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74वां गणतंत्र दिवस— आत्मचिंतन करने का समय

74वां गणतंत्र दिवस— आत्मचिंतन करने का समय

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बलबीर पुंज आज भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। सभी पाठकों को इसकी असीम शुभकामनाएं। यह अवसर जहां जश्न मनाने का है, तो आत्मावलोकन करने का भी है। इसके लिए कुछ प्रश्नों का उत्तर खोजना स्वाभाविक है। यह ठीक है कि 1950 में भारत संप्रभु गणराज्य बना, किंतु क्या एक राष्ट्र के रूप में उसे पहचान भी तब ही मिली? क्या भारत में पंथनिरपेक्षता, लोकतंत्र और बहुलतावाद रूपी जीवनमूल्य, ब्रितानियों से मिले उपहार है? यदि ऐसा है, तो भारत को छोड़कर भारतीय उपमहाद्वीप में हमारे पड़ोसी देश या यूं कहे कि एक समय सांस्कृतिक भारत का हिस्सा रहे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इन मूल्यों का अकाल क्यों है? आखिर भारत में यह मूल्य किसके कारण अब तक जीवंत है? भारत केवल इसलिए ही पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और बहुलतावादी नहीं है, क्योंकि अंग्रेजों ने अपने 200 वर्षों के राज के दौरान देश को कथित रूप से इन मूल्यो...
बर्बादी की हद तक फिसलता,गिरता व डूबता यूरोप

बर्बादी की हद तक फिसलता,गिरता व डूबता यूरोप

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अनुज अग्रवाल बढ़ते जनाक्रोश व विरोध प्रदर्शनों के बीच फ़्रांस , जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन , इटली सहित यूरोप के अधिकांश देशों ने जनवरी 2023 की शुरूआत के साथ ही सभी वस्तुओं व सेवाओं के दामो में औसतन 20%की वृद्धि कर दी। पिछले एक साल में लगभग दुगने हो चुके दामों के बीच जनता पर यह नई मार थी। अब फ़रवरी और मार्च के बीच फिर से विभिन्न वस्तुओं व सेवाओं के दाम 10 से 40% तक बढ़ाने की घोषणा कर दी गई है। पिछले तीन सालों में यूरोप के देशों में कामकाजी वर्ग के कोई वेतन नहीं बढ़े बल्कि अनेक भत्ते कम कर दिए गये। सरकारे सब्सिडी घटाती जा रही हैं, पेंशन कम कर रही हैं और बेरोज़गारी भत्ते समाप्त और महंगाई दो गुना से ज्यादा पहले ही हो चुकी थी। “क्रेडिट कार्ड व पर्सनल लोन कल्चर” के आदि हो चुके यूरोपवासियो के पास ईएमआई चुकाने लायक़ आमदनी ही नहीं हो रही। ऐसे में यूरोप की कम से कम दो तिहाई जनता के सामने अपन...
प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं

प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं

BREAKING NEWS, Today News, TOP STORIES, राष्ट्रीय, समाचार
प्रधानमंत्री ने कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आज के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की झलकियां साझा करते हुए ट्वीट की एक श्रृंखला साझा की।
भारत का गगनयान मिशन 2024 में: इसरो प्रमुख

भारत का गगनयान मिशन 2024 में: इसरो प्रमुख

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भारत अंतरिक्ष में अपना पहला मानव मिशन गगनयान-3 अगले साल 2024 में लॉन्च कर सकता है। इसे लेकर हरस्तर पर बारीकी से परीक्षण किए जा रहे हैं। एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षा की दृष्टि से इसरो पहले मानव रहित तरीके सेगगनयान की लॉन्चिंग करेगा। यह बात भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) के चेयरमैन डॉ एस. सोमनाथने विशेष साक्षात्कार में कही है। वे मंगलवार को 8वें भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ)-2022 केसमापन सत्र में शामिल होने के लिए भोपाल पहुँचे थे। इसरो प्रमुख डॉ एस. सोमनाथ से हितेश कुशवाहा / राहुलचौकसे की विशेष बातचीत के प्रमुख अंश यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं।प्रश्न: भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में छात्रों एवं प्रतिभागियों का उत्साह देखकर कैसा लग रहा है?उत्तर: सब मुझे उत्साह से लबरेज नज़र आए। युवाओं की जबरदस्त सहभागिता दिखी है। इस आयोजन में अभूतपूर्वप्रतिसाद देखने को मिला।प्रश्न:...
A short Badaga Story ‘Golden Share’

