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अच्छी आदतों के निर्माण का संकल्प लें

अच्छी आदतों के निर्माण का संकल्प लें

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-ललित गर्ग- आज का इंसान नकारात्मक को ओढ़े नानाप्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है,हर इंसान अपनी आदतों को लेकर परेशान है। ऐसा नहीं है कि आज का आदमी समय के साथ चलना न चाहे, बुरे आचरण एवं आदतों को छोड़कर अच्छी जिन्दगी का सपना न देखे, बुराई को बुराई समझने के लिये तैयार न हो। सोचना यह है कि हम गहरे में जमंे संस्कारों एवं जड़ हो चुकी आदतों को कैसे दूर करें। जड़ तक कैसे पहुंचे। बिना जड़ के सिर्फ फूल-पत्तों का क्या मूल्य? अच्छा जीवन जीने एवं श्रेष्ठता के मुकाम तक पहुंचने के लिये अच्छी आदतों को स्वयं में सहेजना होगा, बाहरी अवधारणाओं को बदलना होगा, जीने की दिशाओं को मोड़ देना होगा। अंधेरा तभी तक डरावना है जब तक हाथ दीये की बाती तक न पहुंचे। जरूरत सिर्फ उठकर दीये तक पहुंचने की है।विलियम जेम्स ने अपनी पुस्तक ‘दि प्रिसिंपल ऑफ साइकोलॉजी’ में मनोवैज्ञानिक ढंग से चर्चा करते हुए लिखा है-‘अच्छा जीवन जीने क...
ये न ‘लव’ है और न ही ‘जिहाद’

ये न ‘लव’ है और न ही ‘जिहाद’

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* थोक वोट कबाड़ने के लिए हमारे राजनीतिक दल आजकल ऐसे-ऐसे पैंतरे अपना रहे हैं और बेसिर-पैर की दलीलें दे रहे हैं कि कई बार मुझे आश्चर्य होता है कि वे देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं। आजकल कुछ प्रदेशों में विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनावों हो रहे हैं। गुजरातियों और मुसलमानों के थोक वोट पटाने के लिए यदि कांग्रेस वीर सावरकर को बदनाम कर रही है तो आफताब-श्रद्धा कांड को भाजपा के कुछ नेता ‘लव जिहाद’ का नाम दे रहे हैं ताकि वे हिंदू वोट पटा सकें। वास्तव में आफताब ने श्रद्धा की जो बर्बरतापूर्ण हत्या की है, उसकी जितना निंदा की जाए, वह कम है। आफताब को तुरंत इतनी कड़ी सजा इस तरीके से दी जानी चाहिए कि हर भावी हत्यारे के रोंगटे खड़े हो जाएं लेकिन उसे ‘लव जिहाद’ कहने की तो कोई तुक नहीं है। आफताब और श्रद्धा के बीच न ‘लव’ था और न ही 'जिहाद'। दोनों के बीच प्रेम होना तो अपने आप में...
पिछले 32 वर्षों से सिक्योरिटी प्रशिक्षण के लिए प्रतिबद्ध संस्था है आईआईएसएसएम IISSM

पिछले 32 वर्षों से सिक्योरिटी प्रशिक्षण के लिए प्रतिबद्ध संस्था है आईआईएसएसएम IISSM

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इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट (आईआईएसएसएम) के दो दिवसीय 32वां अन्तरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव की शुरुआत आज दिल्ली में हुई। यह कॉन्क्लेव होटल क्राउन प्लाजा, ओखला फेज 1, नई दिल्ली के खचाखच भरे हॉल के साथ ही वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर भी आयोजित किया गया है। जिसमें पूरे विश्व के हजारों सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस बार कॉन्क्लेव का थीम “राष्ट्र निर्माण में सुरक्षा, सुरक्षा और हानि निवारण की भूमिका” है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आईआईएसएसएम के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद आर.के सिन्हा ने कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण का विशेष महत्व है। सुरक्षा एजेंसियों को समय-समय पर नई तकनीक से खुद को अपग्रेड करते रहना चाहिए। उन्होंने आईआईएसएसएम की स्थापना के उद्देश्य के विषय में बताते हुए कहा कि जब 1989 में मैं पटना में एक छोटी सी ही सिक्यूरिटी कम्पनी ...
भारत का अहिन्दूकरण

