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चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

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चातुर्मास शुभारंभ-06 जुलाई 2025 पर विशेषचातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर- मंत्र महर्षि डॉ. योगभूषण महाराज - सृष्टि का चक्र अनवरत गतिशील है-गर्मी, वर्षा और शीत ऋतु इसका पर्याय हैं। इन्हीं ऋतुओं में से एक वर्षा ऋतु-न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक जगत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैन धर्म में इस अवधि को “चातुर्मास” या “वर्षायोग” कहा जाता है, जैन परम्परा में आषाढ़ी पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक का समय तथा वैदिक परम्परा में आषाढ़ से आसोज तक का समय चातुर्मास कहलाता है। इस दौरान दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों परंपराओं के मुनि स्थिर एक ही स्थान पर विराजमान रहते हैं। यह नियम प्राकृतिक कारणों से भी जुड़ा है-जैसे वर्षा ऋतु में जीव-जंतु अधिक उत्पन्न होते हैं, जिससे भ्रमण करने से अहिंसा का उल्लंघन हो सकता है। वास्तव में आज के व्यस्त, तनाव एवं हिंसाग्रस्त और भौति...
अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

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अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव संजय सक्सेना,वरिष्ठ पत्रकार2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव हर हाल में सत्ता में वापसी की जुगत में जुटे हैं। उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा का आधार लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव द्वारा स्थापित मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण रहा है। इस समीकरण के सहारे मुलायम सिंह तीन बार और अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे। लेकिन 2014 के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में आए बदलाव ने सपा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हिंदुत्व की छतरी तले विभिन्न हिंदू जातियों को एकजुट करने में सफलता हासिल की है, जिसने सपा की परंपरागत रणनीति को कमजोर कर दिया है। अखिलेश यादव अब इस बदले सियासी परिदृश्य में अपनी पार्टी की छवि को नया रूप देने और व्यापक स...
हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

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हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें  ललित गर्ग  दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी विरोध की राजनीति अब महाराष्ट्र में भी उग्र से उग्रत्तर हो गयी, इसी के कारण त्रिभाषा नीति को महाराष्ट्र में लगा झटका दुखद और अफसोसजनक है। आखिरकार राजनीतिक दबाव, लंबी रस्साकशी और कशमकश के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई से जुड़े मुद्दे पर यू-टर्न लेते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए। विदित हो कि केंद्र सरकार की नीति के तहत महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना था। राजनीतिक आग्रहों एवं दुराग्रहों के चलते अब ऐसा नहीं हो पाएगा। मतलब, महाराष्ट्र को तीसरी भाषा के रूप में भी हिंदी मंजूर नहीं है। महाराष्ट्र में हिंदी का संकट वास्तव में एक गहरे सामाजिक-राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। यह केवल भाषाई नहीं, बल्कि अस्म...
दिलों को ही नहीं, विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ता है संगीत

दिलों को ही नहीं, विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ता है संगीत

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दिलों को ही नहीं, विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ता है संगीत-ः ललित गर्ग:- संगीत हर इंसान के न सिर्फ शारीरिक, बल्कि भावात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। यह ईश्वर का मानव को अनमोल उपहार है। क्योंकि एक सुर, जो जोड़ता है दुनिया को बिना बोले, धुनों से रचता है मनुष्य मन की कहानी। संगीत न केवल शांति, सुकून एवं आनन्द का सशक्त माध्यम है बल्कि  यह हमारी भावनाओं को जुबान देता है, यह तनाव कम करता एवं अनेक बीमारियों से मुक्ति भी देता है। संगीत सुनने से मानसिक शांति का अहसास होता है, संगीत दुनिया में हर मर्ज की दवा मानी जाती है। यह दुखी से दुखी इंसान को भी खुश कर देता है, संगीत का जादू एक मरते हुए इंसान को भी खुशी के लम्हे दे जाता है। अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ने में संगीत सबसे असरदार माध्यम है। संगीत को दुनिया की सबसे आसान और बेहतरीन भाषा मानी जाती है। संगीत की इन्हीं विलक्षण एव...
आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?

आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों?

