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सामाजिक

मन ही सब कुछ है। आपको क्या लगता है आप क्या बनेंगे?

मन ही सब कुछ है। आपको क्या लगता है आप क्या बनेंगे?

सामाजिक, साहित्य संवाद
बुद्ध ने कहा कि - 'सभी समस्याओं का कारण उत्साह है' अर्थात इच्छा की अधिकता और इच्छा मन से आती है। इसलिए मन को नियंत्रित और संतुलित करना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति और शास्त्र हमें अपने मन को नियंत्रित करने के तरीके सिखाते हैं। संतुलित मन के लिए प्राचीन संत वर्षों से योग किया करते थे। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की भारत सरकार की पहल इस दिशा में एक और कदम है। यह मुहावरा - "मन ही सब कुछ है, जो आप सोचते हैं आप बन जाते हैं" सभी पहलुओं में सही है। इसलिए केवल एक स्वस्थ शरीर ही नहीं बल्कि एक स्वस्थ और प्रसन्न मन और आत्मा भी महत्वपूर्ण है। -डॉ सत्यवान सौरभ  हमारा दिमाग हमारे शरीर में सबसे शक्तिशाली तत्व है, हालांकि सबसे संवेदनशील भी है। हमारा शरीर जो भी कार्य करता है वह मन द्वारा निर्देशित होता है- हमारी गति, हमारी भावनाएं, भावनाएं और सबसे महत्वपूर्ण सोच और तर्क। मन की उपस्थिति के कारण ...
महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं 

महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी में बाधाएं 

BREAKING NEWS, सामाजिक
मौजूदा पितृसत्तात्मक मानदंड सार्वजनिक या बाजार सेवाओं को लेने में एक महत्वपूर्ण बाधा उत्पन्न करते हैं। चाइल्डकैअर और लचीले काम के मुद्दे को संबोधित करने से सकारात्मक सामाजिक मानदंडों को शुरू करने में मदद मिल सकती है जो अवैतनिक देखभाल और घरेलू काम के बोझ के पुनर्वितरण को प्रोत्साहित करते हैं। महिलाओं के कुशल लेकिन अवैतनिक कार्यों का एक बड़ा स्पेक्ट्रम अर्थव्यवस्था में सीधे योगदान देता है। फिर भी, 'काम' के लिए जिम्मेदार नहीं होने के कारण इसका अवमूल्यन महिलाओं की स्थिति को कमजोर करता है, जिससे उनकी भेद्यता बढ़ जाती है। सार्वजनिक सेवाओं में अवसर की समानता सुनिश्चित करके लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालाँकि, इन समाधानों का एक सीमित प्रभाव होगा जब तक कि प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार परिवर्तन को लक्षित न किया जाए। -प्रियंका सौरभ  जबकि शिक्षा और पोष...
शादी में जात व धर्म का बंधन क्यों?

शादी में जात व धर्म का बंधन क्यों?

सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* महाराष्ट्र सरकार ने एक 13 सदस्यीय आयोग बना दिया है, जिसका काम यह देखना है कि देश में जितनी भी अंतरजातीय और अन्तर्धामिक शादियां होती हैं, उन पर कड़ी निगरानी रखी जाए। यदि उनके रिश्तेदारों या पति-पत्नी के बीच हिंसा या अनबन की शिकायतें आएं तो उन पर ध्यान दिया जाए। इस आयोग की अध्यक्षता भाजपा के महिला और बालविकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा करेंगे। इस आयोग का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि इस तरह की शादियों पर कड़ी निगरानी रखकर यह आयोग उनके विवादों को सुलझाने की कोशिश करेगा और औरतों के अधिकारों की रक्षा करेगा। यह आयोग उक्त प्रकार की शादियों की सारी जानकारियां और आंकड़े भी इकट्ठे करेगा। इस अपने ढंग के आयोग की स्थापना देश में पहली बार महाराष्ट्र सरकार ने की है, जो भाजपा और शिवसेना (नई) के गठबंधन से बनी है। इन दोनों पार्टियों ने लव-जिहाद के खिलाफ जिहाद छेड़ रखा है। वास्तव में ...
रोको नौनिहालों को खुदकुशी करने से

