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Author: dindiaadmin

जनता और पार्टी कायकर्ता  मेरी प्राथमिकता

जनता और पार्टी कायकर्ता मेरी प्राथमिकता

EXCLUSIVE NEWS
श्रीमती कृष्णा राज मेरी हाल ही कि लद्दाख यात्रा लंबे समय तक स्मृतियों से धूमिल न हो सकेगी। विपरीत परिस्थितियों में जीते लद्दाखियो का जीवन संघर्ष नि:संदेह प्रेरणादायक है। बर्फ से ढके वृक्षविहीन पहाड़ों में सांस लेना ही बड़ी चुनोती है क्योंकि ऑक्सिजन कब कम हो जाए यह पता ही नहीं चलता। बर्फ के तूफान, भारी बारिश और पहाड़ों के दरकना, यह रोजमर्रा की बातें हैं। अपनी यात्रा के दौरान मैंने जब अपने मंत्रालय से जुड़े अनेक कार्यो का निरीक्षण किया तो यह स्थानीय अधिकारियों के लिए बड़े आश्चर्य की बात थी, शायद उनके क्षेत्र में किसी केंद्रीय मंत्री का पहला दौरा था। में ग्रामीण महिलाओं के साथ खासी घुलमिल जाती हूं। जब मैने उन्हें टटोला तो मुझे बहुत दुख हुआ जब मैने पाया कि कर्मचारी ओर सामाजिक संस्थाओं की कार्यशैली में व्यापक भ्रष्टाचार व्याप्त था। रोज जीवन संघर्ष कर रहे लद्दाखियो के प्रति यह अत्याचार की तरह थ...
भारत में भूतापीय ऊर्जा पैदा करने की संभावनाओं  पर सरकार का ग्रहण – वैज्ञानिक सूर्य प्रकाश कपूर

भारत में भूतापीय ऊर्जा पैदा करने की संभावनाओं पर सरकार का ग्रहण – वैज्ञानिक सूर्य प्रकाश कपूर

राष्ट्रीय
भारत सहित पूरा विश्व इस समय ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है। कभी यह तलाश सौर ऊर्जा के रूप में पूरी होती है तो कभी आकाशीय बिजली के द्वारा, विद्युत् उत्पादन की संभावना में। भारत एक बहुत ही विशाल देश है, जिसमें विशाल जनसँख्या के सामने ऊर्जा की समस्या मुंह बाए खड़ी है। भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। अब तक हमारे देश के 21 प्रतिशत गाँवों तथा 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक बिजली नहीं पहुँच पाई है। ऊर्जा के स्रोतों की बात करते ही केवल कुछ स्रोत सभी के मस्तिष्क में आते हैं, और उनमें है सौर ऊर्जा, जैव ईंधन, गैस, लकड़ी आदि। परन्तु पिछले कुछ समय से भूतापीय अर्थात जियोथर्मल ऊर्जा के विषय में भी सुना जा रहा है। भूतापीय ऊर्जा क्या है और भारत में इसकी क्या संभावनाएं हैं, क्या भारत में भूतापीय ऊर्जा संभव है और क्या भूतापीय ऊर्जा के रास्ते में कुछ बाधाएं हैं, यदि...
खुद को हर कीमत  पर साबित करना

खुद को हर कीमत पर साबित करना

TOP STORIES
एक बहुत ही पुरानी कहावत है वीर भोग्या वसुंधरा। हर सुबह ही अपने आप को वीर या श्रेष्ठ साबित करने की एक दौड़ शुरू हो जाती है, अपने आपको श्रेष्ठ साबित करने की एक दौड़ शुरू हो जाती है। बाघ हिरन के पीछे दौड़ता है जिससे वह उसे पकड़ सके। अब हिरन अपने आप तो बाघ के पास जाकर कहेगा नहीं कि मुझे खाओ, अपनी भूख मिटाओ। बाघ को हिरन को पकडऩे के लिए अपनी पूरी शक्ति का उपयोग करना ही होता है। इसी प्रकार हिरन के लिए भी बहुत बड़ी चुनौती होती है अपने आप को बचाना और दिन भर के लिए जिंदा रहना। तो हर रोज़ हिरन को भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है, न केवल हर दिन बल्कि हर घंटे, हर मिनट। क्योंकि उसे नहीं पता होता कि कब उस पर कोई बड़ा जंगली जानवर आक्रमण कर देगा और उसे अपना शिकार बना लेगा। आज हम जिस प्रतिस्पर्धी संसार में रहते हैं, वह किसी भी प्रकार से अलग नहीं है। एक सेल्समैन अपना दिन इसी उम्मीद के साथ शुरू...
संस्कृत – अब बाजार की बनती मजबूरी सिविल और राज्य सर्विस में लोकप्रिय होती संस्कृत

संस्कृत – अब बाजार की बनती मजबूरी सिविल और राज्य सर्विस में लोकप्रिय होती संस्कृत

