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Author: Dialogue India

हमें सॉफ्ट पुलिसिंग की आवश्यकता क्यों है?

हमें सॉफ्ट पुलिसिंग की आवश्यकता क्यों है?

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हमें सॉफ्ट पुलिसिंग की आवश्यकता क्यों है? समाज की सेवा व सुरक्षा के लिए व्यवस्थित की गई पुलिस हर जगह अपनी भद्द पिटाती रहती है। इसका मुख्य कारण यही रहा है कि समाज के लोगों, विशेषत: गांवों, कस्बों व शहरों में जाकर पुलिस ने अपनी स्थिति, लाचारी, कानूनी जिम्मेदारियों इत्यादि से जनता को कभी भी अवगत नहीं करवाया।  समस्या समाधान का दृष्टिकोण यानी गांधी जी के नैतिक सिद्धांतों का पालन करते हुए, "पाप से घृणा करो पापी से नहीं" का आदर्श व्यवहार में अपनाना। पुलिस कर्मियों के लिए, सेवा भाव (कर्तव्य की भावना) प्रेरक शक्ति होनी चाहिए न कि सत्ता का अहंकार। पुलिस को आम जनमानस को अपने साथ ले आने की आवश्यकता है तभी  बिना वर्दी के सतर्क नागरिक पुलिस की ढाल बन कर उनके सच्चे हमसफर, हमदर्द व हमराज बनकर पुलिस के चाल, चरित्र व चेहरे में निखार लाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। -डॉ सत्यवान सौरभ सॉफ्...
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के चलते भारत की आर्थिक विकास दर में हो रही वृद्धि

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के चलते भारत की आर्थिक विकास दर में हो रही वृद्धि

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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के चलते भारत की आर्थिक विकास दर में हो रही वृद्धि किसी भी देश में स्वस्थ नागरिक उस देश के लिए एक बहुत बड़ी पूंजी मानी जाती है। नागरिकों के स्वस्थ रहने से देश की अर्थव्यवस्था को सीधे सीधे दो लाभ होते हैं। एक, देश के स्वस्थ नागरिकों की उत्पादकता तुलनात्मक रूप से अधिक रहती है। दूसरे, यदि नागरिक बीमार हैं तो उनको स्वस्थ रखने के लिए अधिक खर्च करना होता है, जो कि एक तरह से अनुत्पादक खर्च की श्रेणी में गिना जाता है, और बीमार नागरिकों की उत्पादकता तो कम होती ही है। इस बीच यदि देश में उत्तम दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं तो अस्वस्थ नागरिकों को जल्दी स्वस्थ कर पुनः उनकी उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है। जिसका सीधा लाभ उस नागरिक के साथ ही देश के आर्थिक विकास में सुधार के रूप में भी देखने में आता है। हाल ही के समय में, भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कें...
हिंसक एवं असहिष्णु होते समाज की त्रासदी

हिंसक एवं असहिष्णु होते समाज की त्रासदी

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हिंसक एवं असहिष्णु होते समाज की त्रासदी - ललित गर्ग-भारतीय समाज हिंसक एवं असभ्य होता जा रहा है। समाज में बढ़ती हिंसकवृत्ति आदमी को एक दिन कालसौकरिक कसाई बना देती है, कंस बना देती है, रावण बना देती है। एक ऐसा हिंसक समाज बन रहा है, जिसमें कुछ लोगों को दिन भर में जब तक किसी को मार नहीं देते, उन्हें बेचैनी-सी रहती है। इतिहास में ऐसे कुछ विकृत दिमाग के लोग हुए हैं, जिन्हें यातना देकर किसी को मारने में आनंद आता था। लेकिन आधुनिक सभ्य समाजों में ऐसी प्रवृत्ति का कायम रहना गहन चिन्ता का विषय है। यह समझना मुश्किल होता जा रहा है कि लोगों में असहिष्णुता, असहनशीलता और हिंसा की प्रवृत्ति इतनी कैसे बढ़ रही है कि जिन मामलों में उन्हें कानून की मदद लेनी चाहिए, उनका निपटारा भी वे खुद करने लगते हैं और इसका नतीजा अक्सर किसी की मौत के रूप में सामने आता है। दिल्ली में जिस तरह एक व्यक्ति क...
ओजोन परत की बहाली के लिए विश्व स्तर पर कार्य आवश्यक हैं।

