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14 सितम्बर : राष्ट्रीय हिन्दी दिवस

14 सितम्बर : राष्ट्रीय हिन्दी दिवस

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14 सितम्बर : राष्ट्रीय हिन्दी दिवसस्वयं की प्रतिभा,अस्तित्व और देशाभिमान का भाव जगाती है हमारी हिन्दी --रमेश शर्मा पराधीनता से मुक्ति केलिये विदेशियों को बाहर कर स्वतंत्र सत्ता स्थापित करना जितना महत्वपूर्ण है उतना ही आवश्यक है स्वयं के विचार और भाव भाषा के आधार पर अपने जीवन, समाज और देश का विकास की ओर बढ़ना । इसी प्राथमिकता, सम्मान और स्वाभिमान का वोध कराता है हमारा यह राष्ट्रीय हिन्दी दिवस ।हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया था कि हिन्दी भारत सरकार की आधिकारिक भाषा होगी क्योंकि भारत के अधिकांश क्षेत्रों में सर्वाधिक हिन्दी ही बोली जाती है इसलिए हिन्दी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया गया और इस निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को प्रत्येक क्षेत्र में जन जन तक पहुँचाने के लिये वर्ष 1953 से पूरे भारत में...
भारतीय संस्कृति वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदु बनने की ओर अग्रसर

भारतीय संस्कृति वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र बिंदु बनने की ओर अग्रसर

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, संस्कृति और अध्यात्म
भारत आदि काल से ही एक जीता जागता राष्ट्र पुरुष है, यह मात्र एक जमीन का टुकड़ा नहीं है। भारत के कंकड़ कंकड़ में शंकर का वास बताया जाता है। हाल ही के कुछ वर्षों में भारत के आर्थिक विकास में विरासत पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है और भारत में आर्थिक विकास के साथ ही सांस्कृतिक विकास पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। जिसके चलते अन्य देशों की तुलना में भारत की आर्थिक विकास दर मजबूत बनी हुई है। बल्कि अब तो अन्य कई देश, विकसित देशों सहित, भी अपने आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं के हल हेतु एवं अपने आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से भारतीय सनातन संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। भारत ने राजनैतिक स्वतंत्रता 75 वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर ली थी, परंतु भारत की सनातन संस्कृति आदि काल से चली आ रही है एवं लाखों वर्ष पुरानी है। भारत को ‘सोने की चिड़िया’ के रूप में जाना जाता रहा है और भारतीय सनातन...
जी – 20 सम्मेलन- भारतीय कूटनीति का स्वर्णिम अध्याय

जी – 20 सम्मेलन- भारतीय कूटनीति का स्वर्णिम अध्याय

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शिखर सम्मेलन में दिखी वसुधैव कुटुम्बकम की छापमृत्युंजय दीक्षितराजधानी दिल्ली में जी -20 सम्मेलन का आयोजन जिस सफलता के साथ संपन्न हुआ है उसकी चर्चा पूरे विश्व में हो रही है। वैश्विक मीडिया जगत इसको भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार व उनके नेतृत्व की जमकर सराहना कर रहा है।नई दिल्ली जी 20 सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन संकट के कारण नहीं आ सके, अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्होंने रूस के विदेश मंत्री को नामित किया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नहीं आये किंतु उन्होंने अपने प्रधानमंत्री को सम्मेलन मे भाग लेने के लिए भेजा। सम्मेलन प्रारम्भ होने के पूर्व रूस और चीन के राष्ट्रपति के न आने के कारण का एक बड़ा वर्ग निराशा व्यक्त कर रहा था और कह रहा था कि कहीं इस सम्मेलन में भी कुछ विषयों को लेकर आम सहमति न बन पाये किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के...
सामाजिक समरसता के अग्रदूत व श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रणेता- महंत अवैद्यनाथ

सामाजिक समरसता के अग्रदूत व श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रणेता- महंत अवैद्यनाथ

