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विपरीत परिस्थितियाँ अक्सर हमें नई दिशा की ओर धकेलती हैं।

विपरीत परिस्थितियाँ अक्सर हमें नई दिशा की ओर धकेलती हैं।

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अगर हमें कठिन परिस्थितियों से गुजरनी पड़ती है तो सबसे तो पहले हमें उस समय अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए और हमें किसी भी कार्य को हिम्मत से काम लेना चाहिए। अगर आप कोई भी कार्य को धैर्य के साथ करते हैं तो वह कार्य हमेशा सफल होता है चाहे वह कितनी भी कठिनाई क्यों ना हो धैर्य और हिम्मत से किसी भी कार्य को किया जा सकता है कठिन से भी कठिन परिस्थितियों को भी हराया जा सकता है इसीलिए अगर आप किसी भी समस्या परिस्थिति में जूझ रहे हो तो हमें अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए हमें उन परिस्थितियों का मिलकर सामना करना चाहिए। लोगों के असली रंग-असली दोस्त की सतह को देखने में सक्षम है। यद्यपि प्रतिकूल परिस्थितियां दर्दनाक और कठिन हो सकती हैं, उन्हें भेष में आशीर्वाद के रूप में देखा और समझा जा सकता है, चाहे वह कितना भी स्वतंत्र क्यों न हो, आपको लोगों की आवश्यकता होगी और अक्सर सबसे प्रतिकूल समय में किसी के सच्चे दोस...
राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों का विवाद कब तक?

राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों का विवाद कब तक?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य
-ललित गर्ग-संवैधानिक पद पर विराजित राज्यपाल एवं चुनी हुई सरकारों के बीच द्वंद एवं टकराव की स्थितियां अनेक बार उभरती रही है। राजनीति के उलझे धागों के कारण ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण एवं विडम्बनापूर्ण स्थितियां देखने को मिलती है। गैर-भाजपा शासित राज्यों में सरकारों और राज्यपालों के बीच इस तरह का टकराव एक सामान्य बात हो गयी है, लेकिन यह टकराव न केवल लोकतंत्र के लिये बल्कि शासन-व्यवस्थाओं पर एक बदनुमा दाग की तरह है। बहुत समय से सरकारें राज्यपाल पर तो राज्यपाल सरकारों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे एक दूसरे के कामकाज में रोड़े अटका रहे हैं। इनदिनों तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में ऐसी स्थितियां बढ़-चढ़कर देखने को मिली है। इन सभी राज्यों में गैर-भाजपा सरकार है और एक बात कॉमन है वो बात है राज्य सरकार का राज्यपाल के साथ विवाद। बीते कुछ समय से इन पांचों राज्यों में राज्यपाल बनाम राज्य सरक...
यूक्रेनः मोदी खुद पहल करें

यूक्रेनः मोदी खुद पहल करें

BREAKING NEWS, Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* विदेश मंत्री डाॅ. जयशंकर ने दिल्ली में एक संगोष्ठी में कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच भारत की मध्यस्थता की बात बहुत अपरिपक्व है याने अभी कच्ची है। यह उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा है। यह सवाल किसी ने इसलिए उनसे पूछ लिया था कि वे 7-8 नवंबर को मास्को गए थे और उस वक्त यही प्रचारित किया जा रहा था कि वे रूस-यूक्रेन युद्ध को रूकवाने और दोनों राष्ट्रों के बीच मध्यस्थता करने के लिए जा रहे हैं। ऐसा लग भी रहा था कि भारत एकमात्र महत्वपूर्ण राष्ट्र है, जो दोनों की बीच मध्यस्थता कर सकता है और इस युद्ध को रूकवा सकता है। ऐसा लगने का एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत ने इस दौरान निष्पक्ष रहने की पूरी कोशिश की है। उसने संयुक्तराष्ट्र संघ के सभी मंचों पर यूक्रेन के बारे में यदि मतदान हुआ है तो किसी के भी पक्ष या विपक्ष में वोट नहीं दिया। वह तटस्थ रहा। उसने परिवर्जन किया। युद्ध के पिछल...
बिना बात के बतंगड़ में माहिर है कांग्रेस

