Shadow

Author: dindiaadmin

समस्त जल प्रबंधन प्रणालियों की जांच का वक्त

समस्त जल प्रबंधन प्रणालियों की जांच का वक्त

TOP STORIES
हमने कभी सिंचाई के नाम पर नदियों को बांधा और कभी बाढ मुक्ति़-बिजली उत्पादन के नाम पर। नदी के नफ़ा-नुकसान की समीक्षा किए बगैर यह क्रम आज भी जारी है। एक चित्र में नदियों को जहां चाहे तोड़ने-मोड़ने-जोड़ने की तैयारी है, तो दूसरे में भारत की हर प्रमुख नदी के बीच जलपरिवहन और नदी किनारे पर राजमार्ग के सपने को आकार देने की पुरजोर कोशिश आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। नोएडा से गाजीपुर तक गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना को आगे बढ़ाने की मायावती सरकार की पैरोकारी को याद कीजिए। श्री नितिन गडकरी द्वारा परिवहन मंत्री बनते ही गंगा जलमार्ग के नाम पर इलाहाबाद से हल्दिया के बीच हर सौ किलोमीटर पर एक बैराज बनाने की घोषणा को याद कीजिए। श्री गडकरी ने अब ब्रह्मपुत्र किनारे भी राजमार्ग की परियोजना को आगे बढ़ा दिया है। तीसरे चित्र में साबरमती रिवर फ्रंट डेवलॅपमेंट माॅडल से निकला जिन्न, राजधानियों में मौजूद नदी भूमि को अपने को व्य...
बिहार की बदहाली पर क्यों बात नहीं करते लालू

बिहार की बदहाली पर क्यों बात नहीं करते लालू

Today News, TOP STORIES
आर.के. सिन्हा बुनियादी सवालों से भटका कर जुमलेबाजी करने में लालू यादव वास्तव में बेजोड़ हैं। उसकी एक ताजा बानगी बिहार के राजगीर में हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल(राजद) में आयोजित सम्मेलन में देखने को मिली। वहां पर राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने यह बेहद गैर-राजनितिक और बेतुकी मांग कर दी कि देश के चारों पीठ में शंकराचार्य की नियुक्ति में भी आरक्षण लागू किया जाये। लालू यही ड्रामा बिहार में करते रहे हैं। उन्होंने बिहार में बेरोजगारी दूर करने, निवेश आकर्षित करने, शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था, इंफ्रास्ट्कचर वगैरह को दुरुस्त करने जैसे मुद्धों को कभी भी गंभीरता से लिया ही नहीं। वे तो मात्र वोट बैंक की राजनीति करना जानते हैंI उनसे सवाल पूछा जाना चाहिए कि शंकराचार्य की नियुक्ति में आरक्षण करने से बिहार के सारे दुख दूर हो जाएंगे या उनके दुःख दूर हो जायेंगें? वे चाहते क्या हैं? पिछले बिहार विधानसभा ...
राष्ट्रीय सुरक्षा की अवहेलना क्यों ?

राष्ट्रीय सुरक्षा की अवहेलना क्यों ?

TOP STORIES
देश के सीमावर्ती क्षेत्रों व सैन्य ठिकानों की उच्चस्तरीय सुरक्षा की अवहेलना क्यों हो रही है , जबकि शत्रु बार बार हमको घायल कर रहा है ? पिछले सितंबर माह में सर्जिकल स्ट्राइक से आहत होने के उपरांत भी पाकिस्तानियों ने सीमाओं पर अनगिनत बार युद्ध-विराम उल्लंघन किया परंतु हम अपने धैर्य और संयम के गुणगान करने में ही वीरता का परिचय कराते है । सेनाओं को शस्त्र उठाने के प्रति नकारात्मक भाव रखने वाले हमारे राजनैतिक नेतृत्व को सेनाओं पर तो भरोसा है , परंतु वे अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के अभाव में कठोर निर्णय लेने से बचते आ रहें है । अगर केवल पिछले 10 वर्षो के ही आंकड़े देखे जाये तो पाक सेनाओं व आतंकवादियों द्वारा हज़ारों घटनायें संघर्ष विराम उल्लघंन, घुसपैठ तथा हमारे सुरक्षा बलों व सीमावर्ती नागरिको पर घात लगाकर हमले करते रहने धारावाहिक समाचार आते रहें है । इतने पर भी हम शांतिदूत बने रहकर अडिग रहें तो आक्र...
उ0प्र0 पुलिस की कायापलट

