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Author: Dialogue India

ज्ञान और सत्य ही एकता के सुनिश्चित आधार हैं

ज्ञान और सत्य ही एकता के सुनिश्चित आधार हैं

सामाजिक, साहित्य संवाद
ज्ञान और सत्य ही एकता के सुनिश्चित आधार हैं :,प्रो रामेश्वर मिश्र पंकज हिंदू मुस्लिम एकता या हिंदू ईसाई एकता या हिंदू और किसी की भी एकता का एक मात्र मार्ग वह राजमार्ग है, वह सनातन मार्ग है जो हिंदू और हिंदू की एकता का मार्ग है। सार्वभौम नियमों के सनातन आधारों पर हिंदुओं के संप्रदाय एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और स्वतंत्र अपनी अपनी उपासना पद्धति और अपनी-अपनी आचार पद्धति सनातन नियमों की मर्यादा में चलाने की सब को स्वाधीनता प्राप्त है और वही उनका अनुशासन भी है। इसी सार्वभौम अनुशासन और सनातन नियमों के प्रतिपालन में हिंदू हिंदू एकता संभव रही है । हिंदू मुस्लिम एकता भी इसी आधार पर हो सकती है।हिन्दू ईसाई एकता का भी यही सुनिश्चितआधार है। भारत का राज्य सार्वभौमिक नियमों (Universal Laws)अर्थात सत्य ,ऋत(Cosmic order), अहिंसा,अचौर्य और मर्यादा पालन आदि प्रत्येक नागरिक को अनिवार्य घोषित करें। ...
अज्ञान से नही होगी एकता

अज्ञान से नही होगी एकता

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अज्ञान से नही होगी एकता प्रो रामेश्वर मिश्र पंकज इंडोनेशिया और मलेशिया का उदाहरण भारत के कतिपय हिंदू संगठन बारंबार देते रहे हैं। पहले मैं समझता था कि यह केवल कूटनीतिक वक्तव्य हैं। लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद भी वही वक्तव्य दोहराए जाते हैं । जिससे पता चलता है कि संघ और भाजपा के लोग इस विषय में आश्चर्यजनक अज्ञान में जीते हैं। अज्ञान से कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इंडोनेशिया और मलेशिया को मुस्लिम देश बताकर वहां अभी भी भारतीय संस्कृति की छाप होने को गरिमा मंडित करना अज्ञान की पराकाष्ठा है । सच यह है कि दोनों ही देशों में डेढ़ हजार वर्षो से अधिक तक हिंदू राज्य रहे हैं और मुस्लिम राज्य हाल ही में हुआ है । इसलिए मुसलमान अभी तक वहां हिंदू संस्कृति और परंपराओं को खा नहीं पाए हैं । धीरे-धीरे वे उस को पूरी तरह खा जाएंगे और खाने के लिए तत्पर हैं । इस तथ्य को जाने बिना ...
दिल्ली में पुरानी कारें ख़रीदने-बेचने वाले सावधान!

दिल्ली में पुरानी कारें ख़रीदने-बेचने वाले सावधान!

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दिल्ली में पुरानी कारें ख़रीदने-बेचने वाले सावधान! *रजनीश कपूर बॉलीवुड में ठग और ठगी करने वालों पर अनेकों फ़िल्में बनी हैं। इनमें से 1958 में बनी एक फ़िल्म का नाम था ‘दिल्ली का ठग’ जिसमें यह दिखाया गया था कि ठगी करने का आदि एक ठग दिल्ली छोड़ मुंबई जा कर ठगी करने लगता है। ठगी करने वाले चाहे दिल्ली के हों या किसी अन्य शहर के, वे पकड़े जाने के डर से अपना नाम और हुलिया बदल कर अलग-अलग शहरों में जाते हैं और अपना मक़सद पूरा करते हैं। पर आज के युग में पेशेवर ठगों को कहीं जाना नहीं होता। सोशल मीडिया ने उनका काम काफ़ी आसान कर दिया है। जिन लोगों को लुटने का शौक़ होता है वे किसी न किसी तरह से इन ठगों के जाल में फँस कर उनका शिकार बन ही जाते हैं। आज कल ‘दिल्ली के ठग’ आपको सोशल मीडिया पर बिना ज़्यादा मेहनत के बड़ी आसानी से मिल जाएँगे। इनका नया रूप खोजने के लिए आपको दिल्ली के सेकंड हैंड कार बाज़...
कृषि क्षेत्र में उत्पन्न हो रहे हैं रोजगार के नए अवसर

