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शहबाज शरीफ का कश्मीर राग दुर्भाग्यपूर्ण

शहबाज शरीफ का कश्मीर राग दुर्भाग्यपूर्ण

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शहबाज शरीफ का कश्मीर राग दुर्भाग्यपूर्ण - ललित गर्ग- पाकिस्तान में एक और सत्ता की तख्ता पलट का नाटक पूरी दुनिया ने देखा। सत्ता में बने रहने के इमरान खान के सारे दांवपेच बेकार साबित हुए। शनिवार देर रात नेशनल असेंबली में बहुमत खो देने के बाद सरकार गिर गई। फिलहाल विपक्ष जीत गया है। सत्ता की कमान अब देश के मंजे हुए राजनेता शाहबाज शरीफ के हाथों में आ गई है। वे तीन बार पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और नवाज शरीफ की गैरमौजूदगी में पार्टी की अगुआई करते रहे हैं। पाकिस्तान के इस घटनाक्रम के बाद देश के राजनेताओं में ज्यादा समझदारी आएगी या दिशाशून्य हो जायेंगे? मालूम नहीं। पक्ष एवं विपक्ष का यह सारा शोर दूसरे को दोषी ठहराने का था और चुप्पी अपने दामन के दाग छिपाने की थी। यह घटनाक्रम सिर्फ किसी को सत्ता से बेदखल करने और किसी को सत्ता हासिल होने के संदर्भ में ही नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें इम...
उत्कृष्ट विलक्षणताओं के प्रतीक हैं हनुमान

उत्कृष्ट विलक्षणताओं के प्रतीक हैं हनुमान

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उत्कृष्ट विलक्षणताओं के प्रतीक हैं हनुमान - ललित गर्ग - इस संसार में सबसे बड़े भक्त है भगवान हनुमानजी, वे ऐसे भक्त हैं जो अपने भक्तों को ईश्वर से मिलाते हैं। उनको हिन्दू देवताआंे में सबसे शक्तिशाली, जागृत एवं सजीव देवता माना गया है, वे रामायण जैसे महाग्रंथ के सह पात्र थे। वे भगवान शिव के ग्यारवंे रूद्र अवतार थे जो श्रीराम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे। इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं। हनुमानजी के पराक्रम की असंख्य गाथाएँ प्रचलित हैं। इन्होंने जिस तरह से राम के साथ सुग्रीव की मैत्री कराई और फिर वानरों की मदद से असुरों का मर्दन किया, वह अत्यन्त प्रसिद्ध है। उनको बजरंगबलि, मारुतिनंदन, पवनपुत्र, केशरीनंदन आदि अनेकों नामों से पुकारा जाता है। उनका एक नाम वायुपुत्र भी है, उन्हें वातात्मज भी कहा गया है अर्थात् वायु से ...
जलियांवाला बाग हत्याकांड भारत में ब्रिटिश शासन की क्रूरता और दमनकारी प्रकृति का प्रतीक है।

जलियांवाला बाग हत्याकांड भारत में ब्रिटिश शासन की क्रूरता और दमनकारी प्रकृति का प्रतीक है।

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(आधुनिक इतिहास के खूनी नरसंहारों में से एक ) जलियांवाला बाग हत्याकांड भारत में ब्रिटिश शासन की क्रूरता और दमनकारी प्रकृति का प्रतीक है। - सत्यवान 'सौरभ' जलियांवाला बाग नरसंहार, जिसे अमृतसर का नरसंहार भी कहा जाता है, एक ऐसी घटना थी जिसमें ब्रिटिश सैनिकों ने पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग के नाम से जाने जाने वाले खुले स्थान में निहत्थे भारतीयों की एक बड़ी भीड़ पर गोलीबारी की थी। जलियांवाला बाग हत्याकांड,13 अप्रैल, 1919, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उस दिन पंजाब और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में लोकप्रिय फसल उत्सव बैसाखी थी। अमृतसर में स्थानीय निवासियों ने उस दिन एक बैठक आयोजित करने का फैसला किया, जिसमें सत्य पाल और सैफुद्दीन किचलू, स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले दो नेताओं और रॉलेट एक्ट के कार्यान्वयन के खिलाफ चर्चा और विरोध किया गया, जिसने ब्रिटिश सरकार को बिना...
याद रखना बाबा साहेब के उन अनाम साथियों को

