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Author: Dialogue India

आरिफ से विजयन टक्कर न लें*

आरिफ से विजयन टक्कर न लें*

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आरिफ से विजयन टक्कर न लें* *डॉ वैदिक* केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को कल एक पत्रकार-परिषद बुलानी पड़ी। क्या आपने कभी सुना है कि किसी राज्यपाल ने कभी पत्रकार-परिषद आयोजित की है? राज्यपाल को पत्रकार-परिषद आयोजित करनी पड़ी है, यही तथ्य यह सिद्ध कर रहा है कि उस प्रदेश की सरकार कोई ऐसा काम कर रही है, जो आपत्तिजनक है और जिसका पता उस प्रदेश की जनता को चलना चाहिए। केरल की सरकार कौन-कौन से काम करने पर अड़ी हुई है। उसका पहला काम तो यही है कि वह अपने विश्वविद्यालयों में अपने मनपसंद के उप-कुलपति नियुक्त करने पर आमादा है। मुख्यमंत्री के साथ काम कर रहे एक भारी-भरकम नौकरशाह की पत्नी को चयन-समिति ने एक विश्वविद्यालय का उप-कुलपति चयन कर लिया। चार अन्य उम्मीदवार, जो उससे भी अधिक योग्य और अनुभवी थे, उन्हें रद्द करके इंटरव्यू में उस महिला को पहला स्थान दे दिया गया। इसी प्रकार कई अन्य विश्वविद्यालयों म...
दिल है कि मानता नहीं

दिल है कि मानता नहीं

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दिल है कि मानता नहीं *रजनीश कपूर जब भी कभी कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना हो तो अक्सर यह देखा गया है कि दिल का पलड़ा दिमाग़ पर भारी पड़ता है। ऐसा ज़्यादातर मोह माया के लोभ के कारण होता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि लोभ में फंसकर व्यक्ति नीति के विरूद्ध कार्य करता है। परंतु जिस भी व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में जब लोभ एक अहम स्थान ग्रहण कर लेता है तो वो हर तरह के प्रयास से अपने मोह से जुड़े लक्ष्यों की पूर्ति में जुट जाता है। प्रायः यह देखा गया है कि जब भी कभी किसी उच्च पद पर तैनात सरकारी अफ़सर, सासंद, विधायक आदि की सेवा निवृत्ति का समय आता है तो सरकारी बंगले और अन्य सुविधाओं का मोह उन्हें घेर लेता है। इसके विपरीत ऐसे भी व्यक्ति देखे गए हैं जो अतिसंवेदनशील पदों पर रहने के बावजूद, अपना सेवाकाल पूरा होते ही सरकारी बंगला छोड़ देते हैं। ऐसे लोग आप उँगलियों पर गिन सकते हैं जो रिटायर हो...
भारत में कैंसर के बढ़ते मामले, समाज के स्वास्थ्य पर बोझ

भारत में कैंसर के बढ़ते मामले, समाज के स्वास्थ्य पर बोझ

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22 सितंबर - रोज डे (कैंसर रोगियों का कल्याण) भारत में कैंसर के बढ़ते मामले, समाज के स्वास्थ्य पर बोझ लोगों को अपने खान-पान के प्रति सचेत रहना चाहिए और किसी न किसी प्रकार का व्यायाम नियमित रूप से करना चाहिए। इसमें योग अहम भूमिका निभाता है। मरीजों को लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण तंत्र का तत्काल आधार पर पालन किया जाना चाहिए। कैंसर को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाना महत्वपूर्ण है। सरकार को कैंसर की दवाओं की कीमतों को सीमित करना चाहिए क्योंकि ये बहुत महंगी हैं। अंत में, आहार में परिवर्तन कैंसर की रोकथाम में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सामुदायिक भागीदारी के साथ कारणों और लक्षणों के बारे में जागरूकता समय की आवश्यकता है। -डॉ सत्यवान सौरभ कैंसर के बढ़ते मामले हमारे समाज के स्वास्थ्य को खराब कर रहे हैं क्योंकि यह भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों मे...
शिक्षा के क्षेत्र की शर्मनाक और दुखद घटना

