Shadow

TOP STORIES

डगमगाती भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद

डगमगाती भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय
एक समय था, जब भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मध्य-वर्ग था तो उसके लिए सबसे पवित्र-पूंजी थी कर्मचारी भविष्य-निधि कोष। भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद। कोई नागरिक निजी तौर पर बचत करना चाहे, या न चाहे पिछली सरकारों ने उसके लिए बचत के प्रावधान को अनिवार्य बनाने की कोशिश की थी। कर्मचारी के इस खाते में बचत सरकार की भी जिम्मेदारी थी। लेकिन,अब सरकार का नागरिकों के प्रति यह अभिभावकीय अस्तित्व अस्त हो रहा है। इस बार के केंद्रीय बजट का मूल स्वर यही है कि “कर दिए जाओ और बचत की चिंता न करो।“हमारे सामने भारतीय अर्थव्यवस्था में छोटी बचतों का इतिहास उस वक्त दर्ज हुआ जब 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के समय दुनिया के बाजार धड़ाम से गिर रहे थे। बाजार के जानकारों ने उस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने का श्रेय घर-घर मौजूद बचतवादियों को ही दिया था। इस बचतवादी प्रवृत्ति का रखवाला था भविष्य-निधि कोष। आप आज जितन...
बिगड़ता मौसम, सबको सोचना होगा!

बिगड़ता मौसम, सबको सोचना होगा!

BREAKING NEWS, Current Affaires, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
बीते कल भोपाल का तापमान 36 डिग्री था । अगले 4 दिनो में इसके 39 डिग्री तक पहुँचने की भविष्यवाणी मौसम विभाग कर रहा है। यह सब ऋतु-चक्र में आये बदलाव के कारण हैं । अब तो बारह महीने लोगों से हम यह सुनते आ रहे हैं- इस बार तो गर्मी ने हद कर दी... ऐसी गर्मी तो मैंने कभी नहीं झेली। बरसात में इस बार की बरसात ने तो हाहाकार मचवा दिया... जिधर देखो पानी ही पानी। इसी तरह जाड़ा - ऐसा जाड़ा कि हड्डियां हिलाकर रख दीं। बारह महीने ऋतुओं के बदलाव ने सभी को परेशान कर दिया है। पिछले साल जून में उत्तर भारत सहित देश के तकरीबन सभी हिस्सों में बेहाल कर देने वाली गर्मी पड़ी। दिल्ली में पारा जब 48 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर पहुंचा तो लोगों पर ही इसका असर नहीं दिखा बल्कि पशु-पक्षी भी हलकान दिखे। इस साल राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित तमाम प्रदेशों में कड़ाके की ठंड ने सबको बेहाल कर दिया। इस फर...
क्या कश्मीर में बदलते हालात जंग की आहट है?- ललित गर्ग

क्या कश्मीर में बदलते हालात जंग की आहट है?- ललित गर्ग

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य
लम्बे समय की शांति, अमन-चैन एवं खुशहाली के बाद एक बार फिर कश्मीर में अशांति एवं आतंक के बादल मंडराने लगे हैं। धरती के स्वर्ग की आभा पर लगे ग्रहण के बादल छंटने लगे थे कि एक बार फिर कश्मीर के पुलवामा के अचन गांव में एक कश्मीरी पंडित की हत्या ने अनेक सवाल खडे़ कर दिये हैं। सवाल अनेक हैं लेकिन एक ज्वलंत सवाल है कि क्या कश्मीरी पंडितों की हत्याओं के सिलसिले का कभी अंत हो पाएगा? क्या अचन गांव में एक और कश्मीरी पंडित की हत्या भी अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियां बनकर ही रह जाएगा? क्या कश्मीर घाटी का अमन-चैन वापस लौटेगा? कश्मीर पहले की तरह धरती का स्वर्ग नजर आएगा? इन सवालों का जवाब सिर्फ कश्मीर की जनता ही नहीं, बल्कि देश के साथ पूरी दुनिया भी जानने को उत्सुक है। यह सही है कि घाटी में सुरक्षा बलों और सैन्य ठिकानों पर हमले अब काफी कम हो गए हैं, लेकिन आम नागरिकों और खासकर कश्मीरी पंडितों और प्रवास...
द मास्क ऑफ अफ्रीका

