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दिल्ली एम्स का कायाकल्प

दिल्ली एम्स का कायाकल्प

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*रजनीश कपूरदेश भर में स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को लेकर हमेशा सवाल उठाए जाते हैं। सरकारें आती-जाती रहती हैं और वेदावा करती हैं कि देश में स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर बनाएँगी। पर अधिकतर राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहालहै। स्वास्थ्य मंत्रालयों के पास इन सब के लिये बड़ा बजट भी होता है। परंतु इस दिशा में उस गति से कार्य नहीं होतेजिस गति से होने चाहिये। ज़्यादातर पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। इसलिए देश भर से मरीज़ इलाज के लिएदिल्ली के एम्स का रुख़ करते हैं। इसी कारण यहाँ पर मरीज़ों की भीड़ लगी रहती है। परंतु आज जिस अनुभव कोआपके साथ साझा कर रहा हूँ, वो आपको अच्छा लगेगा।कुछ दिन पहले दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जाना हुआ। चूँकि मेरा नाता एम्स के साथसन् 1991 से है इसलिए वहाँ के चप्पे-चप्पे से वाक़िफ़ हूँ। परंतु जैसे ही मुझे पता चला कि एम्स की न्यू राजकुमारीअमृत कौर...
संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा का मुकाबला।

संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा का मुकाबला।

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ऐसे कई उदाहरण हैं जहां विकास कार्यक्रमों और दृष्टिकोणों से हिंसा का मुकाबला करने में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। "राजस्थान मदरसा बोर्ड" पहल राज्य में पारंपरिक इस्लामी स्कूलों (मदरसों) के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। धार्मिक अध्ययन के साथ-साथ पाठ्यक्रम में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों को शामिल करके, इसने छात्रों को अधिक सर्वांगीण शिक्षा प्रदान की। परिणामस्वरूप, छात्र चरमपंथी विचारधाराओं के प्रति कम संवेदनशील हो गए। आंध्र प्रदेश में "सद्भावना" परियोजना का उद्देश्य विविध समुदायों के बीच सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है। इसने विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमि के लोगों को सामुदायिक कार्यक्रमों, खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक साथ लाया। इससे समझ बढ़ी, अविश्वास कम हुआ और समुदायों के बीच मजबूत संबंध बनाने में मदद मिली। "उड़ान" कार्यक्रम कश्मीर घाटी में युवाओं को कौशल विकास और नौकरी प्रशि...
9 अगस्त : काॅकोरी काँड और भारत छोड़ो आँदोलन

9 अगस्त : काॅकोरी काँड और भारत छोड़ो आँदोलन

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स्वाधीनता के सूर्योदय के लिये निर्णायक आँदोलन का उद्घोष --रमेश शर्मा भारत के स्वाधीनता आँदोलन 9 अगस्त वह ऐतिहासिक तिथि है जब स्वतंत्रता केलिये निर्णायक संघर्ष का उद्घोष हुआ था । इसलिए इसे अगस्त क्रान्ति कहा जाता है ।स्वाधिनता आँदोलन के इतिहास में यह नौ अगस्त की तिथि दो महत्वपूर्ण स्मृतियों से जुड़ी है । पहली तिथि 9 अगस्त 1925 है इसदिन क्राँतिकारी आँदोलन को गति देने केलिये काॅकोरी रेल्वे स्टेशन पर सरकारी खजाना लूटा गया था । और दूसरी तिथि 9 अगस्त 1942 है जब अहिसंक आँदोलन को निर्णायक स्वरूप देने के लिये अंग्रेजो भारत छोड़ो आँदोलन आरंभ हुआ था । इस आँदोलन का आव्हान गाँधी जी ने किया था पर एक रात पहले ही 8 अगस्त को गाँधी जी सहित सभी कांग्रेस नेता बंदी बना लिये गये थे इसलिए इस आँदोलन में अधिकांश भागीदारी जन सामान्य की थी । जन सामान्य की भागीदारी के कारण ही इस आँदोलन को अगस्त क्राँति नाम मिल...
भाजपा ही नहीं विपक्षी राज्यों में भी हुई हिंसा

