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बाज़ारवाद के इस दौर में क्या ग्राहक वाकई राजा है?

बाज़ारवाद के इस दौर में क्या ग्राहक वाकई राजा है?

आर्थिक, जीवन शैली / फिल्में / टीवी
बाज़ारवाद के इस दौर में क्या ग्राहक वाकई राजा है?आज हम जिस दौर में जी रहे हैं वो है बाज़ारवाद और उपभोक्तावाद का दौर। अब पहला प्रश्न यह कि इसका क्या मतलब हुआ? परिभाषा के हिसाब से यदि इसका अर्थ किया जाए तो वो ये होगा कि आज उपभोक्ता (यानी किसी भी वस्तु का उपयोग करने वाला) ही राजा है। खास बात यह है कि बाज़ारवाद के इस दौर में उपभोगता की जरूरत से आगे बढ़कर उसके आराम को केंद्र में रखकर ही वस्तुओं का निर्माण किया जा रहा है।मोबाइल है तो यूजर फ्रेंडली। कोई ऐप है तो उसका इस्तेमाल करने वाले की उम्र यानी बच्चे, युवा, अथवा वयस्क के मानसिक विकास,उसकी जरूरतों और क्षमताओं को ध्यान में रखकर उसे कस्टमर फ्रेंड्ली बनाया जा रहा है। अगर रोबोट है तो ह्यूमन फ्रेंड्ली। और पूंजीवाद के इस युग में तो मनुष्य के उपभोग के लिए समान बनाने वाली विभिन्न कंपनियां उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा कर र...
वैश्विक स्तर पर भुगतान के माध्यम के रूप में स्थापित हो रहा है भारतीय रुपया

वैश्विक स्तर पर भुगतान के माध्यम के रूप में स्थापित हो रहा है भारतीय रुपया

आर्थिक, राष्ट्रीय
भारत में कच्चा तेल, स्वर्ण एवं रक्षा उपकरण जैसे उत्पादों का आयात सबसे अधिक होता है। आज भारत द्वारा सबसे अधिक तेल का आयात रूस से किया जा रहा है जिसका भुगतान रुपए अथवा रूबल में हो रहा है। “आत्मनिर्भर भारत” की घोषणा के बाद से रक्षा उपकरणों को भारत में ही निर्मित किए जाने के प्रयास तेजी से चल रहे हैं जिसके चलते रक्षा उपकरणों का आयात बहुत कम हो जाने की सम्भावना है। इसी प्रकार भारत यूनाइटेड अरब अमीरात से 200 टन सोने का आयात कर रहा है जिसका भुगतान भी भारतीय रुपए में किया जा रहा है। कुल मिलाकर अब भारत को आगे आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता कम होने लगेगी। साथ ही, वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई देशों के बीच रुपए की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ती जा रही है। अब प्रबल सम्भावना बनती जा रही है कि भारतीय रुपया शीघ्र ही वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में स्वीकार किया जाने लगे...
अमेरिकन बैंक का डूबना..!

अमेरिकन बैंक का डूबना..!

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अमेरिकन बैंक का डूबना - प्रशांत पोळ शुक्रवार १० मार्च को अमेरिका की सोलहवी सबसे बडी बैंक, 'सिलिकॉन व्हॅली बैंक' (SVB) डूब गई. डीफंक्ट हो गई. एक ही दिन मे, बैंक पर रन आकर, इतनी बडी बैंक डूबने का शायद यह अनूठा उदाहरण हैं. अमेरिकन अर्थव्यवस्था (financial system इस संदर्भ मे) कितनी खोखली हैं, इसका यह उदाहरण हैं. *इसका परिणाम कल से, अर्थात सोमवार से, दिखना शुरु होगा.* इस बैंक के ग्राहक मुख्यतः स्टार्ट - अप कंपनीज और टेक कंपनीज थे. अमेरिका मे आई टी और टेक कंपनीज मे महिने मे दो बार वेतन बटता हैं. दिनांक १ को और दिनांक १५ को. जब १५ मार्च को वेतन बांटने का समय आएगा तो अनेक कंपनियों को समस्या होगी. उनकी बैंक ही डूब गई हैं, जिसमे उनका पैसा था. अब वेतन कहां से करेंगे? चालीस वर्ष पुरानी यह बैंक अचानक नही डूबी हैं. पिछले दो वर्षों से इसके लक्षण ठीक नही दिख रहे थे. अपने यहां जैसी आरबीआई रेग...
रकारी बजट पर ‘रेवड़ी कल्चर’ का साया खतरनाक