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12 सितंबर पर विशेष -सामाजिक समरसता के अग्रदूत व श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रणेता- महंत अवैद्यनाथमृत्युंजय दीक्षितयोग, दर्शन व अध्यात्म के मर्मज्ञ महान संत महंत अवैद्यनाथजी का जन्म पौढ़ी गढ़वाल के ग्राम कांडी में हुआ था। महंत अवैद्यनाथ की माता जी का स्वर्गवास जब वह बहुत छोटे थे तभी हो गया था और उनका लालन पालन दादी ने किया था उच्च्तर माध्यकि स्तर शिक्षा पूर्ण होते ही उनकी दादी का भी निधन हो गया। जिसके कारण उनका मन इस संसार के प्रति उदासीन होता गया। उनके मन में वैराग्य का भाव गहरा होता गया। वह अपने पिता के एकमात्र संतान थे अतः उन्होंने अपनी संपत्ति अपने चाचाओं को दे दी और पूरी तरह से वैराग्य जीवन में आ गये।महंत अवैद्यनाथ जी ने बहुत कम समय में ही बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगो़त्री, यमुनोत्री आदि तीर्थस्थलों की यात्रा की। कैलाश मानसरोवर की यात्रा से वापस आते समय अल्मोड़ा में उन्हें हैजा हो गया और उन...
स्वामी विवेकानन्द की दृष्टि में राष्ट्र की रीढ़..!

स्वामी विवेकानन्द की दृष्टि में राष्ट्र की रीढ़..!

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, साहित्य संवाद
~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटलस्वामी विवेकानन्द ने भारत के उस मर्म को छुआ जो कालखण्ड के प्रहार से पथभ्रष्ट होकर एक असाध्य रोग का रुप ले चुका था। वह था— 'छुआछूत वाद',गरीबी, भुखमरी और निम्न से निम्नतर समझी जाने वाली श्रेणियों के प्रति घ्रणा,वैमनस्य और अत्याचार की अन्तहीन प्रताड़ना। उनका ह्रदय इस मानवीय पाशविकता से डोल गया। उनके अन्दर उसी समानुभूतिपूर्ण करुणा का ज्वार मथने लगा — जो उन असंख्य निर्दोष लोगों के जीवन को हीनतर बना रहा था।उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त इस व्याधि के उपचार के लिए केवल आह्वान ही नहीं किया,बल्कि उस कार्य में अपने जीवन के अन्तिम क्षणों! तक रत रहे आए। ऐसा नहीं था कि उस समय समाज सुधार नहीं चल रहे थे, किन्तु उन सामाजिक सुधारों में सिध्दान्त और व्यवहार में पूर्णतः अन्तर पाया जाता था। साथ ही तथाकथित समाज सुधारकगण — वे समाज की इस दुर्दशा का ठीकरा हिन्दू धर्म पर फोड़कर अपनी अ...
<strong>भारत में आयोजित जी-20 की दो बड़ी उपलब्धियां</strong>

भारत में आयोजित जी-20 की दो बड़ी उपलब्धियां

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आर.के. सिन्हा अब तक का सबसे भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जी- 20 शिखर सम्मेलन जो भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुआ, दो वजहों से याद रखा जायेगा। पहला, जी 20 घोषणा पत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति बन गई। हालांकि, इस मसले पर चीन, कनाडा आदि देशों से विवाद होने की आशंका जताई जा रही थी। दूसरा, अफ्रीका यूनियन को भारत की पहल पर जी-20 में शामिल कर लिया गया जो “जी -20” में भारत की स्थिति को और मजबूत बनायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा "हमारी टीम की  कड़ी मेहनत से ही नई दिल्ली जी-20 लीडर्स घोषणा पत्र पर आम सहमति बनी है।" अब पाठकों को यह भी जानना जरुरी है कि नई दिल्ली घोषणा पत्र में किन चीज़ों का ज़िक्र है I दरअसल इसमें संसार के मजबूत, दीर्घकालीक, संतुलित और समावेशी विकास पर जोर दिया गया है। ज...
<strong>जी 20- सम्मेलन में मित्र देशों को भी भारत ने दिया सम्मान</strong>

जी 20- सम्मेलन में मित्र देशों को भी भारत ने दिया सम्मान

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
आर.के. सिन्हा भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन में अपने करीबी  मित्र देशों जैसे बांग्लादेश, मॉरीशस,संयुक्त अरब अमीरत वगैरह को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित करके मित्र धर्म का निर्वाह किया।  भारत-बांग्लादेश के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, हालांकि कभी-कभी सीमा विवाद तो होते ही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के बीच मधुर संबंधों के चलते दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिल रही है।  ये दोनो देश सार्क, बिम्सटेक, हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ और राष्ट्रकुल के सदस्य भी हैं। विशेष रूप से, बांग्लादेश और पूर्व भारतीय राज्य जैसे पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा बंगाली भाषा बोलने वाले प्रांत हैं। 1971 में पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच बांग्लादेश मुक्ति युद्ध शुरु हुआ और भा...
भारत नाम पर आपत्ति किन्हें है