द मास्क ऑफ अफ्रीका

BREAKING NEWS, TOP STORIES
सर वी एस नायपॉल ने अपनी पुस्तक "द मास्क ऑफ अफ्रीका" में अफ्रीकी आस्थाओं का एक अध्ययन प्रस्तुत किया है.पुस्तक में पश्चिम अफ्रीका के एक देश गेबॉन में एक पात्र है रोसेटाँगा-रेनयु, जो एक लॉयर और एकेडेमिक है. उसके पिता फ्रेंच थे, माँ अफ्रीकन. उसने पेरिस में लॉ की पढ़ाई की थी, वह एंथ्रोपोलॉजिस्ट भी था और यूनिवर्सिटी ऑफ गेबॉन में डीन था. रोसेटाँगा अफ्रीका के बारे में कहता है : मॉडर्न रेलिजन्स यहाँ सिर्फ सतह पर है. उसके नीचे घने जंगल हैं.हर अफ्रीकी के अंदर यह घना जंगल है. वे जंगल से डरते हैं, तो जंगल के साथ जीते भी हैं. वे पेड़ों से बातें करते हैं. उसे मन की बात, अपना दुख दर्द बताते हैं. जब कोई किसी पेड़ की डाल काटता है या छाल निकालता है तो उसे उस पेड़ की अनुमति माँगनी होती है. उसे बताना होता है कि वह यह लकड़ी या छाल किसलिए ले जा रहा है. यह जरूरी है. जंगल की एक अपनी ऊर्जा है. यह जीवन ऊर्...
सभ्यतागत चुनौती

सभ्यतागत चुनौती

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
The Civilisational Challengeजापान को सिर्फ एक देश नहीं, एक विशिष्ट सभ्यता मानना गलत नहीं होगा. अपने इतिहास के प्रारंभिक कालखंड में जापानी संस्कृति लगभग पूरी तरह से चीनी संस्कृति की एक शाखा मात्र थी. चीन एक तरह से जापान का कल्चरल बिग ब्रदर था. पर दूसरी सहस्त्राब्दी के आते आते जापान ने अपनी विशिष्ट संस्कृति विकसित कर ली जो दुनिया की अन्य किसी भी संस्कृति से बिल्कुल ही अलग थी...लगभग विचित्र. यह एक बहुत ही पारंपरिक, सैन्य संस्कृति बन गयी. शिंतो बौद्ध धर्म और विलक्षण समुराई सैनिक इसकी खास पहचान थे. 16वीं सदी का जापान टुकड़ों में बँटा था. इसमें अनेक डेमियन सरदार (वारलॉर्ड) आपस में लड़ते रहते थे. उसी समय यूरोपियन व्यापारी और ईसाई मिशनरियाँ भी जापान पहुंचीं. उस दौर में जापान में पश्चिम से दो चीजें पहुंची...क्रिश्चियनिटी और बंदूकें. उनमें एक जापानी वारलॉर्ड हुआ ओडा नोबुनागा. उसे जापान का पहल...
पंजाब में उन्मादी लपटों को हवा देने के षड़यंत्र- ललित गर्ग

पंजाब में उन्मादी लपटों को हवा देने के षड़यंत्र- ललित गर्ग

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य
एक बार फिर पंजाब अशांति, हिंसा एवं आतंकवाद की ओर बढ़ रहा है। राज्य में कानून-व्यवस्था ढह चुकी है और अराजकता हावी है। समूचा प्रशासन मूकदर्शक बनकर असामान्य होती स्थितियों को देख रहा है। खालिस्तान समर्थक उग्र होते जा रहे हैं। पुलिस और शासन-व्यवस्था एकदम लाचार बनी उपद्रवियों के सामने समर्पण करती हुई दिखाई दे रही है? ऐसे जटिल-से-जटिल हालातों में आम जनता अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करेगी! यह छिपा तथ्य नहीं है कि पंजाब में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, तब से कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कई बार ऐसे हालात देखे गये है, मानो आपराधिक तत्त्वों को बेलगाम होने का मौका मिल गया हो या यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत राज्य में अशांति, आतंक एवं अराजकता को पनपने दिया जा रहा है। जबकि चुनावों के दौरान आप पार्टी ने राज्य की जनता से कानून-व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने से लेकर नशामुक्ति जैसे कई बड़े वादे...
भाग्य के भरोसे झूलता विपक्ष

