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राहुलः खुदी को कर बुलंद इतना कि

राहुलः खुदी को कर बुलंद इतना कि

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक राहुल गांधी का भाषण पहले केंब्रिज विश्वविद्यालय में हुआ, फिर ब्रिटिश संसद में हुआ और फिर लंदन के चेथम हाउस में हुआ। इन तीनों संस्थाओं में मैं पिछले 50-55 साल से जाता रहा हूं। मुझे आश्चर्य हुआ कि हमारे नेताओं में एक नेता इतना योग्य निकला कि इन विश्व-प्रसिद्ध संस्थाओं में भाषण देने के लिए उसे बुलाया गया। मेरा सीना गर्व से फूल गया। लेकिन सच यह है कि इन संस्थाओं के सभा-भवनों को कोई भी किराए पर बुक कर सकता है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और सांसद हैं, इस नाते सरकार की आलोचना करने का उन्हें पूरा अधिकार है लेकिन यह काम बड़ी सावधानी से किया जाना चाहिए। ऐसी अतिवादी बातें नहीं कही जानी चाहिए जिनसे देश की छवि बिगड़ती हो, हालांकि भाजपा के प्रवक्ता जरूरत से ज्यादा परेशान मालूम पड़ते हैं। उन्हें क्या यह पता नहीं है कि विदेशी लोग राहुल की बातों को उतना महत्व भी नहीं देते, ...
भारत में फैल रहा एच3एन2 इन्फ्लूएंजा, क्या है संक्रमण से बचने के उपाय?

भारत में फैल रहा एच3एन2 इन्फ्लूएंजा, क्या है संक्रमण से बचने के उपाय?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार
एच3एन2 इन्फ्लूएंजा तब फैलता है जब संक्रमित व्यक्ति दूसरे से बात करता है, खांसता है या छींकता है By Dayanidhi मौसम में अचानक आ रहे बदलाव और अत्यधिक ठंड से गर्म तापमान में बदलाव के कारण लोगों में फ्लू के लक्षण अधिक दिखाई दे रहे हैं। जहां मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है, वहीं एक नया वायरस एच3एन2 पूरे भारत में फैल रहा है। एच3एन2 वायरस चिंता का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एच3एन2 इन्फ्लूएंजा अत्यधिक संक्रामक है। क्या है एच 3 एन 2 इन्फ्लुएंजा? सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक 2009 के एच1एन1 महामारी वायरस से मैट्रिक्स (एम) जीन के साथ इन्फ्लुएंजा ए एच3एन2 वेरिएंट वायरस जिसे "एच3एन2वी" वायरस के रूप में भी जाना जाता है, यह पहली बार जुलाई 2011 में लोगों में पाए गए थे। वायरस को पहली बार 2010 में अमेरिका में  सूअरों में पहचान की गई थी। 20...
प्रो कुसुमलता केडिया जी महिला दिवस पर कस्तूरी संस्था में बोलते हुए:-

प्रो कुसुमलता केडिया जी महिला दिवस पर कस्तूरी संस्था में बोलते हुए:-

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
कथित रेनेसां और enlightenment के बाद भी यूरोप में स्त्रियों पर भीषण अत्याचार जारी रहे थे क्योंकि चर्च के मनोरोगी पादरियों ने स्त्री को eve और evil प्रचारित कर दिया था।चर्च के नियंत्रण में ईसाई स्त्रियों को तरह तरह के झूठे अभियोग लगाकर भयंकर रूप से उत्पीड़ित किया जाता था:- जिंदा जला देना, खौलते कढ़ाह में उबालना, घोड़े की पूंछ में बांधकर पथरीली कटीली सड़कों में दौड़ाना ताकि वह लहूलुहान हो जाए, कांटेदार कुर्सी में बैठा कर मारना ,योनि में एक पीड़ादायक यंत्र डालकर उसे  इस प्रकार चौड़ा करते जाना कि भीषण पीड़ा हो और खून निकलने लगे,या  गले में कांटेदार यंत्र फंसा कर मुंह खोलना जिससे गला फट जाए और मरने की स्थिति आ जाए, ऐसे बर्बर पैशाचिक उपाय पादरियों  के द्वारा अपने अपने राज्यों की सहमति से किए जाते थे और जिन्हें यह दण्ड  दिया जाता था ,उनके ही परिवार से दंड देने का खर्चा वस...
बारूद के ढ़ेर पर खड़े विश्व को धर्म-धम्म की आवश्यकता।

