अस्तित्व का संकट
रोनाल्ड रीगन ने कहा था, “स्वतंत्रता के अस्तित्व को मिटने में एक पीढ़ी से अधिक का समय नहीं लगता| इसे हम अपने संतानों के रक्त में प्रवाहित नहीं करते| स्वतंत्रता के लिए लड़ना और इसे सुरक्षित कर भावी पीढ़ी को लड़ने के लिए देना पड़ता है|”
इंडिया को तो कभी स्वतंत्रता मिली ही नहीं! आक्रांता अंग्रेजों ने भारत को अपनी सम्पत्ति मानकर दो उपनिवेश इंडिया और पाकिस्तान बनाये. जिनका अंग्रेजों को न अधिकार था और न है. लेकिन उपनिवेश का आजतक किसी ने विरोध नहीं किया! क्या आप अपनी स्वतंत्रता के लिए मेरी गुप्त सहायता करेंगे?
हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द ‘स्वतंत्र’ का जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.
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