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भारत के भविष्य से जुड़ा सवाल?

भारत के भविष्य से जुड़ा सवाल?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
आज का ‘प्रतिदिन’ भारत के भविष्य से जुड़ा है। यह भारत के भविष्य के लिए अत्यंत ही चिंताजनक बात है, जो फ़ौरन कार्रवाई की अपेक्षा की माँगती है । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् यानी एनसीईआरटी तथा भारत सरकार के स्कूली शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में एक सर्वे हुआ। इस सर्वे के आंकड़ों के अनुसार देशभर में कक्षा तीन के बच्चे विशेष रूप से गणित, अंग्रेजी एवं हिंदी में औसत से भी कमजोर साबित हुए हैं। मानव जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व है। दरअसल, बेहतर व्यक्तियों के निर्माण तथा उज्ज्वल करिअर के लिए सर्वथा उचित शिक्षा की आवश्यकता होती है। वैसे आजादी के बाद से ही हमारी शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव किये गये, लेकिन हाल ही में एक सर्वे से प्राप्त आंकड़ों एवं जानकारियों से पता चलता है कि उद्देश्यगत बेहतरी के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अब तक किये गये तमाम प्रयास अपर्याप्त रहे हैं। ...
विश्व स्वास्थ्य दिवस, 7 अप्रैल)

विश्व स्वास्थ्य दिवस, 7 अप्रैल)

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
डॉक्टर और दवाइयों की कमी से जूझता देश का स्वास्थ्य प्रत्येक 10,000 लोगों के लिए केवल एक एलोपैथिक डॉक्टर उपलब्ध है और 90,000 लोगों के लिए एक सरकारी अस्पताल उपलब्ध है। मासूम और अनपढ़ मरीजों या उनके रिश्तेदारों का शोषण किया जाता है। अधिकांश केंद्र अकुशल या अर्ध-कुशल पैरामेडिक्स द्वारा चलाए जाते हैं और ग्रामीण सेटअप में डॉक्टर शायद ही कभी उपलब्ध होते हैं। मरीजों को जब आपात स्थिति में तृतीयक देखभाल अस्पताल में भेजा जाता है जहां वे अधिक भ्रमित हो जाते हैं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और बिचौलियों के एक समूह द्वारा आसानी से धोखा खा जाते हैं। बुनियादी दवाओं की अनुपलब्धता भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की एक सतत समस्या है। कई ग्रामीण अस्पतालों में नर्सों की संख्या जरूरत से काफी कम है. -डॉ सत्यवान सौरभ विश्व स्वास्थ्य दिवस, 7 अप्रैल, स्वास्थ्य समस्या या विशेष ध्यान देने योग्य मुद्दे पर विश्व ...
माँग में सिन्दूर लगाने की प्रथा अति प्राचीन है

माँग में सिन्दूर लगाने की प्रथा अति प्राचीन है

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय, सामाजिक
श्रीमती शारदा नरेन्द्र मेहता (एम.ए. संस्कृत विशारद)माँग में सिन्दूर लगाने की प्रथा अति प्राचीन है । सौभाग्यवती महिलाओं के सोलह श्रृृंगार में से एक श्रृंगार माथे पर माँंग में सिन्दूर लगाना भी है। हमारे समाज में वैदिक रीति की विवाह पद्धति में मंडप में कन्यादान विधि संपन्न्ा होने के बाद वर, वधू की माँग में सिन्दूर लगाता है तथा उसे मंगल सूत्र पहनाता है। इसके पश्चात कन्या अखण्ड सौभाग्यवती कहलाती है । सिन्दूर भारतीय समाज में पूजन-सामग्री का एक प्रमुख घटक है । देवी पूजन में माँ पार्वती, माँ दुर्गा के नौ रूप, माँ सीता तथा अन्य शक्ति स्वरूपा माताओं के पूजन में सिन्दूर का अपना एक विशेष महत्व है । देवी पूजन में सिन्दूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। आज भी नवविवाहिता अपनी मांग के अंदर सिंदूर बड़ी कुशलता पूर्वक लगाती है । सिन्दूर लगाने की प्रथा दक्षिण भारत की अपेक्षा उत्तर भारत में अधिक प्रचलित...
बल, बुद्धि और सिद्धि के सागर हैं हनुमान

