीय लोक अदालत 12 नवंबर 2022 को देश भर में लगेगी

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राष्ट्रीय लोक अदालत 12 नवंबर 2022 को देश भर में लगेगी उपभोक्ताओं से संबंधित विचाराधीन मामलों को निपटाने के लिए देश भर में 12 नवंबर 2022 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। लोक अदालत व्यवस्था के लाभों और पार्टियों के बीच आपसी समाधान एवं समझौते को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में उपभोक्ता मामलों के निपटारे की उम्मीद है। इस पूरी कार्रवाई के लिए जमीनी स्तर पर कार्य पहले ही शुरू किया जा चुका है। सभी उपभोक्ता आयोगों को उन मामलों की पहचान करने के लिए सूचित कर दिया गया है, जिनमें निपटान की संभावना है। इसके अलावा ऐसे लंबित मामलों की एक सूची तैयार करने को कहा गया है, जिन्हें लोक अदालत में भेजा जा सकता है। विभाग द्वारा सूची बनाने की नियमित निगरानी की जा रही है। अधिकतम पहुंच सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को लाभान्वित करने के लिए विभाग एसएमएस तथा ईमेल के माध्यम से उपभोक्ताओं, कंप...
स्वच्छता सारथी समारोह में आकर्षण बनी अपशिष्ट प्रबंधन प्रदर्शनी

स्वच्छता सारथी समारोह में आकर्षण बनी अपशिष्ट प्रबंधन प्रदर्शनी

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स्वच्छता सारथी समारोह में आकर्षण बनी अपशिष्ट प्रबंधन प्रदर्शनी नई दिल्ली, अक्तूबर 07 (इंडिया साइंस वायर): भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) कार्यालय द्वारा शुरू की गई स्वच्छता सारथी फेलोशिप योजना के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में विगत 30 सितम्बर और 1 अक्तूबर को स्वच्छता सारथी समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में देश के 27 राज्यों और 6 केंद्र-शासित प्रदेशों से गत वर्ष चयनित 344 स्वच्छता सारथी फेलो ने अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े अपने कार्यों को पोस्टर, प्रोटोटाइप, आलेख प्रस्तुतिकरण और उत्पाद के रूप में प्रदर्शित किया। स्वच्छता सारथी फेलोशिप के पहले बैच में 344 फेलो का चयन प्रबंधन की बढ़ती चुनौती के प्रभावी और वैज्ञानिक समाधान से संबंधित उनके विचारों एवं कार्ययोजनाओं के आधार पर किया गया है। इन स्वच्छता स...
अब नहीं आती अपनों की चिट्ठी-पत्री

अब नहीं आती अपनों की चिट्ठी-पत्री

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(9 अक्टूबर विश्व डाक दिवस विशेष) अब नहीं आती अपनों की चिट्ठी-पत्री संचार क्रांति के इस युग में अब नहीं आती कहीं से भी अपनों की चिट्ठी-पत्री। बदलते दौर में घर से जाते समय अब कोई नहीं कहता कि पहुंतें ही चिट्ठी लिखना। आज की नयी पीढ़ी पत्र लेखन की कला से कोसो दूर है। वास्तव में नयी पीढ़ी यह भी नयी जानती कि डाकिया भी कोई होता है। चैटिंग के इस ज़माने में  न ही उसे पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र व लिफाफ की जानकारी है। आज इंटरनेट, फोन व मोबाइल ने अब लगभग चिट्ठी लिखने की परंपरा को समाप्त कर दिया है। बरसों पूर्व में घर से बाहर जाते समय कहा जाता था कि पहुंचतें ही पत्र लिखना। लेकिन अब न ही कोई कहता है और न ही पत्र लिखने की जरूरत है। भागदौड़ भरी जिंदगी में घर से निकलकर मंजिल तक...
आर्थिक असमानता एवं संघ की चिन्ता के मायने

आर्थिक असमानता एवं संघ की चिन्ता के मायने

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आर्थिक असमानता एवं संघ की चिन्ता के मायने- ललित गर्ग -राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की समस्याओं पर निरन्तर नजर रखता रहा है। गरीबी, महंगाई, अभाव, शिक्षा, चिकित्सा, सेवा और बेरोजगारी आदि क्षेत्रों में उसकी दखल से देश में व्यापक सकारात्मक बदलाव होते हुए देखे गये हैं। संघ की दृष्टि में आजादी के 75 साल बाद भी गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी अगर देश के प्रमुख मुद्दे बन कर छाए रहें, तो यह चिंता की बात होनी ही चाहिए। इस चिन्ता को महसूस करते हुए स्वदेशी जागरण मंच के एक कार्यक्रम में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संघ का आर्थिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के सरकार के दौरान इन समस्याओं के बरकरार रहने पर चिन्ता जताई। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि 23 करोड़ लोग आज भी गरीबी रेखा से नीचे हैं। देश के बड़े हिस्से को आज भी साफ पानी और दो समय के भोजन के लिए संघर्ष करना पड़ता है। निश्चित ही हो...
ज़ीनिक्स शोध: दवा-प्रतिरोधक टीबी का इलाज बेहतर हुआ संभव