सामाजिक
भाषा किसी भी देश की अस्मिता और उसके अस्तित्व की सबसे बड़ी पहचान होती है, भाषा और बोलियों के समाप्त होने से न केवल भाषा बल्कि वह राष्ट्र समाप्त हो जाता है। और उस पर यदि संस्कृत जैसी वैज्ञानिक भाषा हो, जिसमें शताब्दियों पूर्व न जाने कितने शास्त्र आदि की रचना हो चुकी हो, जिस भाषा के द्वारा प्रदत्त ज्ञान पर आज भी कई रहस्य अनसुलझे हैं, और जिस संस्कृत भाषा को नासा आज सबसे अधिक वैज्ञानिक भाषा मानता है, क्या वह वाकई में ही लुप्त प्राय भाषा बन गयी है? क्या वह वाकई ऐसी भाषा बन गयी है जिसका कोई अस्तित्व नहीं या फिर ऐसी भाषा जो एक दिन विलुप्त हो जाएगी? कई ऐसा सोचते हैं, मगर पिछले कुछ वर्ष के आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। पिछले कुछ वर्षों में संस्कृत भाषा न केवल सबसे वैज्ञानिक भाषा के रूप में उभरी है बल्कि यह प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले बच्चों के लिए भी एक माध्यम के रूप में उभरी है। नई दिल्ली में प...
कृषि संकट की जड़ें

कृषि संकट की जड़ें

राज्य
जावेद अनीस मध्यप्रदेश विडम्बनाओं और विरोधाभासों का गढ़ बनता जा रहा है, एक तरफ तो यह सूबा भुखमरी, कुपोषण और किसानों की बदहाली के लिए कुख्यात है तो ठीक उसी समय यह देश का ऐसा पहला सूबा भी बन जाता है जहाँ 'हैप्पीनेस डिपार्टमेंटÓ की शुरुआत की जाती है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लाख धमकाने, पुचकारने और फरेब के बावजूद किसानों का गुस्सा शांति नहीं हुआ है।इस बार किसानों प्रतिरोध इनता तेज था कि एक बार तो करीब 11 सालों से सूबे की गद्दी पर अंगद की तरह पसरे शिवराजसिंह चौहान की गद्दी हिलती नजर आयी। आदोंलन शुरू होने के करीब पखवाड़े भर के भीतर ही सूबे के करीब दो दर्जन किसानों ने आत्महत्या कर ली लेकिन किसान पुत्र शिवराज सिंह की सरकार का पूरा जोर किसी भी तरह से इस पूरे मसले से ध्यान हटा देने या उसे दबा देने का रहा। पहले आन्दोलनकारियों को 'एंटी सोशल एलिमेंटÓ के तौर पर पेश करने की पूरी कोशिश की गयी और ज...
मेट्रोमेन के बाशिंदो का हक़

मेट्रोमेन के बाशिंदो का हक़

BREAKING NEWS
संपादक अनुज अग्रवाल दिल्ली मेट्रो विश्व की सबसे आधुनिक रेल प्रणाली, 100 से 200 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर जिसकी लागत है।जिसके कर्ता धर्ता रहे श्रीधरन को हम देशवासी सर चढ़ाए रहते हैं ओर भारत रत्न मानते हैं। वो मेट्रो जिसमें ऑटोमेशन तकनीक का ऐसा खेल हुआ कि 80त्न कम कर्मचारियों से ही काम चल गया। जिस जगह से गुजरी वहाँ की जमीन सोना हो गयी। लोग मालामाल हो गए। जिस देश जापान ने कर्ज दिया उसकी लॉटरी लग गयी। मगर उसी मेट्रो में जो थोड़े बहुत कर्मचारी ऑपरेशनल सेवाओं में लगे हैं वे नाराज हैं, परेशान हैं। उनका कहना है उनको लूटा जा रहा है। दुगना काम करा कर आधा वेतन दिया जा रहा है। जी हाँ यह सच है। दुनिया की अत्याधुनिक मेट्रो में काम करने वाले 80त्न कर्मचारियों का औसत वेतन 8 हज़ार से 20 हज़ार के बीच है। सारी भर्ती पैसे लेकर की जाती हैं और अस्थायी होती हैं, वाह क्या गवर्नेन्स मॉडल है। बेचारे कर्मचारी म...
राजपूतों की राजनीति और गैंगस्टर आनंदपाल सिहं एनकाउंटर

राजपूतों की राजनीति और गैंगस्टर आनंदपाल सिहं एनकाउंटर

राज्य
रामस्वरूप रावतसरे नंदपाल एनकाउंटर मामले की सीबीआई जांच की मांग को राजस्थान सरकार ने मान लिया है। राजपूत संगठनों के दबाव के बाद आखिरकार राजस्थान सरकार झुक गई और उसने सीबीआई जांच की सिफारिश करने का फैसला लिया है। 24 जून 17 की रात को चूरू जिले के मालासर में पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रु्रप के द्वारा आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद से ही लगातार सीबीआई जांच की मांग की जा रही थी। 12 जुलाई को आनंदपाल के गांव सांवराद में आयोजित शोक सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों लोगों की भीड़ जुटी। गांव में पुलिस और लोगों के बीच झड़प हुई और हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कुछ आम लोगों को भी चोटें आई। इस हिंसा के दौरान एक शख्स की जान भी चली गई। हालांकि अब ये सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि राजस्थान सरकार ने इतने दिनों बाद सीबीआई जांच की मांग मान ली। राजपूत संगठनों के आगे झुकने की सबसे ब...
हिन्दुत्व के एजेंडे पर  योगी सरकार

