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चंद्रचूड़ और अमित शाहः पते की बात*

चंद्रचूड़ और अमित शाहः पते की बात*

Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* आज दो खबरों ने बरबस मेरा ध्यान खींचा। एक तो मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ के बयान ने और दूसरा गृहमंत्री अमित शाह के बयान ने! दोनों ने वही बात कह दी है, जिसे मैं कई दशकों से कहता चला आ रहा हूं लेकिन देश के किसी न्यायाधीश या नेता की हिम्मत नहीं पड़ती कि भाषा के सवाल पर वे इतनी पुख्ता और तर्कसंगत बात कह दें। चंद्रचूड़ ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की संगोष्ठी में बोलते हुए कह दिया कि कोई यदि अच्छी अंग्रेजी बोल सकता है तो इसे उसकी योग्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता और उसकी योग्यता इस बात से भी नापी नहीं जा सकती कि वह व्यक्ति कौन से नामी-गिरामी स्कूल या काॅलेज से पढ़कर निकला है। हमारे देश में इसका एकदम उल्टा ही होता है। इसका एकमात्र कारण हमारे नेताओं और नौकरशाहों की बौद्धिक गुलामी है। अंग्रेजों की लादी हुई औपनिवेशिक व्यवस्था ने भारत की शिक्षा और चिकित्सा दोनों को चौपट कर र...
Diversity among India’s leadership is significant

Diversity among India’s leadership is significant

Current Affaires, TOP STORIES
By Balbir Punj The appointment of Indian-origin politician Rishi Sunak as the British Prime Minister (PM) last month was celebrated by Indians at home and abroad. But it also sparked a raft of rancour- bordering on self-flagellation - whether a similar event could happen in India, especially the appointment of a Muslim as PM. Former Union minister P Chidambaram said the British example was a template worthy of emulation. “First Kamala Harris, now Rishi Sunak…. I think there is a lesson to be learned by India,” he wrote. “As we Indians celebrate the ascent of Rishi Sunak let's honestly ask: Can it happen here?” asked Congress leader Shashi Tharoor. But it is important to remember that Sunak got the top job because the Conservative Members of Parliament (MPs) saw in him a thoroughb...
सुप्रीम कोर्ट के जजों का अहंकार –

सुप्रीम कोर्ट के जजों का अहंकार –

BREAKING NEWS, CURRENT ISSUE, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES
इनके पतन का कारण बनेगा - वैसे तो यह काफी समय से चल रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों का अहंकार चरम पर चलता दिखाई दे रहा है और यही जुडिशरी के लिए हानिकारक साबित होगा परन्तु कुछ हाल के मसलों में पता चलता है जजों को एहसास ही नहीं होता कि वो क्या बोल रहे हैं - कुछ किस्से बता रहा हूँ - -कल CJI चंद्रचूड़ के सामने वकील शशांक शेखर झा की याचिका सुनवाई के लिए आई जिसमे उन्होंने पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपील की थी - इस याचिका को चंद्र्कहुड ने सुनने से ही मना कर दिया और 80% पराली जलाने वाले पंजाब को एक तरह से निर्दोष बता दिया - चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या पराली जलने से रोकने से प्रदूषण ख़तम हो जायेगा, इसके लिए कुछ और तरींका ढूढ़ना होगा - इसका मतलब तो यही हुआ न मीलार्ड कि पराली जलाने से प्रदूषण नहीं होता बल्कि एक दिवाली की रात में पटाखे जलाने से सारा प्रदूषण होता है जिसे रोकने के लिए आप...
जांच बलात्कार की या स्त्री के चरित्र की?*

