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अपनों से बेईमानी, पतन की निशानी।

अपनों से बेईमानी, पतन की निशानी।

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हम दूसरों की आर्थिक स्थिति पर ज्यादा ध्यान देते हैं। अपनी स्थिति से असंतुष्टि ही हमें बेईमानी की तरफ धकेलती है। गरीब लोग अमीर बनने के चक्कर में और अमीर लोग अधिक अमीर बनने के चक्कर में छोटा रास्ता पकड़ते हुए धड़ाधड़ सब कुछ पा लेना चाहते हैं। छोटे रास्ते का अंकुर ही भविष्य में बेईमानी का पौधा बन जाता है। चाहे गाँवों में जमीन-जायदाद के विवाद हों या फिर शहरों में लोगों का अपने पड़ोसियों से छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े हों, सभी जगह हम दूसरों का हक छीनना चाहते हैं। यह कभी-कभी भौतिक लाभ में मदद करता है; यह सजा आदि से बचने में मदद करता है। वहीं, झूठ बोलना भी परेशानी खड़ी कर सकता है। झूठ बोलना संज्ञानात्मक रूप से क्षीण हो सकता है, यह इस जोखिम को बढ़ा सकता है कि लोगों को दंडित किया जाएगा, यह लोगों को खुद को अच्छे लोगों के रूप में देखने से रोककर उनके आत्म-मूल्य को खतरे में डाल सकता है, और यह आ...
भाजपा के ब्राम्हणवाद से हारेगा केजरीवाल

भाजपा के ब्राम्हणवाद से हारेगा केजरीवाल

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राष्ट्र-चिंतन**भाजपा के ब्राम्हणवाद से हारेगा केजरीवाल* *ब्राह्मणों को चरणस्पर्श किया, जाटों, गुर्जरों, राजपूतों को सिर पर उठाया* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त*==================== ब्राम्हण 45, जाट 34, राजपूत 22, गुर्जर 17, पंजाबी 31 , वैश्य 21और पिछडे वर्ग को पांच टिकट, ये आकंडे भाजपा के दिल्ली नगर निगम चुनाव में घोषित उम्मीदवारों के हैं। इन आंकड़ो के देखने के बाद यह प्रतीत होता है कि भाजपा जातिवाद की मिसाइल से अरविन्द केजरीवाल को परास्त करेगी। खासकर ब्राम्हणवाद भाजपा के लिए आईकॉन बन गया है। भाजपा के घोषित उम्मीदवारों को देखकर यही कहा जा सकता है कि अब भाजपा का विश्वास है कि वह ब्राम्हण जाति को खुश कर चौथी बार दिल्ली नगर निगम में परचम लहरायेगी। ब्राम्हण कभी कांग्रेस के वोटर हुआ करते थे, ब्राम्हण, मुस्लिम और हरिजन कांग्रेस की जीत के समीकरण हुआ करते थे।भाजपा लगातार 15 सालों से दिल्ली नग...
वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत औद्योगिक नीति की जरूरत।

वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत औद्योगिक नीति की जरूरत।

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक
देश का सन्तुलित विकास करने कि लिए संसाधनों को उचित दिशा में प्रवाहित करने कि लिए, उत्पादन बढ़ाने के लिए, वितरण की व्यवस्था सुधारने के लिए, एकाधिकार, संयोजन और अधिकार युक्त हितों को समाप्त करने अथवा नियन्त्रित करने के लिए कुछ गिने हुए व्यक्तियों के हाथ में धन अथवा आर्थिक सत्ता के केन्द्रीकरण को रोकने के लिए, असमताएँ घटाने के लिए, बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए, विदेशों पर निर्भरता समाप्त करने कि लिए तथा देश को सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए एक उपयुक्त एवं स्पष्ट औद्योगिक नीति की आवश्यकता होती है। -प्रियंका सौरभ औद्योगिक नीति को आर्थिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य द्वारा रणनीतिक प्रयास के रूप में परिभाषित किया गया है, अर्थात क्षेत्रों के बीच या भीतर निम्न से उच्च उत्पादकता गतिविधियों में बदलाव। भारत का लक्ष्य 2025-26 तक अपने विनिर्माण सकल मूल्य वर्धित (जीव...
पर्यावरण को बचाने के लिए पंचामृत मंत्र

