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समाजवादी आस्था का दोहरा मापदंड

समाजवादी आस्था का दोहरा मापदंड

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समाजवादी आस्था का दोहरा मापदंड श्रावण माह शिव भक्ति का पवित्र माह है जिसमें उत्तर भारत के अनेक राज्यों में पवित्र कांवड़ यात्रा निकलती है। कांवड़ यात्रा में कांवड़िये पहले गंगा नदी तक पैदल जाकर पवित्र जल लेते हैं फिर शिवालयों जाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। कांवड़िये अपनी यात्रा में 200 से 600 किमी तक पैदल चलते हैं। पूरी यात्रा में कांवड़िये सात्विक जीवन का पालन करते हैं। इस कठिन यात्रा में उनके पावों में छाले तक पड़ जाते हैं। कांवड़ यात्रा में स्त्रियाँ और बच्चे भी सम्मिलित होते हैं। जो सनातनी हिन्दू इस कथों यात्रा का व्रत नहीं ले पाते वे स्थान -स्थान पर कांवड़िओं की भिन्न- भिन्न प्रकार से सेवा करके अपना जीवन धन्य करना चाहते हैं। ये अत्यंत दुखद है कि छद्म धर्मनिरपेक्ष और वोट बैंक की राजनीति करने वाले राजनैतिक दलों ने इस वर्ष ऐसी पवित्र यात्रा पर क्षोभजनक अमार्यदित टिप्पणियां करीं। ...
मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथ

मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथ

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मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथअजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही समीकरण बदल रहे हैं। मायावती, जो लंबे समय से दलित वोट बैंक की धुरी रही हैं, अब मुस्लिम वोटों को साधने की रणनीति पर काम कर रही हैं। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता आजम खान के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के करीब आने की चर्चाएं तेज हैं। यह घटनाक्रम सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए सियासी चुनौती बन सकता है, क्योंकि उनकी पार्टी का आधार मुस्लिम और यादव वोटरों पर टिका है। मायावती ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा की कमजोर स्थिति को देखते हुए अपनी रणनीति बदली है। उनकी पार्टी, जो कभी दलितों की एकमात्र आवाज थी, अब केवल एक विधायक तक सिमट गई है। ऐसे में, मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए मायावती पुराने गठजोड़ को फिर से तलाश रही हैं। आजम खान, जो सपा के वरिष्ठ नेता औ...
संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद !

संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद !

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संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद ! अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान तल्ख टिप्पणी की कि 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर नेताओं को सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए और नई पीढ़ी को अवसर देना चाहिए। यह बयान उन्होंने दिवंगत आरएसएस विचारक मोरोपंत पिंगले के हवाले से दिया, जिन्होंने कथित तौर पर कहा था कि 75 वर्ष की आयु में शॉल ओढ़ाए जाने का अर्थ है कि व्यक्ति को अब रुक जाना चाहिए और दूसरों को आगे आने देना चाहिए। भागवत का यह बयान, जो सामान्य प्रतीत होता है, ने भारतीय राजनीति में तीव्र चर्चा को जन्म दिया है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयं भागवत, दोनों सितंबर 2025 में 75 वर्ष के हो जाएंगे। इस बयान ने विपक्षी दल...
अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

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अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव संजय सक्सेना,वरिष्ठ पत्रकार2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव हर हाल में सत्ता में वापसी की जुगत में जुटे हैं। उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा का आधार लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव द्वारा स्थापित मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण रहा है। इस समीकरण के सहारे मुलायम सिंह तीन बार और अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे। लेकिन 2014 के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में आए बदलाव ने सपा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हिंदुत्व की छतरी तले विभिन्न हिंदू जातियों को एकजुट करने में सफलता हासिल की है, जिसने सपा की परंपरागत रणनीति को कमजोर कर दिया है। अखिलेश यादव अब इस बदले सियासी परिदृश्य में अपनी पार्टी की छवि को नया रूप देने और व्यापक स...
राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025 रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स 

राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025 रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स 

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राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स   ललित गर्ग  स्वस्थ जीवन हर किसी की सर्वोच्च जीवन प्राथमिकता होता है। कहा भी गया है कि, ‘सेहत सबसे बड़ी पूंजी’ है। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन को सही तरह से एन्जॉय करते हुए उसे सफल एवं सार्थक बना सकता है और इसमें डॉक्टर्स की भूमिका बहुत अहम होती है। छोटी-बड़ी हर तरह की बीमारियों को डॉक्टर्स की मदद से ठीक किया जा सकता है। शायद इसलिए ही इन्हें भगवान का दर्जा मिला हुआ है। राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस प्रसिद्ध डॉक्टर और बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधानचंद्र राय के सम्मान में मनाया जाता है।  वैसे तो दुनियाभर के अलग-अलग देशों में डॉक्टर्स डे को अलग-अलग दिन मनाया जाता है, लेकिन भारत में इस दिन को 1 जुलाई को इसलिये मनाया जाता है  क्योंकि 1 जुलाई 1882 में भारत के प्रसिद्ध फिजीशियन डॉ. राय का जन्म हुआ...
कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

