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<strong>इंडिया महागठबंधन की बड़ी बाधा न बन जाये ‘आप’</strong>

इंडिया महागठबंधन की बड़ी बाधा न बन जाये ‘आप’

TOP STORIES, राज्य
- ललित गर्ग-आज की राजनीति सत्ताकांक्षी अधिक है, जबकि उसका मूल लक्ष्य राष्ट्र-निर्माण एवं राष्ट्र उन्नति कहीं गुम हो गया है। हर राजनैतिक दल राष्ट्रहित नहीं, अपने स्वार्थ की सोच रहा है। जैसे-जैसे पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव एवं अगले वर्ष आम चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, हर दल येन-केन-प्रकारेण ज्यादा-से-ज्यादा वोट प्राप्त करने की तरकीबें निकाल रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के महागठबंधन ‘इंडिया’ के बनने से पहले ही उसमें सीटों एवं शीर्ष नेतृत्व को लेकर फूट, अलग सुर, ऊंची महत्वाकांक्षा और बेतरतीब तालमेल दिखने लगा हैं। इसमें सबसे ज्यादा अति-महत्वाकांक्षी आम आदमी पार्टी सेंध लगा रही है। राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में लगभग सभी सीटों से चुनाव लड़ने की उसकी घोषणा ने इंडिया में खलबली मचा दी है। निश्चित ही वर्तमान राजनीति परिवेश में आम आदमी पार्टी ने अपनी स्वतंत्र जगह बनाई है, भविष्य में यह...
कुप्पाहाली सीतारमय्या सुदर्शन

कुप्पाहाली सीतारमय्या सुदर्शन

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
. 15 सितंबर--पुण्यतिथि कुप्पाहाली सीतारमय्या सुदर्शन का जन्म 18 जून 1931 को रायपुर (छत्तीसगढ़) में एक कन्नड़ भाषी परिवार में हुआ था। के एस सुदर्शन के पिता श्री सीतारामैया वन-विभाग की नौकरी के कारण अधिकांश समय मध्यप्रदेश में ही रहे और वहीं श्री सुदर्शन जी का जन्म हुआ। सुदर्शन मूलतः तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा पर बसे कुप्पहल्ली (मैसूर) ग्राम के निवासी थे। कन्नड़ परम्परा में सबसे पहले गांव, फिर पिता और फिर अपना नाम बोलते हैं। तीन भाई और एक बहिन वाले परिवार में सुदर्शन जी सबसे बड़े थे। सुदर्शन की प्रारंभिक शिक्षा रायपुर, दामोह, मंडला और चंद्रपुर में हुई। महज 9 साल की उम्र में ही उन्होंने पहली बार आरएसएस शाखा में भाग लिया। उन्होंने वर्ष 1954 में जबलपुर के सागर विश्वविद्यालय (इंजीनिरिंग कालेज) से दूरसंचार विषय (टेलीकाम/ टेलीकम्युनिकेशंस) में बी.ई की उपाधि प्राप्त कर प्रारम्भिक जिला, विभाग प्...
सोलर पावर बनता भारत

सोलर पावर बनता भारत

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार
भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ देश है.... बढ़ती जनसंख्या है, बढ़ते उद्योग हैं... और उसी ratio में बढ़ती हुई उनकी ऊर्जा जरूरतें भी हैं. तेल महंगा होता जा रहा है.. कोयला महंगा हो रहा है... वहीं हाइड्रो dams बनाने में खर्च बढ़ रहा है.. वहीं Nuclear के अपने फायदे नुकसान हैं.. ऐसे में Solar ही सबसे अच्छा option है. आज भारत में 70 GW Solar power बनाने की installed capacity है...और भारत अब दुनिया में चौथा सबसे बड़ी Solar Capacity वाला देश है. इतने बढ़े स्तर पर Solar का इस्तेमाल हम कर रहे हैं... लेकिन इसके लिए काम आने वाले components, जैसे Solarpanels, PV Cells, PV Encapsulants – EVA & POE, and PV back sheets आदि हमारे यहाँ कम बनती थी..... लगभग 95% चीन से Import होती थी. मतलब... हम जितना Solar Capacity को बढ़ाएंगे, उसी Ratio में हमारा चीन से Solar Components का import भी बढ़ता जा र...
महंगाई, डायन खाय जात है

