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Author: dindiaadmin

जीवन की आपाधापी में क्या जी रहे हैं हम?

जीवन की आपाधापी में क्या जी रहे हैं हम?

TOP STORIES, जीवन शैली / फिल्में / टीवी
जब हम अपने जीवन की शुरुआत करते हैं तो हमारा मन सब कुछ पाने को लालायित रहता है। हमें पैसे के साथ-साथ नाम कमाने की भी चाह होती है। ये चाहत काफी हद तक सही भी है। पर, इसके चक्कर में परिवार और अपनी खुशियों को अहमियत न देना गलत है। अपनी जिम्मेदारियों और अपनी खुशियों के साथ समझौता किसी भी हाल में सही नहीं हो सकता। जीवन में आपका पैसा और नाम कमाना या कामयाब इंसान बनना जितना जरुरी है उतना ही जरुरी छोटी- छोटी खुशियों को महसूस करना भी है। अगर आप इन पलों को भूलकर बस आगे बढ़ने में लगे हैं तो आपको एक दिन इस बात का दुःख जरूर होगा की मैंने क्या कुछ खोया थोड़ा-सा पाने के चक्कर में? हम सब के हित में यही है कि हम चैन से रहें और दूसरों को भी चैन से रहने दे। जीवन की आपाधापी में हम ये जान लें कि हमारा कोई भी पल आखिरी हो सकता है इसलिए हर पल को बिना किसी अहंकार के सच्चे मन से सर्वे भवन्तु सुखिन: के भाव से जिए...
पनिवेशवाद, साम्राज्यवाद एवं पूंजीवाद के बाद अब राष्ट्रीयता पर आधारित हो अर्थव्यवस्था

पनिवेशवाद, साम्राज्यवाद एवं पूंजीवाद के बाद अब राष्ट्रीयता पर आधारित हो अर्थव्यवस्था

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक
अमेरिकी महाद्वीप की खोज के साथ ही उपनिवेशवाद का प्रारम्भ हुआ और यह 20वीं शताब्दी के लगभग आधे भाग तक निर्बाध रूप से चलता रहा। उपनिवेशवाद की पहली खेप 16वीं शताब्दी में प्रारम्भ हुई जब फ्रान्स, स्पेन एवं इंग्लैंड ने पृथ्वी के दक्षिणी भाग में स्थिति छोटे छोटे देशों को अपना उपनिवेश बना लिया। पश्चिमी देशों ने उपनिवेश देशों के मूल निवासियों को दूर दराज इलाकों में भेजते हुए यूरोपीयन देशों के निवासियों के लिए इन उपनिवेश देशों के व्यापार एवं प्रशासन पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया। इन देशों के मूल निवासियों को न केवल उपनिवेश देशों में श्रमिकों के तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा बल्कि अन्य उपनिवेश देशों एवं पश्चिमी देशों में भी इन मूल निवासियों को ले जाकर श्रमिकों के तौर पर बसाया गया। उपनिवेश देशों से बहुत सस्ती दरों पर कच्चा माल अपने देशों में ले जाकर, इस कच्चे माल से उत्पाद निर्मित कर इन ...
भक्तिधारा के महान कवि – गोस्वामी तुलसीदास

भक्तिधारा के महान कवि – गोस्वामी तुलसीदास

TOP STORIES, साहित्य संवाद
23 अगस्त पर विशेष :-मृत्युंजय दीक्षितहिंदी साहित्य के महान कवि संत तुलसीदास का जन्म संवत् 1956 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन अभुक्तमूल नक्षत्र में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्मा रामदुबे व माता का नाम हुलसी था। जन्म के समय तुलसीदास रोए नहीं थे अपितु उनके मुंह से राम शब्द निकला था, जन्म के समय ही उनके मुख में 32 दांत थे। ऐसे अदभुत बालक को देखकर माता- पिता बहुत चिंतित हो गये । माता अपने बालक को अनिष्ट की आशंका से दासी के साथ ससुराल भेज आयीं और स्वयं चल बसीं। फिर पांच वर्ष की अवस्था तक दासी ने ही उनका पालन पोषण किया तथा उसी पांचवें वर्ष वह भी चल बसीं। अब यह बालक पूरी तरह से अनाथ हो गया। इस अनाथ बालक पर संतश्री नरहरिनन्द जी की दृष्टिपड़ी उन्होने बालक का नाम रामबोला रखा और अयोध्या आकर उसकी शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था की। बालक बचपन से ही प्रखर बुद्धि का था। गुरुकुल में उसको हर पाठ बड़ी शीघ्रता से या...
कांग्रेस का सौफ्ट हिंदुत्व