बारूद के ढ़ेर पर खड़े विश्व को धर्म-धम्म की आवश्यकता।

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हाल ही में भारत के मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल में 3 मार्च को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में तीन दिवसीय सातवें अंतरराष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का शुभारंभ हुआ तथा जिसका समापन पांच मार्च को हो गया। यह सम्मेलन ‘नए युग में मानववाद का सिद्धांत” विषय पर सांची यूनिवर्सिटी ऑफ बुद्धिस्ट-इंडिक स्टडीज के सहयोग से इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें 15 देशों से  350 से भी अधिक विद्वान शामिल हुए। निश्चित ही इस प्रकार के सम्मेलन से धर्म धम्म के वैश्विक विचारों को एक साझा मंच मिला। इस सम्मेलन में भूटान, मंगोलिया, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाइलैंड, वियतनाम, नेपाल, दक्षिण कोरिया, मॉरिशस, रूस, स्पेन, फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से विभिन्न प्रतिनिधियों, विद्वान लोगों ने अपनी सहभागिता की। इस सम्मेलन में विषयों का निरूपण हुआ, मानववाद सिद्धांत पर लगातार तीन दिनों तक विभिन्न लोगों द्वा...
भारत की प्रतिष्ठा धूमिल करने के राहुली प्रयास

भारत की प्रतिष्ठा धूमिल करने के राहुली प्रयास

TOP STORIES, विश्लेषण, समाचार
-ललित गर्ग - देश पर सर्वाधिक समय शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेशी की धरती पर होहल्ला मचाते हुए भारत की छवि को धूमिल करने का घृणित एवं गैरजिम्मेदाराना काम किया है। गांधी ने लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पेगासस को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। वह देश में इस तरह की बातें करते ही रहे हैं कि मोदी सरकार के चलते भारतीय लोकतंत्र खतरे में है और सरकार से असहमत लोगों के साथ विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। वह वहां यह भी कह गए कि भारत की सभी संस्थाओं और यहां तक कि न्यायालयों पर भी सरकार का कब्जा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनके सरकार चलाने के तौर-तरीकों की तीव्र आलोचना की, जो महज खिसियाहट भरी अभद्र राजनीति का ही परिचायक नहीं था, बल्कि इसका भी प्रमाण था कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के लिए कोई किस हद तक जा सकता है, देश के गौरव को दाव पर लगा स...
कैसे मिली होली को अखिल भारतीय पहचान

कैसे मिली होली को अखिल भारतीय पहचान

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
 आर.के. सिन्हा कोरोना के कारण दो-तीन सालों तक जन धड़कन के पर्व होली का रंग फीका सा पड़ने लगा था। होली मिलन समारोहों पर भी विराम सा लग गया था। पर इस बार लगता है कि देश रंगोत्सव को पुराने अंदाज में मनाने जा रहा है। होली के रंग फिजाओं में बिखरे हैं। कहीं गुलाल और गुजिया की खुशबू को तो कहीं दही बड़ा और मालपुआ के अनोखे स्वाद को हर तरफ महसूस किया जा रहा है। होली मिलन समारोहों की भी वापसी हो चुकी है। इनके आयोजन लखनऊ से रायपुर, मुम्बई तथा पटना से दिल्ली वगैरह में सभी जगह हो रहे हैं। सब एक-दूसरे से गले मिल रहे हैं। गिले-शिकवे भुलाए जा रहे हैं। यही मौका है कि जब विभिन्न दलों के तमाम राजनीतिक नेता भी अपने मतभेद भुलाकर एक साथ होली खेलें और राष्ट्र निर्माण में लग जाएं। आखिर यह देश तो सबका है। राष्ट्र के प्रति जिम्मेवारी भी सबकी ही है I एक दौर था जब होली पर अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर भव्य...
सुप्रीम कोर्ट का यह “न्यायिक आतंकवाद” 

सुप्रीम कोर्ट का यह “न्यायिक आतंकवाद” 

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का फैसला ख़ारिज कर कूड़ेदान में डाल दो -बेशर्मी और निर्लज्जता की पराकाष्ठा दिखाता है यह फैसला -प्रधानमंत्री के हाथ काटने की कोशिश - आतंकवाद गतिविधि को अंजाम देने के लिए आतंकवादी दूसरे के घर, शहर, या मुल्क में घुसकर हमला करते हैं और आज ऐसा ही हमला सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के घर में घुसकर किया है - चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए “कॉलेजियम” बनाने का फैसला देश में अराजकता फैलाने का काम करेगा क्योंकि इस कॉलेजियम में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI होंगे - यानी 3 सदस्यों के पैनल में प्रधानमंत्री के खिलाफ जब 2 व्यक्ति होंगे तो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति असंभव ही हो जाएगी क्योंकि ये दोनों व्यक्ति तो सरकार और मोदी विरोधी ही होंगे जिनमें Genes तो एक जैसे ही हैं और यह अराजकता का कारण बनेगा - जस्टिस केएम जोसेफ ने नवम्बर, 2022 में अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थ...
अंगदान न होने से देश में हर साल पांच लाख मौतें

