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अतुल्य भारत

अतुल्य भारत

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यह अद्भुत देश जो प्रकाश के पुंज से घिरा हुआ है इसका नाम" भारत" है। ईश्वर की सृष्टि रचना की तरह यह देश विविधता में एकता का दुनिया में अकेला अनूठा संगम है। जहां हर पांच कोस पर पानी , भाषा और रहन सहन के तौर तरीके बदल जाते हैं। कुछ रह जाता है तो सबमें प्रेम , देश, समाज और प्राणी मात्र के प्रति। वर्तमान में काल परिवर्तन के कारण कुछ बदलाव आया ज़रूर है। ऐसे समाज को शब्दों और उनके अर्थ को लेकर तोड़ने का प्रयास करने वालों को आप क्या उपमा देंगे । सब व्यक्ति विशेष पर निर्भर करेगा। "जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी " वाले तर्ज पर...लेकिन इसी बहाने.........आज कुछ चर्चा शब्दों और उनके अर्थों पर हो जाए। ताकि जो ऐसे लोग जो राजनीतिक और निज स्वार्थ की पूर्ति लिए समाज और राष्ट्र को विखंडित करना चाहते हैं, उनकी धूर्तता समझ में आ सके ....1. राजस्थान में बेटी, बहू, महिला को बाई जी कहना सम्मान देना ...
निवेशकों में प्रदेश में निवेश के लिए दिखा गजब का उत्साह

निवेशकों में प्रदेश में निवेश के लिए दिखा गजब का उत्साह

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प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा यह निवेश समिटयूपी के लिए उपयोगी सिद्ध हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथमृत्युंजय दीक्षितप्रदेश की राजधानी लखनऊ में तीन दिवसीय यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट -2023 का भव्य आयोजन हुआ। निवेश का यह महाकुंभ प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।लखनऊ में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों, देश व विदेश के उद्योग जगत की महान हस्तियों ने भी संबोधित किया और प्रदेश में भारी मात्रा में निवेश करने की घोषणाएं कीं ।यह पहला अवसर था जब निवेश आकर्षित करने के लिए जनपद स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए गए और अवध, ब्रज, पूर्व ,पश्चिम और बुंदेलखंड सभी क्षेत्रों में निवेशकों ने उत्साह दिखाया । निवेश के लिए सरकार ने जो लक्ष्य तय किया था निवेश का अनुमान उससे कहीं अधिक हुआ है। राजधानी ल...
भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साज़िश

भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साज़िश

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2047 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिले 100 साल पूरे हो जाएँगे। तब तक का रास्ता आसान होगा, ऐसा नहीं है। वो देश जिसे दो हिस्सों इस्लामिक पाकिस्तान और धर्मनिरपेक्ष भारत में बाँट दिया गया था, उसके बँटवारे के 100 साल पूरे होने से पहले एक नापाक मंसूबा सामने दिखाई दे रहा है। इस नापाक मंसूबे को पूरा करने के लिए कट्टर इस्लामी और वामपंथी भारत को एक बार फिर उन परिस्थितियों की ओर धकेल रहे हैं, जिसके कारण पहले उसका विभाजन हुआ था। जुलाई 2022 में, एक खास दस्तावेज़ की डिटेल निकाली थी, जो प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने अपने सदस्यों को प्रसारित किया था। ‘विजन 2047’ नाम के दस्तावेज में गजवा-ए-हिंद के रोडमैप की डिटेल थी। इसमें उनकी योजना मुस्लिमों को कट्टरपंथी बनाना, ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होना, भारतीय संविधान को शरीयत कानून में बदल देना, हिंदुओं का नरसंहा...
अपशब्दों की राजनीति : हृदयनारायण दीक्षित