बिना बात के बतंगड़ में माहिर है कांग्रेस

TOP STORIES, विश्लेषण, समाचार
-ललित गर्ग- भारतीय राजनीति में अक्सर बिना बात के बतंगड़ होते रहे हैं। ऐसे राजनेता चर्चित माने जाते हैं जो वास्तविक उपलब्धियों एवं सकारात्मक आयामों की भी आलोचना एवं छिद्रान्वेषण करने में चतुर होते हैं। बिना बात का बतंगड़ करने में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी एवं देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का कोई मुकाबला नहीं है। कांग्रेस ने जी-20 सम्मेलन के लोगो में कमल को चित्रित करने पर आपत्ति जताकर बैठे-ठाले न केवल अपनी प्रतिष्ठा को बटा लगाया है बल्कि इस प्रकार उद्देश्यहीन, उच्छृंखल, विध्वंसात्मक नीति को ही प्रदर्शित किया है। आग्रह, पूर्वाग्रह एवं दुराग्रह से ग्रस्त ऐसे आरोपों एवं आलोचनाओं से किसी का भी हित सधता हो, प्रतीत नहीं होता। ऐसा लगता है कि इस पार्टी एवं उसके नेताओं को मोदी सरकार के हर काम और निर्णय का विरोध करने की आदत पड़ गई है। ऐसा तभी होता है, जब कोई अंधविरोध से ग्रस्त हो जाता है।...
इजरायल में सत्ता परिवर्तन. भारत के लिये मायने

इजरायल में सत्ता परिवर्तन. भारत के लिये मायने

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आर.के. सिन्हा भारत के मित्र बेंजामिन नेतन्याहू के इजराइल के आम चुनावों में जीत से भारत का प्रसन्न होना स्वाभाविक है।  भारत-इजरायल संबंधों को नयी बुलंदियों पर लेकर जाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू ने अब तक कई शानदार इबारतें लिखी है।  दोनों नेताओं के बीच निजी मधुर संबंध स्थापित हो गये हैं जो अब तक कायम हैं! इसका लाभ यह हुआ कि दोनों देश तमाम क्षेत्रों में आपसी सहयोग करने लगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के आम चुनावों में अपने मित्र की विजय पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, "चुनाव में जीत पर मेरे प्रिय मित्र नेतन्याहू को बधाई। मैं भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ करने के लिए हमारे संयुक्त प्रयासों को जारी रखने के लिए उत्सुक हूं।"  यह मानना होगा कि वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल के निवर्तमान प्रधानमंत्री न...
डाॅक्टरी को ठगी का धंधा न बनाएँ*

डाॅक्टरी को ठगी का धंधा न बनाएँ*

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डाॅक्टरी को ठगी का धंधा न बनाएँ* *डॉ. वैदिक* कर्नाटक और गुजरात के मेडिकल काॅलेजों ने गज़ब कर दिया है। उन्होंने अपने छात्रों की फीस बढ़ाकर लगभग दो लाख रु. प्रति मास कर दी है। याने हर छात्र और छात्रा को डाॅक्टर बनने के लिए लगभग 25 लाख रु. हर साल जमा करवाने पड़ेंगे। यदि डाॅक्टरी की पढ़ाई पांच साल की है तो उन्हें सवा करोड़ रु. भरने पड़ेंगे। आप ही बताइए कि देश में कितने लोग ऐसे हैं, जो सवा करोड़ रु. खर्च कर सकते हैं? लेकिन चाहे जो हो, उन्हें बच्चों को डाॅक्टर तो बनाना ही है। तो वे क्या करेंगे? बैंकों, निजी संस्थाओं, सेठों और अपने रिश्तेदारों से कर्ज लेंगे, उसका ब्याज भी भरेंगे और बच्चों को किसी तरह डाॅक्टर की डिग्री दिला देंगे। फिर वे अपना कर्ज कैसे उतारेंगे? या तो वे कई गैर-कानूनी हथकंडों का सहारा लेंगे या उनका सबसे सादा तरीका यह होगा कि वे अपने डाॅक्टर बने बच्चों से कहेंगे कि तुम मरीजो...
भूकम्प : उठते हिमालय से सचेत रहिये