भारत का अहिन्दूकरण

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आज पुरे भारत में दलित जाति के हिन्दूओं को जोर शोर से इसाई बनाया जा रहा रहा है. हिन्दू सो रहा है. प्रायः हिन्दू समझता है कि मत/ मजहब बदलने से कुछ अंतर नहीं पड़ता. सच तो यह है कि मतान्तरण आगे चल कर राष्ट्रान्तरण में बदल जाता है. जो भी मुस्लिम बन जाता है उसकी तीसरी पीढ़ी अपनी जड़ें मक्का मदीना से जोडती है. जो ईसाई बन जाता है उसकी तीसरी पीढ़ी अपने को वेटिकन के अधिक निकट पाती है. भारत में जहाँ भी हिन्दू कंम है उन्ही राज्यों में अधिक अशांति है. जैसे कश्मीर और मिजोरम. यह समस्या कितनी जटिल है इसका जन सामान्य को अनुमान नहीं है. पाठको ने संभवतः मुहम्मद अली जिन्नाह (पाकिस्तान निर्माता) और मुहम्मद इकबाल (पाकिस्तान के वैचारिक जनक) का नाम सुना होगा. इनके पूर्वज भी हिन्दू से मुस्लिम बने थे. परन्तु इन्होने भारत विभाजन में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई यह सभी जानते हैं. इसी तरह पण्डित नीलकंठ शास्त्री क...
पंज प्यारों की जमीन पर देखते-देखते ही कैसे ‘पगड़ी वाले ईसाई’ छा गए

पंज प्यारों की जमीन पर देखते-देखते ही कैसे ‘पगड़ी वाले ईसाई’ छा गए

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पंजाब में 65000 पादरी, जिस चर्च के 14 साल पहले थे 3 मेंबर- अब हैं उसके 300000 सदस्य: पंज प्यारों की जमीन पर ‘पगड़ी वाले ईसाइयों’ की छाया कैसे.....सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंज प्यारों की जमीन पर देखते-देखते ही कैसे 'पगड़ी वाले ईसाई' छा गए। इस सवाल का जवाब देने में जितनी देरी होगी, धर्मांतरण माफिया की जड़ें उतनी ही मजबूत होती जाएगी। भारत धर्मांतरण (Religious Conversion) के घातक जाल में उलझा हुआ है। भोले-भाले जनजातीय समाज के लोगों को प्रलोभन दे ईसाई बनाने से मिशनरियों ने इस घातक जाल के धागे जोड़ने शुरू किए। अब यह एक ऐसे जाल के रूप में सामने आ चुका है, जिसमें दलित, पिछड़े, सर्वण… सब उलझे नजर आ रहे हैं। इस घातक जाल की जद में पंजाब (Religious Conversion In Punjab) भी है। इंडिया टुडे मैगजीन ने पंजाब में ईसाई धर्मांतरण पर कवर स्टोरी की है। इससे जो तथ्य सामने आए हैं, वे बताते हैं कि यदि इस पर लग...
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी

खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी

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19 नवंबर पर विशेष-खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थीमृत्युंजय दीक्षितभारतीय स्वाधीनता का इतिहास वीर गाथाओं से भरा पड़ा है और आज जब देश स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मना रहा है तब इन वीर गाथाओं का स्मरण करना किसी पुण्य कार्य को करने की अनुभूति कराता है। महारानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा को दोहराना ऐसा ही एक पुण्य कार्य लगता है ।महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म महाराष्ट्र से काशी आकर रहने वाले मोरोपंत तांबे के घर 19 नवंबर सन 1834 को हुआ था। मणि कर्णिका नाम वाली लक्ष्मीबाई को तब प्यार से मनु कहा जाता था। जब मनु 4 वर्ष की थी तब उसकी मां भागीरथी बाई का काशी में ही देहांत हो गय।अब मनु के पिता को मनु के पालन- पोषण के लिए कोई सहारा न दिखाई दिया। तब बाजीराव पेशवा ने उन्हें अपने पास बिठूर बुलवा लिया। यहां पर मनु के पिता उसको अपने साथ पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में ले जाने लगे। मनु स्वभाव से बहुत चंचल ...
केरल का मार्क्सवादी दुराग्रह

