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रक्षा क्षेत्र में भारत की छलांग

रक्षा क्षेत्र में भारत की छलांग

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रक्षा क्षेत्र में भारत की छलांग भारतीय मिसाइलों व रक्षा उपकरणों का बज रहा दुनिया में डंकामृत्युंजय दीक्षितप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सर्वांगीण विकास के पथ पर बढ़ता हुआ आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। रक्षा क्षेत्र भी इस धारा से अछूता नहीं है इसमें भी अहम और व्यापक परिवर्तन दिख रहा है । 2014 के पूर्व मात्र एक दशक पूर्व तक भारत की पहचान रक्षा उपकरणों के खरीदार की हुआ करती थी। रक्षा खरीद में घोटालों के समाचार आना सामान्य बात थी फिर भी ख़रीदे गए हथियारों की समय पर आपूर्ति नहीं होती थी। मोदी जी के नेतृत्व में ये परिस्थितियाँ तीव्रता के साथ बदल रही हैं। अब भारत जल, थल और नभ तीनों सेनाओं के सभी अंगों को सुदृढ़ करने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहा है जिससे रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और बल दोनों निरंतर बढ़ रहे हैं। भारत के रक्षा वैज्ञानिक निरंतर शोध में में व्यस्त ...
वक्फ़ के आतंक और लूट से मिली गरीब मुसलमानों को मुक्ति

वक्फ़ के आतंक और लूट से मिली गरीब मुसलमानों को मुक्ति

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वक्फ़ के आतंक और लूट से मिली गरीब मुसलमानों को मुक्तिमृत्युंजय दीक्षितस्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संसदीय इतिहास में हुई सबसे लंबी बहस के बाद ऐतिहासिक वक्फ़ संशोधन विधेयक -2025 पारित हुआ, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और अधिसूचना जारी होने के बाद अब यह कानून बन चुका है। कुछ लोग इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट गए हैं जहाँ केंद्र सरकार ने एक कैविएट दाखिल करते हुए कहा है कि बिना उसकी बात सुने कोर्ट कोई फैसला न सुनाए। वक्फ़ संशोधन कानून बन जाने के बाद भी उस पर पक्ष और विपक्ष की राजनीति का दौर जारी है। संसद में बहस व संसदीय गणित में हार जाने के बाद मुस्लिम तुष्टिकरण में संलिप्त ऐसे -ऐसे संगठन याचिकाएं लेकर जा रहे हैं जो राष्ट्रद्रोह के अंतर्गत प्रतिबंधित हैं या उनके खिलाफ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के तहत मुकदमे चल रहे हैं। यह समाचार पुष्ट होने के साथ ही कि सरकार संसद के बजट सत्र में ही वक्फ़ विधेयक पारित...
भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने हेतु सांस्कृतिक संगठनों को भी विशेष भूमिका निभानी होगी

भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने हेतु सांस्कृतिक संगठनों को भी विशेष भूमिका निभानी होगी

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भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने हेतु सांस्कृतिक संगठनों को भी विशेष भूमिका निभानी होगी प्रहलाद सबनानी  प्राचीनकाल में भारत विश्व गुरु रहा है इस विषय पर अब कोई शक की गुंजाईश नहीं रही है क्योंकि अब तो पश्चिमी देशों द्वारा पूरे विश्व के प्राचीन काल के संदर्भ में की गई रिसर्च में भी यह तथ्य उभरकर सामने आ रहे हैं। भारत क्यों और कैसे विश्व गुरु के पद पर आसीन रहा है, इस संदर्भ में कहा जा रहा है कि भारत में हिंदू सनातन संस्कृति के नियमों के आधार पर भारतीय नागरिक समाज में अपने दैनंदिनी कार्य कलाप करते रहे हैं। साथ ही,  भारतीयों के डीएनए में आध्यतम पाया जाता रहा है जिसके चलते वे विभिन्न क्षेत्रों में किए जाने वाले अपने कार्यों को धर्म से जोड़कर करते रहे हैं। लगभग समस्त भारतीय, काम, अर्थ एवं कर्म को भी धर्म से जोड़कर करते रहे हैं। काम, अर्थ एवं कर्म में चूंकि तामसी प्रवृत्ति का ...
“जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी”, “मूर्ति की पूजा, विचारों की हत्या”, “हाथ में माला, मन में पाखंड”

“जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी”, “मूर्ति की पूजा, विचारों की हत्या”, “हाथ में माला, मन में पाखंड”

