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हिंदी के नाम पर आत्महत्या क्यों?

हिंदी के नाम पर आत्महत्या क्यों?

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* कल भारत का संविधान-दिवस था और कल ही तमिलनाडु के एक व्यक्ति ने यह कहकर आत्महत्या कर ली कि केंद्र सरकार तमिल लोगों पर हिंदी थोप रही है। आत्महत्या की यह खबर पढ़कर मुझे बहुत दुख हुआ। पहली बात तो यह कि किसी ने हिंदी को दूसरों पर लादने की बात तक नहीं कही है। तमिलनाडु की पाठशालाओं में कहीं भी हिंदी अनिवार्य नहीं है। हाँ, गांधीजी की पहल पर जो दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा बनी थी, वह आज भी लोगों को हिंदी सिखाती है। हजारों तमिलभाषी अपनी मर्जी से उसकी परीक्षाओं में भाग लेते हैं। आत्महत्या करनेवाले सज्जन चाहते तो वे इसका भी विरोध कर सकते थे लेकिन विरोध का यह भी क्या तरीका है कि कोई आदमी अपनी या किसी की हत्या कर दे। जो अहिंदीभाषी हिंदी नहीं सीखना चाहें, उन्हें पूरी स्वतंत्रता है लेकिन वे कृपया सोचें कि ऐसा करके वे अपना कौनसा फायदा कर रहे हैं? क्या वे अपने आप को बहुत संकुचित नही...
माई लार्ड ! जेल में बंद लोग भी देश के नागरिक हैं

माई लार्ड ! जेल में बंद लोग भी देश के नागरिक हैं

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-राकेश दुबे  भारत की आज़ादी और भारत में आज़ादी को लेकर कभी भी और कहीं भी बहस होती रहती है | आज तक देश में किसी राजनीतिक दल ने उन विचाराधीन कैदियों की बात नहीं की जो जेलों में हैं | इनकी संख्या कोई छोटी- मोटी नहीं बल्कि 4.27 लाख से अधिक है | देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने   कुछ दिन पहले संविधान दिवस के अवसर पर बिना जमानत और सुनवाई के लंबे समय से जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भावनात्मक निवेदन किया है | जिस कार्यक्रम में उन्होंने यह मुद्दा उठाया  उसमें देश के प्रधान न्यायाधीश समेत सर्वोच्च और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश तथा केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू भी उपस्थित थे|  राष्ट्रपति की इस अपील को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने देशभर के राज्य सरकारों और जेल अधिकारियों को ऐसे तमाम कैदियों के बारे में 15 दिन के भीत...
चीन की अनावश्यक चिंता

चीन की अनावश्यक चिंता

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* भारत,चीन और अमेरिका के बीच आजकल जो कहा-सुनी चल रही है, वह बहुत मजेदार है। उसके तरह-तरह के अर्थ लगाए जा सकते हैं। चीनी सरकार के प्रवक्ता ने एक बयान देकर कहा है कि उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा पर अमेरिकी और भारतीय सेना का जो ‘युद्धाभ्यास’ चल रहा है, वह बिल्कुल अनुचित है और वह 1993 और 1996 के भारत-चीन समझौतों का सरासर उल्लंघन है। सच्चाई तो यह है कि मई 2020 में चीन ने गलवान-क्षेत्र में अपने सैनिक भेजकर ही उक्त समझौतों का उल्लंघन कर दिया था। वास्तव में भारत-अमेरिका का यह युद्धाभ्यास चीन-विरोधी हथकंडा नहीं है। दोनों राष्ट्र इस तरह के कई युद्धाभ्यास जगह-जगह कर चुके हैं। यह चीन को धमकाने का कोई पैंतरा भी नहीं है। यह तो वास्तव में हिमालय-क्षेत्रों में अचानक आनेवाले भूंकप, बाढ़, पहाड़ों की टूटन, जमीन फटने जैसी विपत्तियों का सामना करने का पूर्वाभ्यास है। प्राकृतिक संकट से ग्र...
कूटनीति एवं राजनीति : अंधेरी सुरंग – अनुज अग्रवाल