पर्यावरण को बचाने के लिए पंचामृत मंत्र

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भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं पर मजबूत प्रगति की है और बढ़ती महत्वाकांक्षा और कम कार्बन वाले भविष्य की रूपरेखा तैयार करने में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हितधारक बना हुआ है। भविष्य में ग्रीनहाउस गैस के शमन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है और साथ ही अत्यधिक गर्मी, सूखे और बाढ़ के कारण पहले से ही लाखों लोगों के साथ बड़े पैमाने पर जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता है। देश के अधिकांश बुनियादी ढांचे का अभी भी निर्माण किया जा रहा है और भविष्य की ऊर्जा आपूर्ति अभी भी स्थापित की जानी है, भारत के पास शेष विकासशील दुनिया के लिए कम कार्बन विकास प्रतिमान स्थापित करने का अवसर है। -डॉ सत्यवान सौरभ शुद्ध-शून्य उत्सर्जन वातावरण से ग्रीनहाउस गैस अवशोषण द्वारा वातावरण में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को संतुलित करने की विधि है। शून्य कार्बन उत्सर्जन में, देश कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। ...
जलवायु संकट के लिये अमीर देशों की उदासीनता खतरनाक

जलवायु संकट के लिये अमीर देशों की उदासीनता खतरनाक

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
 ललित गर्ग  जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए अमीर एवं शक्तिशाली देशों की उदासीनता एवं लापरवाह रवैया एक बार फिर मिस्र के अंतरराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन (कॉप-27) में देखने को मिली। दुनिया में जलवायु परिवर्तन की समस्या जितनी गंभीर होती जा रही है, इससे निपटने के गंभीर प्रयासों का उतना ही अभाव महसूस हो रहा है। कॉप-27 में मौसम में अप्रत्याशित बदलाव के कारण गरीब देशों को हुए नुकसान पर चर्चाएं हुई, इस तरह का नुकसान गरीब देश ही भुगतते हैं। इस सम्मेलन में इसकी भरपाई के लिए धन मुहैया कराने समेत अन्य अहम मुद्दों को लेकर गतिरोध ने इस कड़वे यथार्थ एवं खौफनाक सच को फिर रेखांकित कर दिया कि अमीर एवं शक्तिशाली देश इस वैश्विक समस्या के प्रति उदासीन है। गंभीर से गंभीरतर होते इस संकट को लेकर सम्मेलन के समापन पर ‘नुकसान और क्षति’ कोष स्थापित करने पर सहमति भले ही बन गई, लेकिन यह कोष कब तक बनेगा,...
पांच लाख करोड़ डालर की भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रामीण विकास के सहारे ही बनेगी

पांच लाख करोड़ डालर की भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रामीण विकास के सहारे ही बनेगी

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक
आज विश्व के लगभग सभी विकसित एवं विकासशील देश आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। इन समस्त अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर एक चमकते सितारे के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार तेज गति से हो रहे सुधार के चलते आज भारत का नाम पूरे विश्व में बड़े ही आदर और विश्वास के साथ लिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक फण्ड एवं विश्व बैंक जैसी वित्तीय संस्थाएं भी भारतीय अर्थव्यवस्था में अपनी अपार श्रद्धा जता चुकी हैं। इन वित्तीय संस्थानों का कहना है कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास बहुत ही मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए 6 विकास सूचक  उच्च मानक वाले माने जाते हैं। इन विकास सूचकों में शामिल हैं - ट्रैक्टर एवं दोपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि, उर्वरकों की बिक्री में वृद्धि, कृषि क्षेत्र में बैकों द्वारा प्रदान...
चेतना द्वारा रामायण महोत्सव 2.0 का आयोजन

चेतना द्वारा रामायण महोत्सव 2.0 का आयोजन

TOP STORIES, धर्म
हम अपने अन्तर्मन में भगवान राम को बैठा लेंगे तो वही अयोध्या बन जाएगी, और किसी भी दैत्य द्वारा कोई अपहरण या अनाचार नहीं हो पाएगा । उपरोक्त कथन विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने कहे । उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 में राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा और हम मकर संक्रांति पर परिवार सहित प्रभु श्रीराम के दर्शन करें । वे आज नई दिल्ली के रोहिणी स्थित क्राउन प्लाजा होटल में चेतना संस्था द्वारा रामायण महोत्सव 2.0 को मनाते हुए चेतना के मंच से कहे । कार्यक्रम का शुभारंभ दीपांजली से श्री गौरव गुप्ता, श्री प्रकाश चंद जैन, श्री ऋषि राज, श्री आमोद अग्रवाल, श्री राजीव तुली, श्री मनोज गर्ग, कंसल परिवार एवं अन्य गणमान्य महानुभावों द्वारा किया गया। सर्वप्रथम गुरुकुल कथक केंद्र के कलाकारों द्वारा “नृत्य में राम” विषय पर श्री राम स्तुति पर कथक नृत्य करने के साथ सीता हरण के दृश्य ...
22नवम्बर 1713 : वीर दुर्गादास की पुण्यतिथि

22नवम्बर 1713 : वीर दुर्गादास की पुण्यतिथि

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औरंगजेब को पराजित किया, अपनी शर्तों पर समझौता--रमेश शर्मा निसंदेह भारत में परतंत्रता का अंधकार सबसे लंबा रहा । असाधारण दमन और अत्याचार हुये पर भारतीय मेधा ने दासत्व को कभी स्वीकार नहीं किया । भारतीय मिट्टी में ऐसे वीर प्रत्येक कालखंड में जन्में जिन्होंने आक्रांताओं और अनाचारियों को न केवल चुनौती दी अपितु उन्हें झुकने पर भी विवश किया । ऐसे ही वीर यौद्धा हैं दुर्गादास राठौर । जिन्होने अपने रणकौशल से न केवल औरंगजेब को पराजित किया अपितु उसे झुका कर अपनी शर्तों पर ही समझौता किया ।वीर ठाकुर दुर्गा दास का जन्म 13 अगस्त 1638 को ग्राम सालवा में हुआ था । उनके पिता आसकरण राठौर ग्राम जुनेजा के जागीरदार थे । माता नेतकंवर धार्मिक, सांस्कृतिक और परंपराओ के प्रति समर्पित विचारों की थीं । पति यद्यपि महाराजा जसवंत सिंह की सेवा में थे । लेकिन महाराजा जसवंतसिंह मुगलों के सैन्य अभियान में सदैव सम्मिलित...
सच्चे राष्ट्रनायक है सावरकर – ह्रदय नारायण दीक्षित

सच्चे राष्ट्रनायक है सावरकर – ह्रदय नारायण दीक्षित

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भारत अखण्ड सम्प्रभुता और राष्ट्रीयता है। हम भारत के लोग प्राचीन राष्ट्र हैं। भारत खण्डों को जोड़ कर नहीं बना लेकिन कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी को संभवतः भारत टूटा फूटा दिखाई पड़ता है। इसीलिए वे भारत जोड़ने की अपील के साथ पद यात्रा पर हैं। उन्होंने राष्ट्रवादी विचार के महानायक विनायक दामोदर सावरकर पर अभद्र टिप्पणी की है। सावरकर को अंग्रेजी सत्ता का पेंशनर बताया है। कहा है कि ”उन्होंने अंग्रेजी सत्ता की मदद की। जेल से अपनी रिहाई कि लिए माफी मांगी थी।” राहुल गाँधी का वक्तव्य क्रांतिकारी सावरकर पर घटिया आरोप है। राहुल नहीं जानते कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक समिति के मंत्री पंडित बाखले ने सावरकर जन्म तिथि अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी को पत्र लिखा था। श्रीमती गाँधी ने मई 1980 के पत्र में बाखले को उत्तर दिया, ‘‘मुझे आपका पत्र मिला। सावरकर ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अति सा...
इतने बड़े घोटालों की जाँच में पक्षपात क्यों हो रहा है?

इतने बड़े घोटालों की जाँच में पक्षपात क्यों हो रहा है?

TOP STORIES, घोटाला
*विनीत नारायणबैंकों का धन लूटकर विदेशों में धन शोधन करने वाले बड़े औद्योगिक घरानों की जाँच को लेकर जाँच एजेंसियाँ आए दिनविवादों में घिरी रहती हैं। मामला नीरव मोदी का हो, विजय माल्या का हो या मेहुल चोक्सी का हो, इन भगोड़े वित्तीयअपराधियों को जेल की सलाख़ों के पीछे भेजने में हमारे देश की बड़ी जाँच एजेंसियाँ लगातार विफल रही हैं। ऐसी नाकामीके कारण ही इन एजेंसियों पर चुनिन्दा आरोपियों के ख़िलाफ़ ही कारवाई करने के आरोप भी लगते रहे हैं।पिछले दिनों कानपुर की रोटोमैक पेन कंपनी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 750 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक फ्रॉड कामामला दर्ज किया है। पेन बनाने वाली इस नामी कंपनी पर आरोप है कि इन्होंने कई बैंकों से ऋण लेकर आज तक नहींलौटाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 7 बैंकों के समूह के लगभग 2919 करोड़ रुपये इस कंपनी पर बकाया हैं। ग़ौरतलब है कि बैंकफ्रॉड का यह मामला नया नहीं है। बैंक को...