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भारतीय सेना की ऐतिहासिक उपलब्धि – ऑपरेशन सिंदूर

भारतीय सेना की ऐतिहासिक उपलब्धि – ऑपरेशन सिंदूर

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भारतीय सेना की ऐतिहासिक उपलब्धि - ऑपरेशन सिंदूरआतंकिस्तान अब भी नहीं सुधरा तो रण भीषण होगामृत्युंजय दीक्षितपहलगाम में विगत 22 अप्रैल 2025 को हुए वीभत्स आतंकी हमले के बाद भारत की सेना ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की सफल कार्यवाई की। पाकिस्तान की सेना ने इसमें आतंकियों का साथ देने का निर्णय किया और भारत के नागरिक तथा सैन्य ठिकानों को चोट पहुँचाने के लिए हमले किये। 10 मई 2025 को भारतीय सेना के आक्रामक प्रहार के पश्चात अंततः पाकिस्तान ने युद्ध विराम की गुहार लगाई। भारतीय सेना का आतंकवाद के खिलाफ यह अभियान पूर्णतः सफल रहा जिसमें पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को लगभग तबाह कर दिया गया।भारतीय सेना द्वारा जो जानकारी साझा की गई है उससे स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों सहित वहां के 11 एयर बेस भी पूरी तरह से तबाह हो गये हैं जिसमे...
शानदार जीत से भारत एशिया की एक बड़ी शक्ति बना

शानदार जीत से भारत एशिया की एक बड़ी शक्ति बना

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शानदार जीत से भारत एशिया की एक बड़ी शक्ति बना ललित गर्ग भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव एवं युद्ध की स्थितियों के बीच भारत ने बड़ा ऐलान करते हुए सीज फायर लागू किया। चार दिन चले सैन्य संघर्ष में परिस्थितियां और भी ज्यादा नाजुक हो गई थीं एवं पाकिस्तान की भारी तबाही हुई। दोनों परमाणु सम्पन्न देशों के बीच के बढ़ते तनाव के बीच समझौते के बाद भले ही पाकिस्तान के विनाश का सिलसिला थम गया हो, लेकिन उसकी एक भूल भारी का सबब बन सकता है। क्योंकि भारत ने यह बड़ा फैसले लेते हुए कहा था कि भविष्य में उसकी जमीन पर किसी भी आतंकवादी हमले को भारत के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा और उसकी गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा। पाकिस्तान की फितरत को देखते हुए भारत सरकार एवं भारतीय सेना अधिक चौकस, सावधान एवं सतर्क रहते हुए संघर्ष-विराम के लिये यदि सहमत हुई है तो उसका स्वागत होना चाहिए। जब भारत ने पाकिस...
कोहली का टेस्ट संन्यास: क्रिकेट के सबसे महान अध्यायों में से एक

कोहली का टेस्ट संन्यास: क्रिकेट के सबसे महान अध्यायों में से एक

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कोहली का टेस्ट संन्यास: क्रिकेट के सबसे महान अध्यायों में से एक -डॉ सत्यवान सौरभ भारतीय क्रिकेट के महान इतिहास में विराट कोहली का नाम ऐसे चमकता है जैसे कोई सितारा। पिछले चौदह वर्षों में कोहली ने एक ऐसी धरोहर बनाई है, जो न केवल उनके अभूतपूर्व आंकड़ों के लिए बल्कि खेल के प्रति उनकी जुनून, तीव्रता और नेतृत्व क्षमता के लिए भी याद रखी जाएगी। जैसे ही वे टेस्ट क्रिकेट से विदा लेते हैं, यह केवल एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि क्रिकेट के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जो आने वाली पीढ़ियों तक चर्चा का विषय रहेगा। विराट कोहली, जिन्हें आधुनिक क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में से एक माना जाता है, ने 21वीं सदी में क्रिकेट खेलने का तरीका ही बदल दिया। उनके आक्रामक बल्लेबाजी, प्रेरणादायक नेतृत्व और खेल के प्रति निष्ठा ने क्रिकेट को एक नई दिशा दी। उनकी यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की नहीं बल्कि भारती...
सनातन हिंदू धर्म एवं भारत में उत्पन्न समस्त मत पंथ विश्व में शांति चाहते हैं |