शिक्षा के क्षेत्र की शर्मनाक और दुखद घटना

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शिक्षा के क्षेत्र की शर्मनाक और दुखद घटना  ललित गर्ग पंजाब के मोहाली में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में कथित अश्लील वीडियो लीक मामले ने समूचे राष्ट्र को हिला कर रख दिया। कई छात्राओं का आपत्तिजनक वीडियो बनाने और उसे अन्य लोगों को भेजने की जो यह शर्मनाक एवं चिन्ताजनक घटना सामने आई है, वह कई स्तर पर दुखी और हैरान करने के साथ-साथ ऊच्च शिक्षण संस्थानों की अराजक एवं असुरक्षित होती स्थितियांे का खुलासा करती है। यह खौफनाक हरकत पीड़ित लड़कियों के सम्मान और उनकी जिंदगी से भी खिलवाड़ है। इन शिक्षा के मन्दिरों में संस्कार, ज्ञान एवं आदर्शों की जगह आज की युवा पीढ़ी का मस्तिष्क किस हद तक प्रदूषित हो गया है, अश्लील वीडियो प्रकरण उसकी भयावह प्रस्तुति है। यह एक गंभीर मसला है जिस पर मंथन किया जाना अपेक्षित है।अब तक जैसी खबरें आई हैं, उस संदर्भ में यह समझना मुश्किल है कि वहां पढ़ने वाली एक लड़क...
राष्ट्र-चिंतन

राष्ट्र-चिंतन

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*राष्ट्र-चिंतन* *ब्रिटेन के लेस्टर में हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों के दंगे रोंगटे खडे करने वाले हैं* *क्या ये मुसलमान भारतीय हो सकते हैं ?* *विदेशों में भारत की कब्र खोदने वाले भारतीय मुसलमानों से* *भारतीय पासपोर्ट छीना जाना चाहिए* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त* =================== ब्रिटेन के लेस्टर में मुस्लिम दंगाइयों द्वारा हिन्दू मंदिरों और हिन्दू प्रतीकों के साथ ही साथ हिन्दुओं पर हिंसा बरपाने और तालिबनी-जिहादी मानसिकता का प्रदर्शन करने की लोमहर्षक घटना से यूरोप के बहुलतावाद पर प्रश्न चिन्ह खड़े हुए हैं और यह बात प्रमाणित हो रही है कि इस्लाम की अवधारणा पर आधारित मुस्लिम हिंसा अब नियंत्रण से बाहर है तथा यूरोप व अमेरिका में भी मुस्लिम आबादी हिंसा, आतंकवाद, जिहाद की प्रतीक बन गयी है। अब मुस्लिम आबादी इस्लाम के आधार पर राष्टवाद की अवधारणा को भी झूठा साबित कर रही है। लेस्टर दंगे म...
एम्स को एम्स ही रहने दो

एम्स को एम्स ही रहने दो

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एम्स को एम्स ही रहने दो  आर.के. सिन्हा अंग्रेजी के महान नाटककार विलियम शेक्सपियर भले ही कह गए हों कि नाम में क्या रखा है, पर कुछ नामों की तो बात ही अलग होती है। वे नाम सम्मान और आदर के लायक होते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी इसी तरह का एक स्थापित नाम है। एम्स यानी देश भर के मरीजों का भरोसा और विश्वास। यहां पर देशभर से हर रोज सैकड़ों रोगी और उनके संबंधी इस विश्वास के साथ आते हैं कि वे यहां से सेहतमंद होकर ही घर लौटेंगे। एम्स भी उनके भरोसे पर खरा उतरने की हरचंद कोशिश करता है। यहां के डॉक्टर, नर्स और बाकी स्टाफ हरेक रोगी को स्वस्थ करने के लिए अपनी जान लगा देते हैं। अब एम्स का नाम बदलने की कवायद शुरू हो गई है। सन 1956 में स्थापित एम्स के नाम को बदलने की वैसे तो कोई जरूरत तो नहीं है। एम्स के डॉक्टरों का भी मानना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। एम्स के डॉक्टरों का कहना है जब दुनि...
Sensing pressure using paper

