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संस्कृति और अध्यात्म

चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

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चातुर्मास शुभारंभ-06 जुलाई 2025 पर विशेषचातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर- मंत्र महर्षि डॉ. योगभूषण महाराज - सृष्टि का चक्र अनवरत गतिशील है-गर्मी, वर्षा और शीत ऋतु इसका पर्याय हैं। इन्हीं ऋतुओं में से एक वर्षा ऋतु-न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक जगत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैन धर्म में इस अवधि को “चातुर्मास” या “वर्षायोग” कहा जाता है, जैन परम्परा में आषाढ़ी पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक का समय तथा वैदिक परम्परा में आषाढ़ से आसोज तक का समय चातुर्मास कहलाता है। इस दौरान दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों परंपराओं के मुनि स्थिर एक ही स्थान पर विराजमान रहते हैं। यह नियम प्राकृतिक कारणों से भी जुड़ा है-जैसे वर्षा ऋतु में जीव-जंतु अधिक उत्पन्न होते हैं, जिससे भ्रमण करने से अहिंसा का उल्लंघन हो सकता है। वास्तव में आज के व्यस्त, तनाव एवं हिंसाग्रस्त और भौति...
हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

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हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें  ललित गर्ग  दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी विरोध की राजनीति अब महाराष्ट्र में भी उग्र से उग्रत्तर हो गयी, इसी के कारण त्रिभाषा नीति को महाराष्ट्र में लगा झटका दुखद और अफसोसजनक है। आखिरकार राजनीतिक दबाव, लंबी रस्साकशी और कशमकश के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई से जुड़े मुद्दे पर यू-टर्न लेते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए। विदित हो कि केंद्र सरकार की नीति के तहत महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना था। राजनीतिक आग्रहों एवं दुराग्रहों के चलते अब ऐसा नहीं हो पाएगा। मतलब, महाराष्ट्र को तीसरी भाषा के रूप में भी हिंदी मंजूर नहीं है। महाराष्ट्र में हिंदी का संकट वास्तव में एक गहरे सामाजिक-राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। यह केवल भाषाई नहीं, बल्कि अस्म...
आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?

आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?

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आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों? आज भारतवर्ष ही नहीं पूरा विश्व अर्थ अर्थात् भौतिकवाद की दौड़ में भाग रहा है। धर्म और काम नियन्त्रित नहीं है अत: अमर्यादित एषणाएँ पल्लवित, फलित एवं पुष्पित हो रही है। आबाल-वृहद, नर-नारी कामाचार अभक्ष्यभक्षण आदि दुष्ट प्रवृत्तियों का शिकार हो रहे हैं, व्यक्ति, समाज, देश एवं राष्ट्र के प्रति अपने पावन-पवित्र कर्तव्य से विमुख से दिखाई देते हैं। हम जहाँ कहीं थोड़ी बहुत धार्मिकता या आध्यात्मिकता के दर्शन करते हैं, देखा जाए तो वास्तव में वहाँ भी उनके आवरण में पाखण्ड, दम्भ दिखावा ही दिखाई देता है। इस विषम दु:खदायी-पीड़ादायी परिस्थिति में श्रीहनुमानजी की उपासना-भक्ति ही संजीवनी बूटी है।श्री हनुमानजी के चरित्र से बुद्धि, विवेक, शक्ति, अभिमान से मुक्ति एवं माता-पिता ही नहीं राष्ट्र की सेवा एवं समर्पण की भावना का उदय होगा। श्रीहनुमानजी के चरित्र से नई ...
उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

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उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा-ः ललित गर्ग:- मानव एवं जीव-जंतुओं का जीवन भूमि पर निर्भर है। फिर भी, पूरी दुनिया में प्रदूषण, भूमि का दोहन, जलवायु अराजकता और जैव विविधता विनाश का एक जहरीला मिश्रण स्वस्थ भूमि को रेगिस्तान में बदल रहा है और संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र मृत क्षेत्रों में बदल रहा है। ‘हमारी भूमि’ नारे के तहत भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण आज की जलवायु समस्याओं का सटीक समाधान हो सकता है,  इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस 17 जून को मनाया जाता है। यह दिन मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने और लोगों को एकजुट करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है ‘भूमि के लिए एकजुट। हमारी विरासत। हमारा भविष्य’ है, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह दिवस पर भूमि के महत्व और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता पर प्रका...
मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

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मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो-ः ललित गर्ग:- ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में पैसे लेकर दर्शन कराने वाले बाउंसरों की गिरफ्तारी के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में सुगम दर्शन के नाम पर एक साथ इक्कीस लोगों की गिरफ्तारी जहां मंदिर प्रशासन की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, वही ईश्वर के दरबार में पांव फैला रहा भ्रष्टाचार गहन चिन्ताजनक एवं शर्मनाक हैं। कुछ ही दिनों पहले ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर मंदिर में भक्तों से वीआइपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली करने पर प्रशासन ने एक होमगार्ड जवान और दो पंडितों पर कार्रवाई की है। देश-विदेश  के भक्त अगाध श्रद्धा से अपने आराध्य का दर्शन करने आते हैं, लेकिन देश के प्रमुख मन्दिरों में सीधे दर्शन कराने के नाम पर पैसों की लूट मची है या वीआईपी संस्कृति के नाम पर त्रासद एवं भेदभावपूर्ण स्थितियां पसरी है। सवाल यह पूछा जा रहा है कि हिंदुओं के धार्मिक स्थलों ...
पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

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अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस- 15 जून, 2025पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है- ललित गर्ग- भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा माना गया है, पिता की धर्म है, पिता ही संबल है, पिता ही ताकत है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस यानी फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल 15 जून 2025 को भारत समेत विश्वभर में यह दिवस मनाया जायेगा। फादर्स डे 2025 का आधिकारिक थीम ‘पिताः लचीलेपन का पोषण और भविष्य को आकार देना’ है। यह थीम हमारे जीवन में पिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है, जो बच्चों में सकारात्मक भावनाओं और सामाजिक विकास को बढ़ावा देते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन और विविध...
केरल में भारत माता का अपमान यह केवल चित्र नहीं देश की आत्मा पर चोट है!