ओजोन परत की बहाली के लिए विश्व स्तर पर कार्य आवश्यक हैं।

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ओजोन परत की बहाली के लिए विश्व स्तर पर कार्य आवश्यक हैं। ओजोन एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला अणु है जो तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बना होता है। ओजोन पृथ्वी के वायुमंडल के विभिन्न स्तरों में पाई जाती है। वायुमंडल में लगभग 90% ओजोन पृथ्वी की सतह (स्ट्रेटोस्फेरिक ओजोन) से 15 से 30 किलोमीटर के बीच केंद्रित है। यह जमीनी स्तर पर कम सांद्रता (ट्रोपोस्फेरिक ओजोन) में भी पाया जाता है। ओजोन एक प्रदूषक है जो शहरों में धुंध का एक प्रमुख हिस्सा है।  ओजोन परत की खोज 1913 में फ्रांसीसी भौतिकविदों चार्ल्स फैब्री और हेनरी बुइसन ने की थी। ओजोन परत ओजोन की उच्च सांद्रता के लिए सामान्य शब्द है जो पृथ्वी की सतह से 15 से 30 किमी के बीच समताप मंडल में पाई जाती है। ओजोन परत सूर्य की मध्यम-आवृत्ति वाले पराबैंगनी प्रकाश (लगभग 200 एनएम से 315 एनएम तरंग दैर्ध्य) के 97 से 99 प्रतिशत को अवशोषित करती है, जो अन्यथा सत...
दिल दा मामला है

दिल दा मामला है

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दिल दा मामला है *रजनीश कपूर मशहूर पंजाबी गायक गुरदास मान का दुनिया भर में चर्चित गाना ‘दिल दा मामला है’ आज एक बार फ़िर से चर्चा में है। इसलिए नहीं कि अचानक यह गाना फिर से लोकप्रिय होने लगा है। इसलिए कि आजकल सोशल मीडिया में ऐसी तमाम ख़ौफ़नाक खबरें सामने आ रही हैं जिनमें हंसते-खेलते लोगों को अचानक दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई। ज़्यादातर देखा गया है कि दिल का दौरा या हार्ट अटैक 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों आता है। दिल का दौरा पड़ने के और कारणों में से प्रमुख है मधुमय या शुगर के मरीज़ और ब्लड प्रेशर के मरीज़। इन मरीज़ों में हार्ट अटैक की संभावना काफ़ी अधिक होती है। इसके साथ ही धूम्रपान करने वाले व्यक्ति भी दिल के मरीज़ कब बन जाते हैं इसका पता नहीं चलता। इसका कारण यह है कि धूम्रपान करने से दिल का दौरा पड़ने की संभावना तीन गुना बढ़ जाती है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को ...
CSE releases new toolkits to support India’s ‘garbage-free cities’ agenda

CSE releases new toolkits to support India’s ‘garbage-free cities’ agenda

प्रेस विज्ञप्ति
PRESS RELEASE CSE lays down roadmap for making Indian cities garbage-free Management of legacy waste and dumpsite remediation major components of the roadmap Urban ministry joint secretary Roopa Mishra releases CSE’s three new toolkits on municipal solid waste management India’s more than 3,000 dumpsites hold 1,300 million tonne of legacy waste. Government has allocated Rs 1,41,600 crore for remediation of these dumpsites – this is the single largest investment in a flagship sanitation programme in independent India Follow the proceeding of the Symposium here: https://www.cseindia.org/legacy-waste-management-and-dumpsite-remediation-11410 New Delhi, September 15, 2022: “The term ‘legacy waste’ has received close attention in the wake of Swachh Bharat Mission (SBM) 2.0 which...
प्रभावी टीबी वैक्सीन उम्मीदवार विकसित करने से जुड़ा नया अध्ययन

प्रभावी टीबी वैक्सीन उम्मीदवार विकसित करने से जुड़ा नया अध्ययन

Current Affaires, समाचार
प्रभावी टीबी वैक्सीन उम्मीदवार विकसित करने से जुड़ा नया अध्ययन नई दिल्ली, 14 सितंबर (इंडिया साइंस वायर): तपेदिक (टीबी) की रोकथाम के लिए आमतौर पर उपयोग होने वाला बीसीजी टीका बच्चों में तो प्रभावी है, पर किशोरों और वयस्कों को सुरक्षा प्रदान करने में यह उतना प्रभावी नहीं देखा गया है। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय शोधकर्ता तपेदिक (टीबी) के विरुद्ध प्रभावी वैक्सीन उम्मीदवार विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस नयी पद्धति में स्वर्ण नैनो कणों पर लिपटे बैक्टीरिया से प्राप्त गोलाकार पुटिकाओं का उपयोग शामिल है, जिसे बाद में प्रतिरक्षा कोशिकाओं तक पहुँचाया जा सकता है। यह अध्ययन, बेंगलूरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। उनका कहना है कि यह पद्धति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करके बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने में प्रभावी भूमिका निभा सकती है। आईआईएससी क...
कमजोर पड़ते विपक्ष से भारतीय लोकतंत्र खतरे में

