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मोदी ने व्हाइट हाउस में ऐसा क्या किया कि भावुक हो गए बाइडन ? मोदी के उपहार की क्या थी खासियत ?*

मोदी ने व्हाइट हाउस में ऐसा क्या किया कि भावुक हो गए बाइडन ? मोदी के उपहार की क्या थी खासियत ?*

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूबी है कि वे मौके पर चौका लगाने से कभी नहीं चूकते। यही काम उन्‍होंने भारतीय समय के अनुसार गुरुवार की सुबह कर दिखाया। अमेरिकी समय के मुताबिक प्रधानमंत्री बुधवार की रात व्‍हाइट हाउस में अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्‍नी डॉ. जिल बाइडेन के खास मेहमान थे। किसी भी राष्‍ट्राध्‍यक्ष के लिए यह खास सम्‍मान होता है और यह अमेरिका के साथ नजदीकी का भी प्रतीक होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर बाइडेन दंपत्‍ति के लिए खास उपहार चुने थे। उन्‍होंने जिल बाइडेन को 7.5 कैरेट का भारतीय लैब में बना हीरा प्रदान किया। लेकिन, राष्‍ट्रपति बाइडेन के लिए वह जो उपहार लेकर गए, वह अपने आप में न केवल अनूठा था, बल्‍कि उसके माध्‍यम से प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्‍कृति के जिस पहलू से बाइडेन को रुबरू कराया, उसने अमेरिकी राष्‍ट्रपति को गदगद कर दिया। आप भी सोच रहे होंगे कि ब...
वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस

वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस

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वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस- 24 जून, 2023स्वाभिमान एवं शौर्य की प्रतीक थी दुर्गावती-ः ललित गर्ग:-भारत का इतिहास महिला वीरांगनाओं के शौर्य, शक्ति, बलिदान, स्वाभिमान एवं प्रभावी शासन व्यवस्था के लिये दुनिया में चर्चित है। इन वीरांगणाओं ने जहां हिंदू धर्म, संस्कृति एवं विरासत को प्रभावित किया, वहीं इन्होंने संस्कृति, समाज और सभ्यता को नया मोड़ दिया है। अपने युद्ध कौशल एवं अनूठी शासन व्यवस्था से न केवल भारत के अस्तित्व एवं अस्मिता की रक्षा की बल्कि अपने कर्म, व्यवहार, सूझबूझ, स्वतंत्र सोच और बलिदान से विश्व में आदर्श प्रस्तुत किया है। भारतीय इतिहास ऐसी महिला वीरांगनाओं की गाथाओं से भरा हैं। लेकिन उनमें से केवल रानी दुर्गावती ऐसी विलक्षण, साहसी एवं कर्मयोद्धा साम्राज्ञी हैं जिन्हें उनके बलिदान, स्वाभिमान और वीरता के साथ गोंडवाना के एक कुशल शासक के तौर पर याद किया जाता है।  24 जून ...
सिविल सेवाएँ राज्य और समाज के बीच संपर्क पुल.

सिविल सेवाएँ राज्य और समाज के बीच संपर्क पुल.

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आईएएस अधिकारी रितु माहेश्वरी ने कानपुर में प्रचलित बिजली चोरी से निपटने के लिए नए बिजली स्मार्ट मीटर लगाए। प्राकृतिक, मानव और वित्तीय संसाधनों का विकास और जुटाना और विकासात्मक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उनका उचित उपयोग। मध्य प्रदेश में जिला कलेक्टर के रूप में पी नरहरि ने एक बाधा मुक्त वातावरण बनाने की दिशा में काम किया, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकलांग लोग सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से घूम सकें। विकास की प्रक्रिया में लोगों को शामिल करके विकासात्मक गतिविधियों के लिए उनका समर्थन सुरक्षित किया गया। समाज में हो रहे सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के प्रति उचित दृष्टिकोण से 'जनता की अधिकारी' के नाम से मशहूर आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल ने वारंगल में "फंड योर सिटी" नामक एक अभियान शुरू किया। उन्होंने निवासियों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद करने की अपील की, जि...
डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान

डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान

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23 जून 1953 सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान बंगाल से लेकर कश्मीर तक राष्ट्र रक्षा आदोलनों की लंबी श्रृंखला --रमेश शर्मा सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्राँतिकारी विचारक डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 23 जुलाई 1901 को बंगाल के अति प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था । उनके पिता आशुतोष मुखर्जी सुप्रसिद्ध शिक्षाविद् और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उन्हे अंग्रेजों ने "सर" की उपाधि से सम्मानित किया था । श्यामाप्रसाद जी की अधिकांश शिक्षा कलकत्ता में ही हुई । उन्होंने 1917 में मैट्रिक एवं 1921 में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की । 1923 में लॉ की उपाधि अर्जित करके वे विदेश चले गये और 1926 में लंदन से बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। अपने पिता का अनुसरण करते हुए उन्होंने भी अल्पायु में ही विद्याध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएँ अर्जित कीं।...
भारत पिछले 74 साल से एक कीड़े से पीड़ित था, जिसे मोदी सरकार ने खत्म कर दिया।

भारत पिछले 74 साल से एक कीड़े से पीड़ित था, जिसे मोदी सरकार ने खत्म कर दिया।

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विदेश मंत्री एस जयशंकर जी ने इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केवल 30 मिनट में इस पूरी समिति को अगले दस दिनों के भीतर भारत छोड़ने का आदेश दे दिया गया। संयुक्त राष्ट्र की एक समिति संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने भारत से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह कमेटी 1948 से भारत में काम कर रही थी और कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान के रवैए खासकर खुद भारत के रवैए पर पैनी नजर रख रही थी। काम करने, घूमने, रहने, खाने-पीने, उठने-बैठने का सारा खर्च भारत उठा रहा था। इस कमेटी ने भारत के खिलाफ काफी कड़े बयान दिए थे। उन्होंने कश्मीर को द्विपक्षीय मामला न बनाकर त्रिपक्षीय घोषित करने की कोशिश की और साथ ही भारत पर गंभीर आरोप लगाए: भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह के काम में बाधा डाल रहा है ताकि समिति ठीक से काम न कर सके। समिति यहीं नहीं रुकी, उन्होंने आ...
फ्रीबीज बनाम जनकल्याणकारी योजनाएं !

फ्रीबीज बनाम जनकल्याणकारी योजनाएं !

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आज राजनीति का स्तर लगातार गिरता चला जा रहा है। राजनीति का मतलब आज सेवा नहीं अपितु मेवा खाना हो गया है। देश में आजकल रेवड़ी कल्चर खूब प्रचलन में है।यह तथ्य आज किसी से भी छिपा हुआ नहीं कि रेवडिय़ां बांटने की राजनीतिक संस्कृति ने न जाने कितने देशों को तबाह किया है। आज राजनीति का मतलब है रेवड़ी कल्चर।आम आदमी को रेवड़ियां बांटकर वोट हथियाना शायद आज की राजनीति का प्रमुख हथियार हो गया है।एक समय था,जब लोग राजनीति में समाज सेवा,देश सेवा, सामाजिक सरोकारों के लिए आते थे। राजनीति का असली धर्म भी सेवा ही तो है लेकिन आज इसके उलट देखने को मिल रहा है और राजनीति आज तुच्छ राजनीति हो चली है, यहां स्वार्थ और लालच की नदियां बहती है, देश व समाज चाहे भाड़ में जाए,किसी को देश व समाज से कोई लेना देना अथवा कोई सरोकार नहीं रह गया है। सच तो यह है कि रेवड़ी कल्चर आज के राजनीतिक गलियारों का प्रमुख शब्द हो गया है,...
<strong>नेताजी सुभाष जीवित होते तो देश का बंटवारा न होने देते</strong>

नेताजी सुभाष जीवित होते तो देश का बंटवारा न होने देते

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आर.के. सिन्हा क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस जीवित होते तो पाकिस्तान कभी  बन पाता? यह बहस लंबे समय से चल रही है। इस विषय पर इतिहासकारों और विद्वानों में मतभेद भी रहे हैं।    अब इस बहस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि "अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिंदा होते तो भारत का बंटवारा नहीं होता।” क्या वे मोहम्मद अली जिन्ना को समझा पाते कि भारत के बंटवारे से किसी को कुछ लाभ नहीं होगा? यह सवाल अपने आप में काल्पनिक होते हुए भी महत्वपूर्ण हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन काल में ही अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान का प्रस्ताव पारित किया था। जिन्ना ने 23 मार्च, 1940 को लाहौर के बादशाही मस्जिद के ठीक आगे बने मिन्टो पार्क में जनसभा को संबोधित करते हुए अपनी घनघोर सांप्रदायिक सोच को प्रकट कर दिया था। जिन...
समान नागरिक संहिता का विरोध अनुचित