कांग्रेस का सौफ्ट हिंदुत्व

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
अवधेश कुमारमध्यप्रदेश कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के हिंदुत्व से संबंधित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हैं। दोनों प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मध्य प्रदेश चुनाव की कमान मुख्यतः इन्हीं दोनों के हाथों है। इसलिए उनके बयानों और गतिविधियों को कांग्रेस की चुनावी रणनीति का अंग स्वाभाविक ही माना जाएगा। कमलनाथ से एक पत्रकार हिंदू राष्ट्र के बारे में प्रश्न पूछता है। कमलनाथ कह रहे हैं कि है तो उसे कहने की क्या जरूरत है। इसका समान्य अर्थ यही लगाया गया है कि वे मान रहे हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र है लेकिन उसे बोलने की आवश्यकता नहीं है। इसी तरह दिग्विजय सिंह हिंदुत्व से संबंधित बयान में संघ और भाजपा का विरोध कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह बजरंग दल पर बैन लगाएंगे? वह कह रहे हैं कि नहीं बैन नहीं लगाएंगे, बजरंग दल में भी अच्छे लोग होंगे। एक तरफ देश में आक्रामक या उग्र हि...
<strong>राजस्थान में जिताऊ प्रत्याशियों पर दांव लगायेगी कांग्रेस</strong>

राजस्थान में जिताऊ प्रत्याशियों पर दांव लगायेगी कांग्रेस

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य
रमेश सर्राफ धमोरा राजस्थान में कांग्रेस पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में जिताऊ प्रत्याशियों पर ही दांव लगाएगी। पार्टी को जो प्रत्याशी जीतने वाला लगेगा चाहे वह कितनी भी अधिक उम्र का क्यों ना हो उसे मैदान में उतारा जाएगा। कांग्रेस का प्रयास है कि राजस्थान में लगातार दूसरी बार सरकार बना कर हर बार सरकार बदलने के मिथक को तोड़ा जाए। इसीलिए पार्टी के बड़े नेता अलग-अलग एंगल से सभी 200 विधानसभा क्षेत्र में जीतने वाले प्रत्याशियों के लिए सर्वे करवा रहे हैं। जिस व्यक्ति का नाम भी सर्वे में उभर कर आएगा उसको ही इस बार कांग्रेस पार्टी टिकट देकर चुनावी मैदान में उतरेगी। कांग्रेस के बड़े नेताओं का मानना है कि आम कार्यकर्ता से लेकर निर्वाचित जनप्रतिनिधि तक कोई भी टिकट के लिए आवेदन कर सकता है। वरिष्ठ नेता पूरी तरह से छानबीन कर अंतिम सूची में जीतने वाले नाम पर ही मोहर लगाएंगे। जयपुर में संपन्न हुई न...
तीर्थों की भीड़ संभालें !

तीर्थों की भीड़ संभालें !

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, समाचार
-विनीत नारायणप्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री योगी जी ने हिन्दू तीर्थों के विकास की तरफजितना ध्यान पिछले सालों में दिया है उतना पिछली दो सदी में किसी ने नही दिया था। ये बात दूसरी हैकि उनकी कार्यशैली को लेकर संतों के बीच कुछ मतभेद है। पर आज जिस विषय पर मैं अपनी बात रखनाचाहता हूँ उससे हर उस हिन्दू का सरोकार है जो तीर्थाटन में रुचि रखता है। जब से काशी, अयोध्या,उज्जैन व केदारनाथ जैसे तीर्थ स्थलों पर मोदी जी ने विशाल मंदिरों का निर्माण करवाया है, तब से इनसभी तीर्थों पर तीर्थयात्रियों का सागर उमड़ पड़ा है। इतनी भीड़ आ रही है कि कहीं भी तिल रखने कोजगह नही मिल रही।इस परिवर्तन का एक सकारात्मक पहलू ये है कि इससे स्थानीय नागरिकों की आय तेज़ी से बढ़ी है औरबड़े स्तर पर रोजगार का सृजन भी हुआ है। स्थानीय नागरिक ही नहीं बाहर से आकार भी लोगों ने इनतीर्थ नगरियों में भारी...
मोदी-विरोध के नाम पर देश-विरोध क्यों?

मोदी-विरोध के नाम पर देश-विरोध क्यों?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य, राष्ट्रीय
-ललित गर्ग-एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को नीचा दिखाने के इरादे से लद्दाख में चारागाह भूमि पर चीनी सेना का कब्जा होने का दावा किया है, निश्चित इस तरह के बयान न केवल सेना के मनोबल को कमजोर करते हैं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता एवं अखण्डता को ध्वस्त करते हैं। राहुल गांधी मोदी-विरोध में कुछ भी बोले, यह राजनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन वे मोदी विरोध के चलते जिस तरह के अनाप-शनाप दावे करते हुए गलत बयान देते हैं, वह उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता को ही दर्शाता है। आखिर कब राहुल एक जिम्मेदार एवं विवेकवान सशक्त नेता बनेंगे?राहुल गांधी ने कथित तौर पर लद्दाख की जमीन पर चीन का कब्जा होने का जो दावा किया गया है, वह जल्दीबाजी में बिना सोच के दिया गया गुमराह करने वाला बयान है, उससे यही पता चलता है कि उन्हें न तो प्रधानमंत्री की बातों पर यकीन है, न रक्षा मंत्री की और न ही विदेश मंत्...
I.N.D.I.A. बनाम एनडीए

