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Author: Dialogue India

HEAT WAVES IN INDIA

HEAT WAVES IN INDIA

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HEAT WAVES IN INDIA A CSE Media Briefing Note How bad has this year’s heat wave been in India? The early heat waves of 2022 that began on March 11 have impacted 15 Indian states and Union territories (as of April 24), according to data from the India Meteorological Department (IMD) that was analysed by Down To Earth. Rajasthan and Madhya Pradesh have suffered the most among the states, with 25 heat wave and severe heat wave days each during this period. The IMD says a heat wave happens when the temperature of a place crosses 40oC in the plains, 37oC in coastal areas, and 30oC in the hills. The weather agency declares a heat wave when a place registers a temperature that is 4.5 to 6.4oC more than the normal temperature for the region on that day. If the temperature is over 6.4oC mo...
तूड़े पर धारा-144 लागू, गाय भैंसों के चारे की चिंता

तूड़े पर धारा-144 लागू, गाय भैंसों के चारे की चिंता

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तूड़े पर धारा-144 लागू, गाय भैंसों के चारे की चिंता -प्रियंका 'सौरभ' हरियाणा में गोवंश के चारे पर भारी संकट पैदा हो गया है। प्रदेश में सबसे ज्यादा मार उन जगहों पर है जिन जिलों में गोशालाएं सबसे अधिक है। प्रदेश के  सिरसा, फतेहाबाद, हिसार जिले में सबसे अधिक गोशालाएं हैं। अभी से तूड़ी के रेट 850 रुपये क्विंटल पर पहुंच गया है। परिणामस्वरूप इससे गोशालाओं का खर्च भी दोगुना हो गया है। आंकड़ों के अनुसार औसतन 2000 गाय वाली गोशाला में अकेली तूड़ी का खर्च पहले करीब 20 लाख रुपये आता था मगर अब रेट दो गुने होने से यह खर्च भी दोगुना हो गया है। पिछली बार 6000 से 7500 रुपए प्रति क्विंटल बिकी सरसों से इस बार गेहूं और तूड़े की व्यवस्था गड़बड़ा गई है। प्रदेश भर में गत वर्ष की तुलना में कम एकड़ में गेहूं की बिजाई करने से इस बार तूड़े (गेहूं की फसल के अवशेष से बने पशु चारे) के दाम भी आसमान छू रहे हैं। इस संकट क...
मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना

मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना

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मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना भारत के अतीत में सम्पूर्ण उत्तर भारत में लगभग एक ही भाषा थी। आज भी वैसा ही है। समय के चक्र के साथ धीरे-धीरे वैभाषिक अन्तर में वृद्धि हो गई और आज से लगभग एक हजार वर्ष पहले आधुनिक स्थानीय भाषाओं का उद्भव एवं विकास हुआ। बिहार राज्य के पूर्वोत्तर कोने से गंगा, गण्डक और कोसी नदियों से घिरे विशाल क्षेत्र की भाषा मैथिली है। इस भाषा का साहित्य लगभग बारहवीं सदी से उपलब्ध है। विद्यापति प्रभूति अनेक विद्वानों के साहित्य से समृद्ध यह भाषा हिन्दी से प्राय: मिलती जुलती है। इस भाषा में कवि चन्द्रा झा ने मैथिली रामायण की रचना की है। उनका रचनाकाल १८८० के आसपास और प्रकाशनकाल १८९०-९१ है। इनकी रामायण अध्यात्मर...
सांबा में नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन की दिशाएं

सांबा में नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन की दिशाएं

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सांबा में नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन की दिशाएं-ललित गर्ग -प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल ही में की गयी जम्मू-कश्मीर यात्रा पर इसलिए देश की निगाहें थीं, क्योंकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद वह पहली बार जम्मू-कश्मीर की धरती पर पहुंचे। उनकी इस यात्रा ने अनेक सकारात्मक संदेश दिये, शांति एवं विकास का माध्यम बना है। निश्चित ही उनकी यह यात्रा इस प्रांत में एक नई फिजां का सबब बनी है। जम्मू-कश्मीर हमारे देश का वो गहना है जिसे जब तक सम्पूर्ण भारत के साथ जोड़ा नहीं जाता, वहां शांति, आतंकमुक्ति एवं विकास की गंगा प्रवहमान नहीं होती, अधूरापन-सा नजर आता रहा है। इसलिए इसे शेष भारत के साथ हर दृष्टि से जोड़ा जाना महत्वपूर्ण है और यह कार्य मोदी एवं उनकी सरकार ने किया है। निश्चित रूप से वहां एक नया दौर शुरू किया है। इसके लिये जम्मू में मोदी ने पंचायत दिवस के अवसर पर केवल देश भर के पंचायत ...
श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग

श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग

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श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग श्रीराम द्वारा सीताजी के त्याग का रहस्य दोहा- रामू अमित गुन सागर थाह कि पावइ कोई। सन्तह सन जस किछु सुनेऊँ तुम्हहि सुनायउ सोई।। श्रीरामचरितमानस उत्तरकाण्ड ९२ (क) वर्तमान समय में श्रीरामकथामृत के समान कोई भी वस्तु संसार में मनोरम नहीं है, बाल, वृद्ध, वनिता, युवा सब ही इसका पान करके अपने आपको अत्यन्त सौभाग्यशाली मानते हैं। इस श्रीरामकथामृत के प्रभाव से उनमें धैर्यवान, साहसी, न्यायप्रिय, परहित में लगे रहने तथा उनमें प्रेम, दया, सहयोग एवं सहानुभूति के गुणों का समावेश होता है। यद्यपि श्रीरामचरित का वर्णन अनेक प्रकार से सन्तों, महात्माओं ने अपूर्व किया है किन्तु गोस्वामी तुलसीदासजी की तुलना आज भी किसी से नहीं की जा सकती है। यही कारण है कि भारत के घरों से मंदिरों तक उनकी विश्व प्रसिद्ध कृति- श्रीरामचरितमानस का श्र...
‘ग्रामीण विकास का नया मंत्र बनी ड्रोन आधारित मैपिंग तकनीक’

‘ग्रामीण विकास का नया मंत्र बनी ड्रोन आधारित मैपिंग तकनीक’

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‘ग्रामीण विकास का नया मंत्र बनी ड्रोन आधारित मैपिंग तकनीक’ गाँवों में होने वाले विवादों का एक प्रमुख कारण भूमि के मालिकाना अधिकार से जुड़ा होता है। भूमि सर्वेक्षण में ड्रोन आधारित तकनीक का उपयोग इन विवादों को दूर करने में प्रभावी भूमिका निभा सकती है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना इस बदलाव का सूत्रधार बनी है, जिसके अंतर्गत गाँवों में रहने वाले लोगों को उनके घरों के अधिकार का रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी के मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जा रहे हैं। स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण भारत के भूमि रिकॉर्ड डिजिटल किए जा रहे हैं, जिससे गाँवों के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस योजना के तहत, ड्रोन का उपयोग करके सभी ग्रामीण इलाकों का सर्वेक्षण किया जा रहा है, और इस प्रकार देश के हर गाँव के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) आधारित मानचित्र तैयार किये जा रहे हैं। भौगोलिक सूचना प्रणाली या जीआईए...
पुस्तकें हर आंधी में टीकी रहेगी

पुस्तकें हर आंधी में टीकी रहेगी

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विश्व पुस्तक दिवस-23 अप्रैल, 2022पुस्तकें हर आंधी में टीकी रहेगी-ललित गर्ग -हर साल 23 अप्रैल को दुनियाभर में विश्व पुस्तक दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसे कॉपीराइट डे भी कहा जाता है। इस दिवस को किताबें पढ़ने, प्रकाशन और कॉपीराइट के लाभ को पहचानने और बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन कई विश्वप्रसिद्ध लेखकांे का जन्मदिवस या पुण्यतिथि होती है। विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वेंट्स और जोसेप प्लाया का इसी दिन निधन हुआ था, जबकि मैनुएल मेजिया वल्लेजो और मौरिस ड्रून इसी दिन पैदा हुए थे। यूनेस्कों ने 23 अप्रैल 1995 को इस दिवस को मनाने की शुरुआत की थी। पैरिस में यूनेस्को की एक आमसभा में फैसला लिया गया था कि दुनियाभर के लेखकों का सम्मान करने, उनको श्रद्धांजली देने और किताबों के प्रति रुचि जागृत करने के लिए इस दिवस को मनाया जाएगा। सर्वविदित है कि पुस्तक का महत्व सार्वभौमिक, सार्वकालिक एवं सार्...
पृथ्वी हर आदमी की जरूरत को पूरा कर सकती है, लालच को नहीं।

