नाम आदर्श, काम पतित
डॉ. वेदप्रताप वैदिक मुंबई की आदर्श हाउसिंग सोसायटी के घोटाले में चार मुख्य मंत्रियों, कुछ मंत्रियों, कुछ नौकरशाह और कुछ सेनापतियों के नाम उछले, यही बताता है कि इस सोसायटी का नाम जितना खरा है, काम इसका उतना ही खोटा है। नाम आदर्श, काम पतित ! कोलाबा में बने इस 31 मंजिले भवन के फ्लैट करगिल युद्ध के शहीदों को मिलने थे लेकिन उन्हें हड़प लिया नेताओं ने, नौकरशाहों ने, सैन्य अफसरों ने। यह पता नहीं चला कि करगिल के शहीदों की कितनी विधवाओं को ये फ्लैट दिए गए। यह भी पता नहीं कि शहीद होनेवाले जवान और कनिष्ठ अफसरों के परिजनों के पास इन फ्लैटों को खरीदने के लिए पैसे भी थे या नहीं ? 75-75 लाख रु. वे कहां से लाते ? दूसरे शब्दों में इस सरकारी जमीन का दुरुपयोग करने का षड़यंत्र पहले से ही बना हो सकता है। करगिल युद्ध के नाम पर कुछ भी किया जा सकता है। इसीलिए 31 मंजिल ऊंचा भवन बनाने की बाकायदा इजाजत भी ले ली गई। स...








