तनाव, असन्तुलन एवं अशांति का जीवन क्यों ?
दुनिया में एक नकारात्मकता का परिदृश्य बिखरा पड़ा है। हम निरन्तर आदर्शवाद और अच्छाई का झूठ रचते हुए सच्चे आदर्शवाद के प्रकट होने की असंभव कामना कर रहे हैं, इसी से जीवन की समस्याएं सघन होती जा रही है, नकारात्मकता व्यूह मजबूत होता जा रहा है, इनसे बाहर निकलना असंभव-सा होता जा रहा है। दूषित और दमघोंटू वातावरण में आदमी अपने आपको टूटा-टूटा सा अनुभव कर रहा है। उसकी धमनियों में कुत्सित विचारों का रक्त संचरित हो रहा है। कोशिकाएँ ईष्र्या और घृणा के धुएँ से जल रही हैं। फेफडे़ संयम के बिना शुद्ध आॅक्सीजन नहीं ले पा रहे हंै, कलह का दावानल पोर-पोर को जला रहा है, ऐसी स्थिति में इंसान का जीना समस्या है।
खुशी हम सबकी जरूरत है, लेकिन क्या हमारी यह जरूरत पूरी हो पा रही है, लेकिन खुशी का जीवन कैसे संभव हो? आज के इस भागम-भाग, तनाव एवं घटनाबहुल युग में सकारात्मक होना, ऊर्जावान होना, खुश होना कैसे संभव होगा? तना...