याद रखना बाबा साहेब के उन अनाम साथियों को

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याद रखना बाबा साहेब के उन अनाम साथियों को आर.के. सिन्हा डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 27 सितंबर,1951 को पंडित जवाहरलाल नेहरु की केन्द्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। दोनों में हिन्दू कोड बिल पर गहरे मतभेद उभर आए थे। बाबा साहेब ने अपने इस्तीफे की जानकारी संसद में दिए अपने भाषण में दी। वे दिन में तीन-चार बजे अपने सरकारी आवास वापस आए। वे इस्तीफे के अगले ही दिन अपने 22 पृथ्वीराज रोड के आवास को छोड़कर 26 अलीपुर रोड में शिफ्ट कर गए। कैबिनेट से बाहर होने के बाद बाबा साहेब का सारा वक्त अध्ययन और लेखन में गुजरने लगा। उन्होंने 26, अलीपुर रोड में रहते हुए ही ‘'द बुद्धा ऐण्ड हिज़ धम्मा' नाम से अपनी अंतिम पुस्तक लिखी। इसमें डॉ.अंबेडकर ने भगवान बुद्ध के विचारों की व्याख्या की है। इसका हिन्दी, गुजराती, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम, कन्नड़, जापानी सहित और कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है। बाबा साहेब की 26 ...
भारत छोड़ो आंदोलन, पूर्ण स्वतंत्रता के विरोधी, दबे-कुचले वर्गों के मसीहा अंबेडकर

भारत छोड़ो आंदोलन, पूर्ण स्वतंत्रता के विरोधी, दबे-कुचले वर्गों के मसीहा अंबेडकर

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भारत छोड़ो आंदोलन, पूर्ण स्वतंत्रता के विरोधी, दबे-कुचले वर्गों के मसीहा अंबेडकर ( अम्बेडकर जी ने कांग्रेस के पूर्ण स्वतंत्रता के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने दलितों के उत्थान हेतु उच्च वर्गीय हिन्दुओं से ज़्यादा अंग्रेज़ों को सहायक माना। देश व दलितों के हितो के बीच टकराव की स्थिति में उन्होंने दलितों के हितों को वरीयता देने की बात कही। ) -प्रियंका 'सौरभ' देश बी आर अंबेडकर की 131वीं जयंती मना रहा है। एक समाज सुधारक, भारतीय संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष और देश के पहले कानून मंत्री के रूप में उनकी भूमिका प्रसिद्ध है। वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, सक्रिय राजनेता, प्रख्यात वकील, श्रमिक नेता, महान सांसद, अच्छे विद्वान, मानवविज्ञानी, वक्ता थे। आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश ने आजादी का अमृत महोत्सव की शुरुआत की है। अम्बेडकर के विचारों की गंभीरता, राष्ट्र-निर्माता के...
महावीर जयन्ती, बाहर ही नहीं, भीतर को आलोकित करें

महावीर जयन्ती, बाहर ही नहीं, भीतर को आलोकित करें

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महावीर जयन्ती, 14 अप्रैल, 2022 बाहर ही नहीं, भीतर को आलोकित करें -ललित गर्ग- जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव चैत्र शुक्ल त्रयोदशी, इस वर्ष 14 अप्रैल 2022 को सम्पूर्ण दुनिया में मनाया जायेगा। यह दिन महावीर की शिक्षाओं एवं सिद्धान्तों को अपनाने एवं धारण करने का दिन है। महावीर ने जो शिक्षाएं दी, वे जन-जन के लिये अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य एवं निराशा से आशा की ओर जाने का माध्यम बनी है। इसलिये भी जैन धर्म के अनुयायियों के लिये महावीर जयन्ती का महत्व है। महावीर लोकोत्तम पुरुष हैं, उनकी शिक्षाओं की उपादेयता सार्वकालिक, सार्वभौमिक एवं सार्वदेशिक है, दुनिया के तमाम लोगों ने इनके जीवन एवं विचारों से प्रेरणा ली है। सत्य, अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह ऐसे सिद्धान्त हैं, जो हमेशा स्वीकार्य रहेंगे और विश्व मानवता को प्रेरणा देते रहेंगे। महावीर का संपूर्ण जीवन मानवता के अभ्य...
धातु पाउडर बनाने की वैकल्पिक तकनीक विकसित

धातु पाउडर बनाने की वैकल्पिक तकनीक विकसित

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धातु पाउडर बनाने की वैकल्पिक तकनीक विकसित त्रिविमीय (Three Dimensional) वस्तुओं के निर्माण के लिए 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है। एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसे मेटल 3डी प्रिंटिंग के रूप में जाना जाता है। 3डी प्रिंटिंग की इस तकनीक में मेटल प्रिंटिंग सामग्री की परत बनाकार वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की एक प्रमुख स्रोत सामग्री धातु पाउडर है, जिसे मुख्य रूप से परमाणुकरण (Atomization) तकनीक द्वारा उत्पादित किया जाता है। इस प्रविधि में पिघली धातु हवा या पानी के द्रुत प्रवाह में टूटकर पहले तरल सूक्ष्म बूंदों में रूपांतरित होती है, जो अंत में ठोस होकर पाउडर बन जाती है। मेटल 3डी प्रिंटिंग में आमतौर पर उपयोग होने वाली परमाणुकरण तकनीक की एक सीमा यह है कि इससे बेहतर परिणाम नहीं मिलते, यह महंगी पड़ती है, और विभिन्न सामग्री प्रकारों के उपयोग में इसमे...
रामनवमी या रावणनवमी?

