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संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद !

संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद !

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संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद ! अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान तल्ख टिप्पणी की कि 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर नेताओं को सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए और नई पीढ़ी को अवसर देना चाहिए। यह बयान उन्होंने दिवंगत आरएसएस विचारक मोरोपंत पिंगले के हवाले से दिया, जिन्होंने कथित तौर पर कहा था कि 75 वर्ष की आयु में शॉल ओढ़ाए जाने का अर्थ है कि व्यक्ति को अब रुक जाना चाहिए और दूसरों को आगे आने देना चाहिए। भागवत का यह बयान, जो सामान्य प्रतीत होता है, ने भारतीय राजनीति में तीव्र चर्चा को जन्म दिया है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयं भागवत, दोनों सितंबर 2025 में 75 वर्ष के हो जाएंगे। इस बयान ने विपक्षी दल...
टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है

टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है

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टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है अमेरिका में श्री डानल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के साथ ही दुनिया के लगभग समस्त देशों के साथ   ट्रम्प प्रशासन द्वारा टैरिफ युद्ध की घोषणा कर दी गई है। अमेरिका में विभिन्न देशों से होने वाले आयात पर   भारी भरकम टैरिफ लगाकर एवं टैरिफ की दरों में बार बार परिवर्तन कर तथा इन टैरिफ की दरों को लागू करने की तिथि में  परिवर्तन कर ट्रम्प प्रशासन टैरिफ युद्ध को किस दिशा में ले जाना चाह रहा है, इस सम्बंध में अब      स्पष्टता का पूर्णत: अभाव दिखाई देने लगा है। अब तो विभिन्न देशों को ऐसा आभास होने लगा है कि अमेरिकी  प्रशासन विभिन्न देशों पर टैरिफ की दरों के माध्यम से अपना दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि ये देश  अमेरिका के स...
ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर

ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर

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ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर भारत में 2023 में 1.44 मिलियन बच्चे ‘ज़ीरो डोज़’ श्रेणी में थे, जिनमें अधिकांश गरीब, अशिक्षित, जनजातीय, मुस्लिम और प्रवासी समुदायों से आते हैं। भूगोलिक अवरोध, सामाजिक हिचकिचाहट, शहरी झुग्गियों में अव्यवस्थित शासन और निगरानी की कमी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाएँ सीमित प्रभावी रही हैं। समाधान के लिए समुदाय-आधारित सहभागिता, तकनीक आधारित ट्रैकिंग, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार आवश्यक है। जब तक हम नीति को अंतिम व्यक्ति के अधिकार से नहीं जोड़ते, सार्वभौमिक टीकाकरण केवल एक सपना बना रहेगा। न्यायपूर्ण स्वास्थ्य नीति ही भविष्य की नींव रख सकती है।  डॉ. सत्यवान सौरभ भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में सार्वभौमिक टीकाकरण केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा म...
कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

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कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक? आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने वर्षों तक नींव रखी। यह संपादकीय उसी विस्मृति की पीड़ा को उजागर करता है। स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ परीक्षा नहीं, सोच, भाषा और संस्कार गढ़ते हैं। कोचिंग एक पड़ाव है, पर शिक्षकों की तपस्या पूरी यात्रा का आधार। शिक्षा में श्रेय का यह असंतुलन सामाजिक और नैतिक रूप से अन्यायपूर्ण है – और इसे सुधारने की सख्त ज़रूरत है। -डॉ सत्यवान सौरभ आज जब भी कोई छात्र NEET, JEE, UPSC या अन्य प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होता है, तो मीडिया उसकी सफलता को कोचिंग संस्थान की सफलता के रूप में प्रस्तुत करता है। बधाइयाँ, होर्डिंग्स, विज्ञापन, और सोशल मीडिया पोस्ट्स – सब पर एक ही नाम चमकता है: कोचिंग सेंटर। लेकिन इस ...
नशीली दवाओं के के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस – 26 जून, 2025

नशीली दवाओं के के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस – 26 जून, 2025

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नशीली दवाओं के के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस - 26 जून, 2025नशीली दवाओं के खिलाफ महत्वाकांक्षी युद्ध का आह्वान- ललित गर्ग -नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 26 जून को नशीली दवाओं मुक्त दुनिया को निर्मित करने के लक्ष्य को प्राप्त करने, कार्रवाई और सहयोग को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गलत सूचनाओं का मुकाबला करना और नशीली दवाओं के बारे में तथ्यों को साझा करना है। साथ ही साक्ष्य आधारित रोकथाम, स्वास्थ्य जोखिमों और विश्व नशीली दवाओं की समस्या, उपचार और देखभाल से निपटने के लिए उपलब्ध समाधानों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। अवैध ड्रग्स एवं तस्करी मानव के लिए बहुत बड़ी पीड़ा एवं संकट का स्रोत हैं। सबसे कमज़ोर लोग, खास तौर पर युवा लोग, इस संकट का खामियाजा भुगतते हैं। ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले और नशे की लत से जूझ रहे लोग अंधेरी दुनिया...
वायरल और प्रसिद्ध होने के लिए कुछ भी!