कूटनीति एवं राजनीति : अंधेरी सुरंग – अनुज अग्रवाल

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भारत अब अगले एक वर्ष तक G -20 समूह का अध्यक्ष है। दुनिया के अकेले प्रभावी वैश्विक संगठन जो की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, का अध्यक्ष होना निश्चित ही हर भारतवासी के लिए गर्व व उपलब्धि की बात है। मगर जिन अनिश्चित व बिगड़ी हुई वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत G20 समूह का अध्यक्ष बना है वे एक चुनौती की तरह हैं। दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर है। नई विश्व व्यवस्था के लिए संघर्ष तीव्र होते जा रहे हैं। अमेरिका - चीन विश्व युद्ध व रुस - यूक्रेन युद्ध अब सीधा सीधा चीन - नाटो व्यापार युद्ध व रूस - नाटो युद्ध में बदलता जा रहा है। कोविड के बाद के झटकों से दुनिया उबर नहीं पा रही है कि अब उसकी नई लहर फिर से उभर रही है। पोस्ट कोविड बीमारियां व वैक्सीन के दुष्प्रभाव से हो रही मौतें हर जगह क़हर बरपा रही हैं तो अनेक नई बीमारियाँ हमारे दरवाज़े पर दस्तक दे रही हैं। उस पर मेडिकल माफिया नित ...
3 डी नेविगेशन तकनीक : स्पाइनल सर्जरी को आसान बनाती है

3 डी नेविगेशन तकनीक : स्पाइनल सर्जरी को आसान बनाती है

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डॉ. अरविंद कुलकर्णी हेड, मुंबई स्पाइन स्कोलियोसिस एंड डिस्क रिप्लेसमेंट सेंटर बॉम्बे हॉस्पिटल मुंबई लैमिनेक्टॉमी और लंबर फ्यूजन जैसी पुराने चलन वाली स्पाइनल सर्जरी बेहद मुश्किल और दर्दनाक होती है। यह तकनीक एक अत्यधिक कुशल विशेषज्ञ की मांग करती है। लेकिन टेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ, आज स्पाइनल नेविगेशन टेक्नोलॉजी ने इलाज की पूरी प्रक्रिया को बदल कर रख दिया है। आज सभी न्यूरोसर्जन, गंभीर और मुश्किल स्पाइनल सर्जरी के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इमेज आधारित इस टेक्नोलॉजी ने स्पाइनल सर्जरी को बेहद आसान बना दिया है, जहां सर्जन बेहतर विजुअल्स (समस्या वाली जगह के दृश्य) के साथ बिल्कुल सटीक सर्जरी कर पाते हैं, जो पुरानी तकनीक के साथ बिल्कुल भी संभव नहीं है। नेविगेशन सिस्टम का कैमरा मरीज की रीढ़ को स्कैन करके साफ  विजुअल्स देता है। इमेज-आधारित यह टेक्नोलॉजी सटीक स्पाइनल ...
राहुल गांधी की जिहादी और पाकिस्तान जोड़ो यात्रा

राहुल गांधी की जिहादी और पाकिस्तान जोड़ो यात्रा

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राष्ट्र-चिंतन पाकिस्तान जिंदाबाद  के नारेबाजों को भारत की नागरिकता से वंचित करो   आचार्य श्री विष्णुगुप्त ==================== राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग गये, वह भी सरेआम और बेखौफ। इतना ही नहीं बल्कि कांग्रेस ने गर्व के साथ अपने ट्विटर हैंडल पर पाकिस्तान जिंदाबाज के नारे से संबंधित वीडीओ पोस्ट कर दिया। इस पर राजनीतिक बवाल तो मचना ही था, बवाल मचा भी। भाजपा ने इस आग में घी डाल कर कांग्रेस की साख और देशभक्ति तथा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का न केवल पाकिस्तान से जोड़ दिया बल्कि भारत जोडो यात्रा का पाकिस्तानी करण-जिहादीकरण  भी कर दिया तथा इस यात्रा को भारत विखंडन की यात्रा भी बता दिया। राजनीति में प्रतिद्वदी तो अवसर के ताक में ही होते हैं, भाजपा को अवसर मिला और भाजपा ने अवसर को खूब भंजाया भी। सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई और क...
राहुल का अद्भुत भोलापन

राहुल का अद्भुत भोलापन

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक राहुल गांधी की मध्यप्रदेश-यात्रा सर्वाधिक सफल रहने की उम्मीद है। पिछले तीन-चार दिनों में मुझे यहां के कई शहरों और गांवों से गुजरने का अवसर मिला है। जगह-जगह राहुल, कमलनाथ, दिग्विजयसिंह और स्थानीय नेताओं के पोस्टरों से रास्ते सजे हुए हैं। लेकिन राहुल के कुछ बयान इतने अटपटे होते हैं कि वे इस यात्रा पर पानी फेर देते हैं। जैसे जातीय जन-गणना और सावरकर पर कुछ दिन पहले दिए गए बयानों ने यह सिद्ध कर दिया था कि वह अपनी दादीजी और माताजी की राय के भी विरूद्ध बोलने का साहस कर रहे हैं। ये कथन सचमुच सा​हसिक होते तो प्रशंसनीय भी शायद कहलाते। लेकिन वे साहसिक कम अज्ञानपूर्ण ज्यादा थे। इसके लिए असली दोष उनका है, जो राहुल को पर्दे के पीछे से पट्ठी पढ़ाते रहते हैं। अब मप्र के महान स्वतंत्र​ता-सेनानी टंट्या भील के जन्म स्थान पर पहुंचकर उन्होंने कह दिया कि टंट्या भील ने अंग्रेजों के विरुद्...
इमारतों की भूकंपीय-भेद्यता आकलन की नयी पद्धति

