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संघ को सोचना पड़ेगा

संघ को सोचना पड़ेगा

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संघ को सोचना पड़ेगा विनीत नारायण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा॰ मोहन भागवत जी के ताज़ा बयान का देश के धर्मनिरपेक्षवादियों, वामपंथियों, समाजवादियों व कांग्रेसियों द्वारा भरपूर स्वागत किया जा रहा है। उन्हें ख़ुशी है कि भागवत जी के इस बयान से देश में अमन चैन पैदा होगा। हिंसा रुकेगी और हिंदू मुसलमानों के बीच सौहार्द बढ़ेगा। इन विचारधाराओं के वो लोग जो कल तक सोशल मीडिया पर संघ और भाजपा के कट्टर हिंदुवाद को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे, आज अचानक भागवत जी के बयान की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं। भागवत जी ने कहा कि अब संघ किसी मंदिर की मुक्ति के लिए आंदोलन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि मस्जिदों के नीचे शिवलिंगों को खोजना बंद करें। हालांकि ज्ञानवापी मस्जिद व श्री कृष्ण जन्मस्थान मथुरा के विषय में उनके विचार भिन्न थे। किंतु भागवत जी के इस बयान ने हिंदू जनमानस को विचलित कर दिया है। उ...
क्या नूपुर प्रकरण पर भाजपा दबाव में है ?

क्या नूपुर प्रकरण पर भाजपा दबाव में है ?

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क्या नूपुर प्रकरण पर भाजपा दबाव में है ? मृत्युंजय दीक्षित एक टीवी डिबेट में साथी पैनेलिस्ट के भगवान शिव पर बार बार अमर्यादित टिपण्णी से उकसावे में आकर पैगंबर मोहम्मद पर की गयी टिप्पणी के बाद विवादों व कटटर मुस्लिम समाज की “सर तन से जुदा” धमकियों में घिरी बीजेपी प्रवक्ता नुपूर शर्मा और एक अन्य प्रवक्ता नवीन जिंदल को भाजपा से छह वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया है जिसके बाद सोशल मीडिया सहित विभिन्न मंचों पर बहुत सारे भाजपा समर्थक व प्रशंसक नेतृत्व की ओर से की गयी कार्यवाही और पार्टी की ओर से जारी किये गये बयानों की तीखी आलोचना कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ताओं के निलम्बन से कई राजनैतिक संदेश जा रहे हैं जिससे प्रथम दृष्टया पार्टी को कुछ क्षणिक नुकसान भी हो सकता है लेकिन अभी फिलहाल ऐसी कोई आशंका नहीं है कि इस कार्यवाही से बीजेपी को कोई बहुत बड़ा नुकसान होने जा रहा है। भाजपा के इन कदमों से सबसे ब...
हर शहर में एक भीड़

हर शहर में एक भीड़

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हर शहर में एक भीड़ ----------- #विजयमनोहरतिवारी शहर में कितना भीड़-भड़क्का है। हर तरफ भीड़ से भरे हैं हमारे शहर। आजादी की यह सबसे महान उपलब्धि है कि गांव वीरान होते गए और शहर भीड़ से भरते गए। अगर यूपी और बिहार न होते तो मुंबई इतनी ठसाठस नहीं होती। भला हो उन सरकारों का जिन्होंने आबादी बेहिसाब बढ़ने दी और गांवों को हाशिए पर रखा। आबादी का सैलाब शहरों की तरफ न गया होता तो बहकर कहां जाता। दूरदृष्टा सरकारों ने ही शहरों को चहलपहल से भरा। भीड़ कई प्रकार की होती है। सदाबहार भीड़ वह है जो हर कभी, हर कहीं दिखाई देती है। बाजारों में, बस अड्डों पर, रेलवे स्टेशनों पर और अब तो हवाई अड्डों पर भी। स्कूल और अस्पतालों में भी जगहें नहीं हैं। मेट्रो और मॉल्स भी हाऊस फुल हैं। शहरों की चमक सबको आकर्षित करती है। भीड़ का एक अलग प्रकार भी है। इस प्रकार की भीड़ अचानक प्रकट होती है। वह बेंगलुरू में थाने पर हमला बोल दे...
युवाओं के लिए अनूठी मिसाल बने- लालसिंह ‘लालू’

युवाओं के लिए अनूठी मिसाल बने- लालसिंह ‘लालू’