पृथ्वी हर आदमी की जरूरत को पूरा कर सकती है, लालच को नहीं।

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पृथ्वी हर आदमी की जरूरत को पूरा कर सकती है, लालच को नहीं। -प्रियंका 'सौरभ' महात्मा गांधी ने एक बार कहा था - पृथ्वी हर आदमी की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रदान करती है, लेकिन हर आदमी के लालच को नहीं। पिछले 25 वर्षों में मनुष्यों ने पृथ्वी के दसवें भाग के जंगल को नष्ट कर दिया है और यदि प्रवृत्ति जारी रहती है तो एक सदी के भीतर कोई भी शेष नहीं रह सकता है।  मनुष्य पृथ्वी पर सभी बायोमास का केवल 0.01% हिस्सा है, लेकिन ग्रह का इतना छोटा हिस्सा होने के बावजूद, उन्होंने सभी जंगली स्तनधारियों के 83% और सभी पौधों के आधे का विनाश किया है। हमें खुद को यह याद दिलाने की आवश्यकता है कि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने पर्यावरण की रक्षा और सुरक्षा करनी चाहिए। इसी दृष्टि से प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया ...
फ़्रांस राष्ट्रपति चुनाव :

फ़्रांस राष्ट्रपति चुनाव :

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फ़्रांस राष्ट्रपति चुनाव : मरिन जीती तो बदल जाएँगे वेश्विक समीकरण आ जाएगा बढ़ा भूचाल - अनुज अग्रवाल फ़्रांस में राष्ट्रपति चुनावों के बीच जनमत पूरी तरह बंट गया है। इस बार अमेरिका समर्थक राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और रुस समर्थक दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरिन ले पेन के बीच कड़ा मुकाबला है। पहले चरण में मैक्रों 27.85% वोट के साथ सबसे आगे रहे। पेन 23.15% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। जानकार बता रहे है कि मरिन की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है और वो मुक़ाबला जीत सकती हैं। इमैनुएल मैक्रों  आरोप लगा चुके हैं कि मरिन चुनावों में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मदद ले रही हैं। मरिन ने वादा किया है कि अगर वे राष्ट्रपति बनती हैं तो फ़्रांस को नाटो व यूरोपियन यूनियन से अलग कर देंगी व रुस पर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटा देंगी।अगर ऐसा हुआ तो इससे पूरी दुनिया में उथल पुथल मच जाएगी। रुस व चीन की स्थिति बहुत ज़्यादा ...
साम्प्रदायिक आग्रहों की चौड़ी होती खाइयां

साम्प्रदायिक आग्रहों की चौड़ी होती खाइयां

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साम्प्रदायिक आग्रहों की चौड़ी होती खाइयां -ललित गर्ग- समस्याएं अनेक हैं। बात कहां से शुरू की जाए। खो भी बहुत चुके हैं और खोने की रफ्तार तीव्र से तीव्रत्तर होती जा रही है। जिनकी भरपाई मुश्किल है। भाईचारा, सद्भाव, निष्ठा, विश्वास, करुणा यानि कि जीवन मूल्य खो रहे हैं। मूल्य अक्षर नहीं होते, संस्कार होते हैं, आचरण होते हैं। हम अपने आदर्शों एवं मूल्यों को खोते ही जा रहे हैं, एक बार फिर रामनवमी और हनुमान जयंति के अवसरों पर देश के कई प्रदेशों में हिंसा, नफरत, द्वेष और तोड़-फोड़ के दृश्य देखे गए। उत्तर भारत के प्रांतों के अलावा ऐसी घटनाएं दक्षिण और पूर्व के प्रांतों में भी हुईं। ऐसे सांप्रदायिक दंगें और खून का बहना कांग्रेस के शासन में होता रहा, लेकिन पिछले एक दशक में ऐसी हिंसात्मक साम्प्रदायिक घटनाएं पहली बार कई प्रदेशों में एक साथ हुई है, ऐसा होना काफी चिंता का विषय है। उन्माद, अविश्वास, राजनैति...