I.N.D.I.A. बनाम एनडीए

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
वर्ष 2024 में प्रस्तावित आगामी लोकसभा चुनावों के सन्दर्भ में अत्यधिक जोर शोर से राजनीतिक हलचल होनी प्रारम्भ हो गयी है। भारत के अधिकांश राजनीतिक दल दो खेमों में विभाजित हो गए हैं। पहला खेमा भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए है जिसमें 38 पार्टियों का समावेश किया जा रहा है। सम्भावना यह है कि शीघ्र ही यह संख्या बढ़कर 40 तक हो सकती है। दूसरा खेमा कांग्रेस नेतृत्व वाला I.N.D.I.A. है, जिसके अन्तर्गत 26 पार्टियों का समावेश है। ऐसी सम्भावना है कि ज्यों-ज्यों चुनाव का समय पास आता जायेगा, त्यों-त्यों 26 में से 1-2 पार्टियाँ मोदी जी से प्रभावित होकर दूसरे खेमें में पहुँच जाएं। परन्तु इतना निश्चित है कि चुनाव से पूर्व जनता के समक्ष दो लुभावने विकल्प अवश्य प्रस्तुत होंगे। अब ये जनता पर निर्भर करेगा कि वर्ष 2024 के आगामी लोकसभा चुनाव में कौनसे विकल्प को प्राथमिकता देगी। परन्तु इतना अवश्य है कि आगामी लोकसभा च...
कब तक ‘रैगिंग की आंधी’ में बुझेंगे सपनों के दीप?

कब तक ‘रैगिंग की आंधी’ में बुझेंगे सपनों के दीप?

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कब तक 'रैगिंग की आंधी' में बुझेंगे सपनों के दीप? रैगिंग के नाम पर मैत्रीपूर्ण परिचय से जो शुरू होता है उसे घृणित और विकृत रूप धारण करने में देर नहीं लगती।  रैगिंग की एक अप्रिय घटना पीड़ित के मन में एक स्थायी निशान छोड़ सकती है जो आने वाले वर्षों तक उसे परेशान कर सकती है। पीड़ित खुद को शेष दुनिया से बदनामी और अलगाव के लिए मजबूर करते हुए एक खोल में सिमट जाता है। यह उस पीड़ित को हतोत्साहित करता है जो कई आशाओं और अपेक्षाओं के साथ कॉलेज जीवन में शामिल होता है। हालाँकि शारीरिक हमले और गंभीर चोटों की घटनाएँ नई नहीं हैं, लेकिन रैगिंग इसके साथ-साथ पीड़ित को गंभीर मनोवैज्ञानिक तनाव और आघात का कारण भी बनती है। जो छात्र रैगिंग का विरोध करना चुनते हैं, उन्हें भविष्य में अपने वरिष्ठों से बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है। जो लोग रैगिंग के शिकार होते हैं वे पढ़ाई छोड़ सकते ह...
कांग्रेस के नए अध्यक्ष खड़गे की मोदीजी ने संसद में खोल दी पोल?

कांग्रेस के नए अध्यक्ष खड़गे की मोदीजी ने संसद में खोल दी पोल?

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आम तौर पर पीएम मोदी जी को एक मृदुभाषी सज्जन के रूप में कम आंकते रहे हैं, लेकिन हम में से बहुत से लोग यह नहीं जानते, कि जब वह अपने विरोधियों पर टूट पड़ते हैं तो उनकी नाक से खून बहा देते हैं! यहां एक उदाहरण है, जिसे हमारे भ्रष्ट मीडिया द्वारा स्पष्ट कारणों से छुपाया गया... संसद में कांग्रेस के नेता, मल्लिकार्जुन खड़गे एक दलित हैं, जैसा कि सभी जानते हैं, उन्होंने संसद में एक लड़ाकू की हरकतों और "बॉडी लैंग्वेज" के साथ एक सवाल उठाया, वस्तुतः भारी आवाज के साथ चिल्लाकर, अपने अंगों को जोर से हिलाकर और मोदीजी से एक प्रश्न पूछा!? हम दलितों के लिए आपको प्रति परिवार कम से कम एक प्रतिशत भूमि आवंटित करनी चाहिए! लोकसभा में पिन ड्रॉप साइलेंस रहा। सब कुर्सी के किनारे आ गए, कुछ समय के लिए रोका गया मानो वह इसे "नाटकीय" बनाने की प्रतीक्षा कर रहे हों! मोदीजी ने कुछ समय लिया और अपनी सीट स...