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चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

चातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर

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चातुर्मास शुभारंभ-06 जुलाई 2025 पर विशेषचातुर्मास है अध्यात्म की फसल उगाने का अवसर- मंत्र महर्षि डॉ. योगभूषण महाराज - सृष्टि का चक्र अनवरत गतिशील है-गर्मी, वर्षा और शीत ऋतु इसका पर्याय हैं। इन्हीं ऋतुओं में से एक वर्षा ऋतु-न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक जगत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैन धर्म में इस अवधि को “चातुर्मास” या “वर्षायोग” कहा जाता है, जैन परम्परा में आषाढ़ी पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक का समय तथा वैदिक परम्परा में आषाढ़ से आसोज तक का समय चातुर्मास कहलाता है। इस दौरान दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों परंपराओं के मुनि स्थिर एक ही स्थान पर विराजमान रहते हैं। यह नियम प्राकृतिक कारणों से भी जुड़ा है-जैसे वर्षा ऋतु में जीव-जंतु अधिक उत्पन्न होते हैं, जिससे भ्रमण करने से अहिंसा का उल्लंघन हो सकता है। वास्तव में आज के व्यस्त, तनाव एवं हिंसाग्रस्त और भौति...
कथावाचक कांड की आड़ में -सनातन पर हमला

कथावाचक कांड की आड़ में -सनातन पर हमला

SPECIAL ISSUE, प्रेस विज्ञप्ति, विश्लेषण, साहित्य संवाद
कथावाचक कांड की आड़ में -सनातन पर हमलामृत्युंजय दीक्षितइटावा के कथावाचक काण्ड को राजनीतिक रंग देकर उसमें स्वयं फंसते नजर आ रहे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बाबा बागेश्वर धाम आचार्य धीरेंद्र शास्त्ऱी पर ही हमला बोल दिया और उन पर कथा करने के लिए अंडर द टेबल 50 लाख रुपए लेने का आरोप लगाकर नया विवाद उत्पन्न करने का असफल प्रयास किया है। सपा मुखिया जब इटावा की घटना पर भारतीय जनता पार्टी को घेरने में सफल नहीं हुए तब उन्होंने हिंदू राष्ट्र का नारा देने वाले धीरेंद्र शास्त्ऱी जी पर बयान देकर सनसनी मचाने का प्रयास किया। वास्तव में अखिलेश यादव धीरेन्द्र शास्त्ऱी जी की आड़ में अपनी पीडीए राजनीति को हवा देने का प्रयास कर रहे हैं।सपा मुखिया अखिलेश यादव यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि वर्तमान समय में बाबा बागेश्वर धाम की लोकप्रियता चरम सीमा पर है। बाबा बागेश्वर के लाखों भक्त तथा प्रशंसक हैं, वे जहां भी कथ...
अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, धर्म, विश्लेषण, सामाजिक
अखिलेश की बदलती राजनीति,सावन में काशी से हिंदुत्व का दांव संजय सक्सेना,वरिष्ठ पत्रकार2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव हर हाल में सत्ता में वापसी की जुगत में जुटे हैं। उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा का आधार लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव द्वारा स्थापित मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण रहा है। इस समीकरण के सहारे मुलायम सिंह तीन बार और अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे। लेकिन 2014 के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में आए बदलाव ने सपा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हिंदुत्व की छतरी तले विभिन्न हिंदू जातियों को एकजुट करने में सफलता हासिल की है, जिसने सपा की परंपरागत रणनीति को कमजोर कर दिया है। अखिलेश यादव अब इस बदले सियासी परिदृश्य में अपनी पार्टी की छवि को नया रूप देने और व्यापक स...
हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें

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हिन्दी को संघर्ष का नहीं, सेतु का माध्यम बनायें  ललित गर्ग  दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी विरोध की राजनीति अब महाराष्ट्र में भी उग्र से उग्रत्तर हो गयी, इसी के कारण त्रिभाषा नीति को महाराष्ट्र में लगा झटका दुखद और अफसोसजनक है। आखिरकार राजनीतिक दबाव, लंबी रस्साकशी और कशमकश के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई से जुड़े मुद्दे पर यू-टर्न लेते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए। विदित हो कि केंद्र सरकार की नीति के तहत महाराष्ट्र के स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना था। राजनीतिक आग्रहों एवं दुराग्रहों के चलते अब ऐसा नहीं हो पाएगा। मतलब, महाराष्ट्र को तीसरी भाषा के रूप में भी हिंदी मंजूर नहीं है। महाराष्ट्र में हिंदी का संकट वास्तव में एक गहरे सामाजिक-राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। यह केवल भाषाई नहीं, बल्कि अस्म...
मध्यम वर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में

मध्यम वर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में

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मध्यम वर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 50 आधार बिंदुओं की कमी की है। इसके साथ ही, निजी क्षेत्र के बैंकों, सरकारी क्षेत्र के बैंकों एवं क्रेडिट कार्ड कम्पनियों सहित अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी अपने ग्राहकों को प्रदान की जा रही ऋणराशि पर लागू ब्याज दरों में कमी की घोषणा करना प्रारम्भ कर दिया है ताकि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में की गई कमी का लाभ शीघ्र ही भारत मे...
ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर

ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर

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ज़ीरो डोज़ बच्चे: टीकाकरण में छूटे हुए भारत की तस्वीर भारत में 2023 में 1.44 मिलियन बच्चे ‘ज़ीरो डोज़’ श्रेणी में थे, जिनमें अधिकांश गरीब, अशिक्षित, जनजातीय, मुस्लिम और प्रवासी समुदायों से आते हैं। भूगोलिक अवरोध, सामाजिक हिचकिचाहट, शहरी झुग्गियों में अव्यवस्थित शासन और निगरानी की कमी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाएँ सीमित प्रभावी रही हैं। समाधान के लिए समुदाय-आधारित सहभागिता, तकनीक आधारित ट्रैकिंग, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन संचार आवश्यक है। जब तक हम नीति को अंतिम व्यक्ति के अधिकार से नहीं जोड़ते, सार्वभौमिक टीकाकरण केवल एक सपना बना रहेगा। न्यायपूर्ण स्वास्थ्य नीति ही भविष्य की नींव रख सकती है।  डॉ. सत्यवान सौरभ भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में सार्वभौमिक टीकाकरण केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा म...
राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025 रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स 

राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025 रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स 

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राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस- 1 जुलाई, 2025रोगी के लिये स्वस्थ जीवन की मुस्कान देते हैं डॉक्टर्स   ललित गर्ग  स्वस्थ जीवन हर किसी की सर्वोच्च जीवन प्राथमिकता होता है। कहा भी गया है कि, ‘सेहत सबसे बड़ी पूंजी’ है। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन को सही तरह से एन्जॉय करते हुए उसे सफल एवं सार्थक बना सकता है और इसमें डॉक्टर्स की भूमिका बहुत अहम होती है। छोटी-बड़ी हर तरह की बीमारियों को डॉक्टर्स की मदद से ठीक किया जा सकता है। शायद इसलिए ही इन्हें भगवान का दर्जा मिला हुआ है। राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस प्रसिद्ध डॉक्टर और बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधानचंद्र राय के सम्मान में मनाया जाता है।  वैसे तो दुनियाभर के अलग-अलग देशों में डॉक्टर्स डे को अलग-अलग दिन मनाया जाता है, लेकिन भारत में इस दिन को 1 जुलाई को इसलिये मनाया जाता है  क्योंकि 1 जुलाई 1882 में भारत के प्रसिद्ध फिजीशियन डॉ. राय का जन्म हुआ...
टीएमसी नेताओं की निर्लज्ज टिप्पणियों से उठा विवाद

टीएमसी नेताओं की निर्लज्ज टिप्पणियों से उठा विवाद

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टीएमसी नेताओं की निर्लज्ज टिप्पणियों से उठा विवाद  ललित गर्ग  कोलकत्ता में कानून की एक छात्रा से सामूहिक दुराचार-गैंगरेप का मुद्दा एक बार फिर पश्चिम बंगाल में जितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने लगा है उतना ही बड़ा नारी उत्पीड़न का मुद्दा बनकर उभर रहा है। इस मामले में पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं की अनर्गल एवं निर्लज्ज टिप्पणी स्त्री की मर्यादा, सम्मान एवं अस्मिता के खिलाफ शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण व संवेदनहीन प्रतिक्रिया है। इन नेताओं ने गैंगरेप मामले पर विवादित बयान से राज्य एवं देश में भारी जनाक्रोश पैदा हो गया था। विशेषतः राजनेताओं के बयानों एवं सोच में एक बार फिर शर्मनाक ढंग से पीड़िता पर दोष मढ़ने की बेशर्म कोशिश की गई है। इस मामले में सत्तारूढ़ टीएमसी पार्टी अन्दर एवं बाहर दोनों मोर्चों पर घिरती हुई नजर आ रही है। जहां इस मामले में पार्टी...
कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

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कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक? आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने वर्षों तक नींव रखी। यह संपादकीय उसी विस्मृति की पीड़ा को उजागर करता है। स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ परीक्षा नहीं, सोच, भाषा और संस्कार गढ़ते हैं। कोचिंग एक पड़ाव है, पर शिक्षकों की तपस्या पूरी यात्रा का आधार। शिक्षा में श्रेय का यह असंतुलन सामाजिक और नैतिक रूप से अन्यायपूर्ण है – और इसे सुधारने की सख्त ज़रूरत है। -डॉ सत्यवान सौरभ आज जब भी कोई छात्र NEET, JEE, UPSC या अन्य प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होता है, तो मीडिया उसकी सफलता को कोचिंग संस्थान की सफलता के रूप में प्रस्तुत करता है। बधाइयाँ, होर्डिंग्स, विज्ञापन, और सोशल मीडिया पोस्ट्स – सब पर एक ही नाम चमकता है: कोचिंग सेंटर। लेकिन इस ...