74वां गणतंत्र दिवस— आत्मचिंतन करने का समय
बलबीर पुंज
आज भारत अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। सभी पाठकों को इसकी असीम शुभकामनाएं। यह अवसर जहां जश्न मनाने का है, तो आत्मावलोकन करने का भी है। इसके लिए कुछ प्रश्नों का उत्तर खोजना स्वाभाविक है। यह ठीक है कि 1950 में भारत संप्रभु गणराज्य बना, किंतु क्या एक राष्ट्र के रूप में उसे पहचान भी तब ही मिली? क्या भारत में पंथनिरपेक्षता, लोकतंत्र और बहुलतावाद रूपी जीवनमूल्य, ब्रितानियों से मिले उपहार है? यदि ऐसा है, तो भारत को छोड़कर भारतीय उपमहाद्वीप में हमारे पड़ोसी देश या यूं कहे कि एक समय सांस्कृतिक भारत का हिस्सा रहे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इन मूल्यों का अकाल क्यों है? आखिर भारत में यह मूल्य किसके कारण अब तक जीवंत है?
भारत केवल इसलिए ही पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और बहुलतावादी नहीं है, क्योंकि अंग्रेजों ने अपने 200 वर्षों के राज के दौरान देश को कथित रूप से इन मूल्यो...