Sensing pressure using paper

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Sensing pressure using paper New Delhi, September 20 (India Science Wire): Several industrial, automotive, and healthcare applications rely on accurate and precise measurement of pressure. Pressure sensors are used for this purpose. They detect the physical pressure and convert it into an electrical signal that is displayed as a number indicative of the magnitude. Many applications require flexible and wearable pressure sensors. They are typically fabricated using petroleum-based polymers. But, these are non- degradable and solid waste generated from using them is harmful to the environment. To avoid this issue, a team of researchers at the Bengaluru-based Indian Institute of Science (IISc) has now fabricated pressure sensors that use paper as the medium. Any sensor always has a trad...
केवल प्यार ही घृणा को दूर कर सकता है।

केवल प्यार ही घृणा को दूर कर सकता है।

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, साहित्य संवाद
(21 सितंबर - अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस) केवल प्यार ही घृणा को दूर कर सकता है। एक शांतिपूर्ण वातावरण सामंजस्यपूर्ण जीवन सुनिश्चित करता है और आपसी समझ के लिए मार्ग प्रदान करता है। यह समझ बातचीत, चर्चा, क्रॉस-सांस्कृतिक आदान-प्रदान आदि के माध्यम से शांति को और मजबूत करती है। इस प्रकार एक पुण्य चक्र बनाया जाता है। दूसरी ओर, यदि बल द्वारा शांति थोपी जाती है, तो प्रतिस्पर्धी व्यक्तियों, समूहों, राज्यों आदि के बीच अविश्वास और शत्रुता की भावनाएँ पैदा होंगी। यहाँ कोई भी छोटी-सी गलतफहमी संघर्ष में बदल सकती है, जिससे परस्पर विरोधी दलों को नुकसान हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि लंबे समय तक शांति कायम रहने के लिए दूसरे पक्ष के हितों की समझ जरूरी है। -प्रियंका सौरभ "आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है।" महात्मा गांधी के शब्द हैं जो 21वीं सदी में भी प्रासंगिक हैं। मनुष्य ने ...
Judge India Solutions’ President, Abhishek Agarwal, launches his first book- The 3I Effect

Judge India Solutions’ President, Abhishek Agarwal, launches his first book- The 3I Effect

प्रेस विज्ञप्ति
Judge India Solutions’ President, Abhishek Agarwal, launches his first book- The 3I Effect Mr. Abhishek Agarwal, President- Judge India & Global Delivery at The Judge Group, launched his first book titled The 3I Effect. Dr. Ravindra Shukla – Former Education Minister of Uttar Pradesh, International President of Hindi Sahitya Bharati, a national poet, and a litterateur – graced the launch as the chief guest. Introducing his first-ever book, Mr. Agarwal said: ‘The 3I Effect is written with a motive to solve a staggering problem in the Modern Era – the lack of a well-rounded and happy life.’ The author has discussed his tried-and-tested 3I method in this book, which can be used at any stage of life and regardless of the direction one is headed. ‘From one’s younger years to professio...
अहिंसा और शांति ही जीवन का सौन्दर्य है

अहिंसा और शांति ही जीवन का सौन्दर्य है

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
अन्तर्राष्ट्रीय शांति एवं अहिंसा दिवस,  21 सितम्बर 2022 पर विशेष अहिंसा और शांति ही जीवन का सौन्दर्य है   ललित गर्ग  विश्व शांति दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितम्बर को मनाया जाता है। यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता, शांति, अहिंसा और खुशी का एक आदर्श माना जाता है। यह दिवस मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए मनाया जाता है। पहला शांति दिवस कई देशों द्वारा राजनीतिक दलों, सैन्य समूहों और लोगों की मदद से 1982 में मनाया गया था। इस साल 40वां अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 21 सितंबर 2022 को बुधवार के दिन मनाया जा रहा है, जिसकी थीम ‘जातिवाद खत्म करें, शांति का निर्माण करें‘ है। शांति सभी को प्यारी होती है। अहिंसा एवं शांति जीवन का सौन्दर्य है। इसकी खोज में मनुष्य अपना अधिकांश जीवन न्यौछावर कर देता है। किंतु यह काफी निराशाजनक है कि आज ...