भूकम्प : उठते हिमालय से सचेत रहिये

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अभी जिस दिन इस वर्ष का अंतिम चन्द्रग्रहण था, देर रात दिल्ली ने भूकम्प के झटके झेले | यह सही है अभी भारत में भूकंप का पूर्वानुमान संभव नहीं है । मैक्सिको जैसे देश ऐसे निगरानी तंत्र से ही अपना बचाव करते हैं। वहां भूकंप से बचने के लिए एजेंसियों को एक से डेढ़ मिनट का वक्त मिल जाता है। जाहिर है, एशिया में इस तरह का तंत्र बनाने के लिए हिमालय के आस-पास बसे सभी देशों को एक मंच पर आना होगा। नेपाल, चीन और भारत में आए भूकंप के ये झटके अस्वाभाविक नहीं थे। इसका केंद्र नेपाल का मणिपुर था और भूगोल के हिसाब से इंडियन टेक्टोनिट प्लेट पूर्व से पश्चिम तक फैला है, जिसमें हमारा पूर्वोत्तर का इलाका, हिंदुकुश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान के कुछ भाग आदि आते हैं। यहां इंडियन प्लेट अपने से कहीं भारी यूरेशियन प्लेट के भीतर समा रही है या टकरा रही है, जिससे न सिर्फ हिमालय ऊपर की ओर उठ रहा है, बल्कि यह पूरा इलाका ही भूक...
भारत की ताकत का रूतबा है जी-20 नेतृत्व की दिशाएं-ललित गर्ग

भारत की ताकत का रूतबा है जी-20 नेतृत्व की दिशाएं-ललित गर्ग

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भारत के लिये यह गर्व एवं गौरव की बात है कि वह 1 दिसंबर से जी-20 की अध्यक्षता करेगा। भारत के लिए ये ऐतिहासिक अवसर है। आजादी के अमृतकाल में यह देश के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है, जहां से भारत के सशक्त होने एवं विश्व स्वीकार्यता की सार्थक दिशाओं का उद्घाटन होने जा रहा है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्व नेता के रूप में उभर रही स्थितियों के कारण एक बड़ा अवसर देश को प्राप्त हो रहा है। जी-20  ऐसे देशों का समूह है जिनका आर्थिक सामर्थ्य विश्व की 75 प्रतिशत जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है। भारत अब इस जी-20 समूह का नेतृत्व करने जा रहा है, इसकी अध्यक्षता करने जा रहा है। निश्चित ही यह भारत के लिये एक नये सूरज के अभ्युदय का संकेत है। मोदी ने भारत की अध्यक्षता के शुभंकर और वेबसाइट का अनावरण करते हुए दुनिया को शांति के मार्ग पर अग्रसर करने के अपने संकल्प को दोहराया है। समूची दुनिया को सुखी होने ...
Why Catholic-Protestant churches must work in tandem

Why Catholic-Protestant churches must work in tandem

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 Why Catholic-Protestant churches burying their differences Vivek Shukla As Christmas is not far away and All Souls day was recently observed in India and other parts of the world by Christians, the efforts to bury the differences between Catholic and Protestants so that they can work for the society and the country with vigour is going on. That should be celebrated.  On All Souls Day, some priests of Catholic and Protestant churches met at Rohtak in Haryana  and discussed ways forward to work in tandem as much as they can. To cement their ties with Catholic Church,  the Delhi Brotherhood Society is organising a series of Inter-faith and Inter community seminars and meetings to strengthen their ties with all the communities/ religions across India. Meanwhile, it...
सेमीकंडक्टर चिप 

सेमीकंडक्टर चिप 

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सेमीकंडक्टर चिप  50 वर्ष पूर्व सेमीकंडक्टर चिप (कंप्यूटर, सेल फ़ोन, फ़्लैश ड्राइव इत्यादि में लगने वाली चिप) बनाने के लिए सिलिकॉन वेफर (पापड़ से कई गुना पतली प्लेट) पर कुछ विशेष रसायन की एक पतली फिल्म छिडकी जाती थी और फिर उस पर एक मास्क एवं लेंस के माध्यम से साधारण प्रकाश स्रोत डाला जाता था। वेफर के जिस भाग पर प्रकाश पुंज पड़ता था, वहां मास्क पर बना पैटर्न रसायन पर छप जाता था। ठीक वैसे ही जैसे एक समय नेगेटिव से फोटो डेवेलप की जाती थी। इस पैटर्न, जिस पर विद्युत् प्रवाह हो सकती थी, पर किसी आभूषण में जड़े हीरे के सामान ट्रांजिस्टर बैठा दिए जाते थे। इसे इंटीग्रेटेड सर्किट का नाम दिया गया जिसे चिप भी कहा जाता है। ट्रांजिस्टर की विशेषता यह है कि इन्हे विदूयत प्रवाह के द्वारा ऑन-ऑफ किया जा सकता है जो कंप्यूटर की भाषा भी है। अंक 1 - ऑन; अंक 0 - ऑफ। 1,0,1,0 … सभी सॉफ्टवेयर कोड इन्...