हिन्दुत्व के एजेंडे पर योगी सरकार

राज्य
अमित त्यागी किसानों की कर्जमाफ़ी के एक बड़े जटिल और भारी भरकम वादे को आखिरकार उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने खुद के वित्तीय संसाधनों से पूरा कर ही लिया। सरकार ने बेहतर राजकोषीय प्रबंधन दिखाते हुये किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया और सरकारी फिजूल खर्ची पर रोक लगाकर लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। सरकार के बेहतर प्रबंधन को इस आंकड़े से समझा जा सकता है। पिछले वर्ष जो राजकोषीय घाटा 3.22 प्रतिशत था उसे इस वर्ष घटा कर 2.97 प्रतिशत तक लाया जा चुका है। अब अगर सरकार, सरकारी नीतियों की लीकेज रोकने में कामयाब हो गयी तो उसे इस बजट के बेहतर परिणाम प्राप्त होने तय हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने बजट में योगी के वस्त्रों की तरह भगवे का पूरा ध्यान रखा है। किसानो और धार्मिक जरूरतों को पूरा करता पहला बजट उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाला बजट है। किन्तु इस बजट के पहले एक घटना ने पूरे बजट का रुझान औ...
अपराध समाजवादी सरकार का सज़ा पाते शिक्षामित्र

अपराध समाजवादी सरकार का सज़ा पाते शिक्षामित्र

राज्य
अमित त्यागी शिक्षामित्र प्रकरण किसी चयनित सरकार के द्वारा वोट बैंक के लिये नागरिकों से खिलवाड़ का निकृष्टम उद्वारण है। बेचारे शिक्षामित्र अच्छा खासा काम कर रहे थे। उन्हे कोई ज़्यादा अपेक्षा भी नहीं थी। जितना वेतन था उसके अनुसार जीवन की जरूरतों कों उन्होने ढाल लिया था। पर अचानक भूचाल आ गया। उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार कों याद आया कि चुनाव के समय पीठासीन अधिकारी आदि अन्य चुनावी कार्यवाहियाँ तो शिक्षक करते हैं। अगर शिक्षामित्रों कों शिक्षक के रूप में समायोजित कर देंगे तो आगामी सभी चुनाव में यह लोग हमारे लिए काम करेंगे। बस इसी गंदी और घिनौनी सोच ने शिक्षा मित्रों की भावनाओं से खिलवाड़ कर दिया। समाजवादी सरकार ने एक गलत नीयत के साथ नियमों की अनदेखी करके शिक्षामित्रों कों समायोजित कर दिया। अब शिक्षामित्रों का वेतन बढ़ गया। उनकी नयी जरूरतें नए वेतन के अनुसार ढल गईं। उन्होने ऋण लेकर वाहन ...
आइए गुरुपूर्णिमा के पर्व पर संकल्प लें लोकतंत्र की दुष्प्रवृत्तियों के प्रतिकार का और सनातन एवं मौलिक राष्ट्र की स्थापना के लिए कटिबद्ध होते हैं

आइए गुरुपूर्णिमा के पर्व पर संकल्प लें लोकतंत्र की दुष्प्रवृत्तियों के प्रतिकार का और सनातन एवं मौलिक राष्ट्र की स्थापना के लिए कटिबद्ध होते हैं

BREAKING NEWS, Uncategorized
श्री अनुज अग्रवाल, महासचिव, मौलिक भारत भारत का हजारों वर्षों का गौरवशाली इतिहास प्राप्त है ।हिन्दू राज्यव्यवस्थाओं का आदर्श इतिहास होते हुए भी स्वतंत्रता के पश्चात तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं ने ब्रिटिश राज्यव्यवस्था पर आधारित लोकतंत्र व्यवस्था स्वीकारी । परिणामस्वरूप गत 70 वर्षों में भारत की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है । भ्रष्टाचार, अनाचार, बढते अपराध, अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण, अधिकार-आरक्षण ही सर्व ओर दिखाई दे रहा है । प्राचीन हिन्दू राज्यव्यवस्था में 'पहले शिक्षा तत्पश्चात गुरुदक्षिणाÓ ऐसी प्रथा थी; परंतु पाश्चात्त्य पद्धति के अनुसार आज के लोकतंत्र में पहले 'डोनेशनÓ तत्पश्ïचात 'एडमिशनÓ और उसके पश्चात 'एज्युकेशनÓ यह पद्धति प्रारंभ की । परिणामस्वरूप देश का मार्गक्रमण अधोगति की ओर शीघ्र गति से हो रहा है । यह स्थिति परिवर्तित करने के लिए हमें लोकतंत्र की दुष्प्रवृत्तियों का निर्मूलन करने...