केरल का मार्क्सवादी दुराग्रह

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*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* केरल की मार्क्सवादी सरकार का दुराग्रह अपनी चरम सीमा पर पहुंचा हुआ है। सत्तारुढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने राज्यपाल को केरल के विश्वविद्यालयों के कुलपति पद से हटाने के लिए एक अध्यादेश तैयार कर लिया है और अब विधानसभा का सत्र बुलाकार वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रस्ताव भी पारित करना चाहते हैं। उनसे कोई पूछे कि राज्यपाल के हस्ताक्षर के बिना कौनसा प्रस्तावित अध्यादेश लागू किया जा सकता है और उनके दस्तखत के बिना कौनसा विधेयक कानून बन सकता है याने केरल की विजयन सरकार झूठ-मूठ की नौटंकी में अपना समय बर्बाद कर रही है। जहां तक उप-कुलपतियों का सवाल है, उनकी नियुक्तियाँ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए लेकिन उन नियमों का उल्लंघन करके आप अपने म...
सावरकर : राहुल का कोई दोष नहीं

सावरकर : राहुल का कोई दोष नहीं

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक राहुल गांधी की अच्छी-खासी भारत-यात्रा चल रही है, लेकिन पता नहीं क्या बात है कि वक्त-बेवक्त उसमें वे पलीता लगवा लेते हैं। पहले उन्होंने जातीय-जनगणना के सोये मुर्दे को उठा दिया, जिसे उनकी माता सोनिया गांधी ने खुद दफना दिया था और अब उन्होंने महाराष्ट्र में जाकर वीर सावरकर के खिलाफ बयान दे दिया है। क्या उन्हें पता नहीं है कि विनायक दामोदर महाराष्ट्रियन थे और महाराष्ट्र के लोग उन्हें स्वांतत्र्य संग्राम का महानायक मानते हैं? स्वयं इंदिरा गांधी ने उन्हें महान स्वतंत्रता-सेनानी कहा है। राहुल ने ब्रिटिश सरकार को लिखे सावरकर के एक पत्र को उद्धृत करते हुए कहा है कि सावरकर ने अपने आप को अण्डमान की जेल से छुड़वाने के लिए ब्रिटिश सरकार से माफी मांगी और रिहा होने के बाद उसके साथ पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। राहुल का कहना है कि सावरकर ने ऐसा करके गांधी, पटेल और नेहरु के साथ विश्वा...
क्या पुरुष उपेक्षा एवं उत्पीडन के शिकार हैं?

क्या पुरुष उपेक्षा एवं उत्पीडन के शिकार हैं?

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अन्तर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस-19 नवम्बर, 2022 पर विशेष-ललित गर्ग- दुुनिया में अब महिला दिवस की भांति पुरुष दिवस प्रभावी रूप में बनाये जाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। अब पुरुष भी अपने शोषण एवं उत्पीडित होने की बात उठा रहे हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुषों पर अधिक उपेक्षा, उत्पीड़न एवं अन्याय की घटनाएं पनपने की भी बात की जा रही है। महिला दिवस की तर्ज पर ही पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस भी मनाया जाने लगा है। इस दिवस की शुरुआत 1999 में त्रिनिदाद एवं टोबागो से हुई थी। तब से प्रत्येक वर्ष 19 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस दुनिया के 30 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसे मान्यता देते हुए इसकी आवश्यकता को बल दिया और पुरजोर सराहना एवं सहायता दी है। आज तेजी से बदलती दुनिया में हर वर्ग के लिए परिभाषाएं भी बन एवं बदल रही हैं। एक तरफ जहां महिलाएं सशक...
फीफा कप- भारतीयों की पसंद ब्राजील ही टीम क्यों

फीफा कप- भारतीयों की पसंद ब्राजील ही टीम क्यों

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आर.के. सिन्हा क्रिकेट टी-20 वर्ल्ड कप के फौरन बाद अब फीफा विश्व कप आगामी 20 नवंबर से कतर में शुरू हो रहा है। लोकप्रियता के स्तर पर क्रिकेट कहीं नहीं ठहरती फुटबॉल के सामने। भारत के हर गाँव में फुटबाल प्रेमी भरे पड़े हैं। फीफा विश्व कप को सारी दुनिया के करोड़ों-अरबों लोगे देखेंगे। भारत में भी इसके मैच हर रोज देखे जाएंगे। दुनिया भर के 200 से अधिक देशों ने हर चार साल में होने वाली इस फुटबॉल स्पर्धा में क्वालीफाई करने का प्रयास किया, लेकिन मेजबान कतर सहित केवल 32 टीमें ही 2022 फुटबॉल विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर सकीं। हालांकि उन 32 देशों में भारत भी नहीं हैं जो फीफा कप के लिए क्वालीफाई कर सके हैं। एक अरसे से भारतीय फुटबॉल प्रेमी ब्राजील की टीम को ही चीयर करते हैं और संतोष कर लेते हैं। हमारे फुटबॉल प्रेमियों की ब्राजील की टीम को ...