अपशब्दों की राजनीति : हृदयनारायण दीक्षित

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शब्द की शक्ति असीम होती है। प्रत्येक शब्द के गर्भ में अर्थ होता है। अर्थ से भरा पूरा शब्द बहुत दूर दूर तक प्रभावी होता है। पतंजलि ने शब्द प्रयोग में सावधानी के निर्देश दिए थे - शब्द का सम्यक ज्ञान और सम्यक प्रयोग ही अपेक्षित परिणाम देता है। महाभारतकार व्यास ने शब्द को ब्रह्म बताया था। युद्ध से आहत व्यास ने कहा था कि शब्द अब ब्रह्म नहीं रहे। लोकमंगल की साधना वाले शब्द जीवनरस को गाढ़ा करते हैं। प्रेम की अभिव्यक्ति के सर्वोत्कृष्ट उपकरण भी शब्द हैं। यही शब्द उचित अवसर उचित घटना और उचित व्यक्ति के लिए ठीक से प्रयुक्त न होने पर भयावह भी हो जाते हैं। सम्प्रति राजनैतिक क्षेत्र में अपशब्दों की आंधी है। अपशब्द सुन्दर शब्दों को विस्थापित कर रहे हैं। विधायी सदनों में भी शब्द अपशब्द के कोलाहल हैं। अपशब्दों के आक्रमण से भाषा का सौंदर्य और सत्यतत्व भी घायल है। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्ट...
अंश बनाम पूर्णता : हृदयनारायण दीक्षित

अंश बनाम पूर्णता : हृदयनारायण दीक्षित

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अंश के आधार पर पूर्ण का विवेचन नहीं हो सकता। विवेचन में देश काल के प्रभाव का ध्यान रखना जरूरी होता है। देश काल के प्रभाव में समाज की मान्यताएं बदलती रहती हैं। वाल्मीकि रामायण विश्वप्रसिद्ध महाकाव्य है। रामायण का रचनाकाल लगभग ईसा पूर्व 500 वर्ष माना जाता है। तुलसीदास ने रामकथा पर आधारित रामचरितमानस सोलहवीं सदी में लिखी थी। रामचरितमानस उत्कृष्ट काव्य है। करोड़ों हिन्दू इसे धर्मग्रन्थ जैसा सम्मान देते हैं। एक समय सूरीनाम, मारीशस, कम्बोडिया, थाईलैण्ड आदि देशों में भारत से जाकर बसने वाले लोग रामचरितमानस की प्रतियां भी साथ ले गए थे। लेकिन कुछ राजनेता मानस की कथित नारी अपमान व शूद्र सम्बंधी चैपाइयों को लेकर आक्रामक हैं। वे इसे जलाने या प्रतिबंधित करने की मांग कर रहे हैं। शूद्र शब्द भी इस विवाद का हिस्सा है। उनके वक्तव्यों से सामाजिक विभाजन का खतरा है। वे अगड़े पिछड़े के विभाजन में राजनैतिक भविष्...
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं स्वयं सहायता समूह

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं स्वयं सहायता समूह

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स्वयं सहायता समूह दृष्टिकोण ग्रामीण विकास के लिए एक सक्षम, सशक्त और नीचे से ऊपर का दृष्टिकोण है जिसने विकासशील देशों में कम आय वाले परिवारों को काफी आर्थिक और गैर-आर्थिक बाह्यता प्रदान की हैं। स्वयं सहायता समूह दृष्टिकोण को गरीबी का मुकाबला करने के लिए एक स्थायी उपकरण के रूप में सराहा जा रहा है, जो लाभ के लिए दृष्टिकोण का संयोजन है जो आत्मनिर्भर है, और गरीबी उन्मूलन पर ध्यान केंद्रित करता है जो कम आय वाले परिवारों को सशक्त बनाता है। यह तेजी से विकासशील देशों में सरकार के लिए विकासात्मक प्राथमिकताओं का प्रयोग करने का साधन बनता जा रहा है। -डॉ सत्यवान सौरभ एक स्वयं सहायता समूह एक गाँव-आधारित वित्तीय मध्यस्थता समिति है, जिसमें आम तौर पर 10-20 स्थानीय महिला या पुरुष शामिल होते हैं। जब औपचारिक वित्तीय प्रणाली जरूरतमंदों की मदद करने में विफल हो जाती है, तो छोटे समूह सूक्ष्म पैमाने पर पैसे ...
मदनी : इस्लाम जन्मा भारत में ?

मदनी : इस्लाम जन्मा भारत में ?