इमारतों की भूकंपीय-भेद्यता आकलन की नयी पद्धति

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नई दिल्ली, 25 नवंबर (इंडिया साइंस वायर): बड़े पैमाने पर इमारतों या फिर अन्य संरचनाओं की मजबूती का आकलन करने के लिए अक्सर रैपिड विज़ुअल स्क्रीनिंग (आरवीएस) की जाती है। आरवीएस दृश्य सूचना का उपयोग यह तय करने के लिए करता है कि कोई इमारत कितनी सुरक्षित है और भूकंप सुरक्षा को बढ़ाने के लिए तत्काल इंजीनियरिंग सुधार एवं मरम्मत की कितनी आवश्यकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने हिमालय क्षेत्र में भूकंप झेलने की इमारतों की क्षमता का आकलन करने के लिए एक नया तरीका विकसित किया है। भूकंप के प्रति इमारतों की संवेदनशीलता का पता लगाने की यह पद्धति सरल है, जो भूकंप के प्रति भवनों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्यों की प्राथमिकता तय करने में उपयोगी हो सकती है।  व्यापक क्षेत्र सर्वेक्षणों के माध्यम से, शोधकर्ताओं ने मंडी के हिमालय क्...
तेजस्वी बलिदानी सिख गुरु तेगबहादुर

तेजस्वी बलिदानी सिख गुरु तेगबहादुर

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आज से कई दशक पहले मैं दिल्ली में निवास के दौरान जब भी वहां के प्रसिद्ध गुरुद्वारा रकाबगंज के सामने से निकलता था तब दूसरे अनेक श्रद्धालुओं की तरह सड़क से ही स्वतः आंखें झुक जातीं और उनके प्रति आदर से हाथ जोड़ लेता था। सिख गुरु तेग बहादुर के बलिदान से जुड़े इस पवित्र स्थल के बारे में इससे अधिक जानने का मैंने कभी कोई प्रयत्न नहीं किया था। पर हाल में जब मैंने प्रसिद्ध लेखक व साहित्यकार डॉ किशोरीलाल व्यास ‘नीलकण्ठ’ का खालसा नाटक व उसकी भूमिका पढ़ी तब मैं कुछ ऐतिहासिक तथ्यों को जानकर स्तब्ध सा रह गया था। नवं सिख गुरु तेगबहादुर के शीश कटने के बाद एक लखी शाह नाम का बंजारा था जो उनके धड़ को अंधेरे का लाभ उठाकर ले गया और अपनी रूई भरी बैलगाड़ी पर ही उसने शीश विहीन धड़ का संस्कार कर दिया था। जिस स्थान पर बंजारे ने गुरु जी का अंतिम संस्कार किया था वहीं पर यह गुरुद्वारा रकाबगंज निर्मित हुआ था। इस गुरुद...
असम साम्राज्य के सेनानायक परमवीर योद्धा श्री लचित_बोरफुकन की ४०० वीं जयंती है।

असम साम्राज्य के सेनानायक परमवीर योद्धा श्री लचित_बोरफुकन की ४०० वीं जयंती है।

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आज अहोम (असम) साम्राज्य के सेनानायक परमवीर योद्धा श्री #लचित_बोरफुकन की ४०० वीं जयंती है। इतिहासकारों ने पूर्वोत्तर के वीरों को जो भारतीय राष्ट्र के सांस्कृतिक आस्था केंद्र होने चाहिए थे उन्हें उत्तर और दक्षिण भारत के पाठ्यक्रम से पर्याप्त दूर रखने का कुप्रयास किया। लेकिन कोई भी कुप्रयास कब तक छुप सकता है। स्वर्णाक्षर तो अपनी आभा बिखेरते ही है। सोशल मीडिया ने पूर्वोत्तर के वीर शिवाजी को देश ही नहीं विश्व मंच पर ऐसे अप्रतिम योद्धा को सम्मान दिया है कि उनकी आत्मा पुलकित, प्रफुल्लित अवश्य होगी। मैं दूसरे कोण से सोच रहा हूँ। जब औरंगजेब पूरे मुगल उत्कर्ष के बाद अब अपने वंशानुगत पतन की ओर उन्मुख हो रहा था तब उसने अपने गुलाम आमेर के मिर्जा राजा रामसिंह को असमिया साम्राज्य जीतने के लिए भेजा। राजा थे औरंगजेब और चक्रध्वज सिंह रणाङ्गण में उतरे योद्धा थे मिर्जा रामसिंह और लचित बोरफुकन। (ल...