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युवाओं के लिए अनूठी मिसाल बने- लालसिंह 'लालू' (अपने व्यक्तिगत कामों को छोड़कर गरीबों, वृद्धों, विधवाओं, किसानों, मजदूरों के काम में मन से रूचि लेकर अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेना लालू की पहचान है. यही वजह की क्षेत्र के बच्चे से लेकर बुजर्गों तक लालू का नाम गूंजता है. समाज सेवा की अनुपम  मिसाल पेश कर रहें लालू का जीवन एक लम्बे संघर्ष की कहानी है.) --सत्यवान 'सौरभ'ईमानदारी, सादगी, विनम्रता, त्याग, संघर्ष और वैचारिक प्रतिबद्धता की अनूठी मिसाल छात्र जीवन से ही समाज सेवा से जुड़े रहें. राजनैतिक पार्टियों की आपसी कलह बार-बार टूटने और बिखरने के दौर में भी लालसिंह लालू ऐसे चंद युवा नेताओं में से है जिन्होंने हमेशा राग-द्वेष से मुक्त रहते हुए साथियों - कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ने का काम किया है. अपने स्कूली और कॉलेज के दिनों में सहपाठियों की पहली पसंद रहें लालू आज भिवानी के सिवानी ब्लॉक क...
जल्दी का काम शैतान का !

जल्दी का काम शैतान का !

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जल्दी का काम शैतान का ! रजनीश कपूर ये मुहावरा उन लोगों पर लागू होता है जो बिना सोचे-समझे जल्दबाज़ी में काम बिगाड़ लेते हैं। कोई आम व्यक्ति ऐसा करे, ये तो समझ में आता है, पर भारत सरकार की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारी अगर ऐसा करें तो यह सरकार और जनता दोनों के लिए चिंता की बात है। वो भी तब जब मामला हाई प्रोफ़ाइल हो और उस पर 24 घंटे मीडिया की नज़र हो। ऐसी जल्दीबाज़ी से न सिर्फ़ जग हँसाई होती है बल्कि जाँच एजेंसी की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर भी प्रश्न चिन्ह लग जाता है। पाठकों को याद होगा कि सुशांत सिंह राजपूत की आकस्मिक मृत्यु के बाद एनसीबी ने बॉलीवुड में जो तांडव रचा वो अप्रत्याशित था। जाँच के परिणाम अगर आरोपों के अनुरूप आते तो एनसीबी की वाह-वाही होती। पर ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’। ताज़ा मामला आर्यन खान का है जिसे एनसीबी ने ड्रग के मामले में ...
जिंदगी मै रंग भरती बिटिया, चूल्हे-चौके से सिविल सेवा के शीर्ष तक

जिंदगी मै रंग भरती बिटिया, चूल्हे-चौके से सिविल सेवा के शीर्ष तक

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जिंदगी मै रंग भरती बिटिया, चूल्हे-चौके से सिविल सेवा के शीर्ष तक सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों में इस बार देश की बेटियों ने जैसी धूम मचाई है, वह न सिर्फ उनके परिवारजनों बल्कि संपूर्ण भारतीय समाज के लिए गर्व करने का विषय है. -प्रियंका 'सौरभ' ______________________________ __ श्रुति शर्मा, अंकिता अग्रवाल तथा गामिनी सिंगला संघ लोक सेवा द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2021 में क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय रैंक प्राप्त किया है। लड़कियों ने आज हर क्षेत्र में डंका बजा रखा है। पढ़ाई से लेकर नौकरी और व्यवसाय से लेकर अंतरिक्ष में छलांग लगाने के मामले में लड़कियों ने अपनी प्रतिभा से सबको परिचित करा दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर की रहने वाली श्रुति शर्मा ने यूपीएससी 2021 प्रथम रैंक प्राप्त की है। यह उत्तर प्रदेश और विशेषकर जिला बिजनौर के लिए बेहद गर्व की बात है। जिस क्षेत्र को कृषि...
एकीकृत स्वास्थ्य के बिना स्वास्थ्य सुरक्षा कैसी?

एकीकृत स्वास्थ्य के बिना स्वास्थ्य सुरक्षा कैसी?

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एकीकृत स्वास्थ्य के बिना स्वास्थ्य सुरक्षा कैसी? इंडोनेशिया में ६-७ जून २०२२ को जी-२० (G20) देशों के स्वास्थ्य कार्य समूह की दूसरी बैठक होगी। इस बैठक से पूर्व, एशिया-पैसिफ़िक देशों के अनेक शहरों के स्थानीय नेतृत्व ने (जिनमें महापौर, सांसद, आदि शामिल थे), एकीकृत स्वास्थ्य (One Health) प्रणाली की माँग की है जो मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के अंतर-सम्बंध को समझते हुए, साझेदारी में क्रियान्वित हो। अनेक स्थानीय प्रशासन के प्रमुखों ने स्थानीय स्तर पर एकीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर कुछ काम करना आरम्भ भी कर दिया है। क्या जी-२० देशों के प्रमुख, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूती से आगे बढ़ाएँगे?  कोविड महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अर्थ-व्यवस्था और विकास के सभी संकेतकों के लिए सबकी-स्वास्थ्य-सुरक्षा कितनी ज़रूरी है। वैज्ञानिक रूप से तो यह पहले से ह...
क्या सभी एनकाउंटर फ़र्ज़ी होते हैं?

