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RBI shields and patronises wrong-doings of NBFCs

RBI shields and patronises wrong-doings of NBFCs

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Reserve Bank of India RBI through an RTI response (copy enclosed) openly shielded wrong-doings of torturing money-lending business by Non-Banking-Finance-Companies NBFCs like an NBFC-agent rather than regulatory-authority when the central Bank provided an analytical detail on suggestions to regulate NBFCs especially in their money-recovering process from those trapped in their net through luring mobile-calls. Significantly these NBFCs dominate loan-takers through financing by public-money of public-sector banks which is also unduly justified by RBI which avoided giving data of complaints against NBFCs. RBI justified filing of court-cases by NBFCs for recovery in cities other than of loan-takers despite NBFC-office being also in the city of loan-taker simply to unduly harass loan-taker a...
Welcome unanimity in Lok Sabha over indecent remarks of Azam Khan

Welcome unanimity in Lok Sabha over indecent remarks of Azam Khan

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It refers to welcome unanimity cutting across party-lines putting apart religious sentiments against highly objectionable and indecent remarks by Samajwadi Party Parliamentarian Azam Khan on 25.07.2019 towards a woman member that too when she was chairing Lok Sabha proceedings. Azam Khan who often gives such indecent remarks outside Parliament also, deserves a fitting lesson so as to control him for future. It is good that now Lok Sabha Speaker has expressed for stringent-most action against Azam Khan with the victim woman Parliamentarian not ready to accept any late apology for ever-defiant Azam Khan. Otherwise erring Parliamentarians in past were never treated harshly for their such undesired behaviour during Parliamentary proceedings or for their misconduct as Parliamentarian. It may...
ये रिसते जख्म

ये रिसते जख्म

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भारत एक नए मोड़ पर खड़ा है। पुन: पूर्ण बहुमत से चुनी गई मोदी सरकार की पहल से देश की संसद बहुत सक्रिय है और तेजी से नए कानून बना रही है ताकि जिन भी मामलों में हम पीछे रह गए हैं उनमें समय के साथ कदमताल मिला लें। प्रगति के अनेकों कीर्तिमानों के बीच अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-2 सफलता पूर्वक अपनी यात्रा पर निकल गया है तो एथलेटिक्स में पिछले कुछ दिनों में 6 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत 19 वर्षीय हिमा दास ने देश का सीना चौड़ा कर दिया है। मगर इन सब उपलब्धियों के बीच भी कुछ काले धब्बे से रिसते जख्म हर भारतवासी को उद्वेलित कर रहे हैं। देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का ह्रास विशेषकर राज्यों में बढ़ते दलबदल के कारण चिंताजनक है ही, वहीं भ्रष्टाचार का जहर अभी भी राष्ट्र की प्रगति में बाधा बना हुआ है। मगर इससे भी बड़ी चिंता देश में पैदा किए जा रहे साम्प्रदायिक तनाव की है जो बहुसंख्यकवाद बनाम अल्पसंख्यकवाद के वर्चस्व क...
‘मानव तस्करी’ ने अपना तीसरे कुख्यात व्यापार के रूप में स्थान बना लिया है!

‘मानव तस्करी’ ने अपना तीसरे कुख्यात व्यापार के रूप में स्थान बना लिया है!

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मानव तस्करी के विरूद्ध जागरूकता और पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा के अनुसार प्रतिवर्ष विश्व भर में 30 जुलाई को मानव तस्करी के विरूद्ध विश्व दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य पीड़ितों की समस्याओं व संभावित समाधानों पर रोशनी डालना है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार विश्व भर में लगभग 21 मिलियन लोग बंधुआ मजदूरी के शिकार हैं। इस अनुमान में श्रम व यौन शोषण के लिए तस्करी किये गए लोग भी शामिल हैं। मानव तस्करी से सभी देश किसी न किसी तरह जुड़े हुए हैं। यू.एन. कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार मानव तस्करी के लगभग एक तिहाई शिकार बच्चे ही हैं, जबकि 71 प्रतिशत मानव तस्करी की शिकार महिलाएँ व लड़कियाँ हैं। मानव जाति के विनाशक पहला ‘ड्रग्स’ तथा दूसरा ‘हथियार’ के दुनिया के सबसे बडे़ कुख्यात दो व्यापारों के बाद ‘मानव तस्करी’ के कुख्यात व्यापार के र...
ट्रिपल तलक  आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।

