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भारत के लिए खतरा है चीन—ईरान गठजोड़

भारत के लिए खतरा है चीन—ईरान गठजोड़

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भारत के पड़ौसी देशों में चीन का दबदबा पहले से बढ़ा हुआ है लेकिन अब उसने ईरान पर भी डोरे डाल दिए हैं। अब वह ईरान में 400 बिलियन डाॅलर की पूंजी लगाएगा। अगले 25 साल के दौरान होनेवाले इस विनियोग से ईरान में क्या-क्या नहीं होगा ? सड़कें बनेंगी, रेलें डलेंगी, बंदरगाह खड़े होंगे, बैंकिंग और संचार को नए आयाम मिलेंगे, नए अस्पताल और स्कूल खुलेंगे। फौजी सहयोग बढ़ेगा। चीन ईरानी फौजियों को प्रशिक्षित करेगा, शस्त्रास्त्र देगा, जासूसी-सूचना का आदान-प्रदान करेगा और ‘आतंकवाद’, आदि से लड़ने में मदद करेगा। यह खबर निकली है, उस 18 पेज के दसतावेज़ से, जो न्यूयार्क टाइम्स में छपा है। कोई आश्चर्य नहीं कि चीन को ईरान अपना सामरिक अड्डा बनाने के लिए भी कोई जगह दे दे। यदि ऐसा हुआ तो चीन खाड़ी और पश्चिम एशिया के क्षेत्रों में अपना वर्चस्व कायम करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। वह ईरान को अपना अड्डा बनाकर अमेरिका के ‘पिट्ठुओं’ इस...
कोरोना कहर से बदली जिन्दगी को स्वीकारें

कोरोना कहर से बदली जिन्दगी को स्वीकारें

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कोरोना महासंकट ने हमारी सोच एवं संवेदना ही नहीं बदली बल्कि हमारा सम्पूर्ण जीवन बदल दिया है। जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा और लोकतंत्र व्यवस्था में सबसे बड़ा राष्ट्र, कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में अब तक सफल रहा हैं। हमने भी देशव्यापी लाॅकडाउन, सोशल डिस्टेंसिग, निजी स्वच्छता, संयम, आत्मबल जैसे उपायों से कोरोना वायरस के भयावह प्रसार को रोकने की कोशिश की है। सामुदायिक व्यवहार में इस संयम, स्व-विवेक, सादगी एवं अनुशासन के अभीष्ट परिणाम भी मिले हैं। जहां-जहां इन उपायों का कड़ाई से पालन किया गया है, वहां पर रोगियों की संख्या तथा मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। इसके विपरीत जहां इन उपायों का उल्लंघन या उनके पालन में ढिलाई बरती गई, वहां पर रोगियों की संख्या में तेजी देखी गई है। अब कोरोना असली चुनौती बन रहा है। अभी हमें पूरी सावधानी एवं सतर्कता बरतनी होगी, अन्यथा कोरोना क...
Drug Discovery Hackathon training programme launched

Drug Discovery Hackathon training programme launched

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New Delhi, Jul 14 (India Science Wire): The Drug Discovery Hackathon (DDH), 2020 training programme kick-started with lectures on different topics. It is an online platform to take open source drug discovery to a higher pedestal in the crusade against the COVID-19 pandemic. Dr Shekhar C. Mande, Director General, Council of Scientific and Industrial Research (DG-CSIR) delivered a lecture on “Rational Drug Design: An Overview”. He laid emphasis on target identification and validation, assay development, virtual screening (VS), high throughput screening (HTS), quantitative structure-activity relationship (QSAR) and refinement of compounds, characterization of prospective drugs, testing on animals for activity and side effects, clinical trials and Food and Drug Administration (FDA) app...
प्राकृतिक रूप से करें दिल की बीमारियों की रोकथाम:  कोविड 19 की महामारी में

प्राकृतिक रूप से करें दिल की बीमारियों की रोकथाम: कोविड 19 की महामारी में

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जबसे कोरोना की महामारी की शुरुआत हुई है, तबसे दिल की बीमारियों से लोगों का ध्यान हट गया है। हालांकि, विश्व स्तर पर हार्ट अटैक के कारण मृत्युदर और बीमारी की दर को अक्सर अनदेखा किया जाता है, लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे देश हैं जिन्हें इसके मृत्युदर के प्रकोप का आज भी सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ जहां अधिकतर देशों का मुख्य लक्ष्य कोविड19 के लिए वैक्सीन बनाना है , तो दूसरी ओर लोगों को इसकी रोकथाम के तरीकों के बारे में बताया जा रहा है, जैसे कि सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन, हांथ धोना, किसी से हाथ न मिलाना आदि। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 5.4 लाख मृत्युदर के साथ विश्वस्तर पर अबतक 1.2 करोड़ लोग कोरोना के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। वहीं भारत में 20,000 मृत्यु दर के साथ अबतक 7.4 लाख मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बावजूद इसके, कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) और दिल की अन्य बीमारियों की तुलना में कोरोना के...
क्या होना चाहिए शिक्षा सत्र का इस वर्ष?