भाजपा ही नहीं विपक्षी राज्यों में भी हुई हिंसा

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हिंसा के तरीके और प्रकृति लंबी तैयारियों और प्रशिक्षण का संकेत देते हैंअवधेश कुमार भाजपा शासित दो राज्यों मणिपुर तथा उसके बाद हरियाणा के नूंह और आसपास की भयानक हिंसा ने पूरे देश के सामूहिक मानस को हिला दिया है। एक प्रश्न आम लोग उठा रहे हैं कि आखिर भाजपा के राज्य में ही ऐसी ज्यादा हिंसा क्यों हो रही है? क्या वाकई भाजपा शासित राज्यों में ही ज्यादा हिंसा हो रही है?• भाजपा शासित राज्यों हरियाणा और मणिपुर के अलावा उत्तराखंड, गुजरात ,कर्नाटक, महाराष्ट्र में भी हमने सांप्रदायिक हिंसा की अग्नि जलती हुई देखी है। महाराष्ट्र में औरंगजेब के नाम पर हिंसा हो गई ।• दिल्ली की कानून व्यवस्था गृह मंत्रालय के तहत है। पिछले महीने मुहर्रम के दौरान हिंसा दिखी और अभी भी नागलोई में कई बसें क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ी हुई हैं। पिछले वर्ष हनुमान जयंती शोभा यात्रा के दौरान ऐसी हिंसा हुई कि जहांगीरपुरी मोहल्ला अभ...
मणिपुर हिंसा

मणिपुर हिंसा

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मणिपुर राज्य, हमारे पड़ौसी देश म्यांमार की सीमा से लगा हुआ भारत के उत्तर पूर्व में स्थित एक बहुत ही सुन्दर राज्य है। मणिपुर नाम दो शब्दों के योग से बना है - मणि + पुर, मणि का अर्थ अमूल्य तथा पुर का अर्थ स्थान होता है, अर्थात् मणिपुर का अर्थ है एक ऐसा स्थान जो अमूल्य है। यहाँ की अप्रितम सुन्दरता के कारण ही मणिपुर को ‘भारत का गहना‘ नाम से भी जाना जाता है। यहाँ आयुर्वेदिक औषधियों की प्रचुरता, अथाह शुद्ध जल की उपलब्धता, प्राकृतिक सुन्दरता की असीम कृपा आदि सभी कुछ ईश्वर द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराया गया है। जहाँ चहुँ ओर प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है, ऐसे प्रदेश में अशान्ति का प्रसार होना सम्पूर्ण भारत देश के लिए अत्यंत दुख का विषय है। दुख इस बात का भी है कि जो निवासी कभी परस्पर भाईचारे के साथ रहते थे, आज वहीं लोग एक-दूसरे को लूट रहे हैं, जला रहे हैं, खून के प्यासे हो गए हैं। हजारों प्रदेश व...
एक गरीब पिछड़ा जिला पर सांप्रदायिकता में अव्वल

एक गरीब पिछड़ा जिला पर सांप्रदायिकता में अव्वल

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
हरियाणा में नूंह के सांप्रदायिक अंधड़ के बाद की कार्रवाई जारी है, लेकिन क्या दबा-छिपा है, उसकी संभावनाएं कोई भी भी नहीं बता सकता । सर्वोच्च अदालत का आदेश है कि सरकारें तय करें कि कोई नफरती भाषण न दिया जाए। माहौल को भडक़ाया-उकसाया न जाए। हिंसा की कोई गुंजाइश न हो| यह जिम्मेदारी हरियाणा, दिल्ली, उप्र और केंद्र की सरकारों की तय की गई है। अदालत ने जुलूस, रैली, प्रदर्शन आदि की वीडियोग्राफी और रिकॉर्डिंग के भी आदेश दिए हैं। फिलहाल सुनवाई जारी है। नूंह हिंसा के पूरे प्रकरण में मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी, कथित गोरक्षकों, को ‘खलनायक’ चित्रित किया गया है। क्या सिर्फ दो हिंदूवादी चेहरों के कारण हरियाणा के एक संवेदनशील इलाके को हिंसा और दंगे की आग में झोंका गया? सांप्रदायिक दोफाड़ के हालात पैदा किए गए? मासूम लोग मारे गए और 70 से अधिक घायल हुए। जिला अदालत की अतिरिक्त चीफ ज्यूडिशियल मजिस्टे्रट...
बहुत घातक है ये “कृत्रिम मिठास”

बहुत घातक है ये “कृत्रिम मिठास”

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आज का “प्रतिदिन” चेतावनी है, सरकार से अपेक्षा है और उन सारे लोगों को सलाह है जो मिठास के लिए चीनी के विकल्प के रूप में रासायनिक मिठास ‘शुगर फ्री’ का उपयोगकर रहे हैं। इस कृत्रिम मिठास से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक प्रभावों को लेकर नये सिरे से बहस छिड़ हुई है। कृत्रिम रूप से खाद्य पदार्थों को मीठा करने वाले एस्पार्टेम को कैंसर कारक के रूप में वर्गीकृत तो किया गया है, लेकिन इसके सेवन को लेकर निर्णायक चेतावनी जारी न किये जाने पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण व खाद्य सुरक्षा विभाग के तहत दो समूहों में हजारों वैज्ञानिकों के शोध अध्ययन सामने के बाद कृत्रिम मीठे को कैंसर के कारकों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। ये निष्कर्ष सामने आना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया में भीमकाय कंपनियां कृत्रिम मीठे से बने उत्पादों का खरबों रुपये का कारोबार करती हैं। साथ ही ...
<strong>भरोसा रखें कि आप सफलता का रास्ता ढूंढ लेंगे</strong>