अंगदान न होने से देश में हर साल पांच लाख मौतें

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
दुर्भाग्य ! देश में 640 चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल हैं, जिनमें अंग प्रत्यारोपण और स्तंभ कोशिका से उत्पादन का काम किया जा सकता है, लेकिन चंद चिकित्सा संस्थानों में ही अंग प्रत्यारोपण व उत्सर्जन की शल्य क्रिया सुविधा उपलब्ध है। अब इनमें अंग प्रत्यारोपण व उत्सर्जन के पाठ्यक्रम भी नवीन चिकित्सा शिक्षा में जोडे गए हैं। चौंकिए मत ! देश में अंगों की अनुपलब्धता के कारण हर साल पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसके मुकाबले वर्ष 2022 में पंद्रह हजार अंगों का प्रत्यारोपण ही हो सका है। लोगों की जान बचाने के लिए जरूरत और उपलब्धता के बीच की इस खाई को पाटना जरूरी है। इसके दो ही उपाय हैं। पहला,अंगदान के लिए लोगों को जागरूक किया जाए और दूसरा, स्तंभ कोशिकाओं यानी स्टेम सेल के जरिए अंगों का उत्पादन बढ़ाया जाए।इस प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए भारत सरकार ‘एक राष्ट्र-एक नीति’ लागू करने जा रही ह...
विदेश नीतिः दोनों से दोस्ती

विदेश नीतिः दोनों से दोस्ती

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक जी-20 और क्वाड के सम्मेलन भारत में संपन्न हुए। इनसे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की छवि तो खूब चमकी और भारत के कई राष्ट्रों के साथ आपसी संबंध भी बेहतर हुए लेकिन जी-20 ने कोई खास फैसले किए हों, ऐसा नहीं लगता। वह रूस-यूक्रेन युद्ध रूकवाने में सफल नहीं हो सका। आतंकवाद और सरकारी भ्रष्टाचार को रोकने पर दो अलग-अलग बैठकों में विस्तार से चर्चा हुई लेकिन उसका नतीजा क्या निकला? शायद कुछ नहीं। सभी देशों के वित्तमंत्रियों और विदेश मंत्रियों ने दोनों मुद्दों पर जमकर भाषण झाड़े लेकिन उन्होंने क्या कोई ऐसी ठोस पहल की, जिससे आतंकवाद और भ्रष्टाचार खत्म हो सके या उन पर कुछ काबू पाया जा सके? इन दोनों मुद्दों पर रटी-रटाई इबारत फिर से पढ़ दी गई। क्या दुनिया के किसी देश में ऐसी सरकार हैं, जिसके नेता ये दावा कर सकें कि वे सत्ता में आने और बने रहने के लिए साम, दाम, दंड, भेद का स...
मुद्रा स्फीति पर अंकुश क्यों जरूरी

मुद्रा स्फीति पर अंकुश क्यों जरूरी

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, विश्लेषण
कोरोना महामारी के बाद से पूरे विश्व में मुद्रा स्फीति बहुत तेजी से बढ़ी है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति 7 प्रतिशत के ऊपर एवं थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति 13 प्रतिशत के ऊपर निकल गई थी। कई विकसित देशों में तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति 10 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंची थी जो कि पिछले 50 वर्षों की अवधि में सबसे अधिक महंगाई की दर है। मुद्रा स्फीति से आश्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि एवं मुद्रा की क्रय शक्ति में कमी होने से है। मुद्रा स्फीति विशेष रूप से समाज के गरीब एवं निचले तबके तथा मध्यम वर्ग के लोगों को बहुत अधिक प्रभावित करती है। क्योंकि, इस वर्ग की आय एक निश्चित सीमा में रहती है एवं इसका बहुत बड़ा भाग उनके खान-पान पर ही खर्च हो जाता है। यदि मुद्रा स्फीति तेज बनी रहे तो इस वर्ग के खान-पान पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने लगता है। अतः, मुद्रा स्फ...