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Tag: Breaking news 2025

पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है

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अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस- 15 जून, 2025पिता-पुत्र का रिश्ता बेजोड़ एवं विलक्षण है- ललित गर्ग- भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा माना गया है, पिता की धर्म है, पिता ही संबल है, पिता ही ताकत है। पिता हर संतान के लिए एक प्रेरणा हैं, एक प्रकाश हैं और संवेदनाओं के पुंज हैं। इसके महत्व को दर्शाने और पिता व पिता तुल्य व्यक्तियों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस यानी फादर्स डे मनाया जाता है। इस साल 15 जून 2025 को भारत समेत विश्वभर में यह दिवस मनाया जायेगा। फादर्स डे 2025 का आधिकारिक थीम ‘पिताः लचीलेपन का पोषण और भविष्य को आकार देना’ है। यह थीम हमारे जीवन में पिताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है, जो बच्चों में सकारात्मक भावनाओं और सामाजिक विकास को बढ़ावा देते हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन और विविध...
वायरल और प्रसिद्ध होने के लिए कुछ भी!

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वायरल और प्रसिद्ध होने के लिए कुछ भी!रजनीश कपूरआज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने लोगों को अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का एक शक्तिशाली मंच प्रदान कियाहै। यह मंच जहां एक ओर रचनात्मकता, ज्ञान और सकारात्मक संदेशों को फैलाने का अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर कुछलोग इस मंच का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। एक चिंताजनक प्रवृत्ति जो हाल के वर्षों में उभरी है, वह है सार्वजनिक स्थानों परअश्लीलता के जरिए वायरल होने और प्रसिद्धि हासिल करने की कोशिश। यह न केवल सामाजिक मूल्यों को ठेस पहुंचाता है,बल्कि समाज में नैतिकता और संस्कृति के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है।सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ ने कई लोगों को गलत रास्ते पर धकेल दिया है। कुछ लोग त्वरित प्रसिद्धि के लिएसार्वजनिक स्थानों पर अश्लील व्यवहार, अभद्र भाषा, अनुचित कपड़े या आपत्तिजनक हरकतें करते हैं और इसे रिकॉर्ड करकेऑनलाइन डाल देते हैं। उदाहरण के तौ...
बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान

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बढ़ते प्रदूषण में यज्ञ परम्परा का योगदान यज्ञ हमारी भारतीय संस्कृति में वैदिक काल से चला आ रहा एक धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान है। यज्ञ परम्परा का वर्णन हमारे प्राचीन वैदिक ग्रन्थों तथा ब्राह्मण ग्रन्थों में सविस्तार उपलब्ध होता है। सर्वाधिक वर्णन यजुर्वेद में प्राप्त होता है। प्राचीन समय में प्राकृतिक विपदाओं से बचने, अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने और तत्कालीन प्राकृतिक देवताओं को प्रसन्न करने के लिए बहुतायत से यज्ञ किए जाते थे। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार ब्रह्माजी ने मानव को सहयोग देकर यज्ञ परम्परा को प्रारम्भ किया। ऋग्वेद में कहा गया है 'अग्रिमीडे पुरोहितं।Ó अग्रि को यज्ञ के मुँह की संज्ञा दी गई है अत: अग्रि में आहूति दी जाती है। यज्ञ ही विद्वानों के अनुसार श्रेष्ठतम कर्म है। गायत्री को माता तथा यज्ञ को पिता कहा गया है। विद्वानों ने यह भी कहा है 'यज्ञो वै विष्णु:वैदिककालीन प्राकृति...
भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर | संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025

भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर | संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025

