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फीके पड़ते होली के रंग

फीके पड़ते होली के रंग

BREAKING NEWS, TOP STORIES, संस्कृति और अध्यात्म
पहले की होली और आज की होली में अंतर आ गया है, कुछ साल पहले होली के पर्व को लेकर लोगों को उमंग रहता था, आपस में प्रेम था। किसी के भी प्रति द्वेष भाव नहीं था। आपस में मिल कर लोग प्रेम से होली खेलते थे। मनोरंजन के अन्य साधानों के चलते लोगों की परंपरागत लोक त्यौहारों के प्रति रुचि कम हुई है। इसका कारण लोगों के पास समय कम होना है। होली आने में महज कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन शहर में होली के रंग कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। एक माह तो दूर रहा अब तो होली की मस्ती एक-दो दिन भी नहीं रही। मात्र आधे दिन में यह त्योहार सिमट गया है। रंग-गुलाल लगाया और हो गई होली। जैसे-जैसे परंपराएं बदल रही हैं, रिश्‍तों का मिठास खत्‍म होता जा रहा है। -प्रियंका सौरभ होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते रहे हैं। होली के दिन सभी बैर-भाव भूलकर एक-दूसरे से परस्पर गले मि...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व का विराट दर्शन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व का विराट दर्शन

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, साहित्य संवाद
हमलोगों को "हिंदू" कब से कहा जाया जाने लगा ये तो ठीक-ठीक नहीं पता पर मेरे ख्याल से ये नाम हमारे लिए सबसे उपयुक्त नाम है क्योंकि ये सर्वसमावेशी नाम है जो हमारी सामूहिक प्रकृति को सबसे ठीक से परिभाषित करती है। महाभारत के बाद से भारत कई अवैदिक मतों की उद्भव स्थली बनी। बौद्ध, जैन और सिख मत जन्में। अगर और ज्यादा विस्तृत रूप में कहें तो हिंदुत्व वो है जिसमें सनातनी, बौद्ध, जैन, निंबार्ककी, सिख (सिखों में भी सहजधारी, केशधारी) लिंगायत, गृहस्थ, संन्यासी, नास्तिक, वैदिक, अवैदिक, अज्ञेयवादी, निरंकारी, प्रकृति पूजक, मशान पूजक, सुधारवादी, जड़वादी, कैवल्य, रामस्नेही सबके सब इस के अंदर समाहित है। दिक्कत ये हुई कि ये सब जो पंथ-उपपंथ-मत- संप्रदाय आदि जन्में इन सबके अपने गुरु, अपने इष्ट, अपने प्रवर्तक और अपने तीर्थंकर हैं। इनके अपने तीर्थ हैं। अपनी परंपराएं हैं। अपने आश्रम और कर्मकांड हैं तो जब तक इन...
भाषाः गुजरात से सीखें सभी प्रांत

भाषाः गुजरात से सीखें सभी प्रांत

BREAKING NEWS, TOP STORIES, संस्कृति और अध्यात्म
डॉ. वेदप्रताप वैदिक गुजरात की विधानसभा ने सर्वसम्मति से जैसा प्रस्ताव पारित किया है, वैसा देश की हर विधानसभा को करना चाहिए। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि गुजरात की सभी प्राथमिक कक्षाओं में गुजराती भाषा अनिवार्य होगी। पहली कक्षा से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए गुजराती पढ़ना अनिवार्य होगा। जो स्कूल इस प्रावधान का उल्लंघन करेंगे, उन पर 50 हजार से 2 लाख रु. तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जो स्कूल इस नियम का उल्लंघन एक साल तक करेंगे, राज्य सरकार उनकी मान्यता रद्द कर देगी। गुजरात में बाहर से आकर रहनेवाले छात्रों पर उक्त नियम नहीं लागू होगा। मेरी राय यह है कि गैर-गुजराती छात्रों पर भी यह नियम लागू होना चाहिए, क्योंकि भारत के किसी भी प्रांत से आनेवाले छात्र-छात्राओं के लिए गुजराती सीखना बहुत आसान है। उसकी लिपि तो एक-दो दिन में ही सीखी जा सकती है और जहां तक भाषा का सवाल है, वह भी कुछ हफ्तों में ह...
चीनी कर्ज का मकड़जाल