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुखिया महमूद मदनी के बयान पर इधर हंगामा मचा हुआ है। हमारे टीवी चैनलों पर आजकल यही सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मदनी के इस कथन का कोई एतिहासिक प्रमाण नहीं है कि ‘‘इस्लाम का जन्म-स्थान अरब देश नहीं, भारत है। पहले नवी का जन्म भारत में ही हुआ है। यह मुसलमानों की मातृभूमि है। इस्लाम को विदेशी मजहब मानना एतिहासिक दृष्टि से गलत है और बिल्कुल निराधार है।’’ ये वाक्य मदनी ने पढ़कर सुनाए थे, जमीयत के 34 वें अधिवेशन में। यों तो मदनी अपने आप में उत्तम वक्ता हैं लेकिन यह समझ में नहीं आया कि ये विवादास्पद वाक्य उन्होंने पढ़कर क्यों सुनाए? हो सकता है कि जैसे हमारे बड़े नेताओं के भाषण उनके अफसर लिखकर दे देते हैं और वे उन्हें श्रोताओं के सामने पढ़ डालते हैं, वैसे ही यह गलती मदनी से भी हो गई है। लेकिन इस गलती के पीछे छिपी भावना को समझने की कोशिश की जाए तो लगेगा क...
कैसे भारत में निवेश का केंद्र बना यूपी

कैसे भारत में निवेश का केंद्र बना यूपी

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आर.के. सिन्हा भगवान राम और कृष्ण की पवित्र जन्मस्थली के रूप में जाना जाने वाला उत्तर प्रदेश अपने बिलकुल नए अवतार में भारत और दुनिया के शीर्ष व्यापारिक घरानों को निवेश करने के लिए आकर्षित कर रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में मुकेश अंबानी से लेकर कुमार मंगलम बिड़ला, टाटा समूह के एन. चंद्रशेखर से लेकर ज्यूरिख एयरपोर्ट एशिया के सीईओ डेनियल बिचर समेत कॉर्पोरेट जगत की कई दिग्गज हस्तियां ना केवल मौजूद थी बल्कि उन्होंने राज्य में कुल मिलाकर 33.50 लाख करोड़ की राशि के निवेश की घोषणा की। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश प्रस्तावों के लागू होने से 92.50 लाख (9.25 मिलियन) रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 में 33.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को प्राप्त करने व...
भारतीयों को मॉरीशस क्यों प्रिय है?

भारतीयों को मॉरीशस क्यों प्रिय है?

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*विनीत नारायणअफ्रीकी महाद्वीप के दक्षिण-पूर्व तट से से लगभग 900 किलोमीटर दूर हिंद महासागर के तट पर और मेडागास्करके पूर्व में स्थित द्वीपीय देश मॉरीशस भारतीयों के लिए काफ़ी आकर्षक स्थान है। अपने झील, झरनों, हरे भरेजंगलों व प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर मॉरीशस हर नवविवाहित जोड़े के लिए बरसों से हनीमून मनाने का स्थानबन हुआ है। परंतु क्या आप जानते हैं कि इसके अलावा भी एक कारण है जिसके लिये मॉरीशस भारतीयों को बहुतप्रिय है।सुंदर पर्यटक स्थल होने के कारण मॉरीशस में केवल हनीमून मनाने वाले पर्यटक ही नहीं आते। बल्कि ‘टैक्स हैवन’के नाम से मशहूर इस छोटे से द्वीप पर हर उस व्यक्ति की नज़र बनी रहती है जो किसी न किसी तरह से भारत मेंआयकर की चोरी करना चाहता है। चूँकि भारत और मॉरीशस के बीच हुए ‘दोहरे करारोपण संधि’ के तहतभारतीय कंपनियां मॉरीशस की किसी कंपनी से समझौता कर भारत में एफडीआई के द्वारा निवेश करवा लेती...
श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग

श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग

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श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंगश्रीरामचरितमानस में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।।श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड १०४-३दो.- संकरप्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।ते नर करहिं कलप भरि घोर नरक महुँ बास।।श्रीरामचरितमानस लंकाकाण्ड दोहाश्रीराम एवं शिवजी का आपस में एक-दूसरे के प्रति घनिष्ठ प्रेम-भक्ति-श्रद्धा जगत् प्रसिद्ध है। शिवजी श्रीरामकथा श्रवण करने हेतु महर्षि अगस्त्य के आश्रम गए तथा सतीजी सहित श्रीरामकथा का श्रवण किया। सतीजी शिवजी के समझाने के उपरान्त श्रीराम के चरित्र एवं उनकी लीलाओं को पहिचान नहीं सकी। अंत में उनकी परीक्षा लेने चली गई। श्रीरामजी की लीला-परीक्षा लेकर लौट आईं। सतीजी ने शिवजी से परीक्षा की बात बताई नहीं। शिवजी ने ध्यान लगने पर सब जान लिया। सतीजी द्वारा सीताजी का रूप धारण क...