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उद्यमी देश के नायक या खलनायक

उद्यमी देश के नायक या खलनायक

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उद्यमी देश के नायक या खलनायक अथवा कैसा हो देश के धनी असरदार लोगों का लाइफ स्टाइल आर.के. सिन्हा इंफोसिस के फाउंडर एन.नारायण मूर्ति जब भी बोलते हैं तो उसे सबको सुनना ही पड़ता है। वे अपनी बात बेखौफ अंदाज में रखते हैं। उन्होंने पिछले दिनों इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (आईआईएम-ए) के 58वां वार्षिक दीक्षांत समारोह में कहा कि कॉरपोरेट लीडर्स को अपनी सैलरी लेते हुए संयम बरतना चाहिए। उनका लाइफ स्टाइल भी बहुत खर्चीला नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि जिस देश में अब भी खासी गरीबी है , वहां पर उद्योगपतियों को एक तरह से अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करना चाहिए। नारायणमूर्ति जी की बात पर गौर तो किया ही जाना चाहिए।  मुझे याद है कि भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब मैं मानव संसाधन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सलाहकार था, नाराय...
इतिहास बोध और राजनीति – हृदयनारायण दीक्षित

इतिहास बोध और राजनीति – हृदयनारायण दीक्षित

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वास्तविक इतिहासबोध राष्ट्र की विशेष शक्ति होता है। सच्चा इतिहास बोध राष्ट्र बोध जगाता है। राष्ट्रबोध जन गण मन की संजीवनी है। बच्चों को वास्तविक इतिहासबोध की शिक्षा देना राष्ट्रराज्य का कर्तव्य है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एन०सी०ई०आर०टी०) ने सम्यक विचार के बाद दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के लिए इतिहास की पुस्तकों का पाठ्यक्रम संशोधित किया है। इस संशोधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, शिवसेना (उद्धव गुट) सहित कई पार्टियों ने पाठ्यक्रम संशोधन पर कड़ा विरोध व्यक्त किया है। खास तौर पर मुगल साम्राज्य, दिल्ली दरबार, अकबरनामा, बादशाहनामा और कुछ राजनैतिक दलों के उदय वाले अंश विवाद का विषय बने हैं। मुगल शासकों और उनके साम्राज्य, पांडुलिपियों की रचना, रंग चित्रण, राजधानियां, दरबार, उपाधियाँ और उपहार, शाही परिवार, शाही मुगल अभिजात वर्ग वाले अंश ठी...
भारत का राष्ट्रीय पशु(जानवर) बाघ है।

भारत का राष्ट्रीय पशु(जानवर) बाघ है।

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भारत का राष्ट्रीय पशु(जानवर) बाघ है। समय के साथ मानवीय हस्तक्षेप के कारण बाघों पर भी खतरा मंडराया और यह बात हमें आंकड़ों से पता चलती है। एक समय था जब बाघों की तेजी से कम होती संख्या को लेकर चिंता जताई जाने लगी थी, लेकिन अब धीरे-धीरे इसमें प्रोजेक्ट टाइगर व अन्य बाघ संरक्षण कार्यक्रमों से इसमें कुछ सुधार आ रहा है। समय के साथ ही वन्य जीवों के शिकार के संबंध में कानून को भी सख्त बनाया गया है। बहरहाल, एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर के बाघों ने अपने प्राकृतिक निवास स्थान का तकरीबन 93 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। यह बहुत ही गंभीर व संवेदनशील है कि इन निवास स्थानों(अधिवासों) को अधिकांशतः मानव गतिविधियों द्वारा नष्ट किया गया है। वनों और घास के मैदानों को कृषि ज़रूरतों के लिये परिवर्तित किया जा रहा है। बाघों से मानव को कथित खतरे को देखते हुए और मौद्रिक लाभ कमाने के उद्देश्य से बाघों का शिकार मानव ...
बहुत याद आएंगे सलीम दुर्रानी

