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भारत अनादिकाल से एक है

भारत अनादिकाल से एक है

TOP STORIES, राष्ट्रीय
_- बलबीर पुंज_ गत 19 नवंबर (शनिवार) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तरप्रदेश में वाराणसी स्थित 'काशी तमिल संगमम' का शुभारंभ किया। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने जो कुछ कहा, वह अपने भीतर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को सहेजे हुए है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत का स्वरूप क्या है... ये विष्णु पुराण का एक श्लोक हमें बताता है, जो कहता है- उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ अर्थात्, भारत वो जो हिमालय से हिंद महासागर तक की सभी विविधताओं और विशिष्टताओं को समेटे हुए है और उसकी हर संतान भारतीय है।" वास्तव में, भारतीय एकता का प्रश्न एक दुखती रग है। सहस्राब्दियों से यह भूखंड सांस्कृतिक, राजनीतिक और भौगोलिक रूप से एक ईकाई रही है, जो आज चार भागों— अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और खंडित भारत में विभाजित है। खंडित भारत फिर से को तोड़ने के लिए क...
दूध की धार पर जहर की मार या दूध की सूखती धार

दूध की धार पर जहर की मार या दूध की सूखती धार

TOP STORIES, विश्लेषण
डॉ. शंकर सुवन सिंहदूध पौष्टिकता का प्रतीक है। दूध देवताओं को प्रिय है। दूध अमृत है। दूध शाकाहारियों के लिए प्राथमिक प्रोटीनका स्रोत है। दूध विटामिन डी का एक दुर्लभ खाद्य स्रोत भी है। पुराणों में दूध की तुलना अमृत से की गई हैं, जोशरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने के साथ-साथ कई सारी बीमारियों से बचाता है। अथर्ववेद में लिखा है किदूध एक सम्पूर्ण भोज्य पदार्थ है। इसमें मनुष्य शरीर के लिए आवश्यक वे सभी तत्व हैं जिनकी हमारे शरीर कोआवश्यकता होती है। दूध की शुद्धता अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। विश्व में भारत दुग्ध उत्पादन में अग्रणी देशहै। भारत को सदियों से दूध दही का देश कहा जाता रहा है। पंजाब और हरियाणा दुग्ध उत्पादन में हमेशा आगेरहे हैं। एक प्रचलित कहावत है कि जहां दूध दही का खाना वो है हमारा हरियाणा। अब खपत को पूरा करने केलिए इसी दूध में जहर को घोला जा रहा है। मिलावटी दूध हमारे स्वास्थ्य और जीवन ...
देश के नेता कैसे हों?

देश के नेता कैसे हों?

TOP STORIES, राष्ट्रीय
रजनीश कपूरअक्सर चुनावी व राजनैतिक सभाओं में आपने ऐसे नारे सुने होंगे ‘देश का नेता कैसा हो ..’, जहां नेता के समर्थक उनका नामजोड़कर नारे को पूरा करते हैं। इसी उम्मीद से कि वो नेता अपने समर्थकों और जानता की सेवा के लिए ही कुर्सी सँभालेंगे।परंतु क्या ये नेता कुर्सी पर बैठते ही जानता की अपेक्षा पर खरे उतरते हैं? क्या ये नेता अपने परिवार और निजी जीवन कीपरवाह किए बिना जनसेवा करते हैं? यदि ऐसा नहीं करते तो ऐसे नारे लगाने वालों को वास्तव में सोचना होगा की ‘देश केनेता कैसे हों?’राज्यों के चुनाव हों या दिल्ली की नगर निगम के चुनाव हों, सोशल मीडिया पर इन दिनों कई राजनैतिक दलों के नेताओं परजनता का ग़ुस्सा फूटते देखा गया है। फिर वो चाहे प्रचार कर रहे इलाक़े के नेता हों, विधायक हों, पार्षद हों या दल के प्रवक्ताहों। इन पर हो रहे जनता के प्रहारों में वृद्धि हो रही है। जनता ही नहीं, राजनैतिक दलों के कार्यकर...
दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है बैक्टीरियल इन्फेक्शन

दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा है बैक्टीरियल इन्फेक्शन

Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES
लैंसेट में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि ह्रदय रोग के बाद बैक्टीरियल इन्फेक्शन दुनिया का सबसे बड़ा हत्यारा है। ह्रदय रोगों में दिल का दौरा भी शामिल है। पता चला है कि 2019 में इन्फेक्शन की वजह से दुनिया भर में 1.37 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। मतलब कि हर आठ में से एक मौत के लिए यह इन्फेक्शन ही जिम्मेवार था। इनमें से 77 लाख मौतों के लिए केवल 33 जीवाणु रोगजनक जिम्मेदार थे, जोकि रोगाणुरोधी प्रतिरोधी और अतिसंवेदनशील दोनों ही हैं। देखा जाए तो वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों में से 13.6 फीसदी मौतों के लिए यह 33 बैक्टीरियल पैथोजन ही जिम्मेदार हैं। वहीं यदि इससे होने वाली मृत्यु दर की बात करें तो वो प्रति लाख की आबादी पर 99.6 दर्ज की गई है।  यही वजह है कि जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित इस नई रिसर्च में 204 देशों में इन 33 जीवाणु रोगजनकों और 11 प्रकार के संक्रमणों...
भारतीय ज्ञान परंपरा के लोप का अधिकार शासक और शासन को नहीं है

भारतीय ज्ञान परंपरा के लोप का अधिकार शासक और शासन को नहीं है

TOP STORIES, सामाजिक
-प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकजसभी प्राणी और सभी मनुष्य अपने-अपने कर्तव्य का पालन करें। वे सब स्वधर्म में निरत रहें, इसमें राजा को व्यवधान नहीं डालना चाहिये। प्रजा को स्वधर्म में प्रवृत्त रखने से प्रजा भी सुखी रहती है और शासक भी सुखी रहता है। दोनों इस लोक में भी सुखी रहते हैं और परलोक में भी सद्गति प्राप्त करते हैं। आर्य मर्यादा को व्यवस्थित रखना और वर्णों और आश्रमों की व्यवस्था सुचारू चलती रहे यह देखना शासन का काम है। जो शासन और जो प्रजा इस प्रकार अपनी मर्यादा में रहते हैं, वे कभी दुखी नहीं होते। सदा आनन्दित ही रहते हैं। इस तरह स्पष्ट है कि राजा का काम समाज का अपने मन से पुनर्गठन करना नहीं है। ऐसा पुनर्गठन पाप है। परंतु लोगों की सर्वसम्मति से तथा व्यापक संवाद के द्वारा और शिष्ट परिषदों तथा विद्वत् परिषदों में सम्पन्न विमर्श एवं निर्णयों के द्वारा पुनर्गठन होता रह सकता है।किसी भी स्थिति में भा...
भागी हुई लड़कियों का बाप.. सबसे निरीह होता हैं !!

भागी हुई लड़कियों का बाप.. सबसे निरीह होता हैं !!

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
      वह इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है। पहले तो वह महीनों तक घर से निकलता नहीं है, और फिर जब निकलता है तो हमेशा सर झुका कर चलता है। अपने आस-पास मुस्कुराते हर चेहरों को देख कर उसे लगता है जैसे लोग उसी को देख कर हँस रहे हैं। वह जीवन भर किसी से तेज स्वर में बात नहीं करता, वह डरता है कि कहीं कोई उसकी भागी हुई बेटी का नाम न ले ले... वह जीवन भर डरा रहता है। वह रोज मरता है। तबतक मरता है जबतक कि मर नहीं जाता।     पुराने दिनों में एक शब्द होता था 'मोछ-भदरा'। जिस पिता की बेटी घर से भाग जाती थी, उसे उसी दिन हजाम के यहाँ जा कर अपनी मूछें मुड़वा लेनी पड़ती थी। यह ग्रामीण सभ्यता का अलिखित संविधान था। तब मनई दो बार ही मूँछ मुड़ाता था, एक पिता की मृत्यु पर और दूसरा बेटी के भागने पर। बेटी का भागना तब पिता की मृत्यु से अधिक पीड़ादायक समझा जाता था। तब और अब में बस इतना इतना ही...
सबकी पहुँच में हो न्याय

सबकी पहुँच में हो न्याय

TOP STORIES, सामाजिक
डॉ. शंकर सुवन सिंहसामाजिक व्यवस्था का नियंत्रण कानून के द्वारा ही संभव है| क़ानून का उद्देश्य प्रत्येक पीड़िततक न्याय को पहुँचाना है। न्याय के बिना कानून की कल्पना करना व्यर्थ है। न्याय को अंग्रेजीमें जस्टिस कहते है|जस्टिस शब्द लैटिन भाषा के जस से बना है, जिसका अर्थ है- बाँधना याजोड़ना। न्याय और व्यवस्था एक दूसरे के पूरक हैं। बिना न्याय के किसी भी व्यवस्था कासंचालन असंभव है| न्याय का व्यवस्था से स्वाभाविक सम्बन्ध है। न्यायिक व्यवस्था समुदायों औरसमूहों को एक सूत्र में बाँधती है| मेरियम के अनुसार, न्याय उन मान्यताओं तथा प्रक्रियाओं कायोग है जिनके माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को वे सभी अधिकार तथा सुविधाएँ प्राप्त होती हैं जिन्हेंसमाज उचित मानता है। न्याय, पीड़ित व्यक्ति को बल प्रदान करता है| पीड़ित व्यक्ति न्यायव्यवस्था का लाभ लेने के लिए दर दर की ठोकरें खाता है| न्यायिक प्रक्रिया सुगम और सरलहोनी ...
वीर सावरकर कौन थे