सनातन हिंदू धर्म एवं भारत में उत्पन्न समस्त मत पंथ विश्व में शांति चाहते हैं |

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सनातन हिंदू धर्म एवं भारत में उत्पन्न समस्त मत पंथ विश्व में शांति चाहते हैं प्रहलाद सबनानी भारत में सनातन हिंदू धर्म तो अनादि एवं अनंत काल से चला आ रहा है परंतु बाद के खंडकाल में भारत में कई अन्य प्रकार के मत पंथ भी विकसित हुए हैं जैसे बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म आदि। भारत में विकसित विभिन्न मत पंथ मूलतः सनातन हिंदू संस्कृति का ही अनुपालन करते हुए दिखाई देते हैं और ऐसा कहा जाता है कि यह समस्त मत पंथ सनातन हिंदू धर्म की विभिन्न धाराएं ही हैं। भारत में विकसित मत पंथ सामान्यतः अपने दर्शन, कर्मकांड एवं सामाजिक ताने बाने के दायरे में अपने धर्म का अनुपालन करते हैं। भारत में हिंदू धर्म के सिद्धांतों पर चलने वाले नागरिकों की संख्या सबसे अधिक हैं एवं यह भारत का सबसे बड़ा धर्म है, जिसमें विभिन्न देवी देवताओं और पूजा प्रथाओं की एक विस्तृत प्रणाली शामिल है। भारत में विकसित हुए मत पंथों म...
( प्रोपेगेंडा और झूठी ख़बरों से सतर्क रहें) “जब खबरें बनती हैं हथियार: युद्ध, प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज”

( प्रोपेगेंडा और झूठी ख़बरों से सतर्क रहें) “जब खबरें बनती हैं हथियार: युद्ध, प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज”

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(प्रोपेगेंडा और झूठी ख़बरों से सतर्क रहें)"जब खबरें बनती हैं हथियार: युद्ध, प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज" -प्रियंका सौरभ युद्ध के दौरान फैलाई गई झूठी खबरें न केवल सैनिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि समाज में भय और नफरत का भी प्रसार करती हैं। यह न केवल जनता की भावनाओं को भड़काती है, बल्कि सच्चाई की नींव को भी कमजोर करती है। कई बार युद्ध के मैदान से बहुत दूर बैठे लोग भी इन झूठी खबरों के शिकार बन जाते हैं और इससे राष्ट्र की एकता और संप्रभुता को भारी क्षति पहुँचती है। युद्ध का समय हमेशा से मानव इतिहास का सबसे तनावपूर्ण और संवेदनशील दौर रहा है। जब दो देशों के बीच टकराव चरम पर होता है, तब सिर्फ हथियारों की ही नहीं, बल्कि सूचनाओं की भी लड़ाई लड़ी जाती है। प्रोपेगेंडा और झूठी ख़बरें इस संघर्ष का एक अनिवार्य हिस्सा बन जाती हैं। यह स्थिति विशेष रूप से भारत और पाक...
“सोशल मीडिया पर देशविरोध का कारोबार: अभिव्यक्ति की आज़ादी या एजेंडा मार्केटिंग?”

“सोशल मीडिया पर देशविरोध का कारोबार: अभिव्यक्ति की आज़ादी या एजेंडा मार्केटिंग?”

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"सोशल मीडिया पर देशविरोध का कारोबार: अभिव्यक्ति की आज़ादी या एजेंडा मार्केटिंग?" (पेआउट के बदले देशविरोध? अब नहीं चलेगा!)  सोशल मीडिया पर 'पेआउट' लेकर भारत को बदनाम करने वालों की अब खैर नहीं। IT एक्ट 2000 और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड 2021 के तहत सरकार ने सख़्त रुख अपनाया है। अब देशविरोधी कंटेंट पर न तो चुप्पी होगी, न छूट। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अफवाह फैलाने और एजेंडा चलाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसेगा। ये तय नहीं होगा कि आप किस पार्टी के समर्थक हैं, बल्कि ये देखा जाएगा कि आपके विचार भारत की अखंडता के साथ हैं या उसके खिलाफ़। अब पोस्ट से पहले सोचिए – देश पहले है, लोकप्रियता नहीं! आज सोशल मीडिया एक ऐसा हथियार बन चुका है, जिसकी धार किसी तलवार से कम नहीं। यह धार विचारों की है, भावनाओं की है और सबसे खतरनाक — अफ़वाहों की भी। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर पिछले कुछ वर्षों में...
सिंदूर की सौगंध: एक था पाकिस्तान: इतिहास के पन्नों में सिमटता सच