रोको नौनिहालों को खुदकुशी करने से

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
आर.के. सिन्हा राजस्थान के कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए अन्य राज्यों से आए तीन नौजवानों के आत्महत्या करने की घटना को सुनकर दिल दहल जाता है। जिन बच्चों का अभी सारा जीवन संभावनाओं से भरा पड़ा हुआ था, उन्होंने अपनी जीवन लीला को यूँ ही एक झटके में खत्म कर लिया। मृतक छात्रों में दो बिहार और एक मध्यप्रदेश के रहने वाले थे, जिनकी उम्र 16, 17 और 18 साल थी। मृतक छात्रों में बिहार के रहने वाले दोनों छात्र अंकुश और उज्जवल एक ही हॉस्टल में रहते थे। एक इंजीनियरिंग की कोचिंग कर रहा था, वहीं दूसरा मेडिकल की तैयारी करता था। मध्यप्रदेश का छात्र प्रणव नीट की तैयारी करता था। कोटा या देश के अन्य भाग में नौजवानों द्वारा आत्म हत्या करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कुछ समय पहले कोटा में ही नीट की तैयारी कर रहे कोचिंग स्टूडेंट ने फंदा लगाकर खुदखुशी कर ली थी। उसके ...
आइये हम सभी अपने कचरे को सोने में बदले 

आइये हम सभी अपने कचरे को सोने में बदले 

Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, मल्टीमीडिया, सामाजिक
 गांधीजी ने कहा है- "इस दुनिया में हर व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है लेकिन हर किसी के लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। आइए हम एक ऐसी दुनिया बनाने की आशा करें जहां नफरत, युद्ध, क्रोध और हिंसा के मामले में कचरा न हो।" लेकिन अपनों के लिए प्यार, करुणा, सहनशीलता और हाथ में हाथ डालकर चलने का वादा ही खजाना है। इस तरह, हम सभी अपने कचरे को सोने में बदल पाएंगे। -डॉ सत्यवान सौरभ  महान पुरुष वे हैं जो कचरे को सोने में बदलने में सक्षम होते हैं। उनके पास जीवन में उस व्यापक दृष्टि की क्षमता होती है जिससे वे प्रतिकूल परिस्थितियों में संभावित लाभों का पूर्वाभास कर सकते हैं। गांधी जी एक ऐसे नेता थे जो विपरीत परिस्थितियों में उठे, भारत के लिए एक आदर्श दृष्टि रखते थे और बिना किसी हथियार के अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़े, तब भी जब लोग सोचते थे कि एक अहिंसक आंदोलन...
विवाह और सहजीव

विवाह और सहजीव

संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
ह्रदय नारायण दीक्षित विवाह और सहजीवन - लिव इन पर चर्चा हो रही है। वह भी विवाह पर कम और सहजीवन पर ज्यादा। वैसे विवाह में सहजीवन होता है। विवाह रहित कोरा सहजीवन या लिव इन अधूरा है। इस सहजीवन में कोई बंधन नहीं। यह स्वच्छंद है। सामान्य आकर्षण का कड़वा परिणाम है। आकर्षण का आधार रूप होता है। रूप अस्थाई होता है। आपस में कुछ आश्वासन, यथार्थ से दूर कोरी कल्पनाएं। न बैण्ड, न बाजा, न बरात। न माता पिता के आशीष। न वरिष्ठों का शुभकामना प्रसाद। न सामाजिक समर्थन। न मंगल गीत, - न उपहार। दो और सिर्फ दो का संवाद और सहजीवन की अंधी सुरंग में प्रवेश। यह उत्तर आधुनिकता का नशा है। कई अभिनेत्रियों ने लिव इन में फंस कर आत्महत्या भी की थी। सम्प्रति श्रद्धा हत्याकाण्ड चर्चा में है। अपराधी और अपराध की चर्चा ज्यादा है। इसके मूल कारण की तरफ लोगों का ध्यान नहीं है। कटे अंग पुलिस खोज रही है। ऐसी घटनाएं सामान्य हो रही ...
कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
आर.के. सिन्हा अब चुनाव आयोग को यह गॅंभीरता से विचार करना होगा कि कैसे सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने को लेकर गंभीर या बाध्य हों। वे मतदान करना अपना दायित्व समझें। हाल ही में दिल्ली नगर निगम चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव नतीजे सही से आ गये। कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई। पर निराशा इस कारण से अवश्य हुई कि इस बार दिल्ली में मतदान 47 फीसद के आसपास ही रहा। मतलब आधे से अधिक मतदाताओं ने अपना वोट डालने की आवश्यकता ही नहीं समझी। मतदान भी रविवार के दिन ही हुआ था। इसलिए उम्मीद तो यह थी कि दिल्ली वाले मतदान के लिए भारी सॅंख्या में निकलेंगे। उस दिन मौसम भी  खुशगवार था। फिर भी मतदान बेहद खराब रहा। बड़ी तादाद में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के हक में वोट देने नहीं आए। वे जिन नेताओं और सियासी दलों को नापसंद करते हैं, उन्हें चाहे तो खारिज कर सकते थे। उन्हों...
कुछ कीजिये “गौमाता” पर, राजनीति नहीं !