बल, बुद्धि और सिद्धि के सागर हैं हनुमान

BREAKING NEWS, TOP STORIES, धर्म, राष्ट्रीय
हनुमान जयन्ती- 6 अप्रैल 2023 पर विशेष- ललित गर्ग - आधुनिक समय के सबसे जागृत, सिद्ध, चमत्कार घटित करने वाले एवं अपने भक्तों के दुःखों को हरने वाले भगवान हनुमान हैं, उनका चरित्र अतुलित पराक्रम, ज्ञान और शक्ति के बाद भी अहंकार से विहीन था। यही आदर्श आज हमारे लिये प्रकाश स्तंभ हैं, जो विषमताओं से भरे हुए संसार सागर में हमारा मार्गदर्शन करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि असंभव लगने वाले कार्यों में भी जब हनुमानजी ने विजय प्राप्त की तब भी उन्होंने प्रत्येक सफलता का श्रेय ‘सो सब तव प्रताप रघुराई’ कहकर अपने स्वामी को समर्पित कर दिया। पूरी मेहनत करना पर श्रेय प्राप्ति की इच्छा न रखना सेवक का देव दुर्लभ गुण होता है, जो उसे अन्य सभी सद्गुणों का उपहार दे देता है। यहीं हनुमानजी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता है। वे शौर्य, साहस और नेतृत्व के भी प्रतीक हैं। समर्पण एवं भक्ति उनका सर्वाधिक लोकप्रिय ग...
तालमेल’ ही परिवार को बचाएगा

तालमेल’ ही परिवार को बचाएगा

राष्ट्रीय, सामाजिक
मेरे सहपाठी और चिकित्सक मित्र डॉक्टर प्रमोद अग्रवाल ने भी समाज में आ रहे बदलाव से व्यथित होकर अपने पेज पर हरियाणा के चरखी दादरी की उस घटना को स्थान दिया है, जिससे समाज का हर संवेदनशील व्यक्ति व्यथित है। इस घटना में संपन्न, पढ़े-लिखे व उच्च अधिकारियों के परिवार के बच्चों की ओर से घोर उपेक्षा के चलते बुजुर्ग मां-बाप ने आत्महत्या कर ली। समाज में इस प्रकार की घटना के अतिरिक्त “माँ” से सम्बोधित गौ, नदी, धरती की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। इसका विस्तार फिर कभी। इस घटना में , वृद्ध दंपति का आरोप था कि उनके बच्चे तीस करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं और वे रोटी के लिये तरस रहे हैं। महिला की गंभीर बीमारी भी इस संकट का एक पहलू है। वैसे इस घटनाक्रम का विवरण पुलिस रिपोर्ट के आधार पर है और वास्तविक तथ्य तो जांच के बाद सामने आएंगे। लेकिन एक बात तो तय है कि यह मामला सिर्फ मां-बाप की भूख का ही नहीं है। ...
हनुमान जी – साहस, शौर्य और समर्पण के प्रतीक

हनुमान जी – साहस, शौर्य और समर्पण के प्रतीक

BREAKING NEWS, TOP STORIES, धर्म, राष्ट्रीय
हनुमान, जिन्होंने सीता देवी को दिखाने के लिए अपना हृदय खोल दिया कि भगवान राम और वह उनके हृदय में निवास करते हैं और उन्हें उनसे उपहार के रूप में मोतियों के हार की आवश्यकता नहीं है, ऐसे अद्भुत समर्पण और बलिदान की आज कल्पना भी नहीं की जा सकती . लेकिन भगवान अपने अनुयायियों की भक्ति के लिए ही पीछे हटते हैं। हनुमान की पूजा सभी लोग विशेष रूप से करते हैं जो खेल और कठिन योगाभ्यास में लगे हुए हैं। हनुमान की तरह, हमें अपने मन, बुद्धि को अपनी आत्मा के नियंत्रण में लाकर, अपने स्वामी (हमारे सच्चे स्व, आत्मान) की सेवा करने का प्रयास करना चाहिए। -प्रियंका सौरभ हनुमान सबसे लोकप्रिय हिंदू देवताओं में से एक हैं। वह सेवा (सेवा), भक्ति (भक्ति) और समर्पण (समर्पण, अहंकारहीनता) का अवतार है। वह शिव के अवतार हैं। उन्हें अंजनी देवी के पुत्र पवन-देवता (मरुता) का पुत्र भी माना जाता है। उनकी ठुड्डी ऊंची है (इसलि...
बिहार से बंगाल तक हिंसा – हिंदू विरोधी टूलकिट का अभियान

बिहार से बंगाल तक हिंसा – हिंदू विरोधी टूलकिट का अभियान

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
बिहार से बंगाल तक हिंसा - हिंदू विरोधी टूलकिट का अभियानबिहार से बंगाल तक रामनवमी को फिर बनाया गया निशानातथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों की विकृत राजनीति का दौर प्रारम्भमृत्युंजय दीक्षितजिस समय देश उल्लास और उत्साह के साथ रामभक्ति के रंग में डूबकर रामनवमी का पर्व मना रहा था उस समय कुछ शरारती तत्व अपने राजनैतिक आकाओं के बल पर हिंसा का तांडव रच रहे थे। रामनवमी के पावन अवसर पर बंगाल से बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र तक जिस प्रकार से चुन चुन कर रामनवमी झांकियों, यात्राओं और भक्तों पर पथराव तथा हिंसा की गई वह निंदनीय नहीं घृणित है और उससे भी अधिक घृणित है उस हिंसा को सही ठहराने वाले छद्म धर्मनिरपेक्ष लोगों का व्यवहार फिर वो चाहे कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री ही क्यों न हों।रामनवमी को हिन्दुओं पर हमले के रूप में प्रारम्भ हुयी हिंसा महाराष्ट्र के संभाजीनगर से बंगाल के हावड़ा से होती हुई बिहार के पांच जिलों औ...
बेहद प्रेरक है “शिक्षा के गाँधी” की उपलब्धियां