कृषि क्षेत्र में उत्पन्न हो रहे हैं रोजगार के नए अवसर

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कृषि क्षेत्र में उत्पन्न हो रहे हैं रोजगार के नए अवसर भारत में लगभग 60 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण इलाकों में निवास करती है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि रोजगार के अधिक से अधिक अवसर भी गावों में ही निर्मित होने चाहिए, अन्यथा गावों से शहरों की ओर नागरिकों का पलायन जारी रहेगा और शहरों पर जनसंख्या का दबाव बढ़ता रहेगा। केंद्र सरकार की सफल आर्थिक नीतियों के चलते अब ग्रामीण इलाकों में भी बेरोजगारी की दर लगातार कम हो रही है, क्योंकि अब ग्रामों में भी रोजगार के अवसर अधिक संख्या में निर्मित हो रहे हैं। भारत में आज न केवल दुग्ध क्रांति हुई है बल्कि कृषि एवं परिष्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात भी बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत आज दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गया है। भारत में करीब 8 करोड़ परिवार दुग्ध उत्पादन और इसके व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। देश में प्रति वर्ष लगभग 9.5 लाख कर...
युवाओं में दिल का दौरा, भारत के हृदय पर बोझ

युवाओं में दिल का दौरा, भारत के हृदय पर बोझ

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29 सितंबर विश्व हृदय दिवस 2022 युवाओं में दिल का दौरा, भारत के हृदय पर बोझ प्रत्येक व्यक्ति को हर साल कम से कम एक ईसीजी करवाना चाहिए। संदेह का एक सूचकांक उठाया जाना चाहिए और विभिन्न स्तरों पर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। पोषण शिक्षा के मूल सिद्धांतों को विशेषज्ञता नहीं बनाया जाना चाहिए और इसे स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। खाने की आदतों के हिस्से में, चीनी को प्राकृतिक मिठास जैसे शहद, गुड़, किशमिश, खजूर आदि से बदलना चाहिए। कृत्रिम भोजन की खुराक के बजाय अधिक प्राकृतिक भोजन (फल और सब्जियां) को शामिल करके अच्छे और संतुलित आहार का पालन करना चाहिए। विश्व हृदय दिवस प्रतिवर्ष 29 सितंबर को मनाया और मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हृदय रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके वैश्विक प्रभाव को नकारने के लिए उन्हें कैसे नियंत्रित किया जाए। विश्व स्वास...
एक घंटे की संघ शाखाओं में लोगों को मातृभूमि के प्रति निःस्वार्थ मूल्यों और कर्तव्य के बारे में पता चलता है – डाॅ मोहन भागवत

एक घंटे की संघ शाखाओं में लोगों को मातृभूमि के प्रति निःस्वार्थ मूल्यों और कर्तव्य के बारे में पता चलता है – डाॅ मोहन भागवत

राष्ट्रीय
एक घंटे की संघ शाखाओं में लोगों को मातृभूमि के प्रति निःस्वार्थ मूल्यों और कर्तव्य के बारे में पता चलता है - डाॅ मोहन भागवत शिलॉंग 25 सितम्बर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने मेघालय की राजधानी शिलॉंग में यू सोसो थाम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया. पारंपरिक खासी जनजाति स्वागत के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ, जिसमें सरसंघचालक जी को पारंपरिक पोशाक पहन शामिल हुए. सरसंघचालक जी ने कहा कि हम अनादि काल से एक प्राचीन राष्ट्र हैं, लेकिन अपनी सभ्यता के चिरंतन लक्ष्य और मूल्यों को भूलने के कारण हमने अपनी स्वतंत्रता खोई. हमारी एकात्मता की शक्ति हमारे सदियों पुराने मूल्य में निहित विश्वास है जो आध्यात्मिकता में निहित है. इस देश की सनातन सभ्यता के इन मूल्यों को हमारे देश के बाहर के लोगों ने “हिन्दुत्व” का नाम दिया. हम हिन्दू हैं, लेकिन हिन्दू की कोई विशेष परिभाषा नहीं...
हिन्दू जागरण के सूत्रधार  अशोक सिंहल जी

