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सावरकर के बलिदानों को धुंधलाने की कोशिशें कब तक?

सावरकर के बलिदानों को धुंधलाने की कोशिशें कब तक?

TOP STORIES, विश्लेषण
वीर दामोदर सावरकर निर्वाण दिवस- 26 फरवरी, 2023- ललित गर्ग -प्रखर राष्ट्रवादी एवं हिन्दूवादी नेता वीर दामोदर सावरकर इस संसार के एकमात्र ऐसे रचनाकार हैं जिनकी पुस्तक ’1857 का स्वातंत्र्य समर’ को अंग्रेजों ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था। यह वह पुस्तक है जिसके माध्यम से सावरकर ने सिद्ध कर दिया था कि 1857 की जिस क्रांति को अंग्रेज मात्र एक सिपाही विद्रोह मानते हैं, जबकि वही भारत का ‘प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ था। वीर सावरकर ऐसे महान् भारतीय क्रांतिवीर हैं जिन्हें अंग्रेज-सरकार ने क्रांति के अपराध में एक ही जीवन में दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी। दो बार की काले पानी की कठोर सजा के दौरान सावरकर को अनेक यातनाएं दी गयी। अंडमान जेल में उन्हें छः महिने तक अंधेरी कोठरी में रखा गया। एक-एक महिने के लिए तीन बार एकांतवास की सजा सुनाई गयी। सात-सात दिन तक दो बार हथकड़ियां पहनाकर दीवा...
कांग्रेसः ढाक के वही तीन पात!

कांग्रेसः ढाक के वही तीन पात!

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
डॉ. वेदप्रताप वैदिक कांग्रेस पार्टी का 85 वां अधिवेशन अभी पूरा नहीं हुआ है लेकिन अभी तक रायपुर में जो कुछ हुआ है, उसके बारे में क्या कहें? ढाक के वही तीन पात! इंदिरा गांधी के ज़माने से देश की इस महान पार्टी के आकाश से आतंरिक लोकतंत्र का जो सूर्य अस्त हुआ था, वह अब भी अस्त ही है। इसमें कांग्रेेस के वर्तमान नेतृत्व का दोष उतना नहीं है, जितना उसके अनुयायिओं का है। राहुल गांधी का तो मानना है कि कांग्रेस की कार्यसमिति चुनाव के द्वारा नियुक्त होनी चाहिए लेकिन रायपुर अधिवेशन में पार्टी की संचालन समिति ने सर्वसम्मति से तय किया है कि यह नियुक्ति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ही करेंगे। जिन दो-तीन नेताओं ने शुरू में थोड़ी हिम्मत की और बोला कि कार्यसमिति के लिए चुनाव करवाए जाएं, उन्होंने भी झुण्ड के आगे मुण्ड झुका दिया। खड़गे ने भी कह दिया कि वह सोनिया, राहुल और प्रियंका से सलाह करके कार्यस...
लचर क़ानून व्यवस्था का प्रमाण है अपराध

लचर क़ानून व्यवस्था का प्रमाण है अपराध

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, विश्लेषण
डॉ. शंकर सुवन सिंहभारत जैसे देश में आए दिन अपराध जैसे हत्या,लूट, छिनैती, बलात्कार,धार्मिक उन्माद आदिहोते रहते हैं। अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश भी शिखर पर है। प्रयागराज के नैनी स्थितहुक्का बार में 14 फरवरी 2023 को एक बालू कारोबारी की हत्या कर दी जाती है। अभीहाल ही में 24 फरवरी 2023 को राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल कोदिनदहाड़े सरेआम गोलियाँ और बम से भून दिया जाता है। इस हत्याकांड में उमेश पाल केगनर को भी अपराधी दौड़ाकर गोलियों से भून देते हैं। इस घटना से उत्तर प्रदेश के पुलिसप्रशासन और क़ानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह उठना स्वाभाविक है। इस घटना का मुख्यकारण न्याय मिलने में विलम्ब होना और क़ानून व्यवस्था का लचर होना है। उधर पंजाब मेंभारत के अमृतकाल के लिए अमृतपाल कहर बनता जा रहा है। पंजाब में खालिस्तानीसंगठन (वारिस पंजाब दे) का मुखिया अमृतपाल सिंह और उसके गुंडों ने अमृतसर केअजना...
कब खरीदकर पढ़ी जाएंगी किताबें ?

