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राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025 रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स 

राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025 रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स 

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राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स   ललित गर्ग  स्वस्थ जीवन हर किसी की सर्वोच्च जीवन प्राथमिकता होता है। कहा भी गया है कि, ‘सेहत सबसे बड़ी पूंजी’ है। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन को सही तरह से एन्जॉय करते हुए उसे सफल एवं सार्थक बना सकता है और इसमें डॉक्टर्स की भूमिका बहुत अहम होती है। छोटी-बड़ी हर तरह की बीमारियों को डॉक्टर्स की मदद से ठीक किया जा सकता है। शायद इसलिए ही इन्हें भगवान का दर्जा मिला हुआ है। राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस प्रसिद्ध डॉक्टर और बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधानचंद्र राय के सम्मान में मनाया जाता है।  वैसे तो दुनियाभर के अलग-अलग देशों में डॉक्टर्स डे को अलग-अलग दिन मनाया जाता है, लेकिन भारत में इस दिन को 1 जुलाई को इसलिये मनाया जाता है  क्योंकि 1 जुलाई 1882 में भारत के प्रसिद्ध फिजीशियन डॉ. राय का जन्म हुआ...
एससीओ में रक्षामंत्री का चीन-पाक को कड़ा संदेश

एससीओ में रक्षामंत्री का चीन-पाक को कड़ा संदेश

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एससीओ में रक्षामंत्री का चीन-पाक को कड़ा संदेश- ललित गर्ग  - भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के पोर्टे सिटी किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए संयुक्त घोषणापत्र में हस्ताक्षर करने से मना कर न केवल पाकिस्तान और चीन को नये भारत का कड़ा संदेश दिया, बल्कि दुनिया को भी जता दिया कि भारत आतंकवाद को पोषित एवं पल्लवित करने वाले देशों के खिलाफ अपनी लड़ाई निरन्तर जारी रखेगा। घोषणापत्र में बलोचिस्तान की चर्चा की गई थी किन्तु पहलगाम के क्रूर आतंकवादी हमले जिनमें धर्म पूछकर 26 लोगों को मारे जाने का कोई विवरण नहीं था। भारत की आतंकवाद को लेकर दोहरे मापदंड के विरुद्ध इस दृढ़ता एवं साहसिकता की चर्चा विश्वव्यापी हो रही है। भारत ने विश्व को आगाह कर दिया है कि अब आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे। राजनाथ सिंह के...
उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा

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उपजाऊ भूमि को मरुस्थल होने से बचाना होगा-ः ललित गर्ग:- मानव एवं जीव-जंतुओं का जीवन भूमि पर निर्भर है। फिर भी, पूरी दुनिया में प्रदूषण, भूमि का दोहन, जलवायु अराजकता और जैव विविधता विनाश का एक जहरीला मिश्रण स्वस्थ भूमि को रेगिस्तान में बदल रहा है और संपन्न पारिस्थितिकी तंत्र मृत क्षेत्रों में बदल रहा है। ‘हमारी भूमि’ नारे के तहत भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण आज की जलवायु समस्याओं का सटीक समाधान हो सकता है,  इसी को ध्यान में रखते हुए विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा निवारण दिवस 17 जून को मनाया जाता है। यह दिन मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने के लिए जागरूकता बढ़ाने और लोगों को एकजुट करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है ‘भूमि के लिए एकजुट। हमारी विरासत। हमारा भविष्य’ है, संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह दिवस पर भूमि के महत्व और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता पर प्रका...
स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने

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स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देकर उजाला बने -ः ललित गर्ग:- किसी के जीवन में रंग भरने का, जीवन और मौत के बीच जूझ रहे लोगों को जीवन देने का और अधिक स्वास्थ्य संकट से घीरे व्यक्ति के जीवन में आशा की किरण बनने का सशक्त माध्यम है रक्तदान। दुनिया भर में अनगिनत लोगों को रक्त की अपेक्षा होती है, इसलिये रक्तदान-महादान है। रक्तदान के महत्व को उजागर करने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 14 जून को ‘विश्व रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में रक्तदान के महत्व को समझाने के साथ ही रक्तदान करने के लिये आम इंसान को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के लिये यह दिवस मनाया जाता है। इंसान की सम्पत्ति का कोई मतलब नहीं अगर उसे बांटा और उपयोग में नहीं लाया जाए, चाहे वे शरीर का रक्त ही क्यों न हो। किसी व्यक्ति की रक्तअल्पता के कारण मृत्यु न हो, इस दृष्टि से रक्तदान एक महान् दान...
 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति

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 सुविधा और दुविधा में फंसी यूपी के बेसिक शिक्षकों की तबादला नीति संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए सात साल बाद तबादले खोलकर षिक्षक समाज को बड़ी राहत प्रदान की है।  सरकार द्वारा अंतर-जनपदीय और जिला-स्तरीय तबादलों का रास्ता खुलने से शिक्षक खुश  तो हैं,लेकिन इसमें वह (शिक्षक) कुछ कमियों की बात करते हुए इन्हें दूर करने की  बात भी कह रहे हैं। तबादला प्रक्रिया शिक्षकों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित थी, क्योंकि कई शिक्षक अपने गृह जनपद या परिवार के नजदीक स्थानांतरित होने की उम्मीद में वर्षों से इंतजार कर रहे थे। इस प्रक्रिया की शुरुआत जून 2025 में हुई, जब बेसिक शिक्षा परिषद ने शिक्षकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन जैसे-जैसे यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, ...
बहुजन मंच की पुरानी विरासत पर चंद्रशेखर की नई बुनियाद