सिंदूर की सौगंध: एक था पाकिस्तान: इतिहास के पन्नों में सिमटता सच

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एक था पाकिस्तान: इतिहास के पन्नों में सिमटता सच सिंदूर की सौगंध: 'एक था पाकिस्तान' की गूंज "एक था पाकिस्तान" – ये केवल तीन शब्द नहीं, बल्कि इतिहास की एक गहरी दास्तां है। यह उस विभाजन का प्रतीक है, जिसने दिलों को तोड़ा और घरों को उजाड़ा। लेकिन क्या हमें हमेशा इस नफरत के जाल में फंसे रहना चाहिए? हमें न केवल बाहरी दुश्मनों से, बल्कि अपने भीतर की नफरत से भी लड़ना होगा। तभी एक दिन हम गर्व से कह सकेंगे – हाँ, 'एक था पाकिस्तान', और हम थे, हैं, और रहेंगे – एक, अखंड, अविनाशी भारत। 'एक था पाकिस्तान' - यह केवल तीन शब्द नहीं हैं, बल्कि यह उन अनगिनत कुर्बानियों, टूटे सपनों और संघर्षों की कहानी है, जो भारतीय सभ्यता के दिल में गहरे तक समाई हुई हैं। जब हम यह वाक्य सुनते हैं, तो न केवल एक भूगोल का जिक्र होता है, बल्कि एक पूरी जड़ें, एक परिवार, एक संस्कृति, और एक सपना जो कभी हमारे अपने हिस्से ...
जो कहा वो किया – आपरेशन सिंदूर

जो कहा वो किया – आपरेशन सिंदूर

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जो कहा वो किया - आपरेशन सिंदूरमृत्युंजय दीक्षितअप्रैल 22, 2025 पहलगाम में 26-निहत्थे निर्दोष हिन्दुओं की धर्म पूछकर हत्या से पूरा देश आहत था। दुःख और क्रोध दोनों चरम पर थे। गृहमंत्री अमित शाह समाचार मिलते ही घटनास्थल पर पहुँच गए। प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्रा संक्षिप्त कर स्वदेश लौटे। अगले ही दिन मधुबनी रैली में घोषणा की, इस बार ऐसा दंड मिलेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी, इस संकल्प को उन्होंने अपने मन की बात कार्यक्रम में दोहराया। गृहमुंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री के संकल्प को बल देते हुए कहा, “हम एक - एक आतंकी को चुन- चुन कर मारेंगे“ और अंत में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि ये मेरा उत्तरदायित्व है कि देशवासी जो कुछ चाहते हैं वह सब कुछ मोदी सरकार में होकर रहेगा। इन वक्तव्यों के पीछे सरकार और सेना के सभी संकल्पबद्ध राष्ट्रभक्त सामरिक और रणनीतिक तैयारियां कर रहे थे।पहलगा...
मेरा लेख जाति जनगणना विभाजन का नहीं, विकास का आधार बने

मेरा लेख जाति जनगणना विभाजन का नहीं, विकास का आधार बने

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मेरा लेख जाति जनगणना विभाजन का नहीं, विकास का आधार बने - ललित गर्ग- पहलगाम की क्रूर एवं बर्बर आतंकी घटना के बाद मोदी सरकार लगातार पाकिस्तान को करारा जबाव देने की तैयारी के अति जटिल एवं संवेदनशील दौर में एकाएक जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लेकर न विपक्षी दलों को बल्कि समूचे देश को चौकाया एवं चमत्कृत किया है। सरकार का यह निर्णय जितना बड़ा है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। मोदी सरकार का जातिगत जनगणना के लिए तैयार होना सुखद और स्वागतयोग्य है। पिछले कुछ समय से जातिगत जनगणना की मांग बहुत जोर-शोर से हो रही थी। कुछ राज्यों में तो भाजपा भी ऐसी जनगणना के पक्ष में दिखी थी, पर केंद्र सरकार का रुख इस पर बहुत साफ नहीं हो रहा था। अब अचानक ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राजनीतिक मामलों की उच्चस्तरीय कैबिनेट समिति की बैठक में यह फैसला ले लिया गया। बाद में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडि...
“प्रेस स्वतंत्रता दिवस: एक इतिहास, एक याद”

“प्रेस स्वतंत्रता दिवस: एक इतिहास, एक याद”

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"प्रेस स्वतंत्रता दिवस: एक इतिहास, एक याद" – प्रियंका सौरभ प्रेस की चुप्पी, रीलों का शोर: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ट्रेंडिंग टैग बन गया। प्रेस स्वतंत्रता दिवस अब औपचारिकता बनकर रह गया है। पत्रकारिता की जगह अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने ले ली है, जहां सच्चाई की जगह रीलें, और विश्लेषण की जगह व्यूज़ ने कब्जा कर लिया है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अब ब्रांड डील्स और ट्रेंडिंग टैग्स में गुम हो गया है। सवाल पूछना अब खतरा है, और चुप रहना 'सेफ कंटेंट'। आने वाले समय में शायद हमें #ThrowbackToJournalism ट्रेंड करना पड़े। जब प्रेस बोलती थी, और सत्ता थर्राती थी। हर साल 3 मई को जब ‘प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ आता है, तो एक गहरी चुप्पी के साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या अब भी पत्रकारिता वाकई स्वतंत्र है? क्या यह दिन अब भी उस निडरता, जिम्मेदारी और सच्चाई का प्रतीक है, जिसे किसी ज़माने में पत्रकारि...