क्या सभी एनकाउंटर फ़र्ज़ी होते हैं?

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क्या सभी एनकाउंटर फ़र्ज़ी होते हैं? *रजनीश कपूर नवंबर 2019 में तेलंगाना राज्य के हैदराबाद में हुए गैंगरेप और हत्या के चार अभियुक्तों के संदिग्ध एनकाउंटर को सर्वोच्च न्यायालय की जाँच समिति ने फ़र्ज़ी पाया। जाँच समिति द्वारा इन पुलिसवालों पर हत्या का मुक़द्दमा चलाने की सिफ़ारिश भी की गई है। पाठकों को याद होगा कि जब यह एनकाउंटर हुआ था, तब लोगों ने पुलिस का समर्थन करते हुए भारी जश्न मनाया था। जबकि दूसरी ओर जब भी कभी पुलिस एनकाउंटर होते हैं तो उन पर तमाम सवाल भी खड़े हो जाते हैं। प्रायः ऐसा मान लिया जाता है कि पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर फ़र्ज़ी ही होते हैं। एनकाउंटर कब और कैसे होते हैं इस बात पर कोई विशेष ध्यान नहीं देता। क़ानून की बात करें तो देश में मौजूद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) दोनों में ही एनकाउंटर का कोई भी ज़िक्र नहीं है। तो फिर सवाल उठता...
दिल्ली, लखनऊ, पटना के साहित्य संसार में सन्नाटा क्यों

दिल्ली, लखनऊ, पटना के साहित्य संसार में सन्नाटा क्यों

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दिल्ली, लखनऊ, पटना के साहित्य संसार में सन्नाटा क्यों अथवा सन्नाटा शहरों में या साहित्य में आर.के. सिन्हा यह संभव है कि मौजूदा युवा पीढ़ी को शायद पता ही न हो कि कोई एक-डेढ़ दशक पहले तक दिल्ली, लखनऊ, पटना वगैरह हिन्दी पट्टी के खास शहरों में हिन्दी लेखकों-कवियों की दिनभर कॉफी हाउस से लेकर शामों में अलग-अलग साहित्य प्रेमियों के घरों में लगातार गोष्ठियां आयोजित हुआ करती थीं। उनमें लेखक बंधु अपनी ताजा रचनाएं पढ़ते थे। उसके बाद उन पर बहस होती थी। वह कभी-कभी विस्फोटक भी होने लगती थीं। अब लगता है कि गोष्ठियों और बैठकी के दौर गुजरे जमाने की बातें हो रही हैं। अब गोष्ठियां आनलाइन अधिक होने लगी हैं। इसके अलावा लेखक अपनी ताजा कहानियां, गजलें, कविताएं अपनी फेसबुक वॉल पर ही डाल रहे हैं। वहां पर कुछ लाइक और छिट-पुट कमेंट जरूर आ जाते हैं। लेखक एक-दूसरे से पहले की तरह गर्मजोशी के साथ नहीं मिल रहे। पहल...
हमें सुनिश्चित करना होगा कि लड़कियां स्कूल न छोड़ें।

हमें सुनिश्चित करना होगा कि लड़कियां स्कूल न छोड़ें।

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हमें सुनिश्चित करना होगा कि लड़कियां स्कूल न छोड़ें। -सत्यवान 'सौरभ' भारतीय महिलाओं ने ओलंपिक खेलों में अब तक भारत के लिए सबसे अधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। एक राष्ट्र के रूप में, यदि हम एक आर्थिक महाशक्ति बनने की इच्छा रखते हैं, तो हम आधे संभावित कार्यबल की उपेक्षा नहीं कर सकते हैं। एक समाज के रूप में, महिलाएं महत्वपूर्ण और स्थायी सामाजिक परिवर्तन लाने की धुरी हो सकती हैं। हालांकि, हमें बालिकाओं के स्कूल छोड़ने की समस्या के समाधान के लिए अभूतपूर्व उपायों की आवश्यकता है और उच्च शिक्षा के पेशेवर और आर्थिक रूप से पुरस्कृत क्षेत्रों में अधिक लड़कियों को लाने की आवश्यकता है। स्वस्थ, शिक्षित लड़कियां अवसरों तक समान पहुंच के साथ मजबूत, स्मार्ट महिलाओं के रूप में विकसित हो सकती हैं जो अपने देशों में नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं। इससे सरकारी नीतियों में महिलाओं के दृष्टिकोण को बेहतर ढंग ...