बहुजन मंच की पुरानी विरासत पर चंद्रशेखर की नई बुनियाद

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बहुजन मंच की पुरानी विरासत पर चंद्रशेखर की नई बुनियाद संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर नई करवट लेती नजर आ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव भले ही अभी दो साल दूर हों, लेकिन सियासी सरगर्मियां अभी से तेज़ होती जा रही हैं। भारतीय जनता पार्टी जहां अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों के सहारे वापसी की राह तलाश रही है। कांग्रेस भी खोई हुई जमीन की तलाश में सक्रिय हो चुकी है। लेकिन इन तमाम प्रमुख दलों के बीच बहुजन राजनीति में हलचल तब तेज़ हो गई जब आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को सीधे चुनौती दे डाली।झांसी में हाल ही में आयोजित ‘प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन’ में चंद्रशेखर ने न सिर्फ बसपा की नीतियों को निशाने पर लिया, बल्कि मायावती के नेतृत्व पर भी सवाल...
केंद्र सरकार के उपक्रम बन रहे कमाऊ पूत

केंद्र सरकार के उपक्रम बन रहे कमाऊ पूत

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केंद्र सरकार के उपक्रम बन रहे कमाऊ पूत आज से एक दशक से अधिक समय पूर्व तक केंद्र सरकार के उपक्रमों को चलायमान बनाए रखने के लिए केंद्रीय बजट में भारी भरकम राशि का प्रावधान करना पड़ता था तथा इन उपक्रमों को केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। परंतु, आज स्थिति एकदम बदल गई है एवं अब केंद्र सरकार के उपक्रम केंद्र सरकार को लाभांश के रूप में भारी भरकम राशि प्रदान कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार के विभिन्न उपक्रमों ने 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का लाभ अर्जित किया है। केंद्र सरकार के उपक्रमों में यह आमूलचूल परिवर्तन केंद्र में ईमानदार सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा निगमित अभिशासन से सम्बंधित नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराए जाने के चलते ही सम्भव हो सका है। पूर्व में इन उपक्रमों में पनप रहे भ्रष्टाचार के चलते इन उपक्रमों की लाभप्रदता पर विपरीत प्रभाव पड़ता...
मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो

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मन्दिरों में पैसे लेकर एवं वीआईपी दर्शन बन्द हो-ः ललित गर्ग:- ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में पैसे लेकर दर्शन कराने वाले बाउंसरों की गिरफ्तारी के बाद श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में सुगम दर्शन के नाम पर एक साथ इक्कीस लोगों की गिरफ्तारी जहां मंदिर प्रशासन की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, वही ईश्वर के दरबार में पांव फैला रहा भ्रष्टाचार गहन चिन्ताजनक एवं शर्मनाक हैं। कुछ ही दिनों पहले ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर मंदिर में भक्तों से वीआइपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली करने पर प्रशासन ने एक होमगार्ड जवान और दो पंडितों पर कार्रवाई की है। देश-विदेश  के भक्त अगाध श्रद्धा से अपने आराध्य का दर्शन करने आते हैं, लेकिन देश के प्रमुख मन्दिरों में सीधे दर्शन कराने के नाम पर पैसों की लूट मची है या वीआईपी संस्कृति के नाम पर त्रासद एवं भेदभावपूर्ण स्थितियां पसरी है। सवाल यह पूछा जा रहा है कि हिंदुओं के धार्मिक स्थलों ...
पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

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अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस- 15 जून, 2025पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है- ललित गर्ग- भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा माना गया है, पिता की धर्म है, पिता ही संबल है, पिता ही ताकत है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस यानी फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल 15 जून 2025 को भारत समेत विश्वभर में यह दिवस मनाया जायेगा। फादर्स डे 2025 का आधिकारिक थीम ‘पिताः लचीलेपन का पोषण और भविष्य को आकार देना’ है। यह थीम हमारे जीवन में पिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है, जो बच्चों में सकारात्मक भावनाओं और सामाजिक विकास को बढ़ावा देते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन और विविध...
बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

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बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान यज्ञ हमारी भारतीय संस्कृति में वैदिक काल से चला आ रहा एक धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान है। यज्ञ परम्परा का वर्णन हमारे प्राचीन वैदिक ग्रन्थों तथा ब्राह्मण ग्रन्थों में सविस्तार उपलब्ध होता है। सर्वाधिक वर्णन यजुर्वेद में प्राप्त होता है। प्राचीन समय में प्राकृतिक विपदाओं से बचने, अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने और तत्कालीन प्राकृतिक देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बहुतायत से यज्ञ किए जाते थे। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार ब्रह्माजी ने मानव को सहयोग देकर यज्ञ परम्परा को प्रारम्भ किया। ऋग्वेद में कहा गया है 'अग्रिमीडे पुरोहितं।Ó अग्रि को यज्ञ के मुँह की संज्ञा दी गई है अत: अग्रि में आहूति दी जाती है। यज्ञ ही विद्वानों के अनुसार श्रेष्ठतम कर्म है। गायत्री को माता तथा यज्ञ को पिता कहा गया है। विद्वानों ने यह भी कहा है 'यज्ञो वै विष्णु:वैदिककालीन प्राकृति...