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"जयंती का शोर, विचारों से ग़ैरहाज़िरी", "मूर्ति की पूजा, विचारों की हत्या", "हाथ में माला, मन में पाखंड" बाबा साहेब की विरासत पर सत्ता की सियासत, जयंती या सत्ता का स्वार्थी तमाशा? बाबा साहब के विचारों—जैसे सामाजिक न्याय, जातिवाद का उन्मूलन, दलित-पिछड़ों को सत्ता में हिस्सेदारी, और संविधान की गरिमा की रक्षा—को आज के राजनेता पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। राजनीतिक दल केवल वोट बैंक के लिए अंबेडकर की जयंती मनाते हैं, जबकि वे उनके विचारों से कोसों दूर हैं। जिन मुद्दों के लिए बाबा साहब ने जीवन भर संघर्ष किया—जैसे आरक्षण की सामाजिक भूमिका, जातिगत जनगणना, आर्थिक आधार पर प्रतिनिधित्व—उन्हें आज भी दरकिनार किया जा रहा है। संसद और विधानसभाओं में पूंजीपतियों, सेलेब्रिटीज़ को भेजा जा रहा है, जबकि वंचित वर्ग हाशिए पर है। क्या बाबा साहब की आत्मा तब तक संतुष्ट हो सकती है जब तक उनके सपनों का भारत साका...
जंगलों पर छाया इंसानों का आतंक: एक अनदेखा संकट

जंगलों पर छाया इंसानों का आतंक: एक अनदेखा संकट

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प्रियंका सौरभ जंगलों पर छाया इंसानों का आतंक: एक अनदेखा संकट हाल ही में एक प्रमुख अखबार की हेडलाइन ने ध्यान खींचा—“शहर में बंदरों और कुत्तों का आतंक।” यह वाक्य पढ़ते ही एक गहरी असहजता महसूस हुई। शायद इसलिए नहीं कि खबर गलत थी, बल्कि इसलिए कि वह अधूरी थी। सवाल यह नहीं है कि जानवर शहरों में क्यों आ गए, बल्कि यह है कि वे जंगलों से क्यों चले आए? हम जिस "आतंक" की बात कर रहे हैं, वह वास्तव में प्रकृति का प्रतिवाद है—उस दोहरी मार का नतीजा जो हमने जंगलों और वन्यजीवों पर एक लंबे अरसे से चलाया है। विकास के नाम पर हमने जंगलों को काटा, नदियों को मोड़ा, और पहाड़ों को तोड़ा। वन्यजीवों के लिए न तो रहने की जगह छोड़ी, न भोजन का साधन। जब उनका प्राकृतिक निवास उजड़ गया, तब वे हमारी बस्तियों की ओर बढ़े। और अब, जब वे हमारी छतों, गलियों और पार्कों में दिखते हैं, तो हम उन्हें ‘आतंकी’ करार देते हैं। यह नजरिय...
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं

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न्यायपालिका में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं, विनीत नारायण भारत के इतिहास में पहली बार सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस रामस्वामी पर अनैतिक आचरण के चलते 1993 मेंसंसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। पर कांग्रेस पार्टी ने मतदान के पहले लोकसभा से बहिर्गमन करके उन्हेंबचा लिया। 1997 में मैंने भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे एस वर्मा के अनैतिक आचरण को उजागरकिया तो सर्वोच्च अदालत, संसद व मीडिया तूफ़ान खड़ा हो गया था। पर अंततः उन्हें भी सज़ा के बदले तत्कालीनसत्ता व विपक्ष दोनों का संरक्षण मिला। 2000 में एक बार फिर मैंने भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डॉ ए एसआनंद के छह ज़मीन घोटाले उजागर किए तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ये मामला चर्चा में रहा व तत्कालीन क़ानून मंत्रीराम जेठमलानी की कुर्सी चली गई। पर तत्कालीन बीजेपी सरकार ने विपक्ष के सहयोग से उन्हें सज़ा देने के बदलेभारत के मानव...
जैसे कर्म वैसा फल, बंद हो गई हिंडनबर्ग