कब खरीदकर पढ़ी जाएंगी किताबें ?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
आर.के. सिन्हा आप जब इन पंक्तियों को पढ़ रहे होंगे तब राजधानी में विश्व पुस्तक मेला शुरू हो गया होगा। कोरोना के कारण विश्व पुस्तक मेला बीते कुछ सालों से आयोजित नहीं हो पा रहा था। जाहिर है कि पुस्तक मेले के फिर से आयोजन से शब्दों के शैदाइयों के चेहरे खिले हुए हैं। वे अपने मन-पसंद की किताबें सस्ते दामों पर खरीदेंगे। पर ये भी सच है कि इस डिजिटल दौर में किताबों से पाठकों की दूरियां निश्चित रूप से बढ़ी हैं। बहुत बड़ी संख्या में पाठक अपने मोबाइल पर ही अपनी दिलचस्पी की सामग्री पढ़कर संतुष्ट हो जाते हैं। वे किताबें खरीदने की जरूरत ही नहीं महसूस करते। बेशक, किताबों को फिर से प्रासंगिक तो बनाना ही होगा। वह कितना अज्ञानी समाज होता है जहां पर किताबों के महत्व को सही ढंग से नहीं समझा जाता। आमतौर पर हमारे यहां कहानियों, कविताओं,उपन्यासों, जीवनियों से जुड़ी किताबें बहुतायत में छपती ह...
ख़तरा : जिसके बारे में सबको, सोचना है

ख़तरा : जिसके बारे में सबको, सोचना है

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
यह तथ्य चौंकाने वाला नहीं, परेशान करने वाला है कि महासागरों का औसत तल वर्ष 1993 के बाद से प्रतिवर्ष 3.2 मिलीमीटर की दर से बढ़ चुका है। वर्ष 2015 से 2019 के बीच तो यह बढ़ोत्तरी 5 मिलीमीटर प्रतिवर्ष तक रही है जबकि वर्ष 2007 से बढ़ोतरी का औसत 4 मिलीमीटर प्रतिवर्ष रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि साल-दर-साल महासागरों के औसत तल में पहले से अधिक बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसके प्रभाव से आबादी का बहुत बड़े पैमाने पर विस्थापन होगा। यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा क्योंकि एक बड़ी आबादी का घर और व्यवसाय छूट जाएगा, ठिकाना बदल जाएगा। इसके प्रभाव से अनेक देश भी डूब जायेंगे, जिससे एक बड़ी आबादी ऐसी होगी, जिसका कोई देश नहीं होगा। दुनिया के अधिकतर महानगर महासागरों के किनारे स्थित हैं और जैसे-जैसे महासागरों का तल बढ़ रहा है, पृथ्वी का भूगोल भी बदल रहा है - पानी का क्षेत्र बढ़ता जा ...
अमृतपाल सिंह पर भेजी गई पीएम मोदी की सीक्रेट रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ ?

अमृतपाल सिंह पर भेजी गई पीएम मोदी की सीक्रेट रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ ?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
अमृतपाल सिंह पर भेजी गई पीएम मोदी की सीक्रेट रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ ?* -देश की एकता और अखंडता को एक बार फिर खतरा पैदा हो रहा है क्योंकि पंजाब में मौजूद केजरीवाल की सरकार खालिस्तानी अलगाववादी तत्वों के प्रति नरम रुख अपना रही है बल्कि उनका तुष्टीकरण भी कर रही है । मीडिया में  शीर्षक के साथ एक खबर प्रकाशित हुई थी... "खालिस्तान समर्थक अमृतपाल पर कार्रवाई ना होने से उठ रहे हैं सवाल" । अमृतपाल को लेकर खुफिया एजेंसियों ने एक रिपोर्ट मोदी सरकार और गृहमंत्री अमित शाह को दी थी जो पंजाब के पुलिस विभाग से शेयर भी की गई थी लेकिन इसके बावजूद भी भगवंत मान ने अमृतपाल और उसके साथी खालिस्तानी तत्वों के सामने सरेंडर कर रखा है -अमृतपाल के समर्थक लवप्रीत ने अमृतपाल पर सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले एक शक्स को किडनैप करके पीटा था । इस पर पुलिस ने लवप्रीत समेत 30 को आरोपी बनाया था लेकिन 23 फर...
हिण्डनबर्ग का जलवा

