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Author: Dialogue India

एक अच्छे पड़ोसी बने लेकिन जासूसी न करे।

एक अच्छे पड़ोसी बने लेकिन जासूसी न करे।

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एक अच्छे पड़ोसी बने लेकिन जासूसी न करे। पड़ोसी देशों के रूप में, आपके घर, राज्यों आदि के रूप में हो सकता है। अच्छे पड़ोसी की योग्य गुणवत्ता पड़ोसियों के व्यवहार और कल्याण पर निर्भर करती है। यह गुण प्रकृति, उपचार के तरीके, एक दूसरे के बीच की जगह यानी सीमा पर निर्भर करता है। केवल गोपनीयता और व्यक्तिगत स्थान बनाए रखने के लिए बाड़ जो समाज के विकास के लिए बहुत आवश्यक है। एक अच्छे पड़ोसी को दयालु, विचारशील और सहयोगी होना चाहिए। पड़ोसी कितना भी अच्छा क्यों न हो, अपनी निजता को लेकर हमेशा संतुष्ट रहने का खतरा बना रहता है। इसका मतलब यह नहीं है कि वे आपको जानबूझकर परेशान करेंगे लेकिन हमेशा एक मौका होता है। -प्रियंका सौरभ अच्छे पड़ोसी लोगों के बीच बाधाओं, दोस्ती, संचार के साथ-साथ सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है। मगर गोपनीयता बनाए रखने के लिए एक बाड़ एक अच्छी सीमा है। इसका मतलब है कि पड़ोसी ...
पर्यटन में छिपे हैं खुशियों के उजाले

पर्यटन में छिपे हैं खुशियों के उजाले

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विश्व पर्यटन दिवस- 27 सितम्बर, 2022 पर विशेष पर्यटन में छिपे हैं खुशियों के उजाले - ललित गर्ग - आज हर व्यक्ति किसी-ना-किसी परेशानी से घिरा हुआ है, महंगाई, बेरोजगारी, भय और जीवनसंकट के इस दौर में ऐसा लगता है मानो खुशी एवं मुस्कान तो कहीं गुम हो गई है। बावजूद इन सबके हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ समय ऐसा जरूर निकालना चाहिए जिसमें खुशी, शांति एवं प्रसन्नता के पल जीवंत हो सके, इसका सशक्त माध्यम है पर्यटन। खुशियों को गले लगाने के लिये एवं शांति एवं उल्लासपूर्ण जीवन जीने के लिये पर्यटन पर जरूर निकलना चाहिए। जीवन में पर्यटन के सर्वाधिक महत्व के कारण ही हर साल 27 सितम्बर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। पर्यटन सिर्फ हमारे जीवन में खुशियों के पलों को वापस लाने में ही मदद नहीं करेगा बल्कि यह किसी भी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का माध्यम भी बनेग...
मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा

मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा

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राष्ट्र-चिंतन* *मोहन भागवत को राष्ट्रपिता कहने का इस्लामिक एजेंडा* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त* ==================== सरकारी सड़क के गोल चक्कर को घेर कर बैठने वाले और इमामों का संगठन चलाने वाले ऑल इंडिया इमाम ऑगनाइजेशन के अध्यक्ष इमाम उमर अहमद इलियासी वर्तमान में बहुत ही चर्चित है, उनकी चर्चा सिर्फ राजनीति में ही नहीं है बल्कि मुस्लिम पंथ में भी खूब हो रही है। चर्चा होनी भी स्वाभिवक है। आखिर उनके दर पर मोहन भागवत जो पहुंच गये, उमर इलियासी भी मोहन भागवत को राष्ट्रपति करार जो दिया।खासकर मुस्लिम राजनीति भी उबल पड़ी। मुस्लिम राजनीति में उनकी चर्चा कुछ ज्यादा ही हो रही है। अधिकतर मुस्लिम राजनीति के सहचर उन्हें खलनायक और भस्मासुर की उपाधि दे रहे हैं, उन्हें इस्लाम का सत्यानाशी करार दे रहे हैं, कुछ मुस्लिम संगठन तो उन्हें अपशब्द भी कह रहें हैं और न लिखने योग्य गालियां भी बक रहे हैं। जहां तक इमामों ...
आधुनिक सतही और भ्रमित युवा: कारण और समाधान