महंगाई, डायन खाय जात है

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, विश्लेषण
बढ़ती महंगाई लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है, महंगाई के लिए खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें पिछले 10 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से महंगाई की चुनौती और कठिन हो गई है। ऐसे में सरकार के लिए महंगाई कम करना बड़ा मुद्दा बन गया है। यद्यपि केंद्र सरकार ने 29 अगस्त को घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम 200 रुपए घटाकर बड़ी राहत दी है, लेकिन आम आदमी सरकार से खाद्य पदार्थों की कीमतों के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल के दामों में कुछ कमी की भी अपेक्षा कर रहा है। हाल ही में 5 सितंबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जुलाई 2023 में जो मुद्रास्फीति सप्लाई चेन के झटकों के कारण ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है, उसे कम करने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अनुसार जून 2023 में जो खुदरा महंगाई दर 4.87 प्रतिशत थी, वह...
<strong>“विश्वकर्मा योजना” आखिर सुध ली गई हाशिए पर खड़े समाज की </strong>

“विश्वकर्मा योजना” आखिर सुध ली गई हाशिए पर खड़े समाज की 

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
आर.के. सिन्हा कभी यह भी सोचा जाना चाहिए कि देश के आजाद होने के इतने दशक गुजरने के बाद भी हमने मोची, धोबी, बढ़ई, लोहार, कुम्हार जैसे निचले स्तर पर काम करने वालें कुशल कामगारों के हितों को लेकर कोई व्यापक नीति क्यों नहीं बनाई?  अगर इनके बारे में पहले सोचा जाता तो ये भी देश के विकास का लाभ ले रहे होते। इनकी अनदेखी तो हुई। हां, इतना सुकून किया जा सकता है कि अब इनके बारे में सोचा जा रहा है। अब सरकार इनकी जिंदगी में खुशियां लाने के लिये विश्वकर्मा योजना लेकर आ रही है। इस योजना के ऊपर अगले पांच साल में 13 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगामी 17 सितंबर को जन्म दिन पर शुरू होने वाली इस योजना के तहत मोची, धोबी, बढ़ई, लोहार कुम्हार आदि को पांच प्रतिशत की दर से एक लाख रुपये और दूसरे चरण में दो लाख रुपये का कर्ज मिल सकेग...
सही संस्कार हैं तनाव से मुक्ति का उपचार

सही संस्कार हैं तनाव से मुक्ति का उपचार

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, साहित्य संवाद
*रजनीश कपूरअक्सर यह देखा जाता है कि तनाव के कारण छात्र हों, युवा हों या कोई समझदार व्यक्ति, ऐसा क़दम उठा लेते हैंजिसके कारण उन्हें और उनके परिवार को काफ़ी पछताना पड़ता है। तनाव ग्रस्त इंसान ग़लत संगत में पड़ जाता हैऔर ग़लत राह पर चलने लग जाता है, जैसे नशा और जुआ आदि की लत लगना। मानसिक तनाव के कारण कभी-कभी कठोर कदम उठाते हुए वो व्यक्ति आत्महत्या तक कर डालता है। आए दिन हमें ऐसी खबरें मिलती हैं जहांपरीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र प्रतिस्पर्धा की दौड़ में ऐसे कदम उठाते हैं। जिन छात्रों को उनके परिवार से यदिसही संस्कार मिलते हैं वो कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाते। वो समस्या का सामना करते हैं और उसके निदान कामार्ग खोज लेते हैं।राजस्थान के शहर कोटा को ‘कोटा फैक्ट्री’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ पर देश भर के छात्र ख़ुद कोआईआईटी व मेडिकल में भर्ती कराने की मंशा से विभिन्न कोचिंग केंद्रों में दाख़िला ...
<strong>विश्वकर्मा योजना-ली गई अंततः असहायोंकी सुध</strong>

विश्वकर्मा योजना-ली गई अंततः असहायोंकी सुध

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
आर.के. सिन्हा कभी यह भी सोचा जाना चाहिए कि देश के आजाद होने के इतने दशक गुजरने के बाद भी हमने मोची, धोबी, बढ़ई, लोहार, कुम्हार जैसे निचले स्तर पर काम करने वालें कुशल कामगारों के हितों को लेकर कोई व्यापक नीति क्यों नहीं बनाई?  अगर इनके बारे में पहले सोचा जाता तो ये भी देश के विकास का लाभ ले रहे होते। इनकी अनदेखी तो हुई। हां, इतना सुकून किया जा सकता है कि अब इनके बारे में सोचा जा रहा है। अब सरकार इनकी जिंदगी में खुशियां लाने के लिये विश्वकर्मा योजना लेकर आ रही है। इस योजना के ऊपर अगले पांच साल में 13 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगामी 17 सितंबर को जन्म दिन पर शुरू होने वाली इस योजना के तहत मोची, धोबी, बढ़ई, लोहार कुम्हार आदि को पांच प्रतिशत की दर से एक लाख रुपये और दूसरे चरण में दो लाख रुपये का कर्ज मिल सकेग...
सनातन पर प्रहार – मनमोहन गोयल