जैसे कर्म वैसा फल, बंद हो गई हिंडनबर्ग

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जैसे कर्म वैसा फल, बंद हो गई हिंडनबर्गमृत्युंजय दीक्षितअमेरिका में भारत समर्थक नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के पूर्व ही अमेरिका से भारत हित के दो महत्वपूर्ण समाचार प्राप्त हुए हैं, जिनके कारण जहां एक और भारतीय शेयर बाजार में आनंदोत्सव मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक हलकों में निराशा व दुख का वातवरण है। जिस कंपनी की रिपोर्ट को आधार मानकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में संपूर्ण विपक्ष हर चुनाव में अंबानी -अडाणी,अंबानी -अडाणी की रट लगा रहा था अब वह कंपनी ही बंद हो गई है। अमेरिका से दूसरा समाचार यह है कि अमेरिका ने भारत पर लगे परमाणु प्रतिबंधो को समाप्त कर दिया है।लोकसभा, उसके बाद हुए विधान सभा चुनावों के बाद संसद के विगत शीतकालीन सत्र में भी विपक्ष ने अडाणी का मुद्दा उठाकर सदन की कार्यवाही तक नहीं चलने दी। राहुल गांधी ने एक पोस्टर जारी किया, जि...
बहुकोणीय दिल्ली विधानसभा चुनावों में रेवड़ियों पर दाँव

बहुकोणीय दिल्ली विधानसभा चुनावों में रेवड़ियों पर दाँव

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बहुकोणीय दिल्ली विधानसभा चुनावों में रेवड़ियों पर दाँवमृत्युंजय दीक्षितवर्ष 2025 का पहला विधानसभा चुनाव देश की राजधानी दिल्ली में होने जा रहा है। दिल्ली में विगत दस वर्षों से आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व्यक्तिगत और आप पार्टी के संयोजक के रूप में शराब घोटाले के मुख्य आरोपी हैं तथा सुप्रीम कोर्ट की दया पर जमानत पर घूम रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी शर्तों के बाद भी वह जनता के बीच लोकलुभावन घोषणाएं कर जनता को गुमराह कर रहे हैं कि मानो कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया हो। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया सहित कई अन्य मंत्री व विधायक जेल यात्रा कर चुके हैं तथा कई पर गंभीर आरोपों के चलते जमानत पर हैं।आप सरकार के दो विधायकों पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या को बसाने के मामले में गहन जांच चल रही है। अरविंद केजरीवाल पर शीशमहल जैसे कई अन्य घोटालों के भी दाग ...
महिला सशक्तिकरण की दौड़ जीतती भारतीय रेलवे

महिला सशक्तिकरण की दौड़ जीतती भारतीय रेलवे

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महिला सशक्तिकरण की दौड़ जीतती भारतीय रेलवे(पुरुषों के गढ़ तोड़ने वाली "प्रथम महिलाओं" को पहचानने की आवश्यकता) कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नियुक्तियों के नवीनतम दौर के साथ पहली बार रेलवे बोर्ड में महिलाएँ ड्राइवर की सीट पर हैं। कांच की छत को तोड़ते हुए, रेलवे बोर्ड का नेतृत्व पहले से ही एक महिला द्वारा किया जा रहा है, अब संचालन और व्यवसाय विकास के प्रभारी एक महिला सदस्य हैं और उसी रैंक की एक अन्य महिला सदस्य वित्त सदस्य के रूप में वित्त की देखभाल करती हैं। महिला सशक्तिकरण को प्रेरित करने के एक अन्य तरीके में, भारतीय रेलवे ने एक पूरी ट्रेन और रेलवे स्टेशन महिलाओं को समर्पित करना शुरू किया। मणिनगर रेलवे स्टेशन (गुजरात) और माटुंगा रोड स्टेशन (मुंबई, महाराष्ट्र) का प्रबंधन महिला कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। महाराष्ट्र के नागपुर में स्थित अजनी रेलवे स्टेशन की सफाई, ट्रैक की खराबी का पता लगाने...
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस को मात दे पायेगा भारत ?

ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस को मात दे पायेगा भारत ?

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ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस को मात दे पायेगा भारत ? भारत को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पहलों के माध्यम से निगरानी, निदान और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करके मानव मेटान्यूमोवायरस जैसे उभरते वायरल खतरों से निपटने के लिए अपने नियामक ढांचे को बढ़ाना चाहिए। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ-साथ वैक्सीन और एंटीवायरल अनुसंधान में निवेश से ऐसे प्रकोपों को कम करने में मदद मिलेगी। कमजोर आबादी की सुरक्षा और एचएमपीवी प्रसार को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। -- डॉo सत्यवान सौरभ, मानव मेटान्यूमोवायरस एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभरा है, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और प्रतिरक्षाविहीन व्यक्तियों जैसे कमजोर आबादी के लिए। पहली बार 2001 में पहचाना गया, मानव मेटान्यूमोवायरस दुनिया भर में महत्वपूर्ण श्वसन संक्रमण का कारण बनता है, जिससे अस्पता...