उ0प्र0 पुलिस की कायापलट

EXCLUSIVE NEWS
यूं तो बम्बईया फिल्मों में पुलिस को हमेशा से ‘लेट-लतीफ’ और ‘ढीला-ढाला’ ही दिखाया जाता है। आमतौर पर पुलिस की छवि होती भी ऐसी है कि वो घटनास्थल पर फुर्ती से नहींे पहुंचती और बाद में लकीर पीटती रहती है। तब तक अपराधी नौ-दो-ग्यारह हो जाते हैं। पुलिस के मामले में उ0प्र0 पुलिस पर ढीलेपन के अलावा जातिवादी होने का भी आरोप लगता रहा है। कभी अल्पसंख्यक आरोप लगाते हंै कि ‘यूपी पुलिस’ साम्प्रदायिक है, कभी बहनजी के राज में आरोप लगता है कि यूपी पुलिस दलित उत्पीड़न के नाम पर अन्य जातियों को परेशान करती है। तो सपा के शासन में आरोप लगता है कि थाने से पुलिस अधीक्षक तक सब जगह यादव भर दिये जाते हैं। यूपी पुलिस का जो भी इतिहास रहा हो, अब उ0प्र0 की पुलिस अपनी छवि बदलने को बैचेन है। इसमें सबसे बड़ा परिवर्तन ‘यूपी 100’ योजना शुरू होने से आया है। इस योजना के तहत आज उ0प्र0 के किसी भी कोने से, कोई भी नागरिक, किसी भी...
नये मोड़ पर व्यापम ?

नये मोड़ पर व्यापम ?

घोटाला
जावेद अनीस व्यापम घोटाले ने एकबार फिर नया मोड़ लेता जा रहा है, मई का महीना मुख्यमंत्री शिवराज के लिए राहत भरी खबर लाया है, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह व्यापम घोटाले में शिवराज सिंह चौहान के सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगते आ रहे हैं. लेकिन इस मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करके कहा है कि कि सबूत के तौर पर जिस सीडी और पेन ड्राइव को पेश किया गया था वे फर्जी पाए गये हैं. सीबीआई का कहना है कि इसमें याचिकाकर्ताओं द्वारा छेड़छाड़ की गयी है जिसके बाद भाजपा इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को क्लीन चिट दिए जाने के तौर पर पेश कर रही है. सीबीआई के हलफनामे के बाद सूबे में सियासत गर्माई हुई है, एक तरफ भाजपा कांग्रेस महासचिव दग्विजिय सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि क्लीन चिट देने का काम अदालत का है सीबीआई का नहीं. जानकार बता...

Dialogue India “Design • Innovate • Transform” Conference with IIT Delhi

addtop, BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS
Design has become an important catalyst for innovation, economic competitiveness and better living, in a world where ideas matter more than ever. Leaders in the public and private sectors are recognizing that design is more than aesthetics. Good design is good strategy. Companies, communities and economies are using design thinking to raise productivity, unlock new opportunities for growth, and improve the quality of everyday life. The Design and Innovation Conference, Themed “Design • Innovate • Transform”. Design, business and public sector leaders will convene to share their experiences and insights on how design is a key driver of innovation, and how it has a transformative impact on individuals and corporations, creating game-changing possibilities for a better world. The Confer...
प्रतियोगी पुस्तकें

प्रतियोगी पुस्तकें

साहित्य संवाद
झारखंड लोक सेवा द्वारा आयोजित प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षाओं के लिए उपयोगी हर राज्य द्वारा संचालित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं तैयारी करने वाली पुस्तक सबसे महत्वपूर्ण होती है। वंदना शेजवलकर द्वारा रचित झारखंड एक परिचय नामक पुस्तक ऐसी ही एक पुस्तक है जिसमें राज्य प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुसार तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक में राज्य की कला संस्कृति और राजनीतिक विविधता को बहुत ही बखूबी प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक राज्य की सूचनाओं को आज के अनुसार अद्यतन रखा है। इस पुस्तक में तथ्यों का रणनीतिक रूप से योजना बनाकर ही प्रस्तुतिकरण किया गया है। चूंकि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए योजना बनाकर अध्ययन करना ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पहली शर्त होती है। अत: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखना बहुत ही अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। तमाम तरह की कसौटियों पर यह पुस्तक एकदम खरा उतरती है। राज्य से...
अरविन्द केजरीवाल का राजनैतिक भविष्य