सनातन पर प्रहार – मनमोहन गोयल

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
देश मे दयानिधी मारान के सनातन को मिटाने के वक्तव्य के बाद से य चर्चा समाप्त होने में नहीं आ रही है।मैंने पहले सोचा कि इसे नज़रअंदाज़ कर दूँ, लेकिन लगता है कि ये सोची समझी रणनीति के तहत सनातन को तोड़ने के लिए ऐक टूल किट के रूप में कही जा रही हैं। खडके साहब के सुपुत्र साहब में तो ये भी कह दिया कि सनातन कब कहाँ कैसे पैदा हुआ, इसका कोई सबूत नहीं है । पहले मैं इसी को लेना चाहता हूं।मान्यवर खडगे जी, सनातन कहीं पैदा नहीं हुआ। धरती पर मनुष्य की उत्पत्ति के साथ जो आचारसंहिता शनैः शनैः विकसित हुई, जो मनुष्य मात्र के परिवार संचालन, देश संचालन , सेना संचालन, खानपान, अर्थात् मनुष्य मात्र की कुल गतिविधियों के लिये जो नियम बनते गये और अपने नियंता भगवान के लिये आराधना के लिये जो विधि विधान विकसित हुऐ वो सब मिल कर सनातन कहलाये। सनातन तो धरती पर मनुष्य के जन्म से विकास पाया और जिसका आदि अन्त न हो वही स...
Is Shah Rukh Khan movie ‘Jawaan’ a ruse for regime change operation

Is Shah Rukh Khan movie ‘Jawaan’ a ruse for regime change operation

BREAKING NEWS, TOP STORIES, जीवन शैली / फिल्में / टीवी
By Shree Dr Ram Squirrel - This is not a routine forwarded message. One of my friend in Europe shared the following comments with me after watching the movie Jawan! For the past few weeks various Social Media like Facebook & WhatsApp and various Media be it print or news have been trying to create a special frenzy by promoting Shah Rukh Khan's newly released film "Jawaan" which has attracted even a movie freak like me. I have no shame in admitting it. However, unfortunately the chance to watch the movie also came today. After watching the movie very seriously, call this my special report or REVIEW. The entire movie is quite a spectacle but before the upcoming Lok Sabha elections a political message has been delivered across the country in a unique and very clever...
दुनिया में बढ़ती भारत की धाक

दुनिया में बढ़ती भारत की धाक

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
-बलबीर पुंज बीते सप्ताह भारत की अध्यक्षता में संपन्न दो दिवसीय जी20 बैठक (9-10 सितंबर) का लब्बोलुआब क्या रहा? जिस प्रकार इस शक्तिशाली वैश्विक मंथन में भारत और उसकी कूटनीति का वर्चस्व दिखा, उसने सिद्ध कर दिया कि बाहरी एजेंडे के अनुसरण करने की बाध्यता को 'नए भारत' ने विशुद्ध राष्ट्रहित में मीलों पीछे छोड़ दिया है। अब नया भारत न केवल अपनी मूल सांस्कृतिक छत्रछाया में दुनिया के अन्य सभी सभ्य देशों के सामूहिक कल्याण के लिए प्रारूप बना रहा है, साथ ही 'ग्लोबल साउथ' अर्थात्— विश्व के दक्षिणी हिस्से का मुख्य प्रतिनिधि भी बनकर उभरा है। भारतीय नेतृत्व में अफ्रीकी संघ को जी20 में बतौर सदस्य सम्मिलित करना— इसका प्रमाण है। भारत ने अपनी जी20 अध्यक्षता में जिन प्रमुख विषयों का निर्धारित किया, उसमें देश की मौलिक सांस्कृतिक पहचान और उसमें निहित विविधता से भी दुनिया को परिचय कराना भी रहा। मुख्य आयोजनस्...