ट्रिपल तलक आस्था नही, अधिकारों की लड़ाई है ।

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ट्रिपल तलाक पर रोक लगाने का बिल लोकसभा से तीसरी बार पारित होने के बाद  एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही इसे असंवैधानिक करार दे दिया था लेकिन इसे एक कानून का रूप लेने के लिए अभी और कितना इंतज़ार करना होगा यह तो समय ही बताएगा। क्योंकि बीजेपी सरकार भले ही अकेले अपने दम पर  इस बिल को लोकसभा में  82 के मुकाबले 303 वोटों से पास कराने में आसानी से सफल हो गई हो लेकिन इस बिल के प्रति विपक्षी दलों के रवैये को देखते हुए इसे राज्यसभा से  पास कराना ही उसके लिए असली चुनौती है। यह वाकई में समझ से परे है कि कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष अपनी गलतियों से कुछ भी सीखने को तैयार क्यों नहीं है। अपनी वोटबैंक की राजनीति की एकतरफा सोच में  विपक्षी दल इतने अंधे हो गए हैं कि  यह भी नहीं देख पा रहे कि उनके इस रवैये से उनका दोहरा आचरण ही देश के सामने आ रहा है। क्योंकि जो विपक्षी दल राम मंदिर औ...
कर्नाटक में गिरती सरकारों का इतिहास

कर्नाटक में गिरती सरकारों का इतिहास

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चार दशक पहले भारत में आयाराम-गयाराम का खेल शुरू हुआ था। जब हरियाणा में रातो-रात सरकार गिराकर विपक्ष ने इसी तरह सरकार बना ली थी। तब से आज तक देशभर में सैकडों बार विधायकों की खरीद-फरोख्त करके हर सत्तारूढ़ केंद्रीय दल ने प्रांतों की उन सरकरों को गिराया है, जहां उनके विरोधी दल की सरकारें थीं। इसमें कोई दल अपवाद नहीं है। फिलहाल बैंगलूरू में जो हुआ, उसका भी एक लंबा इतिहास है। जिस समय रामकृष्णन हेगड़े ने कर्नाटक में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार का नेतृत्व किया था, उस समय उनके शासन की समस्त देशवासियों ने प्रशंसा की थी। श्री हेगड़े एक सुलझे हुए, काबिल और सद्व्यवहार वाले नेता थे। उन्हीं की कैबिनेट के एक मंत्री थे एच डी देवगौड़ा। जिन्होंने अपने ऐजेंडे को पूरा करने के लिए, विधायकों की एक समूह के साथ विद्रोह कर दिया और हेगड़े सरकार को गिराने में मुख्य भूम...
मर्दों का क्या है, ये तो ऐसे ही होते हैं!

मर्दों का क्या है, ये तो ऐसे ही होते हैं!