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आज के परिवेश में श्रीहनुमानजी की भक्ति क्यों? आज भारतवर्ष ही नहीं पूरा विश्व अर्थ अर्थात् भौतिकवाद की दौड़ में भाग रहा है। धर्म और काम नियन्त्रित नहीं है अत: अमर्यादित एषणाएँ पल्लवित, फलित एवं पुष्पित हो रही है। आबाल-वृहद, नर-नारी कामाचार अभक्ष्यभक्षण आदि दुष्ट प्रवृत्तियों का शिकार हो रहे हैं, व्यक्ति, समाज, देश एवं राष्ट्र के प्रति अपने पावन-पवित्र कर्तव्य से विमुख से दिखाई देते हैं। हम जहाँ कहीं थोड़ी बहुत धार्मिकता या आध्यात्मिकता के दर्शन करते हैं, देखा जाए तो वास्तव में वहाँ भी उनके आवरण में पाखण्ड, दम्भ दिखावा ही दिखाई देता है। इस विषम दु:खदायी-पीड़ादायी परिस्थिति में श्रीहनुमानजी की उपासना-भक्ति ही संजीवनी बूटी है।श्री हनुमानजी के चरित्र से बुद्धि, विवेक, शक्ति, अभिमान से मुक्ति एवं माता-पिता ही नहीं राष्ट्र की सेवा एवं समर्पण की भावना का उदय होगा। श्रीहनुमानजी के चरित्र से नई ...
उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

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उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा-ः ललित गर्ग:- मानव एवं जीव-जंतुओं का जीवन भूमि पर निर्भर है। फिर भी, पूरी दुनिया में प्रदूषण, भूमि का दोहन, जलवायु अराजकता और जैव विविधता विनाश का एक जहरीला मिश्रण स्वस्थ भूमि को रेगिस्तान में बदल रहा है और संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र मृत क्षेत्रों में बदल रहा है। ‘हमारी भूमि’ नारे के तहत भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण आज की जलवायु समस्याओं का सटीक समाधान हो सकता है,  इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस 17 जून को मनाया जाता है। यह दिन मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने और लोगों को एकजुट करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है ‘भूमि के लिए एकजुट। हमारी विरासत। हमारा भविष्य’ है, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह दिवस पर भूमि के महत्व और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता पर प्रका...
मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

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मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो-ः ललित गर्ग:- ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में पैसे लेकर दर्शन कराने वाले बाउंसरों की गिरफ्तारी के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में सुगम दर्शन के नाम पर एक साथ इक्कीस लोगों की गिरफ्तारी जहां मंदिर प्रशासन की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, वही ईश्वर के दरबार में पांव फैला रहा भ्रष्टाचार गहन चिन्ताजनक एवं शर्मनाक हैं। कुछ ही दिनों पहले ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर मंदिर में भक्तों से वीआइपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली करने पर प्रशासन ने एक होमगार्ड जवान और दो पंडितों पर कार्रवाई की है। देश-विदेश  के भक्त अगाध श्रद्धा से अपने आराध्य का दर्शन करने आते हैं, लेकिन देश के प्रमुख मन्दिरों में सीधे दर्शन कराने के नाम पर पैसों की लूट मची है या वीआईपी संस्कृति के नाम पर त्रासद एवं भेदभावपूर्ण स्थितियां पसरी है। सवाल यह पूछा जा रहा है कि हिंदुओं के धार्मिक स्थलों ...
भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर | संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025

भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर | संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025

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संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025 भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर- ललित गर्ग - भारतीय संत परम्परा और संत-साहित्य में संत कबीर एक महान् हस्ताक्षर, समाज-सुधारक, अध्यात्म की सुदृढ़ परम्परा के संवाहक एवं अनूठे संत हैं। जब भारतीय समाज और धर्म का स्वरूप रूढ़ियों एवं आडम्बरों में जकड़ा एवं अधंकारमय था, एक तरफ मुसलमान शासकों की धर्मांधता से जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी और दूसरी तरफ हिंदूओं के कर्मकांडों, विधानों एवं पाखंडों से धर्म-बल का हृास हो रहा था, तब संत कबीर एक रोशनी बनकर समाज को दिशा दी। कबीर ने मानव चेतना के विकास के हर पहलू को उजागर किया। श्रीकृष्ण, श्रीराम, महावीर, बुद्ध, जीसस के साथ-ही-साथ भारतीय अध्यात्म आकाश के अनेक संतों-आदि शंकराचार्य, नानक, रैदास, मीरा आदि की परंपरा में कबीर ने धर्म की त्रासदी एवं उसकी चुनौतियों को समाहित करने का अनूठा कार्य किया। जीवन का ऐसा कोई ...
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई

ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई

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ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई - डॉ सत्यवान सौरभ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादियों के 9 ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रमुख आतंकवादी संगठनों के हेडक्वार्टर भी शामिल थे। भारतीय सेना ने 100 किलोमीटर तक पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकवादी अड्डों पर सटीक एयरस्ट्राइक की। साथ ही, भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया। इस ऑपरेशन ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जय हिंद! भारत ने हाल ही में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकवादियों के खिलाफ एक ऐतिहासिक सैन्य ऑपरेशन "ऑपरेशन सिंदूर" को अंजाम दिया, जो केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारतीय सेना की ताकत, साहस और...