समस्त जल प्रबंधन प्रणालियों की जांच का वक्त
हमने कभी सिंचाई के नाम पर नदियों को बांधा और कभी बाढ मुक्ति़-बिजली उत्पादन के नाम पर। नदी के नफ़ा-नुकसान की समीक्षा किए बगैर यह क्रम आज भी जारी है। एक चित्र में नदियों को जहां चाहे तोड़ने-मोड़ने-जोड़ने की तैयारी है, तो दूसरे में भारत की हर प्रमुख नदी के बीच जलपरिवहन और नदी किनारे पर राजमार्ग के सपने को आकार देने की पुरजोर कोशिश आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। नोएडा से गाजीपुर तक गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना को आगे बढ़ाने की मायावती सरकार की पैरोकारी को याद कीजिए। श्री नितिन गडकरी द्वारा परिवहन मंत्री बनते ही गंगा जलमार्ग के नाम पर इलाहाबाद से हल्दिया के बीच हर सौ किलोमीटर पर एक बैराज बनाने की घोषणा को याद कीजिए। श्री गडकरी ने अब ब्रह्मपुत्र किनारे भी राजमार्ग की परियोजना को आगे बढ़ा दिया है। तीसरे चित्र में साबरमती रिवर फ्रंट डेवलॅपमेंट माॅडल से निकला जिन्न, राजधानियों में मौजूद नदी भूमि को अपने को व्य...