ज़ीनिक्स शोध: दवा-प्रतिरोधक टीबी का इलाज बेहतर हुआ संभव

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ज़ीनिक्स शोध: दवा-प्रतिरोधक टीबी का इलाज बेहतर हुआ संभव शोभा शुक्ला - सीएनएस पिछले माह प्रकाशित "ज़ीनिक्स" (ZeNix) शोध के नतीजों ने यह सिद्ध कर दिया है कि दवा प्रतिरोधक टीबी का इलाज सिर्फ 6 महीने में हो सकता है (वर्तमान में अक्सर जिसमें 20-24 महीने या अधिक लगते थे), और इलाज की सफलता दर 40% - 50% से बढ़ कर 93% तक हो सकती है। इससे भी ज़्यादा ज़रूरी तथ्य यह है कि इस नए शोध में इस्तेमाल हुई दवाओं के कारण विषाक्तता बहुत कम हुई है। दवा-प्रतिरोधक टीबी क्या है? जब टीबी कीटाणु (बैक्टीरिया) किसी दवा से प्रतिरोधक हो जाता है तो वह दवा उसको मार नहीं पाती। ऐसी दवा-प्रतिरोधक टीबी के इलाज के लिए अन्य दवा का उपयोग किया जाता है जिसके प्रति वह कीटाणु प्रतिरोधक नहीं है। पर दवाएँ सीमित हैं इसीलिए दवा प्रतिरोधक टीबी का इलाज मुश्किल, लम्बा (2 साल तक या अधिक अवधि का), और जटिल हो जाता है, और इलाज के परिण...
तनाव पर भारी पड़ती मुस्कान

तनाव पर भारी पड़ती मुस्कान

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
तनाव पर भारी पड़ती मुस्कान या तनाव से मुक्ति का मंत्र है मुस्कान डॉ. शंकर सुवन सिंह दया शब्द को कई नामों से जाना जाता हैं जैसे करुणा, सहानुभूति, अनुकंपा, कृपा, रहम, आदि। परिस्थिति जन्य की गई सेवा दया कहलाती है। मनोस्थिति जन्य की गई सेवा करुणा कहलाती है। करुणा स्वभाव गत होती है। जिस इंसान में करुणा है उसके लिए बाहर की कोई भी परिस्थिति उस पर प्रभाव नहीं डाल पाती। सामान्य भाषा में कहें तो करुणा का ही प्रतिरूप है दया। एक मनोस्थति जन्य और दूसरा परिस्थति जन्य है। दया परिस्थति पर निर्भर करती है। करुणा मन की स्थिति पर निर्भर करती है। करुणावान व्यक्ति दयालु भी होता है। दयालु व्यक्ति करुणामयी हो ऐसा जरुरी नहीं। महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद आदि महापुरुष करुणामयी थे। इनमे दयालुता भी थी। हिन्दुओं के पवित्र ग्रन्थ रामचरित मानस के लेखक गोस्वामी तुलसीदास जी ने दया को धर्म का मूल कहा था। दया...
कनाडा को भारत-हिन्दू विरोध पर उचित जवाब मिले

कनाडा को भारत-हिन्दू विरोध पर उचित जवाब मिले

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कनाडा को भारत-हिन्दू विरोध पर उचित जवाब मिले -कनाडा को कब कसेगा भारत आर.के. सिन्हा कभी भारत का मित्र समझे जाने वाले कनाडा का रवैया विगत कुछ वर्षों से कतई मित्रवत नहीं रहा है। वहां पर खालिस्तानी तथा भारत विरोधी तत्वों की लंबे समय से चल रही गतिविधियां और अब हिन्दू मंदिरों पर हमले को नजरअंदाज करना भारत के लिये असंभव है। यह समझना कठिन है कि आखिर कनाडा सरकार क्यों भारत विरोधी तत्वों को कायदे से कसने में देरी कर रही है। अब एक ताजा मामले में कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में ‘श्री भगवद गीता’ पार्क में तोड़फोड़ की घटना हुई। हालांकि, कनाडा सरकार अभी इस आरोप से इनकार कर रही है। लेकिन, जब साक्ष्य हैं तो कबतक करेगी। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त ने ट्वीट किया, ‘‘हमलोग ब्रैम्पटन में श्री भगवद गीता पार्क में घृणा अपराध की निंदा करते हैं। हम कनाडा के अधिकारियों और पुलिस से मामले की जांच करने और दोषियों के...
रामलीलाओं की सशक्त वापसी की वजह

रामलीलाओं की सशक्त वापसी की वजह

TOP STORIES, संस्कृति और अध्यात्म
रामलीलाओं की सशक्त वापसी की वजह आर.के. सिन्हा कोरोना के कारण लगभग दो वर्षों के घोर निराशा भरे समय के बाद जीवन फिर से लगभग पटरी पा आ सा गया है। चारों तरफ उत्सव और उत्साह का वातावरण है। सकारात्मकता ने हताशा के दौर को पीछे छोड़ दिया सा लगता है। शारदीय नवरात्रि के श्रीगणेश होते ही जगह-जगह रामलीला, दुर्गापूजा और गरबा के आयोजन हो रहे हैं। रामलीलाओं में इस बार जनमानस की भी भारी उपस्थिति दर्ज हो रही है। सारे देश में रामलीला के आयोजन हो रहे हैं। इनमें राम- लक्ष्मण, राम-रावण, राम हनुमान आदि संवाद सुनने के लिए भारी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं। हरेक रामलीला के साथ एक मेला भी लगा हुआ है। यह स्थिति दुर्गा पूजा की भी है। दुर्गा पूजा के पंडालों में भी भारी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। रामलीला और दुर्गा पूजा में जनता की अप्रत्याशित भागेदारी को देखकर समझा जा सकता है कि कोरोना के कारण कि...