बहुत याद आएंगे सलीम दुर्रानी

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आर.के. सिन्हा सलीम दुर्रानी के बीते रविवार को निधन से भारत ने अपना 1960 और 1970 के दशकों के एक बेहद लोकप्रिय और लाजवाब क्रिकेटर को खो दिया। सलीम दुर्रानी ने गुजरात के जामनगर में आखिरी सांस ली।   सलीम दुर्रानी जब मैदान में होते थे, तो कोई भी लम्हा नीरस नहीं होता था। सलीम दुर्रानी के लिए मशहूर था कि वे दर्शकों की मांग पर छक्का मारते थे। उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल हरफनमौला क्रिकेटर माना जाता था। दर्शकों की छक्के की मांग को वे फौरन पूरा करते थे। वे राजधानी में सालों राजस्थान की तरफ से रणजी ट्रॉफी के मैच खेलने के लिए करनैल सिंह स्टेडियम में आया करते थे। राजस्थान की उस दौर की टीम में हनुमंत सिंह, लक्ष्मण सिंह तथा कैलाश गट्टानी जैसे स्टार प्लेयर होते थे। हनुमंत सिंह तो सेंट स्टीफंस कॉलेज के स्टुडेंट रहे थे। पर सलीम दुर्रानी की लोकप्रियता के सामने बाकी...
श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ किया

श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ किया

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ और 613 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में कौशाम्बी महोत्सव-2023 का शुभारंभ और विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया। इनमें लोक निर्माण विभाग की 405 करोड़ रुपये लागत की 70 योजनाओं और युवा कल्याण,खेल,नगर विकास व व्यावसायिक शिक्षा विभाग समेत 12 विभागों की 51 करोड़ रुपये लागत की 24 परियोजनाओं का लोकार्पण शामिल है।साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेज-3 की 151 करोड़ रुपये लागत की 19 योजनाओं और स्वास्थ्य एवं नगर विकास विभाग की 6 करोड़ रुपये की 4 योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री ...
राष्ट्रपति ने गज उत्सव-2023 का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति ने गज उत्सव-2023 का उद्घाटन किया

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (07 अप्रैल, 2023) असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में गज उत्सव-2023 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति और मानवता के बीच एक बहुत ही पवित्र रिश्ता है। प्रकृति का सम्मान करने वाली संस्कृति हमारे देश की पहचान हमेशा सेरही है। भारत में प्रकृति और संस्कृति आपस में जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे का पोषण करते हैं। हमारी परंपरा में हाथियों का बहुत सम्मान किया जाता है। भारत में इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह देश का राष्ट्रीय धरोहर पशु है, इसलिए हाथियों की रक्षा करना हमारे लिएअपनी राष्ट्रीय धरोहर को संरक्षित करने वाली हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राष्ट्रपति ने कहा कि जो काम प्रकृति और पशु-पक्षियों के हित में हैं, वही मानवता और धरती माता के हित में भी हैं। हाथी अभ्यारण वाले जंगल और हर...
इमरान खान – आज के पाकिस्तान का शेर

इमरान खान – आज के पाकिस्तान का शेर

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने खेल जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई हुई है। आज भी सम्पूर्ण विश्व इमरान खान को उनकी पूर्व की छवि से ही याद करते है। वे 80 के दशक के एक लोकप्रिय क्रिकेटर रहे हैं, उनके असंख्य प्रशंसक ना केवल पाकिस्तान में अपितु भारत देश में भी हैं। उन्होंने खेल जगत में क्रिकेट को आकाश की ऊँचाईयों तक पहुँचाया है, इसलिए उनके प्रशंसक उनका दिल से सम्मान करते हैं।आज सम्पूर्ण पाकिस्तान राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में नित्प्रतिदिन पतन की ओर अग्रसर हो रहा है, ऐसी परिस्थिति में जनता त्राही-त्राही कर रही है। वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय में भी वहाँ की जनता ने हिन्दुओं को लूटकर अपने घर भरे और समय का लाभ उठाया, परन्तु वर्तमान में उनके किए हुए कुकर्मो का फल उन्हें बहुतायत में मिल रहा है। यदि हम पाकिस्तान के अस्तित्व से लेकर अब तक की स्थिति का आंकलन करे...
सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का बलिदान

सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का बलिदान

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8 अप्रैल 1857 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का बलिदान इन्ही के स्वाभिमान की चिंगारी क्राँति का दावानल बनी- रमेश शर्मा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 की क्रान्ति को सब जानते हैं। यह एक ऐसा सशस्त्र संघर्ष था जो पूरे देश में एक साथ हुआ । इसमें सैनिकों और स्वाभिमान सम्पन्न रियासतों ने हिस्सा लिया । असंख्य प्राणों की आहूतियाँ हुईं थी । इस संघर्ष का सूत्रपात करने वाले स्वाभिमानी सिपाही मंगल पाण्डेय थे । अपने स्वत्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिये न केवल गाय की चर्बी वाले कारतूस लेने से इंकार किया अपितु दो अंग्रेज सैन्य अघिकारियों को गोली भी मार दी ।ऐसे इतिहास प्रसिद्ध क्राँतिकारी मंगल पाण्डेय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के अंतर्गत नगवा नामक गांव में 19 जुलाई 1827 को हुआ था। इनके पिता दिवाकर पांडे था भारतीय परंपराओ से जुड़े थे । घर में पूजा पाठ का वातावरण था । मंगल पाण्डेय ...
मीडिया पर प्रतिबंध, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध

मीडिया पर प्रतिबंध, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध

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देश की शीर्ष अदालत ने सत्ताधीशों को आईना दिखाया है। शीर्ष अदालत ने मलयालम चैनल मीडिया वन पर लगे प्रतिबंध को हटाते हुए सरकार को यह नसीहत दी है। याद कीजिए, केंद्रीय सूचना व प्रसारण और गृह मंत्रालय ने इस मलयालम चैनल मीडिया वन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा बताते हुए बीती 31 जनवरी को इस पर रोक लगायी थी। याद कीजिए, उस कहावत को कि “मजबूत लोकतंत्र के लिये मीडिया की आजादी ज़रूरी है।“ इसी तथ्य को एक बार फिर दोहराकर देश की शीर्ष अदालत ने सत्ताधीशों को आईना दिखाने का ही प्रयास किया है। शीर्ष अदालत की पीठ ने यह भी कहा कि चैनल के शेयरधारकों का जमात-ए-इस्लामी हिंद से जुड़ाव का दावा चैनल के अधिकारों को प्रतिबंधित करने का वैध आधार भी नहीं है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई़ चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने बीते बुधवार कहा कि सरकार मीडिया की आजादी पर अनुचित प्रतिबंध नहीं लगा सकती। ऐसा करने...
जैव-विविधता के लिए जरूरी है हाथियों और बाघों का संरक्षण !

जैव-विविधता के लिए जरूरी है हाथियों और बाघों का संरक्षण !

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भारत का राष्ट्रीय पशु(जानवर) बाघ है। समय के साथ मानवीय हस्तक्षेप के कारण बाघों पर भी खतरा मंडराया और यह बात हमें आंकड़ों से पता चलती है। एक समय था जब बाघों की तेजी से कम होती संख्या को लेकर चिंता जताई जाने लगी थी, लेकिन अब धीरे-धीरे इसमें प्रोजेक्ट टाइगर व अन्य बाघ संरक्षण कार्यक्रमों से इसमें कुछ सुधार आ रहा है। समय के साथ ही वन्यजीवों के शिकार के संबंध में कानून को भी सख्त बनाया गया है। बहरहाल, एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर के बाघों ने अपने प्राकृतिक निवास स्थान का तकरीबन 93 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। यह बहुत ही गंभीर व संवेदनशील है कि इन निवास स्थानों(अधिवासों) को अधिकांशतः मानव गतिविधियों द्वारा नष्ट किया गया है। वनों और घास के मैदानों को कृषि ज़रूरतों के लिये परिवर्तित किया जा रहा है। बाघों से मानव को कथित खतरे को देखते हुए और मौद्रिक लाभ कमाने के उद्देश्य से बाघों का शिकार मानव द...