आधुनिक सतही और भ्रमित युवा: कारण और समाधान

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आधुनिक सतही और भ्रमित युवा: कारण और समाधान भारत में 15 से 35 वर्ष की आयु के युवा एक मूल्यवान संसाधन हैं जो ज्ञान, कौशल और विकास की पहचान हैं और अक्सर कई आंतरिक और बाहरी कारकों से प्रभावित होते हैं जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। अवधि शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक संबंधों और संबंधों के बदलते रूप की विशेषता है। युवावस्था एक स्वस्थ और उत्पादक वयस्कता स्थापित करने और जीवन में बाद में स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना को कम करने का एक अवसर है। अधिकांश युवा लोगों को स्वस्थ माना जाता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अनुमानित 2.6 मिलियन युवा 10 से 24 वर्ष की आयु के बीच हर साल मर जाते हैं, और इससे भी अधिक संख्या में बीमारियों या "दुर्व्यवहार" से पीड़ित होते हैं जो वे विकसित करते हैं। होने की क्षमता को सीमित करता है। सभी समय से पहले होने वाली मौतों ...
कैंसरग्रस्त कोशिकाओं तक कीमोथेरेपी दवा पहुँचाने की नई रणनीति

कैंसरग्रस्त कोशिकाओं तक कीमोथेरेपी दवा पहुँचाने की नई रणनीति

BREAKING NEWS, Current Affaires, राष्ट्रीय
कैंसरग्रस्त कोशिकाओं तक कीमोथेरेपी दवा पहुँचाने की नई रणनीति नई दिल्ली, 26 सितंबर (इंडिया साइंस वायर): कैंसर उपचार के दौरान रोगी को कीमोथेरेपी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। मौजूदा कीमोथेरेपी दवाओं के साथ समस्या यह है कि वे कैंसरग्रस्त कोशिकाओं के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी मार देती हैं। इस कारण, रोगी के शरीर पर कई अवांछनीय दुष्प्रभाव उभरकर आते हैं। भारतीय शोधकर्ताओं ने कैंसर रोगी के शरीर में, विशेष रूप से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं तक कीमोथेरेपी दवाएं पहुँचाने के लिए एक नई रणनीति विकसित की है। उनका कहना है कि नया विकसित दृष्टिकोण कीमोथेरेपी के लिए बेहतर दवा-वाहकों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिसकी प्रभावकारिता अधिक, और दुष्प्रभाव नगण्य होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी, और कलकत्ता विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन रॉयल सोसायटी ऑफ...
Delhi water water due to rain AAP-BJP war verbally

Delhi water water due to rain AAP-BJP war verbally

Link of debates on various news channel participation by Dialogue India Group Editor Anuj Agarwal
हिंदी खबर न्यूज़ चैनल पर आयोजित बहस में शामिल रहा। बिषय था - *बारिश से दिल्ली पानी-पानी* *AAP-बीजेपी में जंग जुबानी* *"हिन्दी ख़बर"* का जबरदस्त डिबेट शो *बिग बुलेटिन*, LIVE एंकर *राखी लांबा* के साथ *एक्सपर्ट पैनल* *1. प्रेम चौहान, प्रवक्ता, AAP* *2. सारिका जैन, प्रवक्ता, BJP* *3. डॉ अनीत सिंह, प्रवक्ता, कांग्रेस* *4. अनुज अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार* बहस के लिंक - https://youtu.be/c9x9ejZKOB4 * Facebook* https://fb.watch/fKDbsabeUf/ * Twitter* https://bit.ly/3xOsXFX ...
क्या बैकफुट पर हैं रुस-चीन या हिला हुआ है नाटो और अमेरिका ?

क्या बैकफुट पर हैं रुस-चीन या हिला हुआ है नाटो और अमेरिका ?