भाग्य के भरोसे झूलता विपक्ष

TOP STORIES, राष्ट्रीय
डॉ. वेदप्रताप वैदिक अपने रायपुर अधिवेशन में सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा बहुत ही मर्यादित ढंग से कर दी है और उन्होंने अपने काल की उपलब्धियों और हानियों का जिक्र भी काफी खुलकर किया है लेकिन कांग्रेसियों का भक्तिभाव भी अद्भुत है। वे बार-बार कह रहे हैं कि इसे आप सोनियाजी का संन्यास क्यों मान ले रहे हैं? वे अब भी कांग्रेस की सर्वोच्च नेता हैं। यह कथन बताता है कि सोनिया गांधी के प्रति कांग्रेसियों में कितनी अंधभक्ति है? क्या आपने कभी अटलजी या आडवाणीजी के प्रति ऐसा भक्तिभाव भाजपा में देखा है? सभी लोकतांत्रिक देशों की पार्टियां समय-समय पर अपने नेताओं को बदलती रहती हैं लेकिन हमारी कांग्रेस पार्टी को आजादी के बाद जड़ता ने ऐसा घेरा है कि वह पार्टी नहीं, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई है, जैसे कि हमारी प्रांतीय पार्टियां हैं। अब कांग्रेस कह रही है कि उसी के नेतृत्व में मोदी-विरोधी...
वायु प्रदूषण से लड़खड़ाता स्वास्थ्य

वायु प्रदूषण से लड़खड़ाता स्वास्थ्य

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
वायु गुणवत्ता बहुत खराब होने का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। इससे रेस्पिरेटरी इश्यू, हार्ट प्रॉब्लम बढ़ने के अलावा और भी कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।हाई लेवल के वायु प्रदूषण के कारण कई तरह के प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं। इससे श्वसन संक्रमण, हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। जो पहले से ही बीमार हैं, उन पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। बच्चे, बुजुर्ग और गरीब लोग इसके ज्यादा शिकार होते हैं। जब पार्टिकुलेट मैटर  2.5 होता है, तो यह फेफड़ों के मार्ग में गहराई से प्रवेश करने लगता है। -प्रियंका सौरभ वायु प्रदूषण का भारत में मानव स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। यह बीमारी के लिए दूसरा सबसे बड़ा जोखिम कारक है और वायु प्रदूषण की आर्थिक लागत सालाना 150 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। भारत में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहन उत्...
वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

TOP STORIES, आर्थिक, समाचार
यदि भारत के प्राचीन अर्थतंत्र के बारे में अध्ययन किया जाय तो ध्यान में आता है कि प्राचीन भारत की अर्थव्यस्था अत्यधिक समृद्ध थी। विश्व के कई भागों में सभ्यता के उदय से कई सहस्त्राब्दी पूर्व, भारत में उन्नत व्यवसाय, उत्पादन, वाणिज्य, समुद्र पार विदेश व्यापार, जल, थल एवं वायुमार्ग से बिक्री हेतु वस्तुओं के परिवहन एवं तत्संबंधी आज जैसी उन्नत नियमावलियां, व्यवसाय के नियमन एवं करारोपण के सिद्धांतों का अत्यंत विस्तृत विवेचन भारत के प्राचीन वेद ग्रंथों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। प्राचीन भारत में उन्नत व्यावसायिक प्रशासन व प्रबंधन युक्त अर्थतंत्र के होने के भी प्रमाण मिलते हैं। प्राचीन भारत में कुटीर उद्योग बहुत फल फूल रहा था इससे सभी नागरिकों को रोजगार उपलब्ध रहता था एवं हर वस्तु का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता था। ग्रामीण स्तर पर भी समस्त प्रकार के आवश्यक उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध...
राहुल गांधी की नई भूमिका क्या हो?

राहुल गांधी की नई भूमिका क्या हो?

TOP STORIES, राष्ट्रीय
विनीत नारायणपंडित नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक हर प्रधान मंत्री वैश्विक मंच पर गर्व से घोषणा करते आए हैं कि भारत विश्वका सबसे बड़ा लोकतंत्र है। किसी भी सफल लोकतंत्र का प्रमाण यह होता है कि उसमें पक्ष और विपक्षी दल सबलभूमिका में सक्रिय रहें। कमज़ोर विपक्ष या विपक्षहीन पक्ष लोकतंत्र के पतन का रास्ता तैयार करता है। इसके साथही न्यायपालिका, मीडिया, चुनाव आयोग, महालेखाकार व जाँच एजेंसियों की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो और वेनिडर होकर काम कर सकें। अनुभव ये बताता है कि हमारा देश में सत्ता पक्ष विपक्ष को कमज़ोर करने का हर संभवप्रयास करता है। पर स्विट्ज़रलैंड, इंग्लैंड या अमरीका जैसे देशों में सत्तापक्ष की ओर से ऐसे अलोकतांत्रिक प्रयासप्रायः नहीं किए जाते। इसलिए उनका लोकतंत्र आदर्श माना जाता है।किसी देश की अर्थव्यवस्था के स्थायित्व के लिए ज़रूरी होता है कि देश की गृह नीति ऐसी हो जिससे समाज मेंशांति व्...