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अंकल परिवार के साथ अच्छी जगह डिनर करने आए हैं। बगल में बीवी है, दो बड़े बच्चे भी बैठे हैं.. सब बहुत खुश हैं, जोर जोर से हँस रहे हैं लेकिन अंकल के लिए इतना काफी नहीं है। अंकल को सामने वाली टेबल पर बैठी लड़की को घूरना है। कभी रँगे हुए बालों को ठीक करते हुए, कभी फोन पर बात करते हुए उनको बस सामने वाली लड़की को लीचड़ता की हद पार करते हुए निहारना है। उनने ठरक के साथ बहुत सारा धन भी संचय किया है तो उनको लगता है कि उनकी लीचड़ता किसी सड़क छाप लड़के की लीचड़ता से बेहतर है। बीवी बगल में बैठी बच्चों का ध्यान रख रही है, उनको क्या खाना है, क्या नहीं सब फरमाइश सुन रही है, खुद को भी सँवार रही है लेकिन पति के कमीनेपन से अंजान है। उसका पति भगवान है उसे यही बताया गया है और भगवान को जिंदा रखने के लिए वो हर साल बस नियम से करवा चौथ करते आ रही है। वह पति की आंखें खुली रखना चाहती है और पति अपने पैंट की चैन। ऐसे तो हर...
Ban cola-drinks – Central government should promote Indian soft drinks

Ban cola-drinks – Central government should promote Indian soft drinks

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Mega-star Amitabh Bachchan once disclosed at Indian Institute of Management (IIM) Ahmadabad about his not advertising for cola-drinks after a school-student at Jaipur drew his attention about harmful ingredients in cola-drinks. It is significant that cola-companies voluntarily stopped selling cola-drinks in schools worldwide in view of increasing obesity in school-going children. Indian government should also not only ban advertisements but even sale of cola drinks in the country. Earlier also, soft-drink manufacturers were asked to remove an oil from their products which was found to be harmful for health. It is time that Union government, Indian Agricultural Research Institute (IARI) and soft-drink manufacturers should revive drinks like old and famous rose-flavoured ones, which can n...
CSE welcomes government’s ban on colistin

CSE welcomes government’s ban on colistin

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Centre for Science and Environment (CSE) has welcomed the health ministry’s recent move to ban colistin use in food-producing animals. On July 19, the Union Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW) notified the prohibition of sale, manufacture and distribution of colistin and its formulations in food-producing animals, poultry, aqua farming and animal feed supplements. The move is expected to help regulate antibiotic misuse in these animals and contain antimicrobial resistance (AMR). “We welcome the health ministry’s move to ban colistin use in food-producing animals. It will help preserve this last-resort antibiotic for humans and save lives from deadly antibiotic-resistant infections. It will go a long way in fighting antibiotic resistance,” said Chandra Bhushan, deputy director ...
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने एनसीसी कैडेटों के लिए पुरस्कारों की संख्या बढ़ाने और नकद प्रोत्साहन में वृद्धि की मंजूरी दी

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने एनसीसी कैडेटों के लिए पुरस्कारों की संख्या बढ़ाने और नकद प्रोत्साहन में वृद्धि की मंजूरी दी

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रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों को दिए जाने वाले विभिन्न पुरस्कारों की संख्या मौजूदा 143 से बढ़ाकर 243 करने और विभिन्न श्रेणियों में नकद प्रोत्साहन में वृद्धि को मंजूरी दे दी है। एनसीसी कैडेट अब 30,000 रुपये के दो रक्षा मंत्री पदक प्राप्त करने के पात्र होंगे। पहले 20,000 रुपये मूल्य का एक पदक दिया जाता था। कैडेटों को प्रत्येक 20,000 रुपये के चार रक्षा मंत्री प्रशस्ति पदक दिये जायेंगे। पहले 15,000 रुपये के मूल्य के तीन प्रशस्ति पदक दिये जाते थे। श्री राजनाथ सिंह ने महानिदेशक की प्रशस्ति वतर्मान 102 से 200 करने की मंजूरी दी है। रक्षा मंत्री ने विभिन्न श्रेणियों में एनसीसी कैडेटों के लिए 9 नए सर्वश्रेष्ठ कैडेट पुरस्कारों को भी मंजूरी दी है। इस तरह इन पुरस्कारों की संख्या 27 हो गई है। प्रत्येक पुरस्कार के लिए नकद प्रोत्साहन में भी वृद्धि की गई...