विश्लेषण
क्या बैकफुट पर हैं रुस-चीन या हिला हुआ है नाटो और अमेरिका ? - अनुज अग्रवाल रुस के राष्ट्रपति पुतिन द्वारा फिर से यूक्रेन के ख़िलाफ़ किसी भी हद तक जाने (परमाणु हमले की धमकी देने) के बाद से पूरा यूरोप डरा व घबराया हुआ है तो नाटो व अमेरिका हिले हुए हैं। यूक्रेन में अपने क़ब्ज़े वाले साठ हज़ार किलोमीटर के क्षेत्र में से नौ हज़ार किलोमीटर के क्षेत्र को किसी गोपनीय रणनीति के तहत छोड़ देने के रुस के फ़ैसले के बाद प्रॉपगंडा वार में महारथी अमेरिका व नाटो ने इतनी ज़्यादा अफ़वाह फैलायीं कि पुतिन परेशान हो गए व ख़तरनाक रूप से आक्रामक होने की रणनीति अपनाने पर मजबूर हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन की इस आक्रामक व उकसाने वाली रणनीति की पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे मूर्खतापूर्ण कहा है किंतु बाईडेन बाज़ नहीं आ रहे। अब अगली अफ़वाह पुतिन के साथ दीवार की तरह खड़े चीनी राष्ट्...
संघ और मुसलमानों में संवाद से दुखी होने वाले कौन

संघ और मुसलमानों में संवाद से दुखी होने वाले कौन

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संघ और मुसलमानों में संवाद से दुखी होने वाले कौन आर.के. सिन्हा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत आजकल मुस्लिम बुद्धिजीवियों और धर्मगुरुओं से लगातार मिल रहे हैं। आरएसएस प्रमुख देश में साम्प्रदायिक सौहार्द्र को मजबूत करने के लिए चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने पहले दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीरउद्दीन शाह, पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी और कारोबारी सईद शेरवानी जैसे प्रबुद्ध मुसलमानों से मुलाकात की। ये सब मुस्लिम समाज के असरदार नाम हैं। शाहिद सिद्दीकी उर्दू अखबार नई दुनिया के संपादक भी हैं। डॉ. मोहन भागवत ने इनके बाद देश के हजारों इमामों की नुमाइंदगी करने वाले संगठन ‘अखिल भारतीय इमाम संगठन’ के प्रमुख मौलाना उमेर अहमद इलियासी से मुलाकात की। इन मुलाकातों के नतीजे सकारा...
बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?

बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा?

TOP STORIES, सामाजिक
बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा? *विनीत नारायण मशहूर शायर नवाब मुस्तफ़ा ख़ाँ शेफ़्ता का शेर, ‘हम तालिब-ए-शोहरत हैं हमें नंग से क्या काम, बदनाम अगर होंगे तो क्या नाम न होगा’ काफ़ी लोकप्रिय हुआ। इसका अर्थ है जिन्हें शोहरत की भूख होती है वो शोहरत पाने के लिए किसी भी हद तक जाने तैयार हो जाते हैं। ऐसा करने पर यदि उन्हें बदनामी भी मिले तो वे उसी में शोहरत के अवसर खोज लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट की मीडिया ऐंकरों को पड़ी फटकार का कुछ ऐसा ही अर्थ निकाला जा सकता है। दरअसल हेट स्पीच के एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टीवी एंकरों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि “नफरती भाषा एक जहर की तरह है जो भारत के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है। पिछले कुछ समय से चैनलों पर बहस बेलगाम हो गई है। देश के राजनैतिक दल इस सब में भी लाभ खोज रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी नफ़रत फैलाने वाले ...
लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है।

लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है।

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
लड़कियों को लड़कों से कमतर आंकना समाज की भूल है। हमेशा देश में 10वीं और 12वीं कक्षा के रिजल्ट में लड़कियां ही पहले पायदान पर रहती हैं। चाहे आईएएस बनने की होड़ हो, विमान या लड़ाकू जहाज उड़ाने की या फिर मैट्रो चलाने की, लड़कियां हर क्षेत्र में अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं।  कौन कहता है कि लड़कियां बोझ है? आज की  लड़की अपना बोझ तो क्या, परिवार का बोझ भी अपने कंधों पर उठाने की हिम्मत रखती है। बेटों की तरह वह भी पूरी निष्ठा के साथ जिम्मेदारियां संभाल रही है। देश की बेटियां अब सिर्फ सिलाई- कढ़ाई या ब्यूटी पार्लर तक ही सीमित नहीं रह गई है बल्कि वह तो दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार हैं। -प्रियंका सौरभ आज की लड़कियां तमाम बंधनों को तोड़कर आसमान छू रही हैं और समाज के लिए आदर्श बनी हुई हैं। अमूमन समाज में लड़कियों को लड़कों से कमतर आंका जाता है। शारीरिक सामर्थ्य ही नहीं अन्य कामों म...