रकारी बजट पर ‘रेवड़ी कल्चर’ का साया खतरनाक

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-ललित गर्ग- सरकारों के बजट भी अब मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार बांटने, तोहफों, लुभावनी घोषणाएं एवं योजनाओं की बरसात करने का माध्यम बनते जा रहे हैं। बजट में भी ‘रेवड़ी कल्चर’ का स्पष्ट प्रचलन लगातार बढ़ रहा है, खासकर तब जब उन राज्यों में चुनाव नजदीक हों। ‘फ्रीबीज’ या मुफ्त उपहार न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में वोट बटोरने का हथियार हैं। यह एक राजनीतिक विसंगति एवं विडम्बना है जिसे कल्याणकारी योजना का नाम देकर सत्ताधारी पार्टी राजनीतिक लाभ की रोटियां सेंकती है।  यह तय करना कोई मुश्किल काम नहीं है कि कौनसी कल्याणकारी योजना है और कौनसी मुफ्तखोरी यानी ‘रेवड़ी कल्चर’ की, परंतु राजनीतिक मजबूरी इसे चुनौतीपूर्ण बना देती है। भारत जैसे विकासशील देश की विभिन्न राज्यों की सरकारें सरकारी बजट के माध्यम से आम-जनता को प्रभावित करने का हरसंभव प्रयास करती है। छत्तीसगढ़ सरकार का बजट इसका ...
मुद्रा स्फीति पर अंकुश क्यों जरूरी

मुद्रा स्फीति पर अंकुश क्यों जरूरी

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कोरोना महामारी के बाद से पूरे विश्व में मुद्रा स्फीति बहुत तेजी से बढ़ी है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति 7 प्रतिशत के ऊपर एवं थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति 13 प्रतिशत के ऊपर निकल गई थी। कई विकसित देशों में तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति 10 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंची थी जो कि पिछले 50 वर्षों की अवधि में सबसे अधिक महंगाई की दर है। मुद्रा स्फीति से आश्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि एवं मुद्रा की क्रय शक्ति में कमी होने से है। मुद्रा स्फीति विशेष रूप से समाज के गरीब एवं निचले तबके तथा मध्यम वर्ग के लोगों को बहुत अधिक प्रभावित करती है। क्योंकि, इस वर्ग की आय एक निश्चित सीमा में रहती है एवं इसका बहुत बड़ा भाग उनके खान-पान पर ही खर्च हो जाता है। यदि मुद्रा स्फीति तेज बनी रहे तो इस वर्ग के खान-पान पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने लगता है। अतः, मुद्रा स्फ...
भारतीय गृहणियों के घरु कार्य का आंकलन कर इसे सकल घरेलू उत्पाद में शामिल किया जाना चाहिए

भारतीय गृहणियों के घरु कार्य का आंकलन कर इसे सकल घरेलू उत्पाद में शामिल किया जाना चाहिए

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भारतीय अर्थशास्त्रियों द्वारा जैसी कि उम्मीद की जा रही थी एवं भारतीय रिजर्व बैंक ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था सम्बंधी अपने आंकलन में जो सम्भावना व्यक्त की थी, उसी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 की तृतीय तिमाही, अक्टोबर-दिसम्बर 2022, में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 की प्रथम तिमाही, अप्रेल-जून 2022, में एवं द्वितीय तिमाही, जुलाई-सितम्बर 2022, में क्रमशः 13.2 प्रतिशत एवं 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। जबकि चौथी तिमाही, जनवरी-मार्च 2023, में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि की सम्भावना के चलते पूरे वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है। इसी प्रकार कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे गोल्डमेन सेच्स, मूडी, फिच, एशियाई विकास बैंक आदि ने भी वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्य...
India’s iron and steel industry capable of emitting less and producing more