समान नागरिक संहिता का विरोध अनुचित

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अवधेश कुमारविधि आयोग द्वारा समान नागरिक संहिता या कॉमन सिविल कोड पर फिर से आम लोगों और धार्मिक संस्थाओं आदि का सुझाव मांगना स्पष्ट करता है कि अब इसके साकार होने का समय आ गया है। पिछले वर्ष ही गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि अब कॉमन सिविल कोड की बारी है। उसी समय लग गया था कि केंद्र सरकार इस दिशा में आगे बढ़ चुकी है। उत्तराखंड सरकार ने इसके लिए एक समिति का गठन किया था। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने भी समान नागरिक संहिता की बात की।फिर असम सरकार ने भी इसकी घोषणा की। कुल मिलाकर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों की ओर से धीरे-धीरे यह संदेश दिया जाता रहा है कि हमारे संविधान निर्माताओं ने भारत के लिए जिस समान नागरिक कानून का सपना देखा और संविधान में उसे शामिल किया उसको साकार करने का कार्य नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भीऔर प्रदेश की भाजपा सरकार है करने जा रही है।...
अमेरिका द्वारा चीन से विकासशील देश का दर्जा छीनने पर बौखलाहट

अमेरिका द्वारा चीन से विकासशील देश का दर्जा छीनने पर बौखलाहट

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हाल ही में हमारे पड़ोसी चीन ने विकासशील देश का दर्जा को दिया है। दरअसल, हाल ही में अमेरिका ने चीन से उसका ‘विकासशील देश’ का दर्जा छीन लिया है और अमेरिका के इस फैसले से चीन यानी कि ड्रैगन में बौखलाहट देखने को मिल रही है। वास्तव में चीन से विकासशील देश का दर्जा हटने से अब इसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना लगभग लगभग तय हो गया है। जानकारी देना चाहूंगा कि वर्तमान समय में  अमेरिका 26.854 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है। वहीं, चीन 19.374 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है‌। चीन के बाद जापान 4.410 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे नंबर और जर्मनी 4.309 ट्रिलियन के साथ चौथे नंबर पर है और इसके बाद भारत का नंबर आता है। अब चीन को विश्व बैंक(वर्ल्ड बैंक) और आईएमएफ यानी कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से कम ब्याज पर लोन नहीं मिल सकेगा। इस नये कानून से चीन की जीडीपी की ग्रोथ रेट और ...
पंजाब केसरी समूह के अख़बार नवोदय टाइम्स में कोचिंग उद्योग पर मेरा साक्षात्कार

पंजाब केसरी समूह के अख़बार नवोदय टाइम्स में कोचिंग उद्योग पर मेरा साक्षात्कार

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पंजाब केसरी समूह के अख़बार नवोदय टाइम्स में कोचिंग उद्योग पर मेरा साक्षात्कार आज प्रकाशित हुआ है। जगह की कमी के कारण कुछ अंश संपादित किए गए हैं। पाठको की रुचि के लिए मूल साक्षात्कार भी साथ में दे रहा हूँ। देश के प्रमुख कोचिंग संस्थान करियर प्लस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एवं डायलॉग इंडिया पत्रिका के संपादक अनुज अग्रवाल से नवोदय टाइम्स के बरिष्ठ संवाददाता अनिल सागर की कोचिंग उद्योग की दशा -दिशा पर गहन बातचीत - सरकार द्वारा कोचिंग संस्थानो पर नियंत्रण न होना आश्चर्यजनक - अनुज अग्रवाल प्रश्न : दिल्ली के मुखर्जी नगर के कोचिंग संस्थान में हालिया हुए अग्निकांड के बारे में आप क्या कहेंगे? उत्तर: देश में कोचिंग के सबसे बड़े हब दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक कोचिंग संस्थान में शार्ट सर्किट से लगी आग से बड़ा हादसा हो गया। दर्जनों छात्र घायल हो गए और अनेक ग़ायब हैं जिनके बारे में पुल...