चीनी कर्ज का मकड़जाल

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
बलबीर पुंज मानव सभ्यता चाहे कितना भी विकास कर लें, उसमें व्याप्त राक्षसी प्रवृतियां आज भी जस की तस है। कमजोर राष्ट्रों को पहले भी शक्तिशाली सेना और हथियारों के बल पर रौंदा गया है और अब भी ऐसा होता है। उद्देश्य वही है, केवल उसका स्वरूप बदल गया है। अब देशों को गुलाम बनाने या उनपर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए सैन्यबल से अधिक आर्थिक प्रपंचों का सहारा लिया जाता है। वर्तमान समय में ऐसे शोषण का मूर्त प्रतीक चीन के रूप में उभरा है। आज जहरीले सर्प रूपी चीन का काटा, पानी मांगने की स्थिति में भी नहीं रहता है। भारत के पड़ोस में श्रीलंका और पाकिस्तान, साम्राज्यवादी चीन की कुत्सित मानसिकता का नवीनतम शिकार है। यह ठीक है कि पाकिस्तान काफी हद तक अपने कुकर्मों के कारण संकटमयी स्थिति से गुजर रहा है, जहां पेट भरने के लिए रोटी की भारी किल्लत है, चायपत्ती का अकाल है, खाद्य-तेल की कमी है, तो बिजली का गहरा स...
युवा पीढ़ी क्या सीखे, इन बोलवचनों से ?

युवा पीढ़ी क्या सीखे, इन बोलवचनों से ?

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
और मध्यप्रदेश में पूर्व मंत्री राजा पटेरिया को दूसरे प्रयास में हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई, दिल्ली में भी एक कांग्रेस प्रवक्ता को हवाई जहाज से उतारकर आनन-फानन में गिरफ्तार करना और सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत देने के इन प्रकरणों ने कई सवालों को जन्म दिया है। कहना कठिन है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी जुबान फिसलने की घटना थी या इरादतन तंज किया गया था, लेकिन असम में दर्ज मुकदमे में दिल्ली पहुंचकर कार्रवाई करने की घटना में पुलिस की मुस्तैदी ने सबको चौंकाया है। सवाल उठा कि क्या अन्य गंभीर मामलों में भी पुलिस इतनी ही तत्परता दिखाती है? ये घटनाक्रम फिर वही मुद्दा उठाते है कि देश में पुलिस सुधारों की आवश्यकता है। बहरहाल, हाल के दिनों में सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर जो तल्ख रवैया अपनाया जा रहा है उसकी गूंज अभी राजनीतिक हलकों में शिद्दत से महसूस की जा रही है। कांग्रेस के नेता ...
होली है नफरत को प्यार में बदलने का रंग-पर्व

होली है नफरत को प्यार में बदलने का रंग-पर्व

TOP STORIES, विश्लेषण, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
-ललित गर्ग -बदलती युग-सोच एवं जीवनशैली से होली त्यौहार के रंग भले ही फीके पड़े हैं या मेरे-तेरे की भावना, भागदौड़, स्वार्थ एवं संकीर्णता से होली की परम्परा में धुंधलका आया है। परिस्थितियों के थपेड़ों ने होली की खुशी को प्रभावित भी किया है, फिर भी जिन्दगी जब मस्ती एवं खुशी को स्वयं में समेटकर प्रस्तुति का बहाना मांगती है तब प्रकृति एवं परम्परा हमें होली जैसा रंगारंग त्योहार देती है। इस त्योहार की गौरवमय परम्परा को अक्षुण्ण रखते हुए हम एक उन्नत आत्मउन्नयन एवं सौहार्द का माहौल बनाएं, जहां हमारी संस्कृति एवं जीवन के रंग खिलखिलाते हुए देश ही नहीं दुनिया में अहिंसा, प्रेम, भाई-चारे, साम्प्रदायिक सौहार्द के रंग बिखेरे। पर्यावरण के प्रति उपेक्षा एवं प्रदूषित माहौल के बावजूद जीवन के सारे रंग फीके न पड़ पाए।होली एक ऐसा त्योहार है, जिसका धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक-आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष मह...
पाक की मदद से पहले सोचे भारत