कुछ कीजिये “गौमाता” पर, राजनीति नहीं !

सामाजिक, साहित्य संवाद
कहते हैं मारक पशु बीमारी “लंपी” देश से चली गई | इस बीमारी ने देश के  उत्तर पश्चिम के प्रदेशों की लाखों गाय व बैल लील लिया | गुजरात. राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश आदि में कुल मिलाकर लाखों दुधारू गाय मर चुकी है और जो बीमारी के बाद बच गईं वह भी दूध से सूख गई हैं। आंकड़ो के मुताबिक सबसे ज्यादा मृत्यु दर राजस्थान में थी परन्तु हरियाणा व पंजाब में भी बहुत बड़ी संख्या में गाय मरी हैं। हरियाणा में यमुनानगर, अंबाला, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी आदि में लंपी का सर्वाधिक कहर देखा गया। लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) गत वर्षों के दौरान पहले भी कहीं-कहीं आती रही परंतु इसका गंभीर संज्ञान पशुपालन विभाग ने कभी  नहीं लिया। इस संबंध में हुई आर्थिक बदहाली के लिए क्या सरकार की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए? विडंबना है कि समय रहते इस बीमारी का संज्ञान लेकर नियंत्रित करने के...
आर एस एस की यात्रा और अब हिन्दू विरोध का आरोप लगाने के मायने

आर एस एस की यात्रा और अब हिन्दू विरोध का आरोप लगाने के मायने

Uncategorized, सामाजिक
रमेश शर्मा  अपनी जीवन यात्रा आरंभ करने के पहले दिन से विरोध और आलोचना झेल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आलोचनाओं में "हिन्दु विरोध" का एक नया अध्याय और जुड़ गया। संघ पर इससे पहले यह आरोप तो लगते रहे हैं कि वह एक हिन्दूवादी साम्प्रदायिक संगठन है किंतु अब एक नया आरोप लगा है कि संघ हिन्दू हितों के विपरीत काम करने लगा है । संघ पर यह आरोप तब लगा जब संघ प्रमुख मोहन भागवत एक इस्लामिक धर्म गुरु से मिलने उनके निवास पर पहुँचे और वहाँ चल रहे मदरसे के बच्चों  के बीच भी गये ।  इस्लामिक धर्म गुरु और कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों से संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के मिलने की घटना इस वर्ष अगस्त माह की हैं। संघ प्रमुख अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख डॉ उमैर अहमद इलियासी से मिलने नई दिल्ली कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित उनके निवास परिसर में गये थे । भेंट के समय मुस्लिम समाज के कुछ कई प्रमुख व्यक्ति भी ...
समाज के उत्थान और सुधार में स्कूल और धार्मिक संस्थान 

समाज के उत्थान और सुधार में स्कूल और धार्मिक संस्थान 

TOP STORIES, सामाजिक
कुछ धार्मिक संस्थान आधुनिक मन के लिए प्रवचनों और प्रकाशनों के माध्यम से "धर्मी" मूल्य प्रणाली को साझा करने के लिए एक  मंच प्रदान करने में उपयोगी होते हैं। यह समाज को सामूहिक रूप से सही मूल्य प्रणाली को विकसित करने, साझा करने और अभ्यास करने में मदद करता है। यह बदले में समाज के उत्थान और सुधार में और अनिवार्य रूप से चरित्र और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में मदद करता है। सभी धर्म व्यक्ति को अच्छे कर्म करने, दूसरों की देखभाल करने और सही या नैतिक कार्य करने का आदेश देते हैं। हमारी एक लंबी परंपरा रही है जहां भारत में व्यक्ति और उद्योग "समाज की देखभाल" को उतना ही प्रोत्साहित करते हैं जितना कि व्यवसाय और अर्थव्यवस्था के भविष्य के विस्तार के लिए धन का सृजन करना। -डॉ सत्यवान सौरभ  मूल्य ऐसे विश्वास हैं जो धारक के लिए उपयोगिता या महत्व में निहित हैं, "या" सिद्धांत, मानक, या गुण सार्थक या ...