स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि
26 फरवरी 1966 :
पूरा जीवन तिहरे संघर्ष में बीता : दोहरा आजीवन कारावास
--रमेश शर्मा
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अकेले ऐसे बलिदानी क्राँतिकारी हैं जिन्हें दो बार आजीवन कारावास हुआ, उनका पूरा जीवन तिहरे संघर्ष से भरा है । एक संघर्ष राष्ट्र की संस्कृति और परंपरा की पुनर्स्थापना के लिये किया । दूसरा संघर्ष अंग्रेजों से मुक्ति केलिये । और तीसरा संघर्ष भारत के अपने ही बंधुओं के लांछन के झाँछन झेलने का।भारत यदि आक्रांताओं से पराजित हुआ और दासों का दास बना तो यह विदेशियों की शक्ति सामर्थ्य से नहीं अपितु अपने ही लोगों के असहयोग और ईष्या से बना । ये दोनों बातें सावरकर जी ने जीवन भर झेली । उनका संघर्ष सत्ता के लिये नहीं था, राजनीति के लिये नहीं था अपितु भारत राष्ट्र की अस्मिता और हिन्दु समाज के जागरण के लिये था । उनका और उनके परिवार का पूरा जीवन भारत के स्वत्व की प्रतिष्ठापना के लिय...