बेहद प्रेरक है “शिक्षा के गाँधी” की उपलब्धियां

राष्ट्रीय, साहित्य संवाद
डॉ. अजय कुमार मिश्राजीवन का मूल उद्देश्य कही न कही जनहित के कार्यो को करना होता है | ऐतिहासिक रूप से देखेगे तो यह पता चलता है की अविस्मरणीय वही रहे है जो दूसरों के लिए जीवन व्यतीत कर देते है | एक ऐसी सख्सियत जिन्होंने अपने बूते शिक्षा के क्षेत्र में न केवल अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य किया बल्कि उत्तर प्रदेश की राजधानी से ऐसे अनेकों होनहार बच्चो को निखार करके देश - विदेश के हर क्षेत्र में परचम लहराया है |उम्र और जज्बे में गजब का तारतम्य है, जहाँ उम्र 86 वर्ष है वही कार्य और सेवा के प्रति जज्बा और जुनून किसी भी नव युवक से हजारों गुना अधिक है | महात्मा गाँधी से प्रभावित होकर उन्होंने अपने नाम में गाँधी महज 11 वर्ष की उम्र में जोड़ लिया | आज दुनियांभर में लोग उन्हें डॉ. जगदीश गाँधी के नाम से जानते है | शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने पहला कदम आज से लगभग 6 दशक पूर्व रखा, आज सिटी मो...
काश, अजय बांगा-गुनीत मोंगा से प्रेरित होते खालिस्तान समर्थक

काश, अजय बांगा-गुनीत मोंगा से प्रेरित होते खालिस्तान समर्थक

राष्ट्रीय
आर.के. सिन्हा आजकल ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका में कुछ भटके हुए सिख नवयुवक न जाने किस भ्रम में काल्पनिक खालिस्तान की मांग करते हुए दिखाई देने लगे हैं। इन पर गुस्से से ज्यादा तरस ही आता है। अपने महान गुरुओं की धरती पंजाब और भारत को लेकर ये जिस तरह से अनाप-शनाप बकवास कर रहे होते हैं, वह बेहद अशोभनीय होती है। वे यह समझ लें कि अब भारत कभी भी विभाजित नहीं होगा। भारत के बंटवारे का ख्वाब देखने वालों को निराशा ही होगा। इस बिन्दु पर 140 करोड़ भारतीय एक हैं। कहीं कोई विवाद नहीं है। अब वह जमाना गया जब अपनी-अपनी नेतागिरी चमकाने और प्रधानमंत्री बनने के लिए नेहरू और जिन्ना ने हिंदुस्तान-पाकिस्तान बाँट लिया I अब वैसा होने से रहा I  काश, खालिस्तान के पक्ष में नारेबाजी करने वाले अजय बांगा और गुनीत मोंगा  से कुछ प्रेरणा ले लेत...
राजनीति की दुर्दशा और दिशाहीनता – अनुज अग्रवाल

राजनीति की दुर्दशा और दिशाहीनता – अनुज अग्रवाल

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय
वो भारत जो पिछले वर्ष ही तीन कृषि कानूनों के विरुद्ध अब तक के सबसे लंबे किसान आंदोलन से गुजरा था और जिसकी गूंज पूरी दुनिया में गूंजी थी और भारत सरकार को झुकना पड़ा था व प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों और देश से माफ़ी तक माँगी थी उसी भारत की राजनीति व किसान आंदोलन आज “ जलवायु परिवर्तन” के कारण हो रहे कम उत्पादन, फसलों के नष्ट होने व महंगाई से परेशान किसानों के दुःख - दर्द की पीड़ा पर ख़ामोश हैं। देश व दुनिया एक भयानक खाद्य व जल संकट से दो चार है और यह आगे बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है, ऐसे में यह राजनीतिक मसला न हो हमारे अस्तित्व का मसला है , किंतु राजनीतिक दल इस मुद्दे पर लगभग ख़ामोश हैं। हाँ विपक्षी दल ताल ठोक रहे हैं संसद में उद्योगपति अदाणी को भारत सरकार व प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लगातार बड़ा फायदा पहुंचाने के हिंडनबर्ग रिपोर्ट द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति द्व...