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संत कबीर जन्म जयन्ती- 11 जून, 2025 भारतीय अध्यात्म जगत के महासूर्य हैं कबीर- ललित गर्ग - भारतीय संत परम्परा और संत-साहित्य में संत कबीर एक महान् हस्ताक्षर, समाज-सुधारक, अध्यात्म की सुदृढ़ परम्परा के संवाहक एवं अनूठे संत हैं। जब भारतीय समाज और धर्म का स्वरूप रूढ़ियों एवं आडम्बरों में जकड़ा एवं अधंकारमय था, एक तरफ मुसलमान शासकों की धर्मांधता से जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी और दूसरी तरफ हिंदूओं के कर्मकांडों, विधानों एवं पाखंडों से धर्म-बल का हृास हो रहा था, तब संत कबीर एक रोशनी बनकर समाज को दिशा दी। कबीर ने मानव चेतना के विकास के हर पहलू को उजागर किया। श्रीकृष्ण, श्रीराम, महावीर, बुद्ध, जीसस के साथ-ही-साथ भारतीय अध्यात्म आकाश के अनेक संतों-आदि शंकराचार्य, नानक, रैदास, मीरा आदि की परंपरा में कबीर ने धर्म की त्रासदी एवं उसकी चुनौतियों को समाहित करने का अनूठा कार्य किया। जीवन का ऐसा कोई ...
भारत में लगातार घटती गरीबी एवं बढ़ती धनाडयों की संख्या

भारत में लगातार घटती गरीबी एवं बढ़ती धनाडयों की संख्या

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भारत में लगातार घटती गरीबी एवं बढ़ती धनाडयों की संख्या वैश्विक स्तर पर वित्तीय संस्थान अब यह स्पष्ट रूप से मानने लगे हैं कि विश्व में भारत की आर्थिक ताकत बहुत तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में जारी किए गए एक सर्वे रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत में पिछले बीते वर्ष में उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों की संख्या एवं उनकी संपतियों में अतुलनीय वृद्धि दर्ज हुई है। जबकि विश्व के कई देशों विशेष रूप से विकसित देशों में उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों की संख्या एवं इनकी सम्पत्ति में वृद्धि दर लगातार नीचे गिर रही है। इसका आश्य तो अब यही लगाया जा सकता है विश्व में आर्थिक शक्ति अब पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित हो रही है। भारत में जिस व्यक्ति की शुद्ध सम्पत्ति 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक होती है उसे उच्च नेटवर्थ व्यक्ति (HNWI) कहा जाता है। पिछले वर्ष भारत में उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों की औसत सम्पत्ति 8.8 प्रति...
राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें

राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें

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राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें- ललित गर्ग - सिंदूर ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान दुनिया से सहानुभूति बटोरने के लिये जहां विश्व समुदाय में अनेक भ्रम, भ्रांतिया एवं भारत की छवि को छिछालेदार करने में जुटा है, वहीं भारत का डर दिखा-दिखा कर ही पाक अनेक देशों से आर्थिक मदद मांग रहा है। इन्हीं स्थितियों को देखते हुए दुनिया के सामने भारत का पक्ष रखने के लिए केंद्र सरकार ने जिस तरह से सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया है और इन दलों में विपक्षी दलों के सांसद एवं नेताओं ने भारत का पक्ष बिना आग्रह, दुराग्रह एवं पूर्वाग्रह के दुनिया के सामने रखा, उसकी जितनी सराहना की जाये, कम है। इन विपक्षी नेताओं ने विदेश में भारतीय राष्ट्रवाद को सशक्त एवं प्रभावी तरीकों से व्यक्त किया। देश ने इन नेताओं को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते और एक लय में आगे बढ़ते देखा, जबकि संसद में वे केवल आपस में...
गांवों की राजनीति से शुरू होगा 2027 का सियासी महाकुंभ  