पाक की मदद से पहले सोचे भारत

TOP STORIES, राष्ट्रीय
आर.के. सिन्हा पाकिस्तान में आजकल भयंकर हाहाकार मचा हुआ है। महंगाई के कारण आम पाकिस्तानी दाने-दाने को मोहताज हो गया है। बेरोजगारी, अराजकता और  कठमुल्लों की करतूतों ने पाकिस्तान को तबाह कर दिया है। यह स्थिति  दुखद और दुभार्ग्यपूर्ण है। अब हमारे यहां के कुछ उदारवादी यह कह रहे हैं, कि भारत को चाहिए कि वह पाकिस्तान की मदद करे। भारतीय गुप्तचर एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत कह रहे हैं कि मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल के अंत में किसी समय पाकिस्तान की ओर शांति का हाथ बढ़ाएंगे और पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक एवं आर्थिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी देश की मदद करेंगे। अब इन महानुभावों से पूछा जाना चाहिए कि जो मुल्क भारत पर 1948, 1965, 1971 और फिर कारगिल पर हमला कर चुका हो उसको लेकर इतना उदारता का रवैया अपनाने का क...
दिल्ली दंगों का तीसरा साल, जख्म जो अब तक नहीं भरा

दिल्ली दंगों का तीसरा साल, जख्म जो अब तक नहीं भरा

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आशीष कुमार 'अंशु' यह दिल्ली दंगे का तीसरा साल है। अब लोग धीरे धीरे उसे भूलने लगे हैं लेकिन जिन परिवारों को इस दंगे ने जख्म दिए हैं। वे भूलने की कोशिश करते हैं और फरवरी का महीना हर साल सबकुछ फिर से याद दिला देता है। 22 फरवरी 2020 तक सबकुछ सामान्य था और 23 तारीख से पूर्वनियोजित योजना बनाकर दिल्ली को आग में झोंक देने की साजिश रची गई। सामने आए कथित तौर पर साजिश रचने वाले दर्जनों नाम अब जमानत पर रिहा हैं। दिल्ली के इतिहास पर यह दंगा एक बदनुमा दाग बन कर छप गया है। जहां कुछ राजनीतिक चेहरे भी बेनकाब हुए जो यहां के दलितों और पीछड़ों को भरोसा दे रहे थे कि वे उनकी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसा कोई कथित अम्बेडकरवादी पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं आया। देखा गया कि भीम आर्मी के लोग इस मुद्दे पर अपना मुंह छुपाते रहे। इस पूरे मामले में आरोपियों में मुसलमानों का नाम शामिल था, संभव है कि भीम आर्मी के नेता यद...
भारतीय गृहणियों के घरु कार्य का आंकलन कर इसे सकल घरेलू उत्पाद में शामिल किया जाना चाहिए

भारतीय गृहणियों के घरु कार्य का आंकलन कर इसे सकल घरेलू उत्पाद में शामिल किया जाना चाहिए

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक
भारतीय अर्थशास्त्रियों द्वारा जैसी कि उम्मीद की जा रही थी एवं भारतीय रिजर्व बैंक ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था सम्बंधी अपने आंकलन में जो सम्भावना व्यक्त की थी, उसी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 की तृतीय तिमाही, अक्टोबर-दिसम्बर 2022, में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि वित्तीय वर्ष 2022-23 की प्रथम तिमाही, अप्रेल-जून 2022, में एवं द्वितीय तिमाही, जुलाई-सितम्बर 2022, में क्रमशः 13.2 प्रतिशत एवं 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। जबकि चौथी तिमाही, जनवरी-मार्च 2023, में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि की सम्भावना के चलते पूरे वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है। इसी प्रकार कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे गोल्डमेन सेच्स, मूडी, फिच, एशियाई विकास बैंक आदि ने भी वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्य...
India’s iron and steel industry capable of emitting less and producing more

India’s iron and steel industry capable of emitting less and producing more

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CSE conducts stakeholder meet on decarbonising India’s iron and steel sector. Underlines the need for better planning, new technologies and adequate finance to help the sector make the much-needed shift in today’s climate-stressed world Download CSE’s new report here: https://www.cseindia.org/decarbonizing-india-s-iron-and-steel-sector-report-11434 Follow the workshop proceedings here: https://www.cseindia.org/workshop-on-decarbonizing-india-s-iron-and-steel-sector-by-2030-and-beyond-11623 New Delhi, February 28, 2022: “The iron and steel industry is an emission-intensive sector. Our new analysis shows it is possible to bring down carbon dioxide (CO2) emissions from our iron and steel sector drastically by 2030, while more than doubling India’s output of s...