रामनवमी या रावणनवमी?

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रामनवमी या रावणनवमी? डॉ. वेदप्रताप वैदिक इस बार भारत में हमने रामनवमी कैसे मनाई ? हमने रामनवमी को रावणनवमी में बदल दिया। देश के कई शहरों और गांवों में एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय से भिड़ गए। यहां तक की जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र, जिन्हें देश में अत्यंत प्रबुद्ध माना जाता है, वे भी आपस में भिड़ गए। कई शहरों में लाठियां, ईंट और गोलियां भी चलीं। कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस की ज्यादती के भी शिकार हुए। यह सब हुआ है, उसके जन्म दिन पर, जिसे अल्लामा इक़बाल ने ‘इमामे हिंद’ कहा है। इकबाल का शेर है- है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज़। अहले-नज़र समझते हैं इसको इमामे हिंद!! राम को भगवान भी कहा जाता है और मर्यादा पुरुषोत्तम भी। लेकिन राम के नाम पर कौनसी मर्यादा रखी गई? राम को सांप्रदायिकता के कीचड़ में घसीट लिया गया। इसके लिए हमारे देश के वामपंथी और दक्षिणपंथी तथा हिंदू और मुसलमान, दोनों जिम्मेद...
भारत में आईएएस अधिकारियों की कमी, संघवाद की पवित्रता पर सवाल

भारत में आईएएस अधिकारियों की कमी, संघवाद की पवित्रता पर सवाल

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भारत में आईएएस अधिकारियों की कमी, संघवाद की पवित्रता पर सवाल -सत्यवान 'सौरभ' भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) (कैडर) नियम 1954 आईएएस अधिकारियों की विभिन्न राज्य सेवाओं से संबंधित है। ये अधिकारी राज्य और केंद्र दोनों की सेवा करते हैं। आईएएस (कैडर) नियम के तहत कुछ राज्य संवर्ग के अधिकारी कुछ वर्षों की सेवाओं को पूरा करने के बाद केंद्र सरकार की सेवाओं के लिए प्रतिनियुक्त होते हैं। हालाँकि, हाल के वर्षों में राज्य संकट पैदा करने वाली मौजूदा रिक्तियों के अनुसार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवश्यक अधिकारियों की संख्या प्रदान करने में विफल रहे हैं। 1991 के उदारीकरण के बाद आईएएस अधिकारियों की वार्षिक भर्ती में भारी कमी के चलते 1991 से पहले के स्तर पर बहाल करने में केंद्र को लगभग 20 साल लग गए। 1 जनवरी, 2021 तक, अखिल भारतीय स्तर पर आईएएस अधिकारियों की कमी 23% थी। राज्य सिविल सेवा अधिकारियों का ...
मातृत्व की कला बच्चों को जीने की कला सिखाना है’।

मातृत्व की कला बच्चों को जीने की कला सिखाना है’।

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मातृत्व की कला बच्चों को जीने की कला सिखाना है'। (माँ अपने बच्चे के चेहरे पर पहली मुस्कान देखती है।) --प्रियंका 'सौरभ' यह एक सर्वविदित तथ्य है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे के लिए सबसे अच्छी उम्र होती है क्योंकि वह इस उम्र में सबसे ज्यादा सीखता है। एक बच्चा पांच साल से कम उम्र के घर पर ज्यादातर समय बिताता है और इसलिए वह घर पर जो देखता है और देखता है उससे बहुत कुछ सीखता है। छत्रपति शिवाजी को उनकी माँ ने बचपन में नायकों की कई कहानियाँ सुनाईं और वे बड़े होकर कई लोगों के लिए नायक बने। घर पर ही एक बच्चा सबसे पहले समाजीकरण सीखता है। एक बच्चा पहले घर पर बहुत कुछ सीखता है। लेकिन आज, चूंकि अधिकांश माता-पिता कमाने वाले व्यक्ति हैं, इसलिए वे अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय नहीं बिता सकते हैं। बच्चों को प्ले स्कूलों में भेजा जाता है और अक्सर उनके दादा-दादी द्वारा उनका पालन-पोषण किया जाता...