अरविन्द केजरीवाल का राजनैतिक भविष्य

TOP STORIES
चार ही वर्ष बीते हैं जिसके पूर्व भारत की जनता अरविंद केजरीवाल को योग्य प्रधानमंत्री के रुप में देखने लगी थी। अन्ना हजारे सहित अनेक लोगों ने उन पर विश्वास किया। अन्ना जी को धोखा देने के बाद भी दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को ऐतिहासिक समर्थन दिया। एक डेढ वर्ष बीतते बीतते ऐसा लगने लगा कि अरविंद केजरीवाल का भविष्य पागल खाने की तरफ बढ रहा है और अब एक डेढ वर्ष और बीता है तो पागल खाने की जगह जेलखाने की चर्चाएॅ शुरु हो गई हैं। मैंने राजनीति में दो प्रकार के लोगों को देखा हैं-1-वे जो गलत काम भी ऐसे कानून सक्वमत तरीके से करते है कि वे हर प्रकार के आरोपों से मुक्त रहते हैं। 2- वे जो सही काम गैर कानूनी तरीके से करते हैं। ऐसे लोगों को समाज में सक्वमान मिलता है भले ही वह काम गैर कानूनी ही ञ्चयों न हो। केजरीवाल ने एक तीसरी लाइन पकडी जिसमें उन्होनें गलत कार्य गैर कानूनी तरीके से ...
एमसीडी चुनाव और अरविन्द केजरीवाल की साख

एमसीडी चुनाव और अरविन्द केजरीवाल की साख

राज्य
एमसीडी चुनावों में भी अंतत: भगवा ही लहराया। कॉंग्रेस ने दिल्ली में वापसी की है और आम आदमी पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है। भारतीय जनता पार्टी की जीत से कहीं अधिक यह वैकल्पिक राजनीति लाने वाली आम आदमी पार्टी की हार है। ये चुनाव नरेंद्र मोदी और अरविन्द केजरीवाल की साख का सवाल थे और नई दिल्ली के विधान सभा चुनावों के बाद भाजपा के लिए एक इम्तहान के रूप में थे। इन चुनावों से ठीक पहले राजौरी गार्डन विधानसभा चुनावों में हालांकि इन परिणामों की झलक मिल चुकी थी,मगर फिर भी आम आदमी पार्टी को निगम में भाजपा के नकारेपन पर पूरा भरोसा था, उसे पूरा यकीन था कि एमसीडी में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण भाजपा को वोट नहीं मिलेंगे और उसके लिए मैदान साफ है। मगर आज के ये परिणाम कहीं न कहीं उस अवधारणा को भी तोड़ते हैं। यह सच है कि यदि काम के आधार पर वोट मिलते तो भाजपा आज हार रही होती क्योंकि भाजपा ने विगत दस वर्षों में...
सेवा के नाम पर चंदा,  धर्मान्तरण धंधा

सेवा के नाम पर चंदा, धर्मान्तरण धंधा

EXCLUSIVE NEWS
द्वारा आशीष कुमार 'अंशुÓ भारत में सबसे बड़ी विदेश से चंदा देने वाली संस्था कम्पेशन इंटरनेशनल ने दस महीने की उठा पटक के बाद तय कर लिया है कि वे भारत में अपना बोरिया बिस्तर समेट लेगी। संस्था पर अपने पैसों का इस्तेमाल भारत में धर्मान्तरण पर करने की बात साबित हुई है। साथ ही संस्था ने भारतीय एफसीआरए (फॉरन कन्ट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट) कानून को धत्ता बताकर अपनी मर्जी से कई जगह पैसों का दुरुपयोग किया है। जो भारतीय अधिकारियों की जांच में पकड़ा गया। ऐसा सिर्फ कम्पेशन इंटरनेशनल के साथ नहीं हुआ है। विदेशी दान लेने और खर्च करने में संस्थाओं द्वारा ईमानदारी बरती जा रही है या नहीं, इस विषय को लेकर जब से गृह मंत्रालय सतर्क हुआ है, उसके बाद से भारत में विदेश से पैसा देने वाली संस्थाओं और भारत में दान लेने वाली गैर सरकारी संस्थाओं के लिए मुश्किल की घड़ी शुरू हो गई है। क्रिश्चियन संस्थाओं द्वारा भार...