भरोसा रखें कि आप सफलता का रास्ता ढूंढ लेंगे

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- ललित गर्ग - आप आज जहां हैं, जाहिर है कि अपने काम करने के खास तरीके के कारण हैं। आपका स्वास्थ्य, रुपये-पैसे की स्थिति, रिश्ते और करियर वगैरह सब, आपकी कार्यप्रणाली और निर्णयों का नतीजा हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आप जहां हैं, क्या उस पड़ाव पर खुश हैं? अगर आप यूं ही अपनी जिंदगी बिताते रहते हैं, तो क्या नतीजों से आप खुद को संतुष्ट महसूस करेंगे? अगर उत्तर में किंतु, परंतु आता है, तो कुछ बदलाव करने एवं जीवन को सकारात्मक सोच एवं दिशाएं देने की जरूरत का वक्त आ गया है। आज के समय में यह बहुत गंभीर मसला है कि निराशा और अवसाद में डूबे लोग इसी सकारात्मकता और ऊर्जा की तलाश में यहां-वहां फिर रहे हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर सकारात्मकता पढ़ाने वालों की जरूरत और भरमार है, पर इनमें से अधिकतर की सबसे बड़ी समस्या है कि वे चीजों को सतही बनाकर पेश करते हैं। सकारात्मकता का अर्थ है- अपनी योग्यता ...
मध्यम वर्ग का संघर्ष कभी खत्म क्यों नहीं होता?

मध्यम वर्ग का संघर्ष कभी खत्म क्यों नहीं होता?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक, साहित्य संवाद
मध्यम वर्ग के लोगों की चिंताओं का कोई अंत नहीं होता। क्योंकि ये बच्चों को लायक बनाने में अपना पूरा जीवन निकाल देते हैं। फिर उस अनुरूप बच्चों का विवाह या नौकरी न हो तो भी चिंतित रहते हैं। अपनी इज्जत बनाए रखने के लिए यह अपना दुख दर्द किसी से नहीं कहते हैं। दूसरों से बातचीत करने पर कभी-कभी समाधान मिल जाया करता है। पर क्योंकि यह लोग कहते नहीं इसलिए इन्हें समाधान नहीं मिल पाता और यह चिंताओं से घिरे रहते हैं।  -प्रियंका सौरभभारतीय मध्यम वर्ग का संघर्ष कभी खत्म क्यों नहीं होता? भारतीय मध्यम वर्ग वह वर्ग है जिसे समाज में अपनी मान मर्यादा को भी बनाए रखना होता है। बच्चों की शिक्षा पर भी पर्याप्त ध्यान देना होता है तथा समाज में क्या चल रहा है? इसका भी ध्यान रखना जरूरी होता है। बच्चों के विवाह पर भी इन्हें काफी धन खर्च करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त दूसरे के यहां भी कोई फंक्शन होने प...
भारत की आर्थिक प्रगति को कुछ देश प्रभावित करना चाहते हैं

भारत की आर्थिक प्रगति को कुछ देश प्रभावित करना चाहते हैं

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, विश्लेषण
भारतीय सनातन संस्कृति की अपनी कुछ विशेषताएं हैं, जिनके पालन से भारत आर्थिक क्षेत्र में चंहुमुखी विकास करता दिखाई दे रहा है। परंतु, कुछ देश भारत की आर्थिक प्रगति को प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखते हुए इसे पचा नहीं पा रहे हैं क्योंकि आज भारत की विकास दर इन देशों से कहीं आगे निकल गई है जबकि इन देशों की न केवल विकास दर लगातार कम हो रही है बल्कि इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में आती दिखाई दे रही हैं। आज पूरे विश्व में भारतीय सनातन संस्कृति सबसे पुरानी संस्कृति मानी जा रही है, अतः वैश्विक स्तर पर कुछ देश एवं संस्थान मिलाकर भारतीय सनातन संस्कृति पर लगातार प्रहार करते दिखाई दे रहे हैं ताकि न केवल भारत के सामाजिक तानेबाने को छिन्न भिन्न किया जा सके बल्कि भारत की आर्थिक विकास दर को भी प्रभावित किया जा सके। हाल ही में, भारत के मणिपुर एवं हरियाणा जैसे र...