क्या होना चाहिए शिक्षा सत्र का इस वर्ष?

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कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण देश  के विभिन्न शिक्षा संस्थानो में पढ़ रहे 30  करोड़ छात्र छात्राऐ अनिश्चय के दौर से गुज़र रहे हैं। इनमे से बारहवीं तक के तीन चौथाई को तो ऑनलाइन शिक्षा भी नहीं मिल पा रही है, तो उच्च शिक्षा में यह आँकड़ा लगभग आधे का है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सामान्यतः अप्रेल से अगस्त तक प्रवेश चलते हैं व इनके बीच जुलाई व अगस्त में कक्षायें प्रारम्भ हो जाती हैं। इस बर्ष स्थिति बिगड़ी हुई है। उच्च शिक्षा संस्थानो में नए प्रवेशों का टोटा है। बड़ी मुश्किल से विभिन्न शिक्षा बोर्डों के बारहवीं के परिणाम आए हैं किंतु छात्र व उनके माता पिता धर्म संकट में हैं। वे अपने बच्चो को उच्च शिक्षा संस्थानो में प्रवेश दिलाने से हिचक रहे हैं क्योंकि : १) उनको डर है कि कॉलेज में सत्र शुरू होने पर कोरोना संकट के कारण वे अपने बच्चे को केम्पस में केसे भेजें? २) उनको लग रहा है कि ये संस्थान ...
ईरान को चीनी प्रलोभन

ईरान को चीनी प्रलोभन

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाड ट्रंप की कृपा कुछ ऐसी है, जो ईरान को चीन की गोद में बिठा देगी। ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने एक 18 पृष्ठ का दस्तावेज उजागर किया है, जिससे पता चलता है कि ईरान में चीन अगले 25 साल में 400 बिलियन डाॅलर्स का विनियोग करेगा। इस पैसे का इस्तेमाल किस-किस क्षेत्र में घुसने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, यह जानकर ही आप दंग रह जाएंगे। ईरान में रेलें, सड़कें, पुल, बंदरगाह आदि के निर्माण में तो चीनी पूंजी लगेगी ही, चीन का बस चलेगा तो वह ईरान की बैंकों, दूर-संचार और फौजी जरुरतों पर भी अपना वर्चस्व कायम करना चाहेगा। ईरान के जरिए वह दक्षिण और मध्य एशिया के राष्ट्रों में अपनी सामरिक उपस्थिति बढ़ाने की पूरी कोशिश करेगा। दक्षिण एशिया के साथ 2000 तक चीन का व्यापार सिर्फ 5.57 बिलियन डाॅलकर का था, पिछले 18-19 साल में वह 23 गुना बढ़कर 127.36 बिलियन डाॅलर का हो गया है। पाकिस्तान पर तो चीन की पकड़ काफी म...
यह कैसा अंकशास्त्र?

यह कैसा अंकशास्त्र?

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सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा का रिजल्ट आया है। 2 बच्चों ने 500 में से 500 अंक हासिल किये हैं। बच्चे बधाई के पात्र हैं। मौजूदा शिक्षा व्यवस्था रुलाई की पात्र है। पेपर सेट करने वाले दुहाई के पात्र हैं  और कॉपियाँ जाँचने वाले कुटाई के पात्र हैं।  जिस बोर्ड के अंतर्गत पढ़ रहे बच्चे 500 में से 499 अंक ले आएं उस बोर्ड के मेम्बरान को साइकिल के नीचे कूद कर जान दे देनी चाहिए। जिस पेपर में बच्चों के 100 में से 100 अंक आएँ, उसकी पेपर सेटर समिति के हर सदस्य को मुँह खोलकर अंदर थोड़ा थोड़ा काला हिट स्प्रे करना चाहिए। चुल्लू भर पानी भी इनके लिए ज्यादा होगा। ये अंक बच्चों की प्रतिभा की निशानी कत्तई नहीं हैं, ये एक पूरी शिक्षा व्यवस्था की दिमागी रूप से दिवालिया हो जाने की निशानी है। और कॉपी जांचने वाले महानुभावों के कहने ही क्या? ये अंक कुबेर जन्म नहीं अवतार लेते हैं। हिंदी के प्रश्नपत्र  में ...