हिन्दू जागरण के सूत्रधार अशोक सिंहल जी

धर्म
हर_दिन_पावन "27 सितम्बर/#जन्म_दिवस" #हिन्दू_जागरण_के_सूत्रधार #अशोक_सिंहल_जी #श्रीराम_जन्मभूमि_आन्दोलन के दौरान जिनकी हुंकार से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे, वे श्री अशोक सिंहल संन्यासी भी थे और योद्धा भी; पर वे स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक प्रचारक ही मानते थे। 27 सितम्बर, 1926 को आगरा (उ.प्र.) में हुआ। सात भाई और एक बहिन में वे चौथे स्थान पर थे। मूलतः यह परिवार #ग्राम_बिजौली (जिला #अलीगढ़, उ.प्र.) का निवासी था। उनके पिता श्री महावीर जी शासकीय सेवा में उच्च पद पर थे। घर में संन्यासी तथा विद्वानों के आने के कारण बचपन से ही उनमें हिन्दू धर्म के प्रति प्रेम जाग्रत हो गया। 1942 में प्रयाग में पढ़ते समय #प्रो_राजेन्द्र_सिंह (#रज्जू_भैया) ने उन्हें स्वयंसेवक बनाया। उन्होंने अशोक जी की मां विद्यावती जी को संघ की प्रार्थना सुनायी। इससे प्रभावित होकर उन्होंने अशोक जी को शा...
सद्भाव के लिए आवश्यक संवाद

सद्भाव के लिए आवश्यक संवाद

विश्लेषण
ह्रदय नारायण दीक्षित हिन्दू मुस्लिम सह अस्तित्व की समस्या पुरानी है। गांधी जी ने इस समस्या पर हार मान ली थी। साम्प्रदायिक दुराग्रह के कारण भारत विभाजन हुआ। विभाजन की त्रासदी के घाव पुराने होकर भी ताजे हैं। सम्प्रति उनका आरोप है कि हाल के दिनों में समुदाय में भय की भावना बढ़ी है। कहा गया है कि कुछ समय से देश में हुई चिंतनीय घटनाओं ने देश का तापमान बढ़ा दिया है। इसी बीच गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भगवत व भारतीय इमाम परिषद् के अध्यक्ष डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी से मुलाकात हुई। इलियासी इस भेंट से संतुष्ट व प्रसन्न रहे। संघ प्रमुख एक मदरसे में भी गए। उनका स्वागत वंदे मातरम् से हुआ। भागवत दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट-जनरल जमीरुद्दीन शाह, शाहिद सिद्दीकी, स...
हिंदुओं-सिखों से मुक्त होता अफगानिस्तान*

हिंदुओं-सिखों से मुक्त होता अफगानिस्तान*

EXCLUSIVE NEWS
हिंदुओं-सिखों से मुक्त होता अफगानिस्तान* _-बलबीर पुंज_ गत 25 सितंबर को 55 अफगान सिख और हिंदू (3 शिशुओं सहित) विशेष विमान से भारत लौट आए। इसी के साथ अनादिकाल तक सांस्कृतिक भारत का हिस्सा रहा अफगानिस्तान भी अपने मूल निवासियों— हिंदू-सिख-बौद्ध से शत-प्रतिशत मुक्त हो गया है। इस जत्थे के बाद अफगानिस्तान में अब शेष हिंदू और सिखों की संख्या नाममात्र 43 रह गई है। यह पलायन कोई पहली बार नहीं हुआ है। इसका पिछले एक हजार वर्षों का एक काला इतिहास है। 1970 के दशक में जिन अफगान हिंदुओं-सिखों की संख्या लगभग सात लाख थी, उनकी संख्या अब गृहयुद्ध, खालिस शरीयत व्यवस्था और तालिबानी जिहाद के बाद निरंतर घटते हुए नगण्य हो गई है। इस प्रकरण में यदि कुछ नया है या यूं कहे कि हतप्रभ करने वाला है, तो वह 11 सितंबर को तालिबान द्वारा पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब के चार 'सरूपों' को 'अफगानिस्तानी विरासत' का अंग बताकर उ...
सपनों को साकार करने का संकल्प

सपनों को साकार करने का संकल्प

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सपनों को साकार करने का संकल्प - डॉ.सौरभ मालवीय किसी भी देश, समाज एवं राष्ट्र के विकास की प्रक्रिया के आधारभूत तत्व मानवता, समुदाय, परिवार एवं व्यक्ति ही केंद्र में होता है, जिससे वहां के लोग आपसी भाईचारे से अपनी विकास की नैया को आगे बढ़ाते हैं तथा सुख एवं समृद्धि प्राप्त करते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्हीं मूल तत्वों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। देश में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में आए हुए आठ वर्ष पूरे हो चुके हैं। इन आठ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां विश्वभर के अनेक देशों में यात्राएं कर उनसे संबंध प्रगाढ़ बनाने का प्रयास किया है, वहीं देश में लोगों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए जनकल्याण की अनेक योजनाएं प्रारम्भ की हैं। इस समय देश में लगभग डेढ़ सौ योजनाएं चल रही हैं। मोदी सरकार ने विकास का नारा दिया और विकास को ही प्राथमिकता दी। परिणामस्वरूप देश में ...