स्वाति मालीवाल का विवादास्पद बयान – रामेश्वर मिश्र पंकज
स्वाति मालीवाल के बयान के पक्ष और विपक्ष दोनों में सक्रिय लोग मूलभूत बात को अनदेखा कर रहे हैं ।ऐसे सभी विषयों में मूलभूत बात जो है ,उस पर जाने क्यों शिक्षित हिंदुओं का बहुत बड़ा हिस्सा ध्यान ही नहीं दे रहा है ।बात यह है कि समाज की प्रतिनिधि घटनाएं और समाज का प्रतिनिधि मानस तथा समाज का प्रतिनिधि व्यवहार,किन किन चीजों को माना जाए? उसका अनुपात क्या है? उसके निकष क्या हैं?इस विषय पर हर क्षेत्र में मनमानी चलती है।
पहले भारतवर्ष के कुछ इलाकों में कुछ समुदायों में स्त्रियां घूंघट करने लगी थी। जिस कारण से भी करती हों।तो लोग सीधे बयान देने लगे कि भारत की स्त्रियां घूंघट करती हैं।जबकि उस समय भी 80% हिंदुओं की स्त्रियां घूँघट नहीं करती थी ।तो प्रश्न यह है कि 15 या 20% स्त्रियां सभी स्त्रियों की प्रतिनिधि किस आधार पर हो गईं,?इसी प्रकार डॉक्टर अंबेडकर के साथियों के साथ या कुछ समुदायों के ...