जांच बलात्कार की या स्त्री के चरित्र की?*

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES
जांच बलात्कार की या स्त्री के चरित्र की?* सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार की जांच के संबंध में किये जाने वाले टू फिंगर टेस्ट पर रोक लगा दी है और सत्य से परे एक बात कि शादीशुदा स्त्री का बलात्कार नहीं हो सकता, को विपरीत नजीर बना दिया है| सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाइकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें सत्र न्यायालय के फैसले के विरुद्ध जा कर दुष्कर्म के दोषियों को रिहा कर दिया गया था, जबकि सत्र अदालत ने उन्हें दोषी माना था| सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनायी है|वैसे तो यह जांच एक तरह से स्त्री की यौन शुचिता से जुड़ी है| वह संभोग की आदी है या नहीं, यह देखने के लिए यह टेस्ट होता है| इसमें छिपी हुई एक बात यह भी है कि किसी विवाहिता के बारे में मान लिया जाता है कि उसका बलात्कार हो ही नहीं सकता| कुंआरेपन को जांचने के लिए यह टेस्ट किया जात...
Economic development schemes being run for tribal society

Economic development schemes being run for tribal society

TOP STORIES, आर्थिक
15 नवम्बर 2022 जनजाति गौरव दिवस के शुभ अवसर पर विशेष लेख जनजाति समाज के लिए चलाई जा रही आर्थिक विकास की योजनाएं जनजाति समाज बहुत ही कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए देश में दूर दराज इलाकों के सघन जंगलो के बीच वनों में रहता है। जनजाति समाज के सदस्य बहुत ही कठिन जीवन व्यतीत करते रहे हैं एवं देश के वनों की सुरक्षा में इस समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। चूंकि यह समाज भारत के सुदूर इलाकों में रहता है अतः देश के आर्थिक विकास का लाभ इस समाज के सदस्यों को कम ही मिलता रहा है। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार एवं कई राज्य सरकारों ने विशेष रूप से जनजाति समाज के लिए कई योजनाएं इस उद्देश्य से प्रारम्भ की हैं कि इस समाज के सदस्यों को राष्ट्र विकास की मुख्य धारा में शामिल किया जा सके एवं इस समाज की कठिन जीवनशैली को कुछ हद्द तक आसान बनाया जा सके। भारत में सम्पन्न हुई वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अनुस...
G-20: Time for India to lead from the front

G-20: Time for India to lead from the front

TOP STORIES, राष्ट्रीय
Challenges before India as head of G-20 Vivek Shukla India is taking over the reins of G-20 only on Ist December 2022, but fact of the matter is that the Indian Prime Minister  Narendra Modi is due to symbolically take over the G-20 presidency from current chair Indonesian President Joko Widodo in Bali on November 16, 2022. Indeed, it is a historic opportunity for the country. If everything goes according to the plan, U.S. President Joe Biden, Chinese President Xi Jinping, Russian President Vladimir Putin, British Prime Minister Rishi Sunak, Canadian Prime Minister Justin Trudeau, Japan’s Prime Minister Fumio Kishida, Australian Prime Minister Anthony Albanese, South  Korean President Yoon Suk—Yeol, German Chancellor Olaf Scholz, French President Emmanuel Macron,Tu...
पृथ्वी का संकट

पृथ्वी का संकट

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
ह्रदय नारायण दीक्षित पृथ्वी का अस्तित्व संकट में है। पर्यावरण विश्व बेचैनी है। भारत में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण चिंताजनक है। प्रातः टहलने वाले लोग प्रदूषित वायु में सांस लेने को बाध्य हैं। काफी लम्बे समय से अक्टूबर नवम्बर के महीनों में भारत के बड़े हिस्सों में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। पराली जलाने सहित इस प्रदूषण के अनेक कारण हैं। क्षिति, जल, पावक, गगन व समीर अव्यवस्थित हो रहे हंै। तुलसीदास ने रामचरितमानस में पृथ्वी संकट का उल्लेख किया है। लिखा है, ‘‘अतिशय देखि धरम कै हानी/परम सभीत धरा अकुलानी - धर्म की ग्लानि को बढ़ते देखकर पृथ्वी भयग्रस्त हुई। देवों के पास पहुंची। अपना दुःख सुनाया - निज संताप सुनाइस रोई। - पृथ्वी ने रोकर अपना कष्ट बताया। शंकर ने पार्वती को बताया कि वहां बहुत देवता थे। मैं भी उनमें एक था। तुलसी के अनुसार आकाशवाणी हुई, ‘‘हे धरती धैर्य रखो। मैं स्वयं ...
भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष

भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य, राष्ट्रीय
*भूख और स्वास्थ्य : २०२३ मोटा अनाज वर्ष* आंकड़े गंभीर नहीं डरावने हैं,विश्व भर में लगभग १२ करोड़ लोग कोरोना दुष्काल भुखमरी की चपेट में आ चुके हैं | वैश्विक खाद्य संकट के कारण यह संख्या बढ़कर ८० करोड़ से भी अधिक हो गयी है। भारत में लगभग ८ करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं, प्रतिवर्ष १.७ करोड़ लोग हृदय रोग के कारण दम तोड़ देते है, ३३ लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे तथा हर पांच में से एक पुरुष एनीमिक है। यह सारा संकट अनाज के कारण है, कहीं अनाज उपलब्ध नहीं होता तो कहीं वो गुणकारी नहीं होता | सारा विश्व इस संकट से निबटने के उपाय खोज रहा है | पिछले दिनों उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित हुए एससीओ सम्मेलन में विश्व खाद्य संकट से निपटने के लिए सुपर फूड (मोटा अनाज) को हर थाली का हिस्सा बनाये जाने की अपील तक की गयी है । कोविड, जलवायु संकट, यूक्रेन युद्ध आदि कारणों से व...
आत्म निर्भरता एवं स्वदेशी अपनाकर चीन को आर्थिक क्षेत्र में दी जा सकती है मात

आत्म निर्भरता एवं स्वदेशी अपनाकर चीन को आर्थिक क्षेत्र में दी जा सकती है मात

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष2021-22 में वस्तुओं के आयात के मामले में एक बार पुनः भारत की निर्भरता चीन पर बढ़ीहै। हालांकि पिछले 3 साल के दौरान भारत के चीन से आयात लगातार कम हो रहे थे परंतुवित्तीय वर्ष 2021-22 में चीन एवं भारत के बीच 11,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर का व्यापारहुआ है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 8,600 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तुलना में कहीं अधिकहै। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े यह अच्छी बात हो सकती है परंतु चिंता का विषय यह हैकि चीन से भारत में आयात बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और भारत से चीन को निर्यात उसगति से नहीं बढ़ पा रहे है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत में चीन से आयात 9,400 करोड़अमेरिकी डॉलर का रहा है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6,530 करोड़ अमेरिकी डॉलर कारहा था। वित्तीय वर्ष 2022-23 के प्रथम दो माह में भी स्थिति संभलने के...
वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमक

वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमक

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार
वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ती भारत की धमकमृत्युंजय दीक्षितअंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है और विश्व के लगभग सभी देश प्रधानमंत्री व भारत की ओर आशा की दृष्टि से देख रहे हैं। कोरोना महामारी की लड़ाई से थके हुए विश्व में अर्थ व्यवस्थाओं में मंदी और उसके करण उपजी नागरिक समस्याओं के साथ साथ रूस- यूक्रेन युद्ध सहित कई अन्य कारणों से तनाव व्याप्त है। किसी भी समय, किसी भी देश की एक गलती से धरती का बड़ा भाग परमाणु विध्वंस की चपेट में आ सकता है किन्तु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत की वर्तमान कूटनीति ने स्थितियों को बिगड़ने से बचा रखा है ।रूस -यूक्रेन युद्ध के सन्दर्भ में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा व उसके किसी भी मंच पर कभी रूस के विरुद्ध मतदान नहीं किया अपितु ऐसे हर प्रस्ताव के समय अनुपस्थित रहा किन्तु जब...