भारत नाम पर आपत्ति किन्हें है

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अवधेश कुमारइसे अच्छा ही मनाना चाहिए कि स्वतंत्रता के अमृत काल में हमारे देश का नाम भारत हो या इंडिया इस पर तीव्र बहस आरंभ हो गई है। जी 20 के नेताओं के सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा भोज के आमंत्रण पत्र पर प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखने के साथ तूफान खड़ा हुआ है। अभी तक नरेंद्र मोदी सरकार की ओर नहीं कहा गया है कि 18 सितंबर से 22 सितंबर तक के संसद के विशेष सत्र में वे देश का नाम केवल भारत रखने के लिए संशोधन ला रहे हैं। हालांकि यह दुखद स्थिति है कि प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया तो हमें स्वीकार्य है लेकिन प्रेसिडेंट ऑफ भारत नहीं। संविधान के अनुच्छेद 1 में भी लिखा है ,इंडिया दैट इज भारत। यानी इंडिया जो भारत है। इस तरह संविधान ने दोनों नाम को मान्यता दी है। तो इंडिया की जगह भारत लिखने से आपत्ति क्यों? अजीब तर्क है कि संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत ने देश के लिए भारत शब्द प्रयोग का आग्रह...
चन्दामामा ने बुला ही लिया

चन्दामामा ने बुला ही लिया

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, साहित्य संवाद
चन्द्रमा के विभिन्न पर्याय समस्त विश्व में प्रसिद्ध रहे हैं। उनमें चन्द्रमा के सदृश सौन्दर्य की उपमा, भारत देश में सभी धर्मों के अनुयायिओं के लिए देवतुल्य एवं बच्चों को बहलानें लिए मामा का पर्याय आदि अधिक प्रसिद्ध हैं। मामा के घर भांजे का जाना सदैव ही आकर्षण का केन्द्र रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि भांजा सदैव से ही मामा का प्रिय रहा है, वे कभी भी अपने भांजो को खाली हाथ नहीं भेजते।चन्द्रयान -3 का चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सहजता से अवतरण को भी इसी दृष्टि से यदि देखा तो यह अवतरण सम्पूर्ण विश्व को अचम्भित करने वाला है। परन्तु विश्व इस तथ्य से अनभिज्ञ है कि चंद्रमा पर अन्य देशों के अनेको प्रयासों के पश्चात सफल होना और भारत के तीसरे प्रयास के सफल होने का एकमात्र कारण यही है कि चन्द्रमा, मामा तो केवल भारत के ही है और मामा अपने भांजे को प्रेम व वात्सल्य से अंगीकार करता है और इस ऐतिहासिक क्...
जी 20 सम्मेलन और कांग्रेस पार्टी

जी 20 सम्मेलन और कांग्रेस पार्टी

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
तो कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्री G20 में राष्ट्रपति के रात्रिभोज में नहीं जा रहे हैं। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने साफ झूठ बोल दिया कि उनके हेलिकॉप्टर को उड़ने की अनुमति नहीं दी गई। छत्तीसगढ़ में बैठे भूपेश बघेल ने भी कह दिया कि दिल्ली तो अब नो फ्लाई जोन है, तो अब वो कैसे जा सकते हैं। जबकि ये नो फ्लाई जोन मुख्यमंत्रियों के लिए है ही नहीं। वो अभी भी दिल्ली जा सकते हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस डिनर की जगह अपने एक जिले के किसी कार्यक्रम को प्राथमिकता दे रहे हैं। और ये सब हो क्यों रहा है? क्योंकि कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस भोज में आमंत्रित नहीं किया गया है। इस दुख को राहुल गांधी अपने यूरोप दौरे पर भी जाहिर कर रहे हैं कि खड़गे को आमंत्रित करना चाहिए था। इस दुख की घड़ी में वो ये बताना भूल गए कि इस भोज में न केवल कांग्रेस, बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्...