भारत के लिए नया सिरदर्द

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इन दिनों मुसीबतों के कई छोटे-मोटे बादल भारत पर एक साथ मंडरा रहे हैं। कोरोना, चीन और तालाबंदी की मुसीबतों के साथ-साथ अब लाखों प्रवासी भारतीयों की वापसी के आसार भी दिखाई पड़ रहे हैं। इस समय खाड़ी के देशों में 80 लाख भारतीय काम कर रहे हैं। कोरोना में फैली बेरोजगारी से पीड़ित सैकड़ों भारतीय इन देशों से वापस भारत लौट रहे हैं। यह उनकी मजबूरी है लेकिन बड़ी चिंता का विषय यह है कि इन देशों के शासकों पर दबाव पड़ रहा है कि वे विदेशी कार्मिकों को भगाएं ताकि स्थानीय लोगों के रोजगार में बढ़ोतरी हो सके। इन देशों के कई उच्चपदस्थ शेखों से आजकल जब मेरी बात होती है तो वे यह कहते हुए पाए जाते हैं कि उनके बच्चे अभी-अभी विदेशों से पढ़कर लौटे हैं लेकिन अपने ही देश में सब अच्छी नौकरियों पर विदेशियों ने कब्जा कर रखा है। इस प्रपंच पर इधर सबसे पहले ठोस हमला किया है, कुवैत ने। कुवैत में कुवैतियों की संख्या सिर्फ 13 लाख है जब...
आहत भावनाओं का comfort zone

आहत भावनाओं का comfort zone

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मशहूर सिटकॉम Big Bang Theory के एक एपिसोड में उसका एक किरदार Howard बताता है कि इस हफ्ते वो मशहूर भौतिक विज्ञानी Stephen Hawking से काम के सिलसिले में मिलने वाला है। दोस्तों के इस बारे में बताते हुए Howard, Hawking की मिमिक्री भी करके दिखाता है। हम सभी जानते हैं कि 21 साल की उम्र में Hawking मोटर न्यूरॉन डिसीज का शिकार हो गए थे और वो स्पीच सिंथेसाइजर की मदद से बोलते थे जिसके कारण उनकी आवाज़ अलग तरह से सुनाई देती थी। हॉकिंग की मिमिक्री करते हुए Howard उनके इसी अलग अंदाज़ की नकल करता है। अब आप सोचिए एक शख्स जो पिछले सौ सालों का महानतम भौतिक विज्ञानी हैं। जो बचपन की एक बीमारी की वजह से अपनी आवाज़ खो बैठा है। एक मशहूर सिटकॉम शो के क्रिएटर उसे अपने शो में सेलिब्रीटी की हैसियत से बुलाते हैं और इतनी छूट भी ले लेते हैं कि बीमारी से उपजी उसकी एक कमज़ोरी का मज़ाक भी उड़ा पाएं! और उससे...
क्या विज्ञान पर राजनैतिक हस्तक्षेप भारी पड़ रहा है?

क्या विज्ञान पर राजनैतिक हस्तक्षेप भारी पड़ रहा है?

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भारत सरकार के भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद (आईसीएमआर) ने 2 जुलाई 2020 को कहा था कि 15 अगस्त 2020 (स्वतंत्रता दिवस) तक कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) से बचाव के लिए वैक्सीन के शोध को आरंभ और समाप्त कर, उसका "जन स्वास्थ्य उपयोग" आरंभ किया जाए. क्योंकि यह फरमान भारत सरकार के सर्वोच्च चिकित्सा शोध संस्था से आया था, इसलिए यह अत्यंत गंभीर प्रश्न खड़े करता है कि क्या विज्ञान पर राजनैतिक हस्तक्षेप ने ग्रहण लगा दिया है? भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद ने अगले दिन ही स्पष्टीकरण दिया कि उसने यह पत्र इस आशय से लिखा था कि वैक्सीन शोध कार्य में कोई अनावश्यक विलम्ब न हो. परन्तु सबसे बड़े सवाल तो अभी भी जवाब ढूंढ रहे हैं. पिछले सप्ताह एक संसदीय समिति को विशेषज्ञों ने बताया कि वैक्सीन संभवत: 2021 में ही आ सकती है (15 अगस्त 2020 तक नहीं). विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामी...