अच्छी आदतों के निर्माण का संकल्प लें
-ललित गर्ग-
आज का इंसान नकारात्मक को ओढ़े नानाप्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है,हर इंसान अपनी आदतों को लेकर परेशान है। ऐसा नहीं है कि आज का आदमी समय के साथ चलना न चाहे, बुरे आचरण एवं आदतों को छोड़कर अच्छी जिन्दगी का सपना न देखे, बुराई को बुराई समझने के लिये तैयार न हो। सोचना यह है कि हम गहरे में जमंे संस्कारों एवं जड़ हो चुकी आदतों को कैसे दूर करें। जड़ तक कैसे पहुंचे। बिना जड़ के सिर्फ फूल-पत्तों का क्या मूल्य? अच्छा जीवन जीने एवं श्रेष्ठता के मुकाम तक पहुंचने के लिये अच्छी आदतों को स्वयं में सहेजना होगा, बाहरी अवधारणाओं को बदलना होगा, जीने की दिशाओं को मोड़ देना होगा। अंधेरा तभी तक डरावना है जब तक हाथ दीये की बाती तक न पहुंचे। जरूरत सिर्फ उठकर दीये तक पहुंचने की है।विलियम जेम्स ने अपनी पुस्तक ‘दि प्रिसिंपल ऑफ साइकोलॉजी’ में मनोवैज्ञानिक ढंग से चर्चा करते हुए लिखा है-‘अच्छा जीवन जीने क...









