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WHY RELIANCE INDUSTRIES SHIFTING FOCUS AWAY FROM INDIAN PETROCHEMICAL SECTOR ?

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Reliance Industries Ltd. (R I L) , a large Indian company ,  has expanded  and grown in a spectacular manner   during the last few  decades, like of which no industrial group in India has performed  before. RIL is now involved in multi various activities relating to  petroleum refineries, petrochemicals, oil and gas exploration,  coal bed methane, life sciences,  retail business, communication network,  ( Jio platform)  media/entertainment  etc. While these activities may look unrelated for an observer,  Mukesh Ambani , the chief architect of RIL seems to  view them as related activities, as all of them have money making potentials. Recently, Mukesh Ambani has gone for diversification projects in consumer sector . RIL’s  performance in refinery, petrochemical and oil & gas explora...
मनरेगा योजना बनी रोजी-रोटी का सहारा

मनरेगा योजना बनी रोजी-रोटी का सहारा

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कोरोना के चलते पूरे भारत में ग्रामीण संकट गहरा रहा है काम की मांग बढ़ती जा रही है, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मांग को पूरा करने के लिए आगामी बजट में जोर-शोर से देखी जा रही हैं। ग्रामीण गरीबी से लड़ने के लिए सरकार के शस्त्रागार में यह एकमात्र गोला-बारूद हो सकता है। हालांकि, योजना को कर्कश, बेकार और अप्रभावी रूप हमने भूतकाल में देखे हैं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत ग्रामीण नौकरियों की मासिक मांग 20 मई तक 3.95 करोड़ पर एक नई ऊंचाई को छू गई थी, और महीने के अंत तक 4 करोड़ को पार कर गई। इस साल मई में चारों ओर बड़े पैमाने पर नौकरी के नुकसान का संकेत आया, विशेष रूप से अनौपचारिक क्षेत्र में, जहां लाखों कर्मचारी अचानक तालाबंदी के कारण बेरोजगार हो गए हैं। मनरेगा के तहत काम मांगने वालों की अधिक संख्या हताशा के कारण है। शहरी श्रमिकों में से अधि...
कोरोना का असर-तो क्या चीन छोड़कर भारत आएंगे निवेशक

कोरोना का असर-तो क्या चीन छोड़कर भारत आएंगे निवेशक

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आर.के. सिन्हा   वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण सारी दुनिया के हाथ-पैर फूल गए हैं। धरती पर भय और त्रात्रि-त्राहि के हालात बन चुके हैं I तब भारत के लिए एक अवसर बन रहा है। अवसर यह हैकि भारत दुनिया का मैन्यूफैक्चरिंग हब बन सकता है । भारत चाहे तो चीन के खिलाफ दुनिया की नफरत का इस्तेमाल अपने लिए एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में कर सकता है। इसबेहतरीन मौके को किसी भी सूरत में भारत को छोड़ना नहीं चाहिए । यह ऐसा  वक्त है जब देश के नीति निर्धारकों को बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित करने के उपाय तलाशने होंगे। पर क्या ये संभव है? असंभव तो दुनिया में कुछ भी नहीं है । पर  इसके लिए भारत के सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर हल्ला बोलना होगा। सरकारों को इस दिशामें कठोर कदम उठाने होंगे। काहिल और निकम्मे सरकारी अफसरों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी । निवेश संबंधी नियमों को ...
ऍफ़. डी. आई. नीति में बदलाव : एक अच्छी शुरुआत पर आगे लम्बी राह

ऍफ़. डी. आई. नीति में बदलाव : एक अच्छी शुरुआत पर आगे लम्बी राह

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  ऍफ़. डी. आई. नीति में परिवर्तन कर भारत सरकार ने घरेलू कंपनियों में भारी निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने के चीनी प्रयास पर अंकुश लगाया । चीन में उत्पन्न हुई महामारी कोविड-१९ ने सम्पूर्ण विश्व को घेर लिया है । भारत में भी इस महामारी ने फरवरी माह में दस्तक दे दी थी और भारतीय सरकार को इससे लड़ने के लिए सम्पूर्ण लॉक-डाउन जैसे कड़े कदम उठाने पड़े । सम्पूर्ण लॉक-डाउन ने इस महामारी के प्रसार पर रोक लगायी परन्तु समूचे देश के आर्थिक क्रियाकलापों पर भी अल्प विराम लगा दिया । जिसके परिणामस्वरूप भारतीय कंपनियां इस समय गंभीर आर्थिक समस्याओं से जूझ रही हैं । विडम्बना यह है कि इस महामारी का उद्गम स्थल चीन न सिर्फ इस महामारी को वश में करता प्रतीत हो रहा है अपितु इस समस्या का लाभ उठाने की लिए भी लालायित दिख रहा है । चीन अपने देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के माध्यम से विश्व भर में तीव्रता से...
वित्त मंत्रालय ने *कराधान और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश, 2020 जारी किया

वित्त मंत्रालय ने *कराधान और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश, 2020 जारी किया