केरल में भारत माता का अपमान यह केवल चित्र नहीं देश की आत्मा पर चोट है!

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केरल में भारत माता का अपमान यह केवल चित्र नहीं देश की आत्मा पर चोट है! अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार भारत माता… एक ऐसा नाम, एक ऐसा भाव, जो करोड़ों भारतीयों के दिल की धड़कन है। जब कोई "भारत माता की जय" बोलता है, तो ये केवल एक नारा नहीं होता, बल्कि एक ऐसी पुकार होती है, जिसमें देशभक्ति, श्रद्धा और मातृत्व का गहरा बोध समाहित होता है। लेकिन दुर्भाग्य देखिए, उसी भारत माता की तस्वीर अब देश के भीतर विवाद की जड़ बन रही है। जिस तस्वीर के सामने स्वतंत्रता सेनानी सिर झुकाकर बलिदान की प्रेरणा लेते थे, उसे देखकर अब केरल के एक मंत्री की आंखें चुभने लगी हैं। केरल के कृषि मंत्री पी प्रसाद ने पर्यावरण दिवस पर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम का सिर्फ इसलिए बहिष्कार कर दिया क्योंकि मंच पर भारत माता की तस्वीर लगी थी। यह घटना एक प्रतीक भर नहीं है, यह उस वैचारिक युद्ध की प्रत्यक्ष झलक है जो अब भारत की आत्मा से टक...
बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

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बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान यज्ञ हमारी भारतीय संस्कृति में वैदिक काल से चला आ रहा एक धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान है। यज्ञ परम्परा का वर्णन हमारे प्राचीन वैदिक ग्रन्थों तथा ब्राह्मण ग्रन्थों में सविस्तार उपलब्ध होता है। सर्वाधिक वर्णन यजुर्वेद में प्राप्त होता है। प्राचीन समय में प्राकृतिक विपदाओं से बचने, अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने और तत्कालीन प्राकृतिक देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बहुतायत से यज्ञ किए जाते थे। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार ब्रह्माजी ने मानव को सहयोग देकर यज्ञ परम्परा को प्रारम्भ किया। ऋग्वेद में कहा गया है 'अग्रिमीडे पुरोहितं।Ó अग्रि को यज्ञ के मुँह की संज्ञा दी गई है अत: अग्रि में आहूति दी जाती है। यज्ञ ही विद्वानों के अनुसार श्रेष्ठतम कर्म है। गायत्री को माता तथा यज्ञ को पिता कहा गया है। विद्वानों ने यह भी कहा है 'यज्ञो वै विष्णु:वैदिककालीन प्राकृति...
भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर | संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025

भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर | संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025

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संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025 भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर- ललित गर्ग - भारतीय संत परम्परा और संत-साहित्य में संत कबीर एक महान् हस्ताक्षर, समाज-सुधारक, अध्यात्म की सुदृढ़ परम्परा के संवाहक एवं अनूठे संत हैं। जब भारतीय समाज और धर्म का स्वरूप रूढ़ियों एवं आडम्बरों में जकड़ा एवं अधंकारमय था, एक तरफ मुसलमान शासकों की धर्मांधता से जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी और दूसरी तरफ हिंदूओं के कर्मकांडों, विधानों एवं पाखंडों से धर्म-बल का हृास हो रहा था, तब संत कबीर एक रोशनी बनकर समाज को दिशा दी। कबीर ने मानव चेतना के विकास के हर पहलू को उजागर किया। श्रीकृष्ण, श्रीराम, महावीर, बुद्ध, जीसस के साथ-ही-साथ भारतीय अध्यात्म आकाश के अनेक संतों-आदि शंकराचार्य, नानक, रैदास, मीरा आदि की परंपरा में कबीर ने धर्म की त्रासदी एवं उसकी चुनौतियों को समाहित करने का अनूठा कार्य किया। जीवन का ऐसा कोई ...
पाकिस्तान को अपने नागरिकों के हित में अपनी भारत विरोधी नीति को छोड़ना ही होगा

पाकिस्तान को अपने नागरिकों के हित में अपनी भारत विरोधी नीति को छोड़ना ही होगा

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पाकिस्तान को अपने नागरिकों के हित में अपनी भारत विरोधी नीति को छोड़ना ही होगा पाकिस्तान के जन्म के साथ ही वहां के राष्ट्रीय दलों एवं नेताओं ने भारत विरोध को अपनी अधिकारिक नीति बना लिया था। पाकिस्तान के आर्थिक विकास पर ध्यान नहीं देते हुए, किसी भी प्रकार भारत के हितों को क्षति पहुंचाई जाए, इस बात पर अधिक ध्यान दिया गया। भारत को हानि पहुंचाने के उद्देश्य से पाकिस्तान द्वारा कई आतंकवादी संगठन खड़े किए जाते रहे एवं इन संगठनों के आतंकवादी सदस्यों ...