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कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक? आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने वर्षों तक नींव रखी। यह संपादकीय उसी विस्मृति की पीड़ा को उजागर करता है। स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ परीक्षा नहीं, सोच, भाषा और संस्कार गढ़ते हैं। कोचिंग एक पड़ाव है, पर शिक्षकों की तपस्या पूरी यात्रा का आधार। शिक्षा में श्रेय का यह असंतुलन सामाजिक और नैतिक रूप से अन्यायपूर्ण है – और इसे सुधारने की सख्त ज़रूरत है। -डॉ सत्यवान सौरभ आज जब भी कोई छात्र NEET, JEE, UPSC या अन्य प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होता है, तो मीडिया उसकी सफलता को कोचिंग संस्थान की सफलता के रूप में प्रस्तुत करता है। बधाइयाँ, होर्डिंग्स, विज्ञापन, और सोशल मीडिया पोस्ट्स – सब पर एक ही नाम चमकता है: कोचिंग सेंटर। लेकिन इस ...
संवाद की भाषा में न हार, न जीत केवल समझदारी जन्मती है : ओम बिरला

संवाद की भाषा में न हार, न जीत केवल समझदारी जन्मती है : ओम बिरला

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‘संवाद से समाधान’ परिचर्चा का आयोजन : संवाद बना संकल्प, समाधान बनी संस्कृति संवाद की भाषा में न हार, न जीत केवल समझदारी जन्मती है : ओम बिरला मुम्बई, 24 जून 2025 देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई की पुण्यभूमि पर तीर्थंकर भगवान महावीर के सिद्धांतों- अहिंसा, समता, सत्य और अपरिग्रह पर आधारित “संवाद से समाधान-एक परिचर्चा” का भव्यतम आयोजन महावीरायतन फाउंडेशन के तत्वावधान में यशवंतराव चव्हाण सभागृह में सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य था- धर्म, शासन और समाज के बीच सार्थक संवाद के माध्यम से सामाजिक समाधान की दिशा तय करना। विशेषतः युद्ध एवं आतंक की परिस्थितियों में विश्व को संवाद की सार्थकता से परिचित कराना। इस ऐतिहासिक आयोजन के प्रेरणास्रोत एवं परिकल्पनाकार स्वामी देवेंद्र ब्रह्मचारी रहे, उनके मार्गदर्शन में अंतरधार्मिक संवाद की यह श्रृंखला नव ऊर्जा, नव विश्वास और समाधान की संस्कृति का परिच...
दिलों को ही नहीं, विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ता है संगीत

दिलों को ही नहीं, विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ता है संगीत

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दिलों को ही नहीं, विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ता है संगीत-ः ललित गर्ग:- संगीत हर इंसान के न सिर्फ शारीरिक, बल्कि भावात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। यह ईश्वर का मानव को अनमोल उपहार है। क्योंकि एक सुर, जो जोड़ता है दुनिया को बिना बोले, धुनों से रचता है मनुष्य मन की कहानी। संगीत न केवल शांति, सुकून एवं आनन्द का सशक्त माध्यम है बल्कि  यह हमारी भावनाओं को जुबान देता है, यह तनाव कम करता एवं अनेक बीमारियों से मुक्ति भी देता है। संगीत सुनने से मानसिक शांति का अहसास होता है, संगीत दुनिया में हर मर्ज की दवा मानी जाती है। यह दुखी से दुखी इंसान को भी खुश कर देता है, संगीत का जादू एक मरते हुए इंसान को भी खुशी के लम्हे दे जाता है। अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ने में संगीत सबसे असरदार माध्यम है। संगीत को दुनिया की सबसे आसान और बेहतरीन भाषा मानी जाती है। संगीत की इन्हीं विलक्षण एव...
भारत आध्यात्म एवं युवाओं के बल पर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में अतुलनीय वृद्धि कर सकता है

भारत आध्यात्म एवं युवाओं के बल पर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में अतुलनीय वृद्धि कर सकता है

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भारत आध्यात्म एवं युवाओं के बल पर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में अतुलनीय वृद्धि कर सकता है जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और संभवत आगामी लगभग दो वर्षों के अंदर जर्मनी की अर्थव्यवस्था से आगे निकलकर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की अपनी अपनी विशेषताएं हैं, जिसके  आधार पर यह अर्थव्यवस्थाएं विश्व में उच्च स्थान पर पहुंची हैं एवं इस स्थान पर बनी हुई हैं। प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के मामले में आज भी कई विकसित देश भारत से आगे हैं। इन समस्त देशों के बीच चूंकि भारत की आबादी सबसे अधिक अर्थात 140 करोड़ नागरिकों से अधिक है, इसलिए भारत में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद बहुत कम है। अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद का आकार 30.51 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर है और प्रति ब्यक्ति सकल घरेलू...
स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

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स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने -ः ललित गर्ग:- किसी के जीवन में रंग भरने का, जीवन और मौत के बीच जूझ रहे लोगों को जीवन देने का और अधिक स्वास्थ्य संकट से घीरे व्यक्ति के जीवन में आशा की किरण बनने का सशक्त माध्यम है रक्तदान। दुनिया भर में अनगिनत लोगों को रक्त की अपेक्षा होती है, इसलिये रक्तदान-महादान है। रक्तदान के महत्व को उजागर करने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 14 जून को ‘विश्व रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में रक्तदान के महत्व को समझाने के साथ ही रक्तदान करने के लिये आम इंसान को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लिये यह दिवस मनाया जाता है। इंसान की सम्पत्ति का कोई मतलब नहीं अगर उसे बांटा और उपयोग में नहीं लाया जाए, चाहे वे शरीर का रक्त ही क्यों न हो। किसी व्यक्ति की रक्तअल्पता के कारण मृत्यु न हो, इस दृष्टि से रक्तदान एक महान् दान...