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कोविड-19 के प्रकोप को ध्यान में रखकर अनेक सेक्‍टरों में वैधानिक और नियामकीय अनुपालन के बारे में किए गए कई महत्वपूर्ण राहत उपायों के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणाओं को प्रभावी करने के लिए सरकार ने 31 मार्च, 2020 को एक अध्यादेश जारी किया है। इनमें से कुछ महत्‍वपूर्ण राहत उपाय और इस अध्यादेश के जरिए बढ़ाई गई समय सीमाएं निम्‍नलिखित हैं:- ★ प्रत्यक्ष कर और बेनामी: ● वित्‍त वर्ष 2018-19 (आकलन वर्ष 2019-20) के लिए मूल के साथ-साथ संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर 30 जून, 2020 कर दी गई है। ● आधार कार्ड और पैन को आपस में जोड़ने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जून, 2020 कर दी गई है। ● Income Tax Act के अध्याय-VIA-B, जिसमें धारा 80C (LIC, PPF, NSC इत्‍यादि), 80D (मेडिक्लेम), 80G (दान) आदि शामिल हैं, के अंतर्गत कटौती का दावा करने के लिए विभिन्न निवेश/भ...
येस बैंक का डूबना-उभरना एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव

येस बैंक का डूबना-उभरना एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव

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बैंकिग व्यवस्था किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का दर्पण होती है। बैंकिग प्रणाली में जनता के विश्वास का होना, इस बात का प्रमाण है कि उक्त देश की अर्थव्यवस्था बहुत सुदृढ़ है इसके विपरीत यदि जनता का विश्वास बैंकिंग व्यवस्था से भंग होता है तो सत्ता के प्रति भी उनका विश्वास भंग होना स्वाभाविक है। देश में अभी कुछ समय के अंतराल में न केवल येस बैंक अपितु 50 से अधिक अन्य छोटे-बड़े बैंक भी बंद हो चुके हैं। इस परिस्थिति के परिणामस्वरूप 25-30 हजार से लेकर कई लाख खाताधारकों का पैसा डूबा है, जिसके कारण आज सम्पूर्ण देश में साधारण जनता का विश्वास बैंकिग व्यवस्था से उठता जा रहा है।  आज बैंको के डूबने के कारणों का गहनता से अध्ययन करने की आवश्यकता है। जब भी कोई बैंक डूबता है, सरकार तथा रिजर्व बैंक द्वारा साधारण जनता को यही समझाया जाता है कि उक्त बैंको के उच्च पदो पर आसीन प्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारियों ने अप...
कौन खा रहा हैं बैंकों को नोच-नोच कर

कौन खा रहा हैं बैंकों को नोच-नोच कर

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यस बैंक में जिस तरह की लोन देने के नाम पर लूट मची हुई थी उससे यह साफ हो गया है कि देश के बैंकिंग सेक्टर में नए सिरे से पुनर्समीक्षा कर प्राण फूंकने की जरूरत हैं। बैंकिंग सेक्टर अब ऐसा लगता है कि जंगग्रस्त हो चुकी है। अब यस बैंक के देशभर में फैले लाखों खातेदार अपना पैसा निकालने के लिए मारे-मारे घूम रहे है। आपको याद ही होगा कि पिछले साल के अंतिम महीनों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर अलग-अलग तरह की कई पाबंदियां लगा दीं थी। जिसके बाद इसके खातेदारों को अपने ही बैंक से अपना पैसा निकालना मुश्किल हो गया था। यकीन मानिए कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों के हर माह करीब 90 मुलाजिमों को चोरी-चकारी, भ्रस्टाचार और अकर्मण्यता के पुख्ता कारणों से नौकरी से बर्खास्त किया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर पर भ्रष्टाचार में फंसे होने के पुख्ता साक्ष्य हैं। ये काम करने की बजाय काली क...
क्या केवल यस बैंक पर ही आ सकता है ऐसा संकट ?

क्या केवल यस बैंक पर ही आ सकता है ऐसा संकट ?

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यस बैंक से धन निकासी की सीमा तय करने के बाद खाताधारकों में दहशत का माहौल है। देशभर में इस बैंक की हर शाखा पर खाताधारकों की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। लोग हड़बड़ाहट में हंै। किसी को बीमार बेटे के इलाज के लिए पैसे की जरूरत पड़ी, लेकिन उसे पैसा नहीं मिल सका। किसी का बैंक में करोड़ों रुपया है, ऐसे में उन्हें पैसों के सुरक्षित रहने की चिंता सता रही है। घबराए ग्राहकों गुस्से में हैं, बैंक में हंगामा होने लगा है। इसको लेकर पुलिस बुलानी पड़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से ब्रांचों में हंगामे की खबरें आ रही हैं। 14 नवंबर 2016 को हमने बैंकों की असलियत पर एक लेख लिखा था। जो आईआईटी दिल्ली के मेधावी छात्र रवि कोहाड़ के गहन शोध के बाद प्रकाशित एक सरल हिंदी पुस्तक ‘बैंकों का मायाजाल’ पर आधारित था। उस समय जो प्रश्न हमने उठाये थे, उन पर फिर से गौर करने की जरूरत है। इस पुस्तक में बड़े रोचक और तार्किक तरीके से ...
Uncertainty of private banks now with YES Bank calls for another round of bank-nationalisation

Uncertainty of private banks now with YES Bank calls for another round of bank-nationalisation

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It refers to Reserve Bank of India (RBI) now on 05.03.2020 imposing restrictions on withdrawal of more than rupees 50000 from an account in YES Bank. Only some time back, similar restrictions in case of PMC Bank had put its customers in great difficulty when there were even deaths reported of some customers who could not bear the burnt of blocking of their hard-earned money because of RBI instructions. Main sufferers of such restrictions are senior citizens whose only income is from interest in Fixed Deposits. Since private Banks give more interest than public-sector banks, depositors park their hard-earned money in private banks in want of more income. It is time that another phase of nationalisation of private banks may be initiated to prevent hardships to depositors in these banks...