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वायरल और प्रसिद्ध होने के लिए कुछ भी!रजनीश कपूरआज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने लोगों को अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का एक शक्तिशाली मंच प्रदान कियाहै। यह मंच जहां एक ओर रचनात्मकता, ज्ञान और सकारात्मक संदेशों को फैलाने का अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर कुछलोग इस मंच का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। एक चिंताजनक प्रवृत्ति जो हाल के वर्षों में उभरी है, वह है सार्वजनिक स्थानों परअश्लीलता के जरिए वायरल होने और प्रसिद्धि हासिल करने की कोशिश। यह न केवल सामाजिक मूल्यों को ठेस पहुंचाता है,बल्कि समाज में नैतिकता और संस्कृति के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है।सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ ने कई लोगों को गलत रास्ते पर धकेल दिया है। कुछ लोग त्वरित प्रसिद्धि के लिएसार्वजनिक स्थानों पर अश्लील व्यवहार, अभद्र भाषा, अनुचित कपड़े या आपत्तिजनक हरकतें करते हैं और इसे रिकॉर्ड करकेऑनलाइन डाल देते हैं। उदाहरण के तौ...
बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

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बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान यज्ञ हमारी भारतीय संस्कृति में वैदिक काल से चला आ रहा एक धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान है। यज्ञ परम्परा का वर्णन हमारे प्राचीन वैदिक ग्रन्थों तथा ब्राह्मण ग्रन्थों में सविस्तार उपलब्ध होता है। सर्वाधिक वर्णन यजुर्वेद में प्राप्त होता है। प्राचीन समय में प्राकृतिक विपदाओं से बचने, अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने और तत्कालीन प्राकृतिक देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बहुतायत से यज्ञ किए जाते थे। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार ब्रह्माजी ने मानव को सहयोग देकर यज्ञ परम्परा को प्रारम्भ किया। ऋग्वेद में कहा गया है 'अग्रिमीडे पुरोहितं।Ó अग्रि को यज्ञ के मुँह की संज्ञा दी गई है अत: अग्रि में आहूति दी जाती है। यज्ञ ही विद्वानों के अनुसार श्रेष्ठतम कर्म है। गायत्री को माता तथा यज्ञ को पिता कहा गया है। विद्वानों ने यह भी कहा है 'यज्ञो वै विष्णु:वैदिककालीन प्राकृति...
भारत में लगातार घटती गरीबी एवं बढ़ती धनाडयों की संख्या

भारत में लगातार घटती गरीबी एवं बढ़ती धनाडयों की संख्या

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भारत में लगातार घटती गरीबी एवं बढ़ती धनाडयों की संख्या वैश्विक स्तर पर वित्तीय संस्थान अब यह स्पष्ट रूप से मानने लगे हैं कि विश्व में भारत की आर्थिक ताकत बहुत तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में जारी किए गए एक सर्वे रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत में पिछले बीते वर्ष में उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों की संख्या एवं उनकी संपतियों में अतुलनीय वृद्धि दर्ज हुई है। जबकि विश्व के कई देशों विशेष रूप से विकसित देशों में उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों की संख्या एवं इनकी सम्पत्ति में वृद्धि दर लगातार नीचे गिर रही है। इसका आश्य तो अब यही लगाया जा सकता है विश्व में आर्थिक शक्ति अब पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित हो रही है। भारत में जिस व्यक्ति की शुद्ध सम्पत्ति 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक होती है उसे उच्च नेटवर्थ व्यक्ति (HNWI) कहा जाता है। पिछले वर्ष भारत में उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों की औसत सम्पत्ति 8.8 प्रति...
काबिलियत और अंक: दोनों में फर्क समझें

काबिलियत और अंक: दोनों में फर्क समझें

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काबिलियत और अंक: दोनों में फर्क समझें अंक नहीं, असल काबिलियत की पहचान अंक केवल एक व्यक्ति की किताबी जानकारी का प्रमाण होते हैं, न कि उसकी असल क्षमता का। असली काबिलियत जीवन की समस्याओं को हल करने, नई चीजें सीखने और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता में होती है। हमें बच्चों को केवल अंकों की दौड़ में शामिल करने के बजाय उनकी व्यक्तिगत रुचियों, प्रतिभाओं और आत्मनिर्भरता को पहचानने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। बच्चों की शिक्षा का विषय हमेशा से ही समाज का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। माता-पिता और शिक्षक, दोनों ही बच्चों की सफलता के लिए चिंतित रहते हैं, लेकिन कई बार यह चिंता एक दबाव का रूप ले लेती है। विशेष रूप से अंक या ग्रेड के मामले में, यह दबाव बच्चों की मानसिक सेहत पर गहरा असर डाल सकता है। इस लेख में हम इस मुद्दे की जड़ तक जाने की कोशिश करेंगे कि कैसे अंक और काब...
(संघर्ष से शांति तक का सफर) “युद्ध से युद्धविराम तक: भारत-पाक रिश्तों की बदलती तस्वीर”

(संघर्ष से शांति तक का सफर) “युद्ध से युद्धविराम तक: भारत-पाक रिश्तों की बदलती तस्वीर”

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(संघर्ष से शांति तक का सफर) "युद्ध से युद्धविराम तक: भारत-पाक रिश्तों की बदलती तस्वीर" 10 मई 2025 को, भारत और पाकिस्तान ने एक पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की, जो हाल के वर्षों में सबसे गंभीर संघर्ष के बाद हुआ। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सैन्य तनाव बढ़ा था। अमेरिकी राष्ट्रपति की मध्यस्थता में हुई वार्ता के बाद, दोनों देशों ने इस संघर्ष को समाप्त करने का निर्णय लिया। हालांकि, सीमा पर स्थायी शांति अभी भी एक बड़ी चुनौती है। सच्ची शांति तब तक संभव नहीं है जब तक कि दोनों देश आपसी विश्वास, संवाद और सहयोग को प्राथमिकता न दें। युद्धविराम केवल एक कदम है, पर स्थायी शांति की दिशा में कई और कदम बढ़ाने की जरूरत है। Pakistan will have to give up its anti-India policy in the interest of its citizens भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंध हमेशा से...