India’s iron and steel industry capable of emitting less and producing more

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CSE conducts stakeholder meet on decarbonising India’s iron and steel sector. Underlines the need for better planning, new technologies and adequate finance to help the sector make the much-needed shift in today’s climate-stressed world Download CSE’s new report here: https://www.cseindia.org/decarbonizing-india-s-iron-and-steel-sector-report-11434 Follow the workshop proceedings here: https://www.cseindia.org/workshop-on-decarbonizing-india-s-iron-and-steel-sector-by-2030-and-beyond-11623 New Delhi, February 28, 2022: “The iron and steel industry is an emission-intensive sector. Our new analysis shows it is possible to bring down carbon dioxide (CO2) emissions from our iron and steel sector drastically by 2030, while more than doubling India’s output of s...
डगमगाती भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद

डगमगाती भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद

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एक समय था, जब भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मध्य-वर्ग था तो उसके लिए सबसे पवित्र-पूंजी थी कर्मचारी भविष्य-निधि कोष। भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद। कोई नागरिक निजी तौर पर बचत करना चाहे, या न चाहे पिछली सरकारों ने उसके लिए बचत के प्रावधान को अनिवार्य बनाने की कोशिश की थी। कर्मचारी के इस खाते में बचत सरकार की भी जिम्मेदारी थी। लेकिन,अब सरकार का नागरिकों के प्रति यह अभिभावकीय अस्तित्व अस्त हो रहा है। इस बार के केंद्रीय बजट का मूल स्वर यही है कि “कर दिए जाओ और बचत की चिंता न करो।“हमारे सामने भारतीय अर्थव्यवस्था में छोटी बचतों का इतिहास उस वक्त दर्ज हुआ जब 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के समय दुनिया के बाजार धड़ाम से गिर रहे थे। बाजार के जानकारों ने उस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने का श्रेय घर-घर मौजूद बचतवादियों को ही दिया था। इस बचतवादी प्रवृत्ति का रखवाला था भविष्य-निधि कोष। आप आज जितन...
वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

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यदि भारत के प्राचीन अर्थतंत्र के बारे में अध्ययन किया जाय तो ध्यान में आता है कि प्राचीन भारत की अर्थव्यस्था अत्यधिक समृद्ध थी। विश्व के कई भागों में सभ्यता के उदय से कई सहस्त्राब्दी पूर्व, भारत में उन्नत व्यवसाय, उत्पादन, वाणिज्य, समुद्र पार विदेश व्यापार, जल, थल एवं वायुमार्ग से बिक्री हेतु वस्तुओं के परिवहन एवं तत्संबंधी आज जैसी उन्नत नियमावलियां, व्यवसाय के नियमन एवं करारोपण के सिद्धांतों का अत्यंत विस्तृत विवेचन भारत के प्राचीन वेद ग्रंथों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। प्राचीन भारत में उन्नत व्यावसायिक प्रशासन व प्रबंधन युक्त अर्थतंत्र के होने के भी प्रमाण मिलते हैं। प्राचीन भारत में कुटीर उद्योग बहुत फल फूल रहा था इससे सभी नागरिकों को रोजगार उपलब्ध रहता था एवं हर वस्तु का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता था। ग्रामीण स्तर पर भी समस्त प्रकार के आवश्यक उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध...
लिथियम की प्राप्ति, आधार विरोधाभासी

लिथियम की प्राप्ति, आधार विरोधाभासी

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और भारत के खदान मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने देश में लीथियम और सोने के भंडार खोज निकाले हैं और ऐसे लगभग 51 खनिज ब्लॉक राज्य सरकारों को भी सौंप दिए गए हैं। लीथियम की महत्ता के कारण यह सूचना भारतीय ही नहीं विदेशी समाचारपत्रों में भी छपा। यह खनिज लीथियम-ऑयन बैटरियों का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, और स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक अनेकानेक बैटरियों में प्रयुक्त होता है। दुनिया जीवाश्म ईंधन से हटकर सतत एवं स्वच्छ ऊर्जा की ओर पहल कर रही है और इस परिवर्तन में एक बड़ी भूमिका लीथियम बैटरियों की है, जो बारम्बार चार्ज होने और लंबे समय तक ऊर्जा का भंडारण करने में सक्षम हैं। इसीलिए लीथियम को अक्सर ‘श्वेत सोना’ या ‘नवीन-तेल’ भी कहा जाता है। देश के भंडारों में जिस भारी मात्रा में लीथियम (5.9 मिलियन टन) होने का संकेत मिला है, उसने विश्वभर को हैरा...