हिण्डनबर्ग का जलवा

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अमेरिका में पाँच व्यक्तियों के समूह से निर्मित, एक ऐसी संस्था जिसका मुखिया कभी एक एम्बुलेंस का ड्राइवर हुआ करता था, उन्होंने अपनी सृजनात्मकता और कार्य के प्रति समर्पण की भावना से आज सम्पूर्ण विश्व में अपनी लोकप्रियता का परचम लहराया है। भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर यदि इस संस्था का आंकलन किया जाए तो वह विश्व की कम्पनियों का लेखापरीक्षा करने में स्वयं को पूर्णतया ईमानदार और निष्पक्ष सिद्ध कर रही है। यह संस्था सोशल मीडिया से प्राप्त आंकड़ो के आधार पर ही किसी भी कम्पनी का ऑडिट करती है, जिसके अन्तर्गत इस संस्था के सदस्य निरन्तर कम्प्यूटर पर कार्य करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करते हैं। आज विश्व के निवेशकों का इस संस्था की कार्यप्रणाली पर एक अटूट विश्वास बन चुका है।कोरोनाकाल में भारत की कम्पनियों का प्रदर्शन सम्पूर्ण विश्व की तुलना में सर्वाधिक रहा है। सम्पूर्ण विश्व की दृष्टि, भारत की अचम्भित...
लिथियम की प्राप्ति, आधार विरोधाभासी

लिथियम की प्राप्ति, आधार विरोधाभासी

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और भारत के खदान मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने देश में लीथियम और सोने के भंडार खोज निकाले हैं और ऐसे लगभग 51 खनिज ब्लॉक राज्य सरकारों को भी सौंप दिए गए हैं। लीथियम की महत्ता के कारण यह सूचना भारतीय ही नहीं विदेशी समाचारपत्रों में भी छपा। यह खनिज लीथियम-ऑयन बैटरियों का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, और स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक अनेकानेक बैटरियों में प्रयुक्त होता है। दुनिया जीवाश्म ईंधन से हटकर सतत एवं स्वच्छ ऊर्जा की ओर पहल कर रही है और इस परिवर्तन में एक बड़ी भूमिका लीथियम बैटरियों की है, जो बारम्बार चार्ज होने और लंबे समय तक ऊर्जा का भंडारण करने में सक्षम हैं। इसीलिए लीथियम को अक्सर ‘श्वेत सोना’ या ‘नवीन-तेल’ भी कहा जाता है। देश के भंडारों में जिस भारी मात्रा में लीथियम (5.9 मिलियन टन) होने का संकेत मिला है, उसने विश्वभर को हैरा...
वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

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यदि भारत के प्राचीन अर्थतंत्र के बारे में अध्ययन किया जाय तो ध्यान में आता है कि प्राचीन भारत की अर्थव्यस्था अत्यधिक समृद्ध थी। विश्व के कई भागों में सभ्यता के उदय से कई सहस्त्राब्दी पूर्व, भारत में उन्नत व्यवसाय, उत्पादन, वाणिज्य, समुद्र पार विदेश व्यापार, जल, थल एवं वायुमार्ग से बिक्री हेतु वस्तुओं के परिवहन एवं तत्संबंधी आज जैसी उन्नत नियमावलियां, व्यवसाय के नियमन एवं करारोपण के सिद्धांतों का अत्यंत विस्तृत विवेचन भारत के प्राचीन वेद ग्रंथों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। प्राचीन भारत में उन्नत व्यावसायिक प्रशासन व प्रबंधन युक्त अर्थतंत्र के होने के भी प्रमाण मिलते हैं। प्राचीन भारत में कुटीर उद्योग बहुत फल फूल रहा था इससे सभी नागरिकों को रोजगार उपलब्ध रहता था एवं हर वस्तु का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता था। ग्रामीण स्तर पर भी समस्त प्रकार के आवश्यक उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उप...
योगी सरकार का समावेशी बजट

योगी सरकार का समावेशी बजट

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य
गांव, किसान और पर्यटन पर विशेष बलमृत्युंजय दीक्षितउत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा 6.90 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया है जिसमें केंद्रीय बजट की तरह ही प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया गया है और आगामी लोकसभा व नगर निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक सरोकारों तथा शहरी क्षेत्रों व नगर निकायों के विकास पर भी बल दिया गया है।बजट में पहली बार किसी वर्ग विशेष या फिर धर्म विशेष का तुष्टिकरण भी नहीं किया गया है। वैसे भी जब से योगी सरकार बनी है तब से जितने भी बजट प्रस्तुत किए गये हैं सभी सबका साथ सबका विकास के नारे को ही ध्यान में रखकर प्रस्तुत किये गये हैं। योगी सरकार के वर्तमान बजट में जल तथा पर्यावरण संरक्षण सहित समाज के उच्च वर्ग से लेकर समाज के वंचित तबकों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश बनाने की ओर अ...