A short Badaga Story ‘Golden Share’

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Long ago a man lived in a village called Aaruuru. He was the headman of that village. Practically, he never did any work for his family. That is, in his family affairs he was an irresponsible person. But, nonetheless he wore the maNDare (Badaga headgear) in such a way to look nice and wrapped himself with siile (white mantle with blue and red lines), to suit his headmanship and went out daily. He used to brag about his costume and himself. His talkative skill was such that he could talk about anything without any least hesitation. He was being very boastful and he was never willing to admit that he was wrong. But his wife was a wonderful noble woman. She was an excellent housewife and a good host. Many appreciated her hospitality. Her tolerance was phenomenal and praise worthy. Otherwise,...
भारतबोध कराता है भारतीय पर्यटन

भारतबोध कराता है भारतीय पर्यटन

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डॉ. सौरभ मालवीयपर्यटन देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाता है। इससे सरकार को राजस्व तथा विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इसके कारण विकास कार्यों को भी बढ़ावा मिलता है। भारत एक विशाल देश है। यहां के विभिन्न राज्यों की भिन्न-भिन्न संस्कृतियां हैं। सबकी अपनी परम्पराएं हैं। इसके साथ ही यहां प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत पर्यटन स्थल हैं। यहां पर ऐतिहासिक स्थल हैं। यहां पर असंख्य धार्मिक स्थल भी हैं।राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का प्रारम्भदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों के प्रचार एवं प्रसार के लिए केंद्र सरकार ने 25 जनवरी 1948 को प्रथम बार राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया था। तब से प्रतिवर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इसके पश्चात एक पर्यटन यातायात समिति भी गठित की गई। इस समिति के गठन के तीन वर्ष पश्चात 1951 में कोलकाता और चेन्नई में पर्यटन दिवस के क्षेत्रीय कार्यालयों में वृद्धि होती गई। दि...
बादशाह अकबर का असीरगढ़ पर धोखे से कब्जा

बादशाह अकबर का असीरगढ़ पर धोखे से कब्जा

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खून-खराबा, लूट सप्ताह भर चला रमेश शर्मा बचपन की पाठ्यपुस्तकों में मुगल बादशाह अकबर को महान पढ़ा था । उन पुस्तकों में कुछ उदाहरण भी थे । इस कारण अकबर को और समझने की जिज्ञासा सदैव बनी रही । आगे चलकर उनकी महानता की अनेक कहानियाँ भी पढ़ी । हो सकता है वे सारी घटनाएं सही हों । पर अकबर के अधिकाँश सैन्य अभियान धोखे और चालाकियों से भरे हैं । भारत में अकबर के जितने सैन्य विजय हुईं । वे अकबर के शौर्य और सैन्य बल से कम अपितु कूटनीति, फूट डालकर, परिवार जनों को तोड़कर या किसी भेदिये को किले में भेजकर दरबाजा खुलवाने की युक्ति से भरीं हैं । उनमें एक है मध्यप्रदेश में सतपुड़ा के शिखर पर बने असीरगढ के किले पर अकबर महान के कब्जे का विवरण, जो उन्होंने धोखे से किया था । कब्जे के बाद किले में लूट और हत्याकांड का सिलसिला एक सप्ताह तक चला ।अकबर महान ने यह धोखा असीरगढ के सूबेदार बहादुर शाह फारुकी के साथ किय...
भारत में उपभोग की असमानता पिछले 40 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर

भारत में उपभोग की असमानता पिछले 40 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार, सामाजिक
किसी भी देश की आर्थिक नीतियां सफल हो रही हैं, इसका एक पैमाना यह भी हो सकता है कि क्या समाज में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इन आर्थिक नीतियों का लाभ पहुंच रहा है? भारत में हाल ही के समय में इस संदर्भ में कुछ विशेष प्रयास किए गए हैं और यह प्रयास एक तरह से प्राचीन भारत में लागू की गई आर्थिक नीतियों की झलक दिखलाते नजर आ रहे हैं। भारत में अर्थ से सम्बंधित प्राचीन ग्रंथों, आध्यात्मिक ग्रंथों सहित, में यह कहा गया है कि यह राजा का कर्तव्य है कि वह अपनी प्रजा की अर्थ से सम्बंधित समस्याओं का हल खोजने का प्रयास करे। पंडित श्री दीनदयाल उपाध्याय जी ने भी एक बार कहा था कि किसी भी राजनैतिक दल के लिए केवल राजनैतिक सत्ता हासिल करना अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए बल्कि यह एक माध्यम बनना चाहिए इस बात के लिए कि देश के गरीब से गरीब व्यक्ति तक आर्थिक विकास का लाभ पहुंचाया जा सके। सामान्यतः विभिन्न देशों ...
अमेरिका हिंसामुक्त कैसे हो?

अमेरिका हिंसामुक्त कैसे हो?

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक अमेरिका दुनिया का सबसे संपन्न और शक्तिशाली देश है लेकिन यह भी सच है कि व​ह सबसे बड़ा हिंसक देश भी है। जितनी हिंसा अमेरिका में होती है, दुनिया के किसी देश में नहीं होती। वैसे तो अमेरिका में ईसाई धर्म को माननेवालों की संख्या सबसे ज्यादा है लेकिन क्या वजह है कि ईसा की अहिंसा का वहां कोई खास प्रभाव दिखाई नहीं पड़ता। अभी-अभी लाॅस एंजिलिस के एक कस्बे में एक बंदूकची ने कहर ढा दिया। 60 हजार लोगों के इस कस्बे में एशियाई मूल के लोग बहुतायत में हैं, खास तौर से चीनी लोग। वे चीनी नव वर्ष का उत्सव मना रहे थे और उसी समय एक बंदूकची ने 10 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। कई लोग घायल भी हो गए। यह इस नए साल की पहली घटना नहीं है। ऐसी घटनाएं आए दिन अमेरिका में होती रहती हैं। पिछले साल बंदूक की गोलियां खाकर 40 हजार लोगों ने अपने प्राणों से हाथ धोए हैं। क्या इतनी हत्याएं किसी और मुल्क में क...
नये भारत को आकार देने के संकल्पों का गणतंत्र

नये भारत को आकार देने के संकल्पों का गणतंत्र

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-ललित गर्ग- गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत ने खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया। तेहत्तर वर्षों में हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली झाड़ियों में फँसा रहा। लेकिन अब इन राष्ट्रीय पर्वों को मनाते हुए संप्रभुता का अहसास होने लगा है। गणतंत्र का जश्न सामने हैं, जिसमें कुछ कर गुजरने की तमन्ना भी है तो अब तक कुछ न कर पाने की बेचैनी भी है। हमारी जागती आंखो से देखे गये स्वप्नों को आकार देने का विश्वास है तो जीवन मूल्यों को सुरक्षित करने एवं नया भारत निर्मित करने की तीव्र तैयारी है। अब होने लगा है हमारी स्व-चेतना, राष्ट्रीयता एवं स्व-पहचान का अहसास। जिसमें आकार लेते वैयक्तिक, सामुदायिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक अर्थ की सुनहरी छटाएं हैं।राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस हमारी ...