गांवों की राजनीति से शुरू होगा 2027 का सियासी महाकुंभ  

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गांवों की राजनीति से शुरू होगा 2027 का सियासी महाकुंभ   अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश में दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव को राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पंचायत चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट कहा जा रहा है, क्योंकि इसके नतीजे आने के बाद ही प्रदेश की सियासी तस्वीर साफ होगी। चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है और जल्द ही अधिसूचना जारी करने की संभावना है। ऐसे में राजनीतिक दल भी अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं। पंचायत चुनाव से न केवल दलों की लोकल पकड़ का पता चलेगा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उनकी रणनीतियों की दिशा भी तय होगी। उत्तर प्रदेश के गांवों में पंचायत चुनाव को लेकर जो सरगर्मी दिख रही है, उससे यह साफ हो गया है कि ये चुनाव प्रदेश की राजनीति में बड़ी भूमिका...
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Build Your Future with Career Plus: Your First Step Towards Success in Competitive Exams For every student dreaming of a government job, success begins with the right guidance and preparation. Career Plus, with 28 years of excellence in civil services coaching, proudly launches its FOUNDATION COURSES for all major competitive examinations. Whether you aim to become an IAS officer, secure a government job through SSC, or clear the JPSC, Career Plus is your trusted partner. Why Career Plus? Since its inception, Career Plus has helped thousands of students turn their dreams into reality. The foundation courses are designed for aspirants who want to start early and build a strong base in subjects like General Studies, English, and Quantitative Aptitude. We believe that success is ...
आईएएस अधिकारी: ड्यूटी या डिजिटल स्टारडम?

आईएएस अधिकारी: ड्यूटी या डिजिटल स्टारडम?

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आईएएस अधिकारी: ड्यूटी या डिजिटल स्टारडम?"प्रशासन से पॉपुलैरिटी तक: आईएएस अधिकारियों का डिजिटल सफर""आईएएस अधिकारी: सोशल मीडिया स्टार या सच्चे सेवक?" आईएएस अधिकारियों का सोशल मीडिया पर बढ़ता रुझान एक नई चुनौती बनता जा रहा है। वे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और ट्विटर पर नीतियों से जुड़ी जानकारियाँ और प्रेरणादायक कहानियाँ साझा कर रहे हैं, जो जागरूकता बढ़ा सकती हैं। लेकिन क्या यह डिजिटल स्टारडम उनकी वास्तविक प्रशासनिक जिम्मेदारियों से समझौता है? व्यक्तिगत छवि बनाने की होड़ में पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में एक संतुलन जरूरी है, जहां अधिकारी डिजिटल दुनिया में सक्रिय रहते हुए भी जनता की सेवा को प्राथमिकता दें। आईएएस अधिकारी: ड्यूटी या डिजिटल स्टारडम? भारत में सिविल सेवा हमेशा से ही सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक रही है। एक आईएएस अधिकारी का दायित्व न केवल नीतियों को लागू कर...
ऑपरेशन सिंदूर पर प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधन

ऑपरेशन सिंदूर पर प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधन

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ऑपरेशन सिंदूर पर प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधनऑपरेशन सिन्दूर न्याय की अखंड प्रतिज्ञा हैआतंकवाद व उसको पोषित करने वालों को कड़ा संदेशमृत्युंजय दीक्षितपहलगाम की वीभत्स घटना और आपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई –बुद्ध पूर्णिमा के दिन देश को पहली बार संबोधित किया । पूरा देश इस संबोधन की सांस थामे प्रतीक्षा कर रहा था क्योंकि अचानक सीज फायर सुनकर सब हतप्रभ थे – ये क्या हुआ ? हम तो पाकिस्तान को जीत रहे थे? देश में अजीब सी छटपटाहट फ़ैल गई थी। प्रधानमंत्री आए, भारतवासियों से बात की और सब कुछ शीशे की तरह स्पष्ट हो गया। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद व पाकिस्तान पर भारत की रणनीति स्पष्ट करते हुए अपने देशवासियों के साथ साथ वैश्विक समुदाय को भी संबोधित किया और कुछ राष्ट्रों को उनके दोहरे रवैये पर कड़ा संदेश दिया।प्रधानमंत्री मोदी ने सर्वप्रथम ऑपरेशन सिंदूर की अभूतपूर्व सफलता पर देशव...