कमजोर पड़ते विपक्ष से भारतीय लोकतंत्र खतरे में

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(15 सितंबर: अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस) कमजोर पड़ते विपक्ष से भारतीय लोकतंत्र खतरे में सरकार को आलोचना को सिरे से खारिज करने के बजाय सुनना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने के सुझावों पर एक विचारशील और सम्मानजनक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।  प्रेस और न्यायपालिका जिन्हें लोकतंत्र के स्तंभ के रूप में माना जाता है, को किसी भी कार्यकारी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होने की आवश्यकता है।  मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष की जरूरत होती है। वैकल्पिक विकल्प के बिना, मनमानी शक्ति पर रोक लगाने के चुनाव का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। लोकतांत्रिक मूल्य और सिद्धांत भारत की पहचान के मूल हैं। हमें अपने लोकतंत्र के स्तंभों - विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया को मजबूत करके उसकी रक्षा करने की आवश्यकता है। -डॉ सत्यवान सौरभ प्रेस पर बढ़ते हमले और न्यायिक स्वायत्तता के क्षरण से लोकतंत्र...
लोकतंत्र के लिये खतरा है मुफ्तखोरी की राजनीतिक

लोकतंत्र के लिये खतरा है मुफ्तखोरी की राजनीतिक

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लोकतंत्र के लिये खतरा है मुफ्तखोरी की राजनीतिक- ललित गर्ग-गुजरात के दिसम्बर-2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव प्रचार में आम आदमी पार्टी ने ‘रेवड़ी कल्चर’ का सहारा लिया तो राजनीतिक हलकों में यह विषय एक बार फिर चर्चा में आ गया। इन दिनों उच्चतम न्यायालय से लेकर राजनीति क्षेत्रों में ‘रेवड़ी कल्चर’ को लेकर व्यापक चर्चा आम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुक्त की संस्कृति पर तीखे प्रहार करते रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार बांटने का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है, खासकर तब जब चुनाव नजदीक हों। ‘फ्रीबीज’ या मुफ्त उपहार न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में वोट बटोरने का हथियार हैं। यह एक राजनीतिक विसंगति एवं विडम्बना है जिसे कल्याणकारी योजना का नाम देकर राजनीतिक लाभ  की रोटियां सेंकी जा रही है। यह तय करना कोई मुश्किल काम नहीं है कि कौनसी कल्याणकारी योजना है और कौनसी मुफ्तखोरी यानी ‘रेवड़ी कल्...
कांग्रेस को बेनकाब करती उसकी भारत जोड़ो यात्रा

कांग्रेस को बेनकाब करती उसकी भारत जोड़ो यात्रा

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कांग्रेस को बेनकाब करती उसकी भारत जोड़ो यात्रा मृत्युंजय दीक्षित स्वयं को पुर्नजीवित करने के लिए कांग्रेस अपने नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कश्मीर से कन्याकुमारी तक 145 दिन की यात्रा पर निकली है और इसे नाम दिया है, भारत जोड़ो यात्रा । विडम्बना यहीं से प्रारंभ होती है – उद्देश्य है दिन प्रतिदिन बिखरती कांग्रेस को कुछ संजीवनी देना और इसी बहाने एक बार फिर राहुल को लांच करना और नाम है भारत जोड़ो जबकि होना चाहिए था कांग्रेस जोड़ो। “कांग्रेस को भारत से जोड़ो” नारा होता तो भी बात बन जाती । कांग्रेस पार्टी की यह यात्रा कहाँ, क्या और कितना जोड़ पाएगी यह तो समय बतायेगा लेकिन पिछले पांच दिनों में इस यात्रा ने कांग्रेस का असली चरित्र अवश्य बेनकाब किया है। राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पूरी तरह एक हिंदू और सनातन संस्कृति विरोधी पार्टी बन चुकी है इसमें टुकड़े- टुकड़े गैंग तथा हम लेकर रहेंगे आजादी क...