वीर सावरकर कौन थे

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
वीर सावरकर कौन थे..? जिन्हें आज कांग्रेसी और वामपंथी कोस रहे हैं! *ये 25 बातें पढ़कर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो उठेगा। इसको पढ़े बिना आज़ादी का ज्ञान अधूरा है!* *आइए जानते हैं एक ऐसे महान क्रांतिकारी के बारे में जिनका नाम इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया। जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा इतनी यातनाएं झेली की उसके बारे में कल्पना करके ही इस देश के करोड़ों भारत माँ के कायर पुत्रों में सिहरन पैदा हो जायेगी।* *जिनका नाम लेने मात्र से आज भी हमारे देश के राजनेता भयभीत होते हैं क्योंकि उन्होंने माँ भारती की निस्वार्थ सेवा की थी। वो थे हमारे परम वीर सावरकर।* 1. वीर सावरकर पहले क्रांतिकारी देशभक्त थे जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोक सभा का विरोध किया और कहा कि वो हमारे शत्रु देश की रानी थी, हम शोक क्यूँ करें? क्या किसी भारतीय महापुरुष के नि...
उत्तर प्रदेश : पर्यटन से लगेंगे विकास के पंख

उत्तर प्रदेश : पर्यटन से लगेंगे विकास के पंख

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प्रदेश की नई पर्यटन नीति से युवा को मिलेगा रोजगार और विकास को बलमृत्युंजय दीक्षितउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भीअपनी लोकप्रियता के कारण हिमाचल और गुजरात में जम कर चुनाव प्रचार कर रहे हैं किन्तु उनकी दृष्टि एक पल के लिए भी अपने प्रदेश के विकास कार्यक्रमों से नहीं हटती, वे इस व्यस्तता के बीच भी प्रदेश के विकास के लिए नई नीतियों पर विचार मंथन करते हुए उन्हें अनुमति प्रदान कर रहे हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था लगातार सुधार की ओर अग्रसर है अतः अब प्रदेश सरकार एक ट्रिलियन डॉलर (10 ख़रब अमेरिकी डॉलर) की अर्थ व्यवस्था का लक्ष्य लेकर निवेश को गति प्रदान करने का काम कर रही है। इस दिशा में कई नीतिगत प्रयास हो रहे हैं और प्रदेश की नई पर्यटन नीति भी इसी का एक अंग है जो निवेशकों को आकर्षित करने का काम करेगी ।प्रदेश सरकार की नई पर्यटन नीति बहुआयामी विकास को धार देने वाली है और यदि इसको सही ...
ईरान में हिजाब पर जन-आक्रोश

ईरान में हिजाब पर जन-आक्रोश

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* ईरान में हिजाब के मामले ने जबर्दस्त तूल पकड़ लिया है। पिछले दो माह में 400 लोग मारे गए हैं, जिनमें 58 बच्चे भी हैं। ईरान के गांव-गांव और शहर-शहर में आजकल वैसे ही हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं, जैसे कि अब से लगभग 50 साल पहले शंहशाहे-ईरान के खिलाफ होते थे। इसके कारण तो कई हैं लेकिन यह मामला इसलिए भड़क उठा है कि 16 सितंबर को एक मासा अमीनी नामक युवती की जेल में मौत हो गई। उसे कुछ दिन पहले गिरफ्तार कर लिया गया था और जेल में उसकी बुरी तरह से पिटाई हुई थी। उसका दोष सिर्फ इतना था कि उसने हिजाब नहीं पहन रखा था। हिजाब नहीं पहनने के कारण पहले भी कई ईरानी स्त्रियों को बेइज्जती और सजा भुगतनी पड़ी है। कई युवतियों ने तो टीवी चैनलों पर माफी मांग कर अपनी जान बचाई है। यह जन-आक्रोश तीव्रतर रूप धारण करता जा रहा है। अब लोग न तो आयतुल्लाहों